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Tag: ashish kumar bal kavita

Blogger: Bal Sajag at बाल सजग...
''किस किस की सुरक्षा ''मुकेश अम्बानी जैसे उद्योगपति ,खतरे से नहीं है खाली सरकार हमारी दे रही गाली । उनकी सुरक्षा के  लिए सी .आर .पी .ऍफ़ बल शाली ॥ सरकार को चिंता है तो पैसे वालो की ,भाड़ मे  जाए दुनियादरी ,लूट रही है जिसकी आबरू ,वो है इस जंहाँ की सारी नारी नारी की सुरक्षा करन... Read more
clicks 391 View   Vote 0 Like   4:41pm 25 Apr 2013 #ashish kumar bal kavita
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              "ठंडी" इस बार ठण्ड का आया मौसम ।जिससे की सारा शहर गया सहम ।।तूने न पहचान ये तेरा है भ्रम ।सर्दी में बोले हर -हर गंगे हम ।।सूरज न दिखता , ये तेरा है भ्रम ।सर्दी में कोहरे का कोहराम ।।सुन लो बच्चो सुन लो तुम ।छुट्टी में कर लो आराम ।इतना भी न करना आराम ।।कि कोई न द... Read more
clicks 349 View   Vote 0 Like   4:13pm 16 Feb 2013 #ashish kumar bal kavita
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  कुछ काम करो इस बार ठण्ड का आया मौसम ।जिससे की सारा शहर गया सहम ।।तूने न पहचाना , यह है तेरा भ्रम ।सर्दी मे भी बोले हर -हर गंगे  हम ।।सूरज न दिखता ,यह है तेरा है भ्रम ।सर्दी में कोहरे का दिखता कोहराम ।।सुन लो बच्चो , सुन लो तुम ।।छुट्टी मे कर लो आराम ।इतना भी न करना आराम ।।किन... Read more
clicks 262 View   Vote 0 Like   10:34am 8 Jan 2013 #ashish kumar bal kavita
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     बचपन ओ मेरे बचपन कहाँ तुम गए ?जब हम खेले थे लुका -छिपी ।।एक दूजे के मारते थे धप्पी ।हमें अपने दे दूर करके ।बचपन के सारे साथी भी गए ।।ओ मेरे बचपन कहाँ तुम गए ?बारिस से भरे गड्ढे - नालों में ।।उस नाव पे बैठाते थे चीटे को हम ।कागज की नाव बहाते थे संग -संग ।।हमारी ये खुंशिया क... Read more
clicks 259 View   Vote 0 Like   4:25pm 20 Dec 2012 #ashish kumar bal kavita
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शीर्षक : कुत्ता काश मै भी सेठ जी का कुत्ता होता ।तो हमारे मजे ही मजे होते ।सुबह - सुबह बाइक मे बैठ कर ।।करता मै भी सैर ।खाने को मिलता माखन , बिस्कुट ,प|नी मे होता ताजा दूध ।खुल जाते भाग्य  हमारे ।।यदि सेठ के कुत्ते होते हम बेचारे ।सर्दी की तो बात निराली ,एक बढ़िया सा होता मेरा ... Read more
clicks 229 View   Vote 0 Like   4:33pm 3 Dec 2012 #ashish kumar bal kavita
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  कवि की छवि एक था बहुत बड़ा कवि ।जब हमने देखी उसकी छवि ।।उड़ गए होश हमारे गश खाकर हम गिरे ,देख के हमको दौड़े लोग बेचारे ।मै तो था बेहोश ,पानी ही पड़ते हमको आया होश ।।कवि ने पूछा अरे ओ भईया ,हमने बोला क्या रे कविया ?सुनकर हमारी ये बतियाँ ,कवि के गुस्से से लाल हो गई अँखियाँ ।काले ब... Read more
clicks 247 View   Vote 0 Like   3:47pm 27 Nov 2012 #ashish kumar bal kavita
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       काम ही कामतू किस सोच मे डूबा है ।अब तो सोच अपनी बदल ।।वरना चला जाएगा यह समय ।तू अपने को न बदल पायेगा ।।हाथ है तेरे स्वतंत्र ,फिर भी तेरा मन है परतंत्र ।।फिर भी अपने के वास्ते ।इऊ खुद कर  स्वतंत्र।।तेरा पता नहीं है कोई फूलो सा सजा ।जो जब मन आये बैठे कर ली आराम ।।आराम तेर... Read more
clicks 201 View   Vote 0 Like   3:14pm 21 Nov 2012 #ashish kumar bal kavita
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       समयउस समय की बात है ।जब वक्त था सोने का ।।सूनसान हो गया था ,सारा महौल ।मन  तो चंचल  होता ही है ।।कुछ करने को जी करता है ।किसी तरह से मन को रोक पाया ।।तब उसको कुछ अच्छा करने को भाया ।लिया कलम कापी का सहारा ।।उनके आगे तो वह ही हारा ।धोखा दे दिया पेन ने उसका ।।इतने मे वह बड़... Read more
clicks 176 View   Vote 0 Like   4:41pm 10 Nov 2012 #ashish kumar bal kavita
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शीर्षक : योगी अवसर मिले करो प्रयोग ,चाहे वह क्यों न हो योग । योग के करने से भी बढ़ी हैं कई चीजे ,चाहे हो मानसिकता की बीमारी ।ख़तम हो जाये इससे बीमारी सारी ,क्योंकि योग करने से बढती है कई चीजे ।यदि योग की साधना करली पूरी ,तो आ जाएगी तुम्हारे अंदर श्रद्धा और सबूरी ।श्रद्धा से ... Read more
clicks 179 View   Vote 0 Like   11:13am 29 Oct 2012 #ashish kumar bal kavita
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    शीर्षक : चुटकुला पहला व्यक्ति :यार मुझे पंडितो से बहुत ही नफरत होती है , और  बहुत गुस्सा आता है । लगता है कि पेट्रोल डालकर आग लगा दूँ दूसरा  व्यक्ति: तो फिर सबसे पहले तू अपने आप को आग लगाकर फूंक ले । पहला व्यक्ति: क्यों? दूसरा  व्यक्ति: क्यों कि तू खुद भी तो पंडित है पहल... Read more
clicks 198 View   Vote 0 Like   3:37pm 14 Oct 2012 #ashish kumar bal kavita
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      शीर्षक :मन जो कहता है तू कह दे । तू न डर किसी से , जो बहकावे तुझको । मत आना उसके बहकावे मे , सोच के अपने मन मे । करले पक्का वादा मन में , कठोर बनने दे अपने को । न  बहके   रोक ले अपने  मन को , मन बड़ा ही चंचल । मन बहके तो मच जायेगी हल -चल । यदि मन को रखेगा ठान के , तभी तो आगे बढ़ प... Read more
clicks 186 View   Vote 0 Like   11:43am 13 Oct 2012 #ashish kumar bal kavita
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