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Tag: budhapa

Blogger: harminder singh at वृद्धग्राम...
हमारे बुजुर्ग अपनों की उपेक्षा के शिकार हैं और जीवन के आखिरी दिनों में मायूस भी हैं.."अभिवादन शीलस्य नित्यं वृद्धोपसेविनः।चत्वारि तस्य वर्धन्ते आयुर्विद्या यशोबलम॥"अर्थात “नित्य गुरुजनों का अभिवादन और वृद्धों की सेवा करने से आयु, विद्या, यश एवं बल की वृद्धि होती है... Read more
clicks 417 View   Vote 0 Like   4:33am 10 Aug 2017 #budhapa
Blogger: harminder singh at वृद्धग्राम...
धुंधले शब्द जोड़-तोड़कर अपने बल पर किस्मत की रचना करना उम्रदराजों के लिए कोई नया नहीं.‘उम्र का फासला हमारी जिंदादिली को बयां नहीं करता।’ बूढ़े काका ने मेरे कंधे पर हाथ रखा। वे दूर कहीं किसी खोज में लगे हुए थे। ऐसा उनकी आंखें बता रही थीं। चेहरे पर एक अधूरी मुस्कान से अनगि... Read more
clicks 353 View   Vote 0 Like   1:02pm 1 Mar 2017 #budhapa
Blogger: harminder singh at वृद्धग्राम...
बूढ़े काका ने सुबह चार बजे मुझे झिंझोड़ कर उठाया। सबसे हैरानी वाली बात यह रही कि रात में समय पर उठने का वादा करने के बाद भी मैं उठ नहीं पाया था। एक बुजुर्ग जो मुझसे कई गुना कमजोर था, वह जवानों की तरह फुर्तिला और जस्बे से भरपूर था। मुझे खुद पर दया और हंसी साथ-साथ आ गयी।कभी-क... Read more
clicks 309 View   Vote 0 Like   5:25am 23 Jun 2016 #budhapa
Blogger: harminder singh at वृद्धग्राम...
सुबह बूढ़े काका से चाय पर फिर मुलाकात हो गयी। वे बोले,‘जिंदगी नरम लगती है, कभी चाय के प्याले से उड़ती भाप।’उन्होंने कहा,‘मुझे खुद से अनेक बार प्रश्न करने का मौका मिला। मैं हंसा भी और मुस्कराया भी। आसमान की थकान को खुद में समेटा, जीभर समेटा। महसूस किया कि जिंदगी निराश सौदा... Read more
clicks 176 View   Vote 0 Like   12:58pm 24 Apr 2015 #budhapa
Blogger: harminder singh at वृद्धग्राम...
उनकी आवाज़ अब कांपती है। उनके चेहरे को देखकर स्पष्ट कहा जा सकता है कि वे जवान नहीं हैं, वे बूढ़े हैं। बुढ़ापा उनसे लिपट गय&#... Read more
clicks 156 View   Vote 0 Like   7:48am 28 Jan 2015 #budhapa
Blogger: harminder singh at वृद्धग्राम...
थकी काया को लेकर कहां चलूं समझ नहीं आ रहा। मैं चप हूं। बिना शब्द बोले मैं एक कोने का सहारा लिये हूं। यह मुश्किल दौर की तरह ह... Read more
clicks 101 View   Vote 0 Like   2:49pm 13 Dec 2014 #budhapa
Blogger: harminder singh at वृद्धग्राम...
किताबों के पन्नों में गुम होने का डर लगता है। सोचता हूं कि जिंदगी एक आफत है। पन्ने बिखरे हैं, अस्त-व्यस्त शहर है। तलाश रहा उन टुकड़ों को जो कभी कुरचे बन सड़क पर उड़ चले थे। तलाश थी उन्हें किसी की जो अनजानों की तरह भटकने लगे। वह मौसम था ही खौफनाक। तब जिंदगी भी पूछ बैठी -"क... Read more
clicks 145 View   Vote 0 Like   10:31am 6 Dec 2014 #budhapa
Blogger: harminder singh at वृद्धग्राम...
उम्र बढ़ती है तो कुछ चीजों की रंगत बढ़ जाती है। ऐसा कहा जाता है कि मदिरा जितनी पुरानी स्वाद उसका उतना उम्दा। उसी तरह बूढ़... Read more
clicks 111 View   Vote 0 Like   3:04pm 5 Dec 2014 #budhapa
Blogger: harminder singh at वृद्धग्राम...
उन बुजुर्ग को देखकर मुझे ऐसा लगा जैसे वे काफी उदास हैं। उनका चेहरा लगभग सारी कहानी बयान कर रहा था। वे सड़क किनारे एक पेड़ से कमर सटाये किसी गहन सोच में डूबे हुए थे। मैं पैदल वहां से गुजर रहा था। मेरी निगाह उनपर ही थी। करीब जाने पर मैं रुक गया। बुजुर्ग उसी अवस्था में थे। मैं ... Read more
clicks 247 View   Vote 0 Like   6:13am 31 Oct 2014 #budhapa
Blogger: harminder singh at वृद्धग्राम...
