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Tag: hindi poem

Blogger: Mahesh Barmate at माही.......
कुछ अंदर दबा हुआ सा है चुभता है ठूंठ साअपनी आवाज को भी नहीं सुनता मैंचीखता हूँ गूँज सा। एक तरफ तन्हाइयों का शोर है दूजी तरफ ग़मों का सन्नाटा पसरा हुआ हैकिस तरफ रखूँ कदम अपने फर्श पे मेरा मैं बिखरा हुआ है। अपनी लाश पे चलकेनिकल जाना हैऐ दुनिया! तुझसे मेराऐसा ही रिश्ता पुरा... Read more
clicks 265 View   Vote 0 Like   8:15am 11 Jun 2018 #hindi poem
Blogger: Mahesh Barmate at माही.......
जागता रहा रात भरअपने गुनाहों को याद करता मैंखुद से ही माफ़ी माँगताऔर खुद को ही सजा देता मैं।हर सजा के बादगुनाह खुद मुझसे पूछताक्यों तूने मुझे कियाऔर फिर मुझसे रूठता।न जवाब थान शर्मिंदगीजाने किस मोड़ पे आयीआज ये ज़िन्दगी।मैं जागता रहागुनहगार की तरहसोती रही क़िस्मतजाने ... Read more
clicks 287 View   Vote 0 Like   12:58pm 21 Nov 2015 #hindi poem
Blogger: Dinesh pareek at Ignored Post | Top Intereating Post...
hindi Poetry, Hindi Poem, Hart touching Linesमैने कहा ऐ जान-ए-जां,उसने कहा हां ज़िन्दगी !उसने कहा तुम कौन हो ?मैने कहा मैं ज़िन्दगी !उसने कहा है नाम क्या ?मैने कहा बस ज़िन्दगी !उसने कहा रहते कहां ?मैने कहा घर ज़िन्दगी !उसने कहा करते हो क्या ?बस जी रहा हूं ज़िन्दगी !उसने कहा कुछ खो दिया ?मैने कहा हां ज़िन्... Read more
clicks 206 View   Vote 0 Like   10:06am 15 Sep 2015 #hindi poem
Blogger: Neeraj Dwivedi at जिजीविषा - नी...
उस दिनआँखों में आँखें डालकर तुमने कहा था कि किताब हो तुम अगर किताब हूँ तो पढ़ो तो कभी कभी पढ़ीं कई किताबें तुमने जरूरत की कहो या स्वार्थ की किसी परीक्षा में उत्तीर्ण होने के लिए पर मेरी जिंदगी की किताब ने तुम्हारी कोई परीक्षा ली ही नहीं बस दी है अपने किताब होने की परीक्षा ... Read more
clicks 277 View   Vote 0 Like   7:40am 25 Aug 2015 #hindi poem
Blogger: Neeraj Dwivedi at जिजीविषा - नी...
मैं खता हूँरात भर होता रहा हूँ  इस क्षितिज पर इक सुहागन बन धरा उतरी जो आँगनतोड़कर तारों से इस पर मैं दुआ बोता रहा हूँमैं खता हूँरात भर होता रहा हूँ  आँख रोयी या न रोयी बूँद जो पलकों पे सोयी मोतियों सा पोर पर रख जीत कर खोता रहा हूँमैं खता हूँरात भर होता रहा हूँ छलक जो आये प... Read more
clicks 239 View   Vote 0 Like   10:31am 13 May 2015 #hindi poem
Blogger: समीर लाल at उड़न तश्तरी .......
दफ्तर आते जाते अक्सर ही ट्रेन की उपरी मंजिल में बैठ जाता हूं. घोषित ’शांत क्षेत्र’ है अर्थात आपसी बातचीत, फोन आदि की अनुमति नहीं है. अक्सर मरघट की सी शांति की बात याद आती है इस जगह. मगर जब आप किसी से बात नहीं कर रहे होते तो मन के भीतर ही भीतर कितनी सारी बातचीत कर रहे होते हैं... Read more
clicks 160 View   Vote 0 Like   1:00am 2 Mar 2015 #hindi poem
Blogger: Neeraj Dwivedi at जिजीविषा - नी...
