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Tag: Literary

Blogger: Anshuman Aashu at ENDEAVOUR, एक प्रया...
इधर कई दिनों के बाद हिंदी में कुछ पढ़ने को मिला। टेक्नोलॉजी के इस युग में सब कुछ सॉफ्ट होता चला जा रहा है। उपन्यासों को कांख के अंदर दबा कर चलने वाले भी अब सोफ्टकॉपी रखते हैं टेबलेट में। अंग्रेजी की कई किताब पहले से सॉफ्ट फॉर्म में मिलती थी। हिंदी पढ़ने वालों के लिए ज्य... Read more
clicks 178 View   Vote 0 Like   12:46pm 31 May 2015 #Literary
Blogger: Anshuman Aashu at ENDEAVOUR, एक प्रया...
कुछ दिनों से BBC पर प्रसारित एक डाक्यूमेंट्री ने अपने देश में खासा ही बवाल खड़ा कर रखा है। दिल्ली के निर्मम बलात्कार काण्ड की सच्चाई बयां करती इस डाक्यूमेंट्री को कोर्ट ने भारत में प्रसारित होने से रोक लगा दी है। इंसानी फितरत होती है, जो नहीं करने बोला जाये वैसा ही करन... Read more
clicks 213 View   Vote 0 Like   10:22pm 14 Mar 2015 #Literary
Blogger: Anshuman Aashu at ENDEAVOUR, एक प्रया...
कमरे में अकेला,पलंग पर करवटें बदलता,घड़ी की टिक-टिक सुनता,कोसता उस आवाज़ कोजो याद दिला रही थी उसेबीते हुए वो दिन, वो पल,वो सब कुछ।वो चेहरा, वो मुस्कराहट,बड़ी सी मुस्कुराती आँखेंशरारत से लबालब,होठों के नीचे वो काला तिल,तिल पर टिपटिपाती उंगलियाँ,वो छोटी छोटी प्यारी उंगलि... Read more
clicks 196 View   Vote 0 Like   6:22pm 5 Nov 2012 #Literary
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वो हँसता था, खिलखिलाता था,झूमता था, गाता था, गुनगुनाता था,दोस्ती थी, प्यार था,मस्ती थी, तकरार था.वो जिंदा था, क्यूंकि,वो ज़िन्दगी को जीता था.हँसता वो आज भी है, मगर,वो हँसी कही खो गयी.खिलखिलाना वो भूल गया है,झूमना, गाना, गुनगुनानाउसकी आदत नहीं रही.दोस्त हैं, प्यार है, मगर.वो प्य... Read more
clicks 211 View   Vote 0 Like   6:07am 4 Feb 2012 #Literary
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भगवान् भला करे उसका जो आज ड्यूटी पर आने से पहले उससे बात हुई और उसने दुआ दी कि आज कोई डेथ सर्टिफाई न करनी पड़े........पता नहीं इमरजेंसी ड्यूटी के ऐसे कितने और 8 घंटे मिलेंगे ज़िन्दगी में जिसमे एक भी मौत से पाला न पड़े.........अपनी 8 घंटे की ड्यूटी बजाकर इमरजेंसी से निकल ही रहा था कि ... Read more
clicks 154 View   Vote 0 Like   12:19pm 13 Dec 2010 #Literary
Blogger: Anshuman Aashu at ENDEAVOUR, एक प्रया...
वक़्त बदल गया, हम बदल गएमैं वही रह गया, तुम आगे निकल गए.सिर्फ एक साल ही तो छोटे थे तुमभाई से ज्यादा दोस्त होते थे तुम.साथ खेलना, साथ खाना, साथ उठना-बैठना,कभी कभी तो साथ इतना वक़्त बिताने के लिए मार तक खाना.दोस्ती की तकरार को भय्यारी से मिटा देनाभय्यारी की मुसीबतों को दोस्ती... Read more
clicks 132 View   Vote 0 Like   4:01am 9 Oct 2010 #Literary
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