किसी की भी जिन्दगी एक खुली किताब है जिसमें दर्ज है सब कुछ। हार-जीत, उतार-चढ़ाव, यश-अपयश, नफरत-मोहब्बत। हमारे सारे कार्यकलाप, सुख और संताप, हमारा जीवन केवल हमारा नहीं अपितु परिवार का, समाज का और देश का भी है। हमारे कार्यकलापों से ये सभी प्रभावित होते हैं। हमारे सद्कर्म इनका... Read more
clicks 88 View   Vote 0 Like   5:46am 3 Sep 2014 #budhapa
Blogger: harminder singh at वृद्धग्राम...
जिंदगी कभी मायूस होती है। कभी उसकी रफ्तर रोके नहीं रुकती। कभी उतार-चढ़ाव आते हैं। जिंदगी हर पल बदलती रहती है। यह बदलाव कभी छोटा होता है, कभी बड़ा। ऐसा तमाम उम्र चलता रहता है। उम्र के आखिरी पड़ाव पर इंसान की समझ खुलने लगती है। तब भी जिंदगी के कई पहलू उसके लिए अनजाने और अद्... Read more
clicks 76 View   Vote 0 Like   4:14pm 16 Aug 2014 #budhapa
Blogger: harminder singh at वृद्धग्राम...
एक राष्ट्रीय सर्वेक्षण के अनुसार भारत में बुजुर्गों की उपस्थिति लगभग  30% से 35% है और इनमें से बहुत  थोड़े ऐसे भाग्यशाली है जो आर्थिक रूप से आश्रित नहीं हैं. उनसे भी कम वे हैं जिन्हें परिवार का पोषण और संरक्षण प्राप्त है यानि कि वे अपने बच्चो के संरक्षण में हैं और उनमे... Read more
clicks 88 View   Vote 0 Like   3:09am 30 Jul 2014 #budhapa
Blogger: harminder singh at वृद्धग्राम...
सुनने में शीर्षक अजीब सा लगेगा पर चर्चा के लिये मुझे उपयुक्त लगा. आप कहेंगें बुढ़ापे में सब सिरदर्द पाँव दर्द, घुटने दर्द, आँख गयी, दाँत गये, ब्लड प्रेशर, डायबिटीस,ह्रदय रोग,किडनी फेल सब हाय हाय और आह आह ही तो है पर मैं कहता हूँ सब आपके नज़रिये पर है. मैंन बहुत सारे बूढ़ेनुमा ज... Read more
clicks 93 View   Vote 0 Like   1:37pm 24 Apr 2014 #budhapa
Blogger: surendra kumar shukla Bhramar5 at BHRAMAR KA DARD AUR DARPAN...
‘लोरी’ गा के मुझे सुलाना------------------------------- माँ बूढी पथरायी आँखेंजोह रही हैं बाटलाल हमारे कब आयेंगेधुंध पड़ी अब आँख                            —————————-जब उंगली पकड़ाये चलतीकही कभी थी बातमै आज सहारा दे सिखलातीजब बूढी तुम थामना हाथ———————... Read more
clicks 122 View   Vote 0 Like   5:37pm 17 Feb 2014 #budhapa
Blogger: harminder singh at वृद्धग्राम...
दर्द भरे अल्फाजों का जिक्र मैं करना नहीं चाहता। जिंदगी बेनूर भी लगती है। मगर एक खूबसूरती सिमटी है यहां भी। एक अनोखी अदा जिसका कायल हुआ है सारा जहां। खिलती हुई कलियों को सिराहने रखने से चीजें मुक्कमल होती नहीं दिखतीं, लेकिन महकती रुहें कमाल की लगती हैं।   बूंदों की बनाव... Read more
clicks 199 View   Vote 0 Like   8:56am 16 Jun 2013 #budhapa
Blogger: harminder singh at वृद्धग्राम...
हम निराश क्यों हो जाते हैं। हमने अपने आसपास इतने लोगों को देखा है जो हौंसले की ऐसी मिसाल पेश कर रहे हैं कि मन अचंभित हुए बिना रहता नहीं। वे हैं तो हम में से ही लेकिन उनकी दास्तान अद्भुत है।  जापान के 80 वर्ष के एक बुजुर्गने एक मिसाल पेश की है। उन्होंने दुनिया के सबसे ऊंचे औ... Read more
clicks 149 View   Vote 0 Like   6:24am 25 May 2013 #budhapa
Blogger: harminder singh at वृद्धग्राम...
कहानियां, अनगिनत किस्से और हजार बातें। उम्र रोके नहीं रुकती, जैसे समय ठहरे नहीं ठहरता। मैंने लोगों को बूढ़े होते करीब से देखा है। समझने की कोशिश में हूं कि हम बूढ़े होते क्यों हैं। जर्जर काया कंबल की तह की तरह क्यों हमसे लिपट जाती है। चिपक क्यों जाती है चमड़ी हड्डियों स... Read more
clicks 137 View   Vote 0 Like   4:49pm 19 Mar 2013 #budhapa
Blogger: harminder singh at वृद्धग्राम...