शत प्रतिशततुम होती होतो ये सच हैकि सब कुछमेरे मन का नहीं होतामेरी तरह से नहीं होतामेरे द्वारा नहीं होतामेरे लिए नहीं होताये भी सच हैकि मैं कवितायेँ नहीं लिख पाताकिताबें नहीं पढ़ पाताज्यादा काम नहीं कर पातामैं मशीन नहीं बन पातादूसरे शब्दों में मैं वो सब कुछ नहीं कर पा... Read more
clicks 199 View   Vote 0 Like   10:39am 20 Oct 2014 #hindi poem
Blogger: Mahesh Barmate at माही.......
मत भेज अब मेरे जवाब-ए-ख़त माही!के तेरे इंतज़ार में, मैं भी अपना पता भूल बैठा हूँ... दिन भूल बैठा हूँ शाम भूल बैठा हूँ जो रूठा था मैं तुझसे वो खता भूल बैठा हूँ। लिखता रहता था ख़त तेरी याद में आज मैं अपना ही फलसफ़ा भूल बैठा हूँ... अब तू मिल जाये तेरी किस्मत होगी कभी सुना था फरिस्तों से... Read more
clicks 249 View   Vote 0 Like   4:22pm 27 Jun 2014 #hindi poem
Blogger: Rajneesh at e-पाण्डुलिपि Hi...
    निकल पड़े हैं हम  घर से वतन बचाने को | कड़ी धूप में, भरी भीड़ में, वो बटन दबाने को ||   जहाँ देखो वहां ही , वो  लम्बी  सी कतार है , क्यों ना उत्साहित हो हम ,  ये लोकतंत्र का त्यौहार है |   निकल पड़े हैं हम घर से नई […]... Read more
clicks 207 View   Vote 0 Like   4:06pm 29 Apr 2014 #hindi poem
Blogger: Mahesh Barmate at माही.......
चार दिन की ज़िंदगी बची है अब मेरे लिएफिर जाने क्या समा होगा आ भर ले फिर बाँहों में मुझे कुछ पल के लिए फिर कहाँ प्यार का मौसम जवां होगा... कुछ पल बैठ सामने मेरे डूब जाने दे इन झील सी आँखों में मुझको के मौत करीब है अब तो मेरेफिर कहाँ तेरी आँखों का किनारा होगा ?कुछ बात कर आज सुबह स... Read more
clicks 258 View   Vote 0 Like   4:20pm 27 Mar 2014 #hindi poem
Blogger: समीर लाल at उड़न तश्तरी .......
जब रात आसमान उतरा थाझील के उस पारअपनी थाली मेंसजाये अनगिनित तारेतब ये ख्वाहिश लिएकि कुछ झिलमिल तारों को लाटांक दूँ उन्हेंबदन पर तुम्हारेतैरा किया था रात भरउस गहरी नीले पानी की झील मेंपहुँच जाने को आसमान के पासतोड़ लेने को चंद तारेबच रह गया था फासलाकोई एक हाथ भर काकि द... Read more
clicks 215 View   Vote 0 Like   12:47am 9 Sep 2013 #hindi poem
Blogger: समीर लाल at उड़न तश्तरी .......
एक अंगारा उठाया था कर्तव्यों काजलती हुई जिन्दगी की आग से,हथेली में रख फोड़ा उसे फिर बिखेर दिया जमीन पर...अपनी ही राह में, जिस पर चलना था मुझेटुकड़े टुकड़े दहकती साँसों के साथ औरजल उठी पूरी धरा इन पैरों के तले...चलता रहा मैं जुनूनी आवाज़ लगाताया हुसैन या अली की!!!ज्यूँ कि उठाया ह... Read more
clicks 166 View   Vote 0 Like   1:00am 6 May 2013 #hindi poem
Blogger: समीर लाल at उड़न तश्तरी .......
