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Tag: geet

Blogger: satish saxena at मेरे गीत !...
हम तो केवल हंसना चाहें  सबको ही, अपनाना चाहें मुट्ठी भर जीवन पाए हैं हंसकर इसे बिताना चाहें खंड खंड संसार बंटा है , सबके अपने अपने गीत । देश नियम,निषेध बंधन में, क्यों बांधा जाए संगीत ।नदियाँ,झीलें,जंगल,पर्वतहमने लड़कर बाँट लिए। पैर जहाँ पड़ गए हमारे ,टुकड़े,टुकड़े ... Read more
clicks 79 View   Vote 0 Like   1:19pm 7 Aug 2020 #geet
Blogger: satish saxena at मेरे गीत !...
ये कौम ही मिटी, तो वरदान क्या करेंगे !धूर्तों से मिल रहे ये, अनुदान क्या करेंगे ?कोरोना राज में भी, जीना लिखा के लायेबस्ती के मुकद्दर को ही  जान क्या करेंगे ?आशीष कुबेरों का लेकर, बने हैं हाकिम  लालाओं के बनाये दरबान, क्या करेंगे ?घुटनों पे बैठ , जोड़े हैं हाथ, माल... Read more
clicks 82 View   Vote 0 Like   11:20am 8 Jun 2020 #geet
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साधू सन्यासी हमारे , लार टपकाते दिखेंकौन आएगा नमन को ,मेरे हिंदुस्तान में ?धूर्तों ने धन कमाने , घर में, कांटे बो दिए !रोयेंगी अब पीढ़िया,परिवार पुनुरुत्थान में !कौम सारी हो चुकी बदनाम,बहते खून से ,कितनीं पीढ़ी बीत जायेंगीं इसी भुगतान में ! जाहिलों की बुद्धि, कैसे शुद्ध हो ... Read more
clicks 128 View   Vote 0 Like   1:50am 10 May 2019 #geet
Blogger: satish saxena at मेरे गीत !...
घर घर से आवाज कन्हैया जीतेगा !कौओं में परवाज़ ,कन्हैया जीतेगा !बुलेट ट्रेन,स्मार्ट सिटी के झांसों में फंदे काट तमाम,कन्हैया जीतेगा !नहले दहले, अंतिम  ठठ्ठा मार रहेमक्कारों पर गाज़,कन्हैया जीतेगा !भारत मां घायल है ,इन गद्दारों  से , जनमन लेके साथ,कन्हैया जीतेगा !लोकत... Read more
clicks 211 View   Vote 0 Like   8:41am 12 Apr 2019 #geet
Blogger: satish saxena at मेरे गीत !...
हे प्रभु ! इस देश में इतने निरक्षर , ढोर क्यों ?जाहिलों को मुग्ध करने यह निरंतर शोर क्यों !अनपढ़ गंवारू जान वे मजमा लगाने आ गए ये धूर्त, मेरे देश में , इतने बड़े शहज़ोर क्यों ?साधु संतों के मुखौटे पहन कर , व्यापार में   रख स्वदेशी नाम,सन्यासी मुनाफाखोर क्यों !माल दिलवाए... Read more
clicks 182 View   Vote 0 Like   5:18am 16 Jan 2019 #geet
Blogger: satish saxena at मेरे गीत !...
खांसते दम ,फूलता है जैसे लगती जान जाए अस्थमा झकझोरता है, रात भर हम सो न पाएधुआं पहले खूब था अब  यह धुआं गन्दी हवा में समय से पहले ही मारें,चला दम घोटू पटाखे ,राम के आने पे कितने दीप आँखों में जले,अब लिखते आँखें जल रही हैं ,जाहिलों के शहर में !धूर्त बाबा बन बताते... Read more
clicks 234 View   Vote 0 Like   8:55am 5 Jan 2019 #geet
Blogger: satish saxena at मेरे गीत !...
