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Tag: समाज

Blogger: कुमारेन्द्र सिंह सेंगर at रायटोक्रेट क...
समाज में सदैव से किसी न किसी तरह के मूल्य चलन में रहे हैं. इनका उद्देश्य समाज को नियमबद्ध रूप से,एक आदर्शात्मक व्यवस्था के रूप में चलाना था. समाज अपने आपमें एक व्यवस्था का नाम है,जहाँ प्रत्येक व्यक्ति के लिए नियमों,कानूनों का पालन करना सुनिश्चित किया गया है. भारतीय संदर... Read more
clicks 8 View   Vote 0 Like   5:04pm 12 Oct 2021 #समाज
Blogger: कुमारेन्द्र सिंह सेंगर at रायटोक्रेट क...
अपने जीवन का बहुत लम्बा समय सामाजिक क्षेत्र में व्यतीत करने के कारण बहुत से व्यावहारिक अनुभवों को करीब से देखने का अवसर मिला है. इन अनुभवों में कुछ अनुभव बहुत सुखद रहे तो कुछ अनुभव तो अत्यंत दुखद रहे. सामाजिक क्षेत्र में बहुत से ऐसे लोगों से परिचय हुआ जो निस्वार्थ भाव स... Read more
clicks 54 View   Vote 0 Like   5:47pm 8 Mar 2021 #समाज
Blogger: डॉ. जेन्नी शबनम at लम्हों का सफ़...
परी******* दुश्वारियों से जी घबराए   जाने क़यामत कब आ जाए   मेरे सारे राज़, तुम छुपा लो जग से   मेरा उजड़ा मन, बसा लो मन में ।   पूछे कोई कि तेरे मन में है कौन   कहना कि एक थी परी, गुलाम देश की रानी   अपने परों से उड़कर, जो मेरे सपने में आई   किसी से न कहना, उस परी क... Read more
clicks 234 View   Vote 0 Like   6:03pm 3 Sep 2020 #समाज
Blogger: डॉ. जेन्नी शबनम at लम्हों का सफ़...
ज़िन्दगी के सफ़हे ******* ज़िन्दगी के सफ़हे पर   चिंगारी धर दी किसी ने   जो सुलग रही है धीरे-धीरे   मौसम प्रतिकूल है   आँधियाँ विनाश का रूप ले चुकी हैं   सूरज झुलस रहा है   हवा और पानी का दम घुट रहा है   सन्नाटों से भरे इस दश्त में   क्या ज़िन्दगी के सफ़हे... Read more
clicks 234 View   Vote 0 Like   4:50pm 30 Aug 2020 #समाज
Blogger: अपर्णा त्रिपाठी at palash "पलाश"...
मिल जाता हैजन्म के साथ हीबहुत कुछ By Defaultलडकी के हिस्से आती हैसहनशीलता, ममता, त्याग और घर की इज्जत लडके को मिल जाती हैघर जायजाद की चाभीकुछ भी करने की आजादीBy Defaultसमय के साथ, पलते बढते है दोनोऔर इस बढते बचपन सेकुछ और मिलता है By Defaultअब तुम बडी हो रही हो,अब तुम बच्ची नहीं रहीये लड... Read more
clicks 160 View   Vote 0 Like   10:00am 24 Aug 2020 #समाज
Blogger: डॉ. जेन्नी शबनम at लम्हों का सफ़...
इतनी-सी बात इतनी-सी फ़िक्र******* दो चार फ़िक्र हैं जीवन के   मिले गर कोई राह, चले जाओ   बेफ़िक्री लौटा लाओ   कह तो दिया कि दूर जाओ   निदान के लिए सपने न देखो   राह पर बढ़ो, बढ़ते चले जाओ   वहाँ तक जहाँ पृथ्वी का अंत है   वहाँ तक जहाँ कोई दुष्ट है या संत है  &nbs... Read more
clicks 267 View   Vote 0 Like   6:35pm 7 Jul 2020 #समाज
Blogger: rozkiroti at Daily Bread-रोज़ की र...
         प्राचीन काल में टूटी हुई शहरपनाह वाले नगर पराजित लोगों को दिखाते थे, जिन्हें खतरों और लज्जा का सामना करना पड़ता था। इसी लिए निर्वासित यहूदियों ने वापस लौट कर पहले यरूशलेम की शहरपनाह को बनाया। उन्होंने यह कैसे किया? साथ-साथ मिलकर, एक दूसरे की सहायता करते ह... Read more
clicks 219 View   Vote 0 Like   3:00pm 6 Jun 2020 #समाज
Blogger: डॉ. जेन्नी शबनम at लम्हों का सफ़...
