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Tag: Poem

Blogger: दिनेशराय द्विवेदी at अनवरत...
एक दिए का जलनाबहुत भला हैजहाँ अभी हाल के बरसों मेंबुझ गए हों अनेक दीपकमहामारी से मरने वालों की संख्या कम पड़ गई होआत्महत्या करने वालों सेउस देश का राजा सदा निन्दनीय रहेगाइतिहास मेंये दीपमालिकाएं, चुंधियाती रोशनी वाले लाखों लाख बल्बनहीं मिटा पाते अमावस का अंधकारवह ... Read more
clicks 61 View   Vote 0 Like   6:10am 7 Nov 2021 #Poem
Blogger: एल एस बिष्ट् at क्षितिज(horizon)...
अंग्रेजी से अनुवाद जार्ज लुई बोर्खेस की स्पेनी कविता / जीवन फ़िर एक बार खो जाना चाहता हूं तेरे अधरों की स्मृतियों में घोर अंधकार में टटोलता हूं अपना मन | जब भी मैनें खुशियां पानी चाहीं अपने आपको हमेशा दुखों की छाया में खडा पाया समुद्र लांघें हैं मैने परिचित हूं मरूभूमि से भी आज मैने देखा / दो-तीन लोगों के साथ जब वह औरत बन चुकी थी | पर मैने प्यार किया था उस सुन्दर सौम्य लड्की से जिसे अपने हिस्पानी होने का गर्व था मैने शहर के उस अंतहीन, बेढब किनारे को भी देखा है जहां थका हुआ सूर्य धीरे धीरे आकर अस्त हो जाता है मेरे अंदर उठती है उद्गार की एक लहर ... Read more
clicks 200 View   Vote 0 Like   7:57am 15 May 2021 #Poem
Blogger: shambhu kumar jha at Shambhu Sadharan...
_वक्त बदलते रहता हैचलते रहता हैअनवरतनिरंतरलगातारघंटे, दिन, महीने, सालमगर कभी कभीएकदम से जिद्दी हो जाता हैएक 'पल'जिसकी रफ्तार बंध जाती है धड़कनों के साथतब आप कह सकते हैंआई एम इन लवशम्भू साधारण... Read more
clicks 49 View   Vote 0 Like   12:23pm 5 Apr 2021 #poem
Blogger: Kavita Rawat at KAVITA RAWAT...
सर्दी में सबको प्यारी लगती धूप देखो बिल्ली मौसी क्या पसरी खूब! धूप में छिपा है इसकी सेहत का राज बड़े मजे में है मत जाना उसके पास बिना धूप ठण्ड के मारे सभी थरथर्राते मिलती जैसे ही धूप तो फूले न समाते नरम धूप लेकर सूरज उगा लोग सुगबुगाते छोड़ कम्बल-रजाई धूप सेंकने चले आते सुबह की धूप ठंड में सबको खूब है भाती सीख समभाव का देकर सबके मन लुभाती ... Read more
clicks 341 View   Vote 0 Like   5:34am 30 Jan 2021 #Poem
Blogger: Spark News at Spark News...
इतिहासकार शुरू करता है. भारी-भरकम लयबद्ध आवाज की निरंतरता सर्वप्रथम मंचीय प्रकाश को गायब कर देती है … धीरे धीरे इंसानी शक्ल, कद काठी नहीं रहने देती. अनैतिहासिक अन्धकार के जाल को भेदते हुए हमें ऐसे प्रकाश व्यवस्था में ले जाती हैं जहां गुजरे ज़माने के सिक्के हैं माटी के नीचे दबे पाषाण. गुफा चित्र. वनैले अँधेरे में पेड़ की टहनी से चिपका है मानव अस्तित्व की लड़ाई प्रतिदिन लड़ता. भवन, भवन के कंगूरे और स्थापत्य हैं. ताम्रपत्रीय अवशेष, स्तम्भ, स्नानागार और भित्तिचित्र. अद्भुत भवन और पूजा स्थल. पुराणों के पृष्ठों पर अंकित कथाओं के विश्लेषण का युद्ध है. ... Read more
clicks 243 View   Vote 0 Like   3:03pm 16 Dec 2020 #Poem
Blogger: दिगम्बर नासवा at स्वप्न मेरे...
आज फिर २५ सितम्बर है ... सोचता हूँ, तू आज होती तो पता नहीं कितनी कतरनें अखबार की काट-काट के अपने पास रक्खी होतीं ... सब को फ़ोन कर-कर के सलाह देती रहती ये कर, वो कर ... ये न कर, वो न कर, बचाव रख करोना से ... सच कहूँ तो अब ये बातें बहुत याद आती हैं ... शायद पिछले आठ सालों में ... मैं भी तो बूढा हो रहा हूँ ... और फिर ... बच्चा तो तभी रह पाता जो तू होती मेरे साथ ...... Read more
clicks 244 View   Vote 0 Like   4:56am 25 Sep 2020 #Poem
Blogger: BHARAT THAKUR at आपकी जिंदगी...
एक सवाल उठता हूँ, सबसे पूछना चाहता हूँ कौन है इंसान यहाँ मानव रूप में जन्मने वाला या मानवता से जीने वाला मार्ग दर्शन करने वाला या मार्ग दर्शन बनाने वाला औरों की राह पर चलने वाला या खुद की राह बनाने वाला देश को न्योछावर करने वाला या देश पर न्योछावर होने वाला एक सवाल उठता हूँ, सबसे पूछना चाहता हूँ कौन है इंसान यहाँ ... Read more
clicks 167 View   Vote 0 Like   9:59am 23 Aug 2020 #Poem
Blogger: Hindi Sansar at HindiSansar...
Attitude Shayari and Attitude Status for Boys-एटीट्यूड स्टेटस और एटीट्यूड शायरी... Read more
clicks 419 View   Vote 0 Like   4:32pm 27 Jul 2020 #Poem
Blogger: Hindi Sansar at HindiSansar...
Bewafa Shayari in Hindi for Love-प्यार में बेवफा शायरी... Read more
clicks 161 View   Vote 0 Like   4:27pm 27 Jul 2020 #Poem
Blogger: रेखा श्रीवास्तव at hindigen...
रिश्ते हैं एक पौध पलते है जो दिलों में प्यार का पानी दें, हवा तो दिल देता है फिर देखो कैसे ? हरे भरे होकर वे जीवन महका देंगे। अकेले और सिर्फ अपने की खातिर अपने सुख की खातिर जीना बहुत आसन है , सोच बदलो औरों के लिए भी जीकर देखो तो वे बहुत कुछ सिखा देंगे . . पानी किसी भी पौध में दें जरूरी नहीं कि अपनी ही बगिया का हो , फूल खिलेंगे और महकेंगे खुशबू बिखरेगी बिना भेद के होता कैसे गैरों से प्यार दिखा देंगे . .इतना छोटा नहीं इंसान से इंसान का रिश्ता चीरों जिगर को सबमें बस वही सब होगा देख कर जान लेना फर्क है दिल और जिस्म में धर्म , जाति , गरीब और अमीर के... Read more
clicks 224 View   Vote 0 Like   8:42am 20 Jul 2020 #Poem
Blogger: S.M.MAasum at हमारा जौनपुर ...
बाप की क़ुर्बानियों का बयान आज तक के सबसे बेहतरीन अंदाज़ में | BAAP... Read more
clicks 715 View   Vote 0 Like   6:09am 19 Jul 2020 #Poem
Blogger: S.M.MAasum at हमारा जौनपुर ...
बाप की क़ुर्बानियों का बयान आज तक के सबसे बेहतरीन अंदाज़ में | BAAP... Read more
clicks 467 View   Vote 0 Like   6:09am 19 Jul 2020 #Poem
Blogger: Sweta sinha at मन के पाखी...
