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Tag: ashok kumar bal kavita

Blogger: Bal Sajag at बाल सजग...
         ''बच्ची ''वह ममता  की कोमल ,   कमल की चमेली , +माता ,पिता की ,वह अकेली ।वन सुन्दर एक राजकुमारी थी ।।वह सरजमी की  ममता ,वह अनंत की  झोली ।वह हिम जैसी सफेदी ,वह सरिता झरना की उद्गम झोली ।वह सुन्दर एक राजकुमारी थी ।।वह बड़े जोर से हँसती थी ।वह सारे सरगम गा चुकी थी , वह दिन... Read more
clicks 249 View   Vote 0 Like   10:27am 25 Jan 2013 #ashok kumar bal kavita
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          " माँ "  तू ममता की झोली है । तेरी महिमा जग में न्यारी है।। तू साथ समुद्र से भी गहरी है । फिर भी तेरी लहरें  नहीं ।। तू ममता की झोली है । तेरी महिमा जग में न्यारी है।। तेरे बिना घर गृहस्थी  अधूरी है । तू घर की देवी है ।।तू  है पीयूष चमन की हरदम ।  तेरे बिन शोक पवन क... Read more
clicks 275 View   Vote 0 Like   4:13pm 10 Jan 2013 #ashok kumar bal kavita
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    महिला की महिमा तुझे देखते ही ।तेरे पिता ने शीश झुकाया ।।तेरी माँ को गाली देकर ।स्त्री तू भी कितनी निराली ।फिर भी न होती तेरी निगरानी ।।जब तू एक बच्ची थी ।अपने माँ के गर्भ से जन्मी थी ।।घर को दौड़ा आया ।।पूछने पर ,मुरझाया सा जवाब पाया ।माँ को गाली देकर ,बेटा क्यों नहीं ज... Read more
clicks 266 View   Vote 0 Like   4:05pm 8 Jan 2013 #ashok kumar bal kavita
Blogger: Bal Sajag at बाल सजग...
    हो रहा विवाद है दूर कहीं एक स्थान है ।जो देखने में पर्वत के सामान है ।।वहां जाने का अनोखा विचार है ।पर उस रास्ते में नहीं कोई इंसान है ।।लोगों की इच्छा ने जाने की लालसा दी ।इंसानियत की पहचान दी ।हम जमाने  के इंसान ने ।।विश्व में छोड़ दी अपनी परवाह ।जहां देखो वहां इंसान... Read more
clicks 211 View   Vote 0 Like   3:44pm 21 Dec 2012 #ashok kumar bal kavita
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   सोचो फिर चलो पहले सोचो फिर समझो ।फिर करने की ठानो ।।ये कुदरत की कहानी है ।हस करके तो देखो ।।हिम्मत रखो करने की ।पहले से क्यों डरते हो ।।चलने से पहले उस पथ में ।क्यो पीछे हटते हो ।।कुछ नहीं है ।हम में तुम में ।।सब एक जैसी तो है ।फिर क्यों नहीं चलते एक साथ ।।कुछ तो है ।आपस ... Read more
clicks 226 View   Vote 0 Like   2:21pm 18 Dec 2012 #ashok kumar bal kavita
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उसी पथ से गुजरना है आसान समझ कर देखो तो ,हर पथ सरल है ,उसमे चल के देखो तो ,हर मोड़ पर पर्वत है ,उसी मोड़ पर ,एक और मोड़ है ,उसमे भी पर्वत की दीवाल है ,पर उनके लिए ,हाथो में मजबूती की जरूरत है ,वह मजबूती दिखाने की नहीं ,किसी को डराने को नहीं ,वह हाथो को हाथो मे ,ल्र्कत चलने वाली है ,जरूर... Read more
clicks 230 View   Vote 0 Like   4:33pm 16 Dec 2012 #ashok kumar bal kavita
Blogger: Bal Sajag at बाल सजग...
शीर्षक : उम्मीदों को छोड़ो उम्मीदों को छोड़ो ।हकीकत को मानो ।पता को पहचानो ।उस पथ  पर  चलाना सीखो ।खुद की उमीदो को छोड़ो । बात मानो तो ,खुद को पहचानो ।न मिले कोई तो ,अकले ही चल दो ।थोडा कष्ट  होगा जरूर ।।लेकिन पता को पहचान होगी ।चलने का अनुभव होगा ।।न  भोजन हो तो भी ।जल से भूख म... Read more
clicks 215 View   Vote 0 Like   4:41pm 7 Dec 2012 #ashok kumar bal kavita
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 पिंडो के सामान आकाशीय  पिंडो में ,भिड़ने की छमता नहीं होती ।आकर्षण के कारण ,उन मे  की  मिलने की ,सम्भावना नहीं होती ।पक्षियों को झुण्ड में चलने  की आदत  होती है,उन में  भी मिलने की सम्भावना नहीं होती ।इंसानों में तो ,सारी योग्यता होती है फिर भी ,हर एकपथ  में,एकअलग  ही चाह... Read more
clicks 230 View   Vote 0 Like   4:32pm 15 Nov 2012 #ashok kumar bal kavita
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       आदी हैसुनने की आदत नहीं ।बोलने की बेसर्मी है ।।माँगने की आदत नहीं ।खाने की बिमारी है ।।गाने की आदत नहीं ।चिल्लाने के हम आदी है।।बेसर्मी की कोई सीमा नहीं ।ओके सर ,एस सर ,कहने की आदत है ।।सही गलत की पहचान नहीं ।बुलंद आवाजो को सुनने के ।।हम आदी है।कामचोरी मे भी ।।सीना -... Read more
clicks 187 View   Vote 0 Like   3:41pm 6 Nov 2012 #ashok kumar bal kavita
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