 तुमने छुड़ा कर हाथ मेराजो पीछे छोड़ दिये थे अँधेरेउनसे अभ्यस्त होती मेरी ये आँखेआज जरा सी टिमटिमटाहट से उस दीपक की, जो बुझने को है अभीचौंधिया जाती है...और मेरा बाँया हाथ....जिस ओर बैठा कर थमवा दिया था हाथउस ब्राह्मण ने मेरा तुम्हारे हाथ मेंये कहते हुए कि हे वामहस्थिनी!!जगमग... Read more
clicks 133 View   Vote 0 Like   2:11am 24 Apr 2013 #hindi poem
Blogger: Mahesh Barmate at माही.......
उसने कहा था,के जब कभी भी तुम लौटो वापस, तो मुझे याद करना...किसी से कुछ मत कहना,पर सब से पहले मुझसे ही तुम बात करना... उसने कहा था,के हर बार, एक उपहार...बस मेरे लिए उसमें भर के प्यारतुम लाना...मेरी याद में, कैसे कटे वो दिन...और रातें, मेरे बिन...ये सब कुछ मुझेतुम बताना...उसने कहा था,के हर ... Read more
clicks 275 View   Vote 0 Like   6:45pm 18 Apr 2013 #hindi poem
Blogger: समीर लाल at उड़न तश्तरी .......
सफ़हा दर सफ़हालम्हा दर लम्हा बरस दर बरसदर्ज होता रहाकिताब में मेरे दिल कीतुम्हारे मेरे साथ की यादों का सफरऔर मैं अपने दायित्वों का निर्वहन करताचलता रहा इस जीवन डगर परलादे उस किताब को अपनी पुश्त पर...कि कभी फुरसत मेंमुस्करा लूँगा फिर पढ़ कर उन यादों को किश्त दर किश्तआहिस्... Read more
clicks 185 View   Vote 0 Like   1:01am 21 Jan 2013 #hindi poem
Blogger: समीर लाल at उड़न तश्तरी .......
मेरे कमरे की खिड़की से दिखतावो ऊँचा पहाड़बचपन गुजरा सोचते किपहाड़ के उस पार होगा कैसा एक नया संसार...होंगे जाने कैसे लोग...क्या तुमसे होंगे?क्या मुझसे होंगे?आज इतने बरसों बाद पहाड़ के इस पार बैठासोचता हूँ उस पार कोजिस पार गुज़रा था मेरा बचपन...कुछ धुँधले चेहरों की स्मृति लिएया... Read more
clicks 147 View   Vote 1 Like   1:56am 20 Nov 2012 #hindi poem
Blogger: समीर लाल at उड़न तश्तरी .......
 बन जाओ मेरी पुस्तक का शीर्षक....जो है ३६५ पन्नों की...वर्ष के दिन की गिनती और यह संख्या..जाने क्यूँ एक से हैं...लगे है ज्यूँ करती हों दिल की धड़कनऔर हाथ घड़ी मेंटिक टिक चलती सैकेंड की सुईजुगलबंदी...और इसका हर पन्ना...खाली...मगर भरा भरा साअलिखित इबारतों से..फिर भी..कुछ लिखे जाने के इ... Read more
clicks 163 View   Vote 0 Like   1:13am 30 Oct 2012 #hindi poem
Blogger: Mahesh Barmate at माही.......
आज...लिख रहा हूँ...हाँ ! मैं  फिर लिख रहा हूँ...पर क्यों ?क्यों छोड़ा था मैंने...लिखना...?क्या...?भूल गया था मैं...खुद से ही कुछ...सीखना...?जाने कितने...मंज़र बीत गए...और दिल को कितने...खंजर चीर गए... ?फिर भी क्यों...?हाँ... हाँ क्यों...?मैं कुछ लिख न पाया...?देख के कई... सपने...मैं खुद सपनों सा क्यों,दिख ... Read more
clicks 215 View   Vote 0 Like   6:29pm 9 Oct 2012 #hindi poem
Blogger: Mahesh Barmate at माही.......