सूर्य की किरणें निचोड़ने पर उसके अर्क से गढ़ी आकृतियाँ, सैनिक मेरे देश के। चाँदनी की स्वप्निल डोरियों से उकेरे रेखाचित्र स्निग्ध,धवल बुनावट,यथार्थ की मोहक कलाकृतियाँ, सैनिक मेरे देश के। पर्वतों को गलाकर बाजुओं में धारते, वज्र के परकोटे, विषबुझी टहनियाँ, सैनिक मेरे देश के। लक्ष्मण रेखा, सीमाओं के जीवित ज्वालामुखी, शांत राख में दबी चिनगारियाँ, सैनिक मेरे देश के। हुंकार मृत्यु की जयघोष विजय, शत्रुओं की हर आहट पर तुमुलनाद करती दुदुंभियाँ, सैनिक मेरे देश के। माँ-बाबू के कुम्हलाते नेत्रों की चमकती रोशनी, सिंदूरी साँझ में प्रतीक्षित विर... Read more
clicks 221 View   Vote 0 Like   9:10am 1 Jul 2020 #Poem
Blogger: Sweta sinha at मन के पाखी...
सूर्य की किरणें निचोड़ने पर उसके अर्क से गढ़ी आकृतियाँ, सैनिक मेरे देश के। चाँदनी की स्वप्निल डोरियों से उकेरे रेखाचित्र स्निग्ध,धवल बुनावट,यथार्थ की मोहक कलाकृतियाँ, सैनिक मेरे देश के। पर्वतों को गलाकर बाजुओं में धारते, वज्र के परकोटे, विषबुझी टहनियाँ, सैनिक मेरे देश के। लक्ष्मण रेखा, सीमाओं के जीवित ज्वालामुखी, शांत राख में दबी चिनगारियाँ, सैनिक मेरे देश के। हुंकार मृत्यु की जयघोष विजय, शत्रुओं की हर आहट पर तुमुलनाद करती दुदुंभियाँ, सैनिक मेरे देश के। माँ-बाबू के कुम्हलाते नेत्रों की चमकती रोशनी, सिंदूरी साँझ में प्रतीक्षित विर... Read more
clicks 214 View   Vote 0 Like   9:10am 1 Jul 2020 #Poem
Blogger: दिगम्बर नासवा at स्वप्न मेरे...
दो पीठ के बीच का फांसला मुड़ने के बाद ही पता चल पाता है हालांकि इन्च भर दूरी उम्र जितनी नहीं पर सदियाँ गुज़र जाती हैं तय करने में "ईगो" और "स्पोंड़ेलाइटिस" कभी कभी एक से लगते हैं दोनों फर्क महसूर नहीं होता दर्द होता है मुड़ने पे पर मुश्किल भी नहीं होती जरूरी है बस एक ईमानदार कोशिश दोनों तरफ से एक ही समय, एक ही ज़मीन पर हाँ ... एक और बात ज़रूरी है मुड़ने की इच्छा का होना ... Read more
clicks 217 View   Vote 0 Like   4:05pm 22 Jun 2020 #Poem
Blogger: अपर्णा त्रिपाठी at palash "पलाश"...
कुछ अच्छे के लिये कुछ छोडना ही पडता है ... Read more
clicks 198 View   Vote 0 Like   10:26am 12 Jun 2020 #Poem
Blogger: अपर्णा त्रिपाठी at palash "पलाश"...
इन्तजार में महबूब, जरा पलकें तो बिछायें वक्त पर पहुचना, हमेशा अच्छा नही लगता... Read more
clicks 274 View   Vote 0 Like   3:26pm 10 Jun 2020 #Poem
Blogger: रेखा श्रीवास्तव at hindigen...
वो संगतराश जिसे लोग पत्थर दे जाते थे कुछ अपने होते थे और कुछ पराये भी होते , वह उन्हें तराश कर ढाल देता एक आकार में । रास्ते के वे पत्थर मुखर हो उठते । आते वे और ले जाते, किसी ने सजा लिया घर में और किसी ने भेंट कर दिया । किसी ने बैठाकर मंदिर में, उन्हें टकसाल बना लिया । वो जिंदगी भर उन बेतरतीब पत्थरों को रूप देता रहा, आकार देता रहा सिर्फ हुनर के लिए लेकिन उसका खरीददार कोई न था । पत्थर मेरा तो हकदार भी हम तुम्हें गढने का शौक था फिर उस आकृति से क्या ? कभी सवाल किया - तो दुत्कार दिया तुम्हारा हुनर मेरे ही पत्थरों पर निखरा वर्ना कौन जानता था ? ये आकृतियाँ भ... Read more
clicks 231 View   Vote 0 Like   6:38pm 9 Jun 2020 #Poem
Blogger: BHARAT THAKUR at आपकी जिंदगी...
व्यक्तियों में प्रधान जो है बुद्धिमान बुद्धिमानों का कमान है भाषा ज्ञान ज्ञानों की विशेषता विविध भाषा ज्ञान विविध भाषाओँ के जानकार सचमुच महान l १ l ... Read more
clicks 165 View   Vote 0 Like   4:59pm 2 Jun 2020 #Poem
Blogger: BHARAT THAKUR at आपकी जिंदगी...
आज फिर उन बातों को हवा दे गई जिसे दवा रखा था हृदय के किसी कोने में आज फिर उसे जगा गई मन शांत, तन शिथिल, धड़कन तेज़ और शिलाओं को क्षणभंगु का आभास करा गई... Read more
clicks 143 View   Vote 0 Like   4:55pm 2 Jun 2020 #Poem
Blogger: अपर्णा त्रिपाठी at palash "पलाश"...
dreams never ends but it needs celebration whenever it comes true.... Read more
clicks 202 View   Vote 0 Like   7:26am 26 May 2020 #Poem
Blogger: Mukesh Kumar Sinha at जिंदगी की राह...
क्या लिखी जा सकती है कविताजो हो तुम्हे समर्पितजिसके शब्द शब्द मेंतुमसे जुड़ा हर एहसास हो समाहितजैसे, बहती नदी सा कलकल करता बहावऔर दूर तलक फैली हरियालीअंकुरण व प्रस्फुटन की वजह सेदे रही थी सुकून भरी संतुष्टिपर वहींसमुद्र व उसका जल विस्तारबताता है नसुकून से परेजिंदगी... Read more
clicks 146 View   Vote 0 Like   9:49am 18 May 2020 #POEM
Blogger: रेखा श्रीवास्तव at hindigen...
जिसे न कोई रोपे जग मेंं, खुद ब खुद उगता बढ़ता हूँ नहीं धूप वर्षा की जरूरत रहते जिसमें शूल ही शूल, ्हाँ मैं शूल हूँ बबूल ! नहीं चाहिए खाद औ पानी फिर भी करके मैं मनमानी जहाँ तहाँ उग ही आता हूँ चाहे धरती हो प्रतिकूल हाँँ मैं हूँ बबूल !... Read more
clicks 210 View   Vote 0 Like   1:30pm 17 May 2020 #Poem
Blogger: रेखा श्रीवास्तव at hindigen...
हाइकु ये धरा हिली वो महसूस किया हिला ये जिया। *** भय में जीना मरने से बुरा है दण्ड निरा है। *** जीवन अब अनुशासित जीना नहीं है खोना। *** विश्व आ रहा अब पीछे हमारे वेदों के द्वारे। *** कोरोना क्या है? प्रकृति की सज़ा है एक रज़ा है । *** ... Read more
clicks 194 View   Vote 0 Like   8:37am 17 May 2020 #Poem
Blogger: Mukesh Kumar Tiwari at कवितायन...
क्या बड़े लोग केवल भोंपू की तरह ही होते हैं?... Read more
clicks 211 View   Vote 0 Like   6:34am 16 May 2020 #Poem
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