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Tag: Bloging

Blogger:  राजेन्द्र सिंह कुँवर 'फरियादी' at बिखरे हुए अक्...
टेक्नोलॉजी दिन-प्रतिदिन बढ़ती अत्यधिक सरल होती रहती है। जिसके साथ साथ हमें भी खुद को अपडेट रखने के लिए टेक्नोलॉजीयों का साहारा लेना पड़ता है। यदि हम समय पर टेक्नोलॉजी को नही पकड़ पाते हैं तो दुनियाँ के साथ आगे नही बढ़ पाते हैं। खुद को अपडेट रखने के लिए समय और टेक्नोलॉजी का ... Read more
clicks 77 View   Vote 0 Like   3:28am 31 Jan 2020 #Bloging
Blogger: jayanti jain at स्वास्थ्य -से...
एलोपैथि में थाइरोइड ग्रंथी ठीक  नहीं की जाती है बल्कि इस रोग को  मैनेज किया जाता हैl रोग के साथ जीना सिखाया  जाता हैl स्वयं थायराइड ग्रंथी नियमित तैयार हार्मोन मिलते रहने से निष्क्रिय हो जाती हैl थायराइड ग्रंथी एक महत्पूर्ण यदि उचित मात्रा में गोली न ले तो थकान,सरदर्द ,च... Read more
clicks 91 View   Vote 0 Like   3:53am 4 Oct 2017 #Bloging
Blogger: jayanti jain at स्वास्थ्य -से...
मुहं में तेल का कुल्ला करने से शरीर के टोक्सिंस बाहर निकल जाते हैंl यह एक आयुर्वेदिक विधि है जिसे विज्ञान भी स्वीकारता हैंl डॉ .कराच जिन्होंने आयल-पुलिंग पर एक विस्तृत शोध किया है उन्होंने पाया है कि आयल-पुलिंग के बाद निकले एक बूंद थूक में जीवाणुओं के लगभग 500 प्रजातियाँ ... Read more
clicks 99 View   Vote 0 Like   4:46pm 17 Mar 2017 #Bloging
Blogger: jayanti jain at स्वास्थ्य -से...
प्रतिदिन भोजन के बाद एक चम्मच निम्न  चूर्ण लेने से  पाचन ठीक होता है एवं शरीर में व्याप्त सारे टोक्सिंस  बाहर निकल जाते है l    निम्न घटकों  मात्रा  अनुसार कूट पिस कर चूर्ण तैयार कर ले l २० gm पुदीना २० gm सौंफ २० gm मिश्री 10 gm धनिया 10 gm सौंठ 10 gm जीरा 10 gm छोटी हरड (  आभार  आर एस  बोहरा  -... Read more
clicks 160 View   Vote 0 Like   5:22am 5 Nov 2016 #Bloging
Blogger: jayanti jain at स्वास्थ्य -से...
प्रसिद्ध फ्रासीसी साहित्यकार मोपासां ;डंनचंेेंदजद्धबचपन से ही लेखक बनने की जिद करने लगा था। तब उसकी समझदार मां अपने परिचित प्रसिद्ध लेखक फ्लोएर्बेट ;थ्संनइमतजद्ध के पास ले गई एवं उनको बताया कि मेरा बेटा लेखक बनना चाहता है। अतः वह आपसे लेखक बनने के सूत्र जानना चाहता ... Read more
clicks 132 View   Vote 0 Like   2:32pm 13 Sep 2015 #Bloging
Blogger: jayanti jain at स्वास्थ्य -से...
हम सामाजिक प्राणी है अतः रिश्तों में ही जीते है। पशुओं में रिश्ते नहीं होते। इनसे ही जीवन खिलता है। व्यक्ति अपने जीवन के लुत्फ़ इन्हें व्यवस्थित करके ही उठा सकता है।सम्बन्ध शब्द सम और बन्ध दो शब्दों से मिल कर बना है जिसका अर्थ है कि समान सम्बन्ध यह विषम बन्ध या विषमय ब... Read more
clicks 81 View   Vote 0 Like   5:50pm 1 Feb 2012 #Bloging
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