रंग*****बेरंग जीवन बेनूर न हो   कर्ज में माँग लायी मौसम से ढ़ेरों रंग   लाल पीले हरे नीले नारंगी बैगनी जामुनी   छोटी-छोटी पोटली में बड़े सलीके से लेकर आई   और खुद पर उड़ेल कर ओढ़ लिया मैंने इंद्रधनुषी रंग   अब चाहती हूँ   रंगों का कर्ज चुकाने, मैं मौसम बन... Read more
clicks 185 View   Vote 0 Like   12:34pm 2 Jun 2020 #समाज
Blogger: डॉ. जेन्नी शबनम at लम्हों का सफ़...
नीरवता ****** मन के भीतर   एक विशाल जंगल बस गया है   जहाँ मेरे शब्द चीखते चिल्लाते हैं   ऊँचे वृक्षों-सा मेरा अस्तित्व   थक कर एक छाँव ढूँढ़ता है   लेकिन छाँव कहीं नहीं है   मैंने खुद वृक्षों का कत्ल किया था,   इस बीहड़ जंगल से अब मन डरने लगा है  &nbs... Read more
clicks 171 View   Vote 0 Like   1:05pm 30 May 2020 #समाज
Blogger: डॉ. जेन्नी शबनम at साझा संसार...
भारत तथा विश्व की वर्तमान परिस्थिति पर ध्यान दें तो ऐसा लग रहा है कि प्रकृति हमें चेतावनी दे रही है कि अब बहुत हुआ, अब तो चेत जाओ, वापस लौट जाओ अपनी-अपनी जड़ों की तरफ, जिससे प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर एक सुन्दर दुनिया निर्मित हो सके। सिर्फ भारत ही नहीं सम्पूर्ण विश्व आ... Read more
clicks 124 View   Vote 0 Like   5:30pm 6 Apr 2020 #समाज
Blogger: डॉ. जेन्नी शबनम at लम्हों का सफ़...
तमाशा  *******   सच को झूठ और झूठ को सच कहती है दुनिया   इसी सच-झूठ के दरमियाँ रहती है दुनिया   खून के नाते हों या किस्मत के नाते   फ़रेब के बाज़ार में सब ख़रीददार ठहरे   सहूलियत की पराकाष्ठा है   अपनों से अपनों का छल   मन के नातों का कत्ल   कोखजायों की बदनी... Read more
clicks 133 View   Vote 0 Like   3:09pm 19 Sep 2019 #समाज
Blogger: डॉ. जेन्नी शबनम at लम्हों का सफ़...
तमाशा  *******   सच को झूठ और झूठ को सच कहती है दुनिया   इसी सच-झूठ के दरमियाँ रहती है दुनिया   खून के नाते हों या किस्मत के नाते   फ़रेब के बाज़ार में सब ख़रीददार ठहरे   सहूलियत की पराकाष्ठा है   अपनों से अपनों का छल   मन के नातों का कत्ल   कोखजायों की बदनी... Read more
clicks 192 View   Vote 0 Like   3:09pm 19 Sep 2019 #समाज
Blogger: डॉ. जेन्नी शबनम at लम्हों का सफ़...
तमाशा  *******   सच को झूठ और झूठ को सच कहती है दुनिया   इसी सच-झूठ के दरमियाँ रहती है दुनिया   खून के नाते हों या किस्मत के नाते   फ़रेब के बाज़ार में सब ख़रीददार ठहरे   सहूलियत की पराकाष्ठा है   अपनों से अपनों का छल   मन के नातों का कत्ल   कोखजायों की बदनी... Read more
clicks 145 View   Vote 0 Like   3:09pm 19 Sep 2019 #समाज
Blogger: डॉ. जेन्नी शबनम at साझा संसार...
मेरा लेख एक बड़ी पत्रिका में ससम्मान प्रकाशित हुआ। मैंने मुग्ध भाव से पत्रिका के उस लेख के पन्ने पर हाथ फेरा, जैसे कोई माँ अपने नन्हे शिशु को दुलारती है। दो महीने पहले का चित्र मेरी आँखों के सामने घूम गया।   जैसे ही मैंने अपना कम्प्यूटर खोल पासवर्ड टाइप किया उसने ... Read more
clicks 260 View   Vote 0 Like   5:18pm 8 Sep 2018 #समाज
Blogger: डॉ. जेन्नी शबनम at लम्हों का सफ़...