खांसते दम ,फूलता है जैसे लगती जान जाए अस्थमा झकझोरता है, रात भर हम सो न पाएधुआं पहले खूब था अब  यह धुआं गन्दी हवा में समय से पहले ही मारें,चला दम घोटू पटाखे ,राम के आने पे कितने दीप आँखों में जले,अब लिखते आँखें जल रही हैं ,जाहिलों के शहर में !धूर्त, बाबा बन बतात... Read more
clicks 330 View   Vote 0 Like   5:17am 8 Nov 2018 #geet
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इस हिन्दुस्तान में रहते,अलग पहचान सा लिखना !कहीं गंगा किनारे बैठ कर , रसखान सा लिखना ! दिखें यदि घाव धरती के,वहां ऋणदान सा लिखना घरों में बंद,मां बहनों पे,कुछ आसान सा लिखना !विदूषक हैं , यहाँ धर्माधिकारी ,उनके शिष्यों के , इन हिंदी पुरस्कारों के लिए,अपमानसा लिखना !किसी के ... Read more
clicks 267 View   Vote 0 Like   8:24am 29 Oct 2018 #geet
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ये रिश्ते जटिल हैं, समझना तो होगा !तुम्हें जानेमन अब बदलना तो होगा !उठो त्याग आलस , झुकाओ न नजरें भले मन ही मन,पर सुधरना तो होगा ! अगर जीना है आओ हंसकर खुले में शुरुआत में कुछ ,टहलना तो होगा !यही है समय ,छोड़ आसन सुखों का स्वयं स्वस्त्ययन काल रचना तो होगा !असंभव कहा... Read more
clicks 171 View   Vote 0 Like   3:50am 9 Jul 2018 #geet
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जाने कितने ही बार हमें, मौके पर शब्द नहीं मिलते !अहसाओं के आवेगों में जिह्वा को शब्द नहीं मिलते !तेरे बिन कैसे रह पाए ,कहने को लफ्ज़ नहीं मिलते !अरसे के बाद मिले जाना,इतने निशब्द,नहीं मिलते !उस दिन घंटों की बातें भी मिनटों में कैसे निपट गयीं  मिलने के क्षण में ज... Read more
clicks 169 View   Vote 0 Like   3:23am 27 May 2018 #geet
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सुनी सुनाई खबरों पर,एतबार बदल लें !झूठी खबरों के सस्ते अखबार बदल लें !चलते, अहंकार की चाल,नज़र आती है !उनसे कहिये,चलने का अंदाज बदल लें !अगर कभी आ जाए ऊँट पहाड़ के नीचे   उंची गर्दन, नीची करके , चाल बदल ले !तीखी उनकी धार, नहीं दरबार सहेगा !चंवर बादशाही से ही,तलवार बदल लें !कोई... Read more
clicks 129 View   Vote 0 Like   4:23am 16 May 2018 #geet
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घर कुटुंब की जिम्मेदारी क्या समझेंगे ?शक संशय में रिश्तेदारी,क्या समझेंगे ?पर निंदा ,उपहास में, रस तलाशने वाले व्यथित पिता की हिस्सेदारी क्या समझेंगे ?नन्हीं बच्ची, तिनके चुग्गा लाने निकली चिंतित माँ की चौकीदारी क्या समझेंगे ?सुंदरता में फंस कर ,कितने राजा डूबे धूर्त ... Read more
clicks 174 View   Vote 0 Like   9:43am 10 May 2018 #geet
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आस्था को  भी , ये खतरे तो उठाने होंगे !ढोंगियों के दिए  , वरदान भुलाने  होंगे  !रूप संतों का रखे , चोर उचक्के पूजे साधु सेवा से मिले पुण्य , भुलाने होंगे !झूठ के बीज को,जड़ से समाप्त करने को तीक्ष्ण अभिव्यक्ति को,खतरे भी उठाने होंगे !एक दिन आँख खुलेंगीं जरूर इन... Read more
clicks 200 View   Vote 0 Like   11:22am 22 Mar 2018 #geet
Blogger: satish saxena at मेरे गीत !...
मैंने आज तक किसी को बेटी नहीं कहा क्योंकि मेरे पास अपने पापा को बेहद प्यार करने वाली बेटी पहले से ही मौजूद है, मैंने किसी को बहिन नहीं बनाया क्योँकि मेरी हर वक्त चिंता करने वाली दो बड़ी बहिनें पहले से ही हैं , बहनों और बेटी को जितना प्यार और समय मुझे देना चाहिए वह मैं इन्हे... Read more
clicks 184 View   Vote 0 Like   4:14am 22 Mar 2018 #geet
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मैराथन आसान ,भरोसा हो क़दमों की ताल कासाथ तुम्हारे दौड़ रहा है, बुड्ढा तिरेसठ साल का !करत करत अभ्यास,पहाड़ों को रौंदा इस पाँव ने हार न माने किसी उम्र में,साहस मानवकाल का !इसी हौसले से जीता है, सिंधु और आकाश भी सारी धरती लोहा माने , इंसानी  इकबाल का !गिरते क़दमों की हर आह... Read more
clicks 150 View   Vote 0 Like   5:52am 7 Mar 2018 #geet
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अर्थ अनर्थ में ,अक्सर बेटा !शब्द अर्थ,रूपान्तर बेटा !क्रूर, कुटिल, सूखे पत्थर में , धड़कन,न तलाश कर बेटा !सूख गए , तालाब प्यार केअब न रहे, पद्माकर बेटा !पथरीले पहाड़ में तुमको खूब मिलेंगे,निरझर बेटा !अच्छे दिन जुमले हैं केवल ,उम्मीदें कुछ कम कर बेटा !... Read more
clicks 183 View   Vote 0 Like   5:20am 9 Feb 2018 #geet
Blogger: satish saxena at मेरे गीत !...