मैंने ये दुनिया आखिरकार छोड़ दी। पीछे छूट गये जाने कितने अपने। नम आंखें, बिलखते लोग। अब अकेला चल पड़ा हूं एक राह जहां चलना है और चलना है। जिंदगी कितनी खूबसूरत रही, यह मैं जान चुका। यादें भी छूट गयीं अब। बचा क्या? .....कुछ भी तो नहीं। .....मैं भी नहीं। खत्म हुआ मैं, मुक्त हुआ मैं। अ... Read more
clicks 159 View   Vote 0 Like   1:57pm 18 Nov 2012 #budhapa
Blogger: harminder singh at वृद्धग्राम...
उड़ना है मुझे। मैं ऐसे नहीं रह सकता, बोझिल लगता है.... मुझे कभी-कभी खुद पर गुस्सा आता है कि मैं कई कामों से बोर हो जाता हूं। ऐसा पता नहीं मेरा साथ होता है या हर किसी की स्थिति यही है। समझ नहीं आता, हम इंसानों का मतलब क्या है। लगता है बिना मतलब के इधर-उधर तैरना हमारी नियति बन गयी ... Read more
clicks 130 View   Vote 0 Like   7:27am 14 Oct 2012 #budhapa
Blogger: S.M.MAasum at हमारा जौनपुर ...
बूढा पेड़झर-झर झरताये पेड़ (महुआ का )कितना मन-मोहक थारस टपकता थामिठास ही मिठासगाँव भर में‘भीड़’ जुटतीइसके तले‘बड़ा’ प्यारा पेड़‘अपने’ के अलावापराये का भीप्यार पाता थाहरियाता था( सभी फोटो गूगल नेट से साभार लिया गया )फूल-फल-तेलत्यौहारमनाता थाथम चुका हैअब वो सिल-सिलाब... Read more
clicks 133 View   Vote 0 Like   11:48am 24 Jul 2012 #budhapa
Blogger: harminder singh at वृद्धग्राम...
नानी अब कहानी नहीं सुनाती। सुनने वाले बच्चे हैं, नानी भी होती है, पर कहानी नहीं होती। नानी बूढ़ी है, दादी बूढ़ी है। लगता है कहानी भी बूढ़ी हो चली है। बच्चे कहते हैं,‘यह कोई कहानी है?’ नानी की गोद में मुन्ना-मुन्नी नहीं बैठते। दादी भी शायद इसलिए ही चुप है। उसकी गोद खाली-खाली है... Read more
clicks 131 View   Vote 0 Like   8:22am 19 Apr 2012 #budhapa
Blogger: harminder singh at वृद्धग्राम...
मेरे दादी-दादी हम बच्चों को देखकर बहुत खुश होते थे। बूढ़ी आंखों से ढेर सा प्यार झलकता था। वे अपनी झुर्रीदार बाहों को फैलाते और हम दौड़कर उनसे लिपट जाते। वह अनुभूति बहुत ही सुखद होती।आज वैसा नहीं है। दादी-दादी संसार से विदा ले चुके। हम भी बच्चे नहीं रहे। अब अपने माता-पिता ... Read more
clicks 138 View   Vote 0 Like   3:47pm 3 Apr 2012 #budhapa
Blogger: harminder singh at वृद्धग्राम...
पतलून ढीली हो गयी। छड़ी की जरुरत महसूस हो रही है। लगता है बुढ़ापा आ गया। शर्मा जी काहे डरते हो, वर्मा जी को देख लो। और चौपाटी वाले गुप्ता जी को क्यों भूल गए। सभी साथ ही थे न। तीन की तिकड़ी कई साल से सुबह की सैर को जाती थी। पिछले कुछ दिनों से शर्मा जी नियम नहीं बना पा रहे। बता रह... Read more
clicks 156 View   Vote 0 Like   5:50am 15 Mar 2012 #budhapa
Blogger: harminder singh at वृद्धग्राम...
एक वृद्धा ने मुझे बताया था कि जीवन बूढ़ा होकर भी उतना बुरा नहीं। उन्होंने मुझे यह एहसास कराया कि बुढ़ापा ठहरा हुआ नहीं होता, बल्कि इंसान इससे बहुत कुछ सीखता है।दादी को गुजरे काफी समय हो गया। लेकिन आज भी मैं उन्हें अपने करीब महसूस करता हूं। सच में वे मुझसे बहुत प्यार करती ... Read more
clicks 130 View   Vote 1 Like   7:19am 10 Feb 2012 #budhapa
Blogger: harminder singh at वृद्धग्राम...
बूढ़े शब्दों का क्या? बेचारे एक कोने में पड़े हैं। उनसे आज कोई बात नहीं करता। वे कमजोर हैं। लाचारी की कहानी उनके इर्द-गिर्द नहीं, उनसे तालमेल बनाकर चलती है। जर्जरता की मैली चादर जो वक्त ने फीकी कर दी है।शब्द कभी चहकते थे। आज इस मुंडेर, कल उस मुंडेर। गजब की तरावट थी। कमाल का ... Read more
clicks 83 View   Vote 0 Like   7:47am 14 Jan 2012 #budhapa
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