आज बहुत दिनों बाद मेरी कलम से कुछ शब्द दिल की आवाज को बयान करते मिले हैं... उम्मीद है आपको पसंद आएगी...। वो कुछ ख़ास है... वो दूर है,और वो पास भी...वो कुछ नहीं है,पर वो ख़ास भी...सोचता हूँ उसे,और मानता हूँ उसे...वो अगले कई जन्मों की तलाश है,और वो एक प्यास भी... रोता हूँ उसके लिए,और हँसत... Read more
clicks 211 View   Vote 0 Like   4:36pm 28 Sep 2012 #hindi poem
Blogger: satyam shivam at *साहित्य प्रे...
          -आकाशकुमार (14 वर्ष)                   http://www.jeevanmag.co.cc आजहमारेदेशमें, रिश्वतबनगयाहैजीवनकादस्तूर,अधिकारकीसबकरतेबात,कर्तव्यनहींमंजूर।अधीरहैइंसान,पसराहैआतंकवाद।बचेंनहींहैं,प्रचारकसुख -शान्तिके,बचेंनहींहैं,निवारकक्लेशके,बचेंहैंअगरकोई,तोवेहैँरिश्वतखोरअफसर,ज... Read more
clicks 92 View   Vote 0 Like   9:04am 9 Aug 2012 #hindi poem
Blogger: Manu Shrivastav at manu-srijan...
ना चाहो किसी को इतना की उसे गरूर हो जायेनशा न उढेलो आँखे से इतना की सरुर हो जायेमोहब्बत को बस मोहब्बत ही रखो जिसे ना हो, उसे भी मोहब्बत जरुर हो जाये ... Read more
clicks 162 View   Vote 0 Like   11:50am 2 Aug 2012 #hindi poem
Blogger: Chakresh Surya at The Surya...
नाज़ है मुझे अपनी ज़िंदादिली पर,कि किसी बात को कहने के लिये,मुझे उसपे,कोई चोगा नहीं डालना पड़ता,चाहे तपती धूप हो,जमाने वाली सर्दी हो,या बहा ले जाने वाली बारिश,मेरे अलफ़ाज़,यूँ ही,खुले बदन निकल पड़ते हैं,कहीं भी जाने को,नाज़ है मुझे अपनी ज़िंदादिली पर...... Read more
clicks 148 View   Vote 0 Like   1:59pm 29 May 2012 #hindi poem
Blogger: समीर लाल at उड़न तश्तरी .......
एक बार फिर- तीन कविताओं के साथ प्रस्तुत. शायद जल्द नियमित हो जाऊँ इस उम्मीद के साथ. एक नये उपक्रम को अंजाम देने की चाहत में कुछ पुरानी नियमित दिनचर्या से दूर:-१-कह तो गये...उत्तेजना में आकरयुवा मन के भाव जताने...धूप कोई आईना नहीं..बस अंधकार को मिटाराह देखने का साधन...तो फिर..मि... Read more
clicks 152 View   Vote 0 Like   5:18am 29 May 2012 #hindi poem
Blogger: समीर लाल at उड़न तश्तरी .......
एक सप्ताह गुजर चुका है सेन फ्रेन्सिसको आये. एक सप्ताह होटल में और रहना है फिर एक किराये का अपार्टमेन्ट ले लिया है, उसमें शिफ्ट हो जायेंगे. नजदीक ही है. ३० मिनट लगेंगे दफ्तर पहुँचने में. यूँ कर शायद ६ माह गुजारना हो यहाँ कि कौन जाने- शायद और ज्यादा. एक साल-हम्म!! जितना किस्मत ... Read more
clicks 137 View   Vote 0 Like   2:56am 25 Apr 2012 #hindi poem
Blogger: Mahesh Barmate at माही.......
कभी कभी लगता है,तुमको,बस तुमको सुनता रहूँ...कभी कभी लगता है,तुमसे दिल की सारी बात कह दूँ...कभी कभी लगता है,तुझसे दूर हो जाऊं...कभी कभी लगता है,तू जो कहे तो तेरे संग मैं चल दूँ...ये कैसा असर है तेरा माही !के कभी कभी लगता है,तुझे चाहूँ ज़िन्दगी से ज्यादा...तो कभी कभी लगता है के तेरे ... Read more
clicks 227 View   Vote 0 Like   9:03am 16 Apr 2012 #hindi poem
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