साथ कोई दे, न दे , पर धीमे धीमे दौड़िये !अखंडित विश्वास लेकर धीमे धीमे दौड़िये !दर्द सारे ही भुलाकर,हिमालय से हृदय में नियंत्रित तूफ़ान लेकर, धीमे धीमे दौड़िये !जाति,धर्म,प्रदेश,बंधन पर न गौरव कीजिये मानवी अभिमान लेकर, धीमे धीमे दौड़िये ! जोश आएगा दुबारा , बुझ गए से  ह... Read more
clicks 157 View   Vote 0 Like   4:20am 30 Oct 2017 #geet
Blogger: satish saxena at मेरे गीत !...
बरसों से सोंचे शब्द भी उस वक्त तो बोले नहीं जब सामने खुद श्याम थे तब रंग ही घोले नहीं !कुछ अनछुए से शब्द थे, कह न सके संकोच में,जानेंगे क्या छूकर भी,हों जब राख में शोले नहीं !प्रत्यक्ष देव,विरक्त मन, किससे कहें, नंदी के भीसीने में कितने राज हैं,जो आज तक खोले नहीं !वि... Read more
clicks 235 View   Vote 0 Like   4:46am 23 Jun 2017 #geet
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अकर्मण्यता की आदत से, है कितना लाचार आदमी !जकड़े घुटने पकड़ के रोये , ढूंढ रहा उपचार आदमी !दुरुपयोग मानस का करके,ढेरो धन संचय कर.भयवश निष्क्रिय और आलसी मन से करता योगाचार आदमी ! हाथ पैर को बिना हिलाये, कुटिल बुद्धि धनवान हुईरोक पसीना शीतल घर में , भूला ग्रामाचार आ... Read more
clicks 204 View   Vote 0 Like   5:25am 17 May 2017 #geet
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आज मैराथन रनिंग प्रैक्टिस में दौड़ते दौड़ते इस रचना की बुनियाद पड़ी , शायद विश्व में यह पहली कविता होगी जिसे 21 किलोमीटर दौड़ते दौड़ते बिना रुके रिकॉर्ड किया ! लगातार घंटों दौड़ते समय ध्यान में बहुत कुछ चलता रहता है उसकी परिणीति आज इस रचना के रूप में हुई ! न जाने दर्द कितन... Read more
clicks 176 View   Vote 0 Like   12:17pm 24 Mar 2017 #geet
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पहचान बने, गद्दारों की,खादी पहने मक्कारों की !दोनों हाथों से लूट रहे ,इस घर के बेईमानों की !इनकी चौखट पर जा जाकरइक दीप जलाएंगे ऐसा जिससे विशेष पहचान रहेदुनियां में इन दरवाजों को बारिश हो या तूफ़ान मगर यह दीप नहीं बुझने पाये !धूर्तों के  दरवाजे  जाकर इ... Read more
clicks 228 View   Vote 0 Like   4:12am 30 Dec 2016 #geet
Blogger: MARKAND DAVE at M.K.TVFilms - HINDI ARTICLES...
बिलकुल सही है, मुझ से इश्क न फरमाने का फैसला तेरा,मेरी  बरबादी  के  लिए, तो   बस   काफ़ी   है   तेरी  बददुआ...!मार्कण्ड दवे । दिनांकः १२ अगस्त २०१६.... Read more
clicks 223 View   Vote 0 Like   3:18am 26 Nov 2016 #geet
Blogger: MARKAND DAVE at M.K.TVFilms - HINDI ARTICLES...
हर   मर्ज़  की, एक  ही  दवा  होती  है, पीने  वालों  के  पास,शायद, घुल जाती होगी सहज से, घुट-घुट के मरने की आस..!मर्ज़ = रोग,समस्या;   सहज = आसानी से; घुलना = एक रस हो जाना;घुट-घुट के = साँस रुँधना, तड़प-तड़प कर;आस = आशा;मार्कण्ड दवे । दिनांकः २९ जुलाई २०१६.... Read more
clicks 220 View   Vote 0 Like   3:32am 25 Nov 2016 #geet
Blogger: MARKAND DAVE at M.K.TVFilms - HINDI ARTICLES...
प्यार  करने की  भी, कोई  वजह  होती  है  क्या ?प्यार  तो  अमर,  रूह  का अटूट हिस्सा  होता  है...!मार्कण्ड दवे । दिनांकः १९ नवम्बर २०१६.... Read more
clicks 209 View   Vote 0 Like   3:26am 24 Nov 2016 #geet
Blogger: satish saxena at मेरे गीत !...
किसने कहा कि दिल में तू मेहमान बनके आ, ये तेरी सल्तनत है, तू सुल्तान बन के आ !इक दिन तो बोल खुल के, तड़पता मेरे बगैर !दिल के गरीब एक दिन , धनवान बन के आ।साँसे तो हैं बाकी, तेरे दीदार के लिए,मुफलिस के पास कर्ज का भुगतान बन के आ !साँसे तो कुछ बाकी तेरे दीदार के लिए,मुफलिस के पास कर... Read more
clicks 222 View   Vote 0 Like   4:05pm 23 Nov 2016 #geet
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