फ़ॉर्मूला...   *******   मत पूछो ऐसे सवाल   जिसके जवाब से तुम अपरिचित हो   तुम स्त्री-से नहीं   समझ न सकोगे   स्त्री के जवाब   तुम समझ न पाओगे   स्त्री के जवाब में   जो मुस्कुराहट है   जो आँसू है   आखिर क्यों है,   पुरूष के जीवन का गणित और विज्ञान&n... Read more
clicks 306 View   Vote 0 Like   6:19pm 1 Sep 2018 #समाज
Blogger: S.M.MAasum at हक और बातिल...
हमें ज़िन्दगी कैसे गुज़ारनी है यह  नमाज़ के दो जुम्लों  से तय होती है।पहला ग़ैरिल मग़ज़ूबि अलैहिम वलज़्ज़ालीन (न उनका जिनपर ग़ज़ब (प्रकोप) हुआ और न बहके हुओं का) जिसका मतलब की हमें उन गुमराह लोगों में शुमार न करना और उस गलत राह से दूर रखना | औरअस्सलामु अलैना व अला इबाद... Read more
clicks 210 View   Vote 0 Like   5:21am 11 Aug 2018 #समाज
Blogger: डॉ. जेन्नी शबनम at लम्हों का सफ़...
ऐसा क्यों जीवन...   *******ये कैसा सहर है   ये कैसा सफर है   रात सा अँधेरा जीवन का सहर है   उदासी पसरा जीवन का सफर है।   सुबह से शाम बीतता रहा   जीवन का मौसम रूलाता रहा   धरती निगोडी बाँझ हो गई   आसमान जो सारी बदली पी गया।   अब तो आँसू है पीना    और सपन... Read more
clicks 173 View   Vote 0 Like   12:47pm 1 May 2018 #समाज
Blogger: डॉ. जेन्नी शबनम at साझा संसार...
नक्सलवाद और मजहबी आतंकवाद में सबसे बड़ा बुनियादी फ़र्क उनकी मंशा और कार्यकलाप में है। आतंकवादी संगठन हिंसा के द्वारा आतंक फैला कर सभी देशों की सरकार पर अपना वर्चस्व बनाये रखना चाहते हैं।इनकी मांग न तो सत्ता के लिए है न बुनियादी जरूरतों के लिए है। नौजवानों को गुम... Read more
clicks 291 View   Vote 0 Like   6:24pm 1 Jul 2017 #समाज
Blogger: Shah Nawaz at प्रेमरस...
बड़ी हैरत की बात है कि जो लोग ऑफिसों में महिलाओं को लेकर डाइवर्सिटी पर ज़ोर देते हैं, बराबरी की बाते करते हैं, इसके नाम पर बड़ी-बड़ी नीतियां बनाते हैं,  आखिर वही लोग महिलाओं की ही तरह सदियों से दबे-कुचले और सामाजिक पिछड़ेपन का दंश झेल रहे लोगों को आरक्षण दिए जाने क... Read more
clicks 338 View   Vote 0 Like   4:27am 29 Oct 2015 #समाज
Blogger: Shah Nawaz at प्रेमरस...
बड़ी हैरत की बात है कि जो लोग ऑफिसों में डाइवर्सिटी के नाम पर महिलाओं के अधिकारों पर ज़ोर देते हैं, बराबरी की बाते करते हैं, इसके नाम पर बड़ी-बड़ी नीतियां बनाते हैं,  आखिर वही लोग महिलाओं की ही तरह सदियों से दबे-कुचले और सामाजिक पिछड़ेपन का दंश झेल रहे लोगों को आरक्षण ... Read more
clicks 199 View   Vote 0 Like   4:27am 29 Oct 2015 #समाज
Blogger: anil kant at मेरी कलम - मेर...
मैं अक्सर देखता और सुनता हूँ कि आरक्षण के मुद्दे पर वो वर्ग जिसकी वजह से आरक्षण की नौबत आई बहुत ज्यादा बेचैन हो उठता है. कभी कोई स्टेटस ठेल रहा है, कभी कोई स्टेटस फॉरवर्ड कर रहा है, कभी कोई फ़ोटो शेयर कर रहा है. लेकिन कभी जाति प्रथा को समाप्त करने के लिए इस वर्ग ने कभी कोई स्ट... Read more
clicks 262 View   Vote 0 Like   7:20am 30 Aug 2015 #समाज
Blogger: S.M.MAasum at हमारा जौनपुर ...
कहा जाता है की आजादी के समय उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले में चार सौ तिहत्तर स्वतन्त्रता सेनानी रहे लेकिन अब इनकी संख्या मात्र बत्तीस  रह गई है।अब तक जीवित बचे स्वतन्त्रता सेनानियों में कुछ ये नाम है सर्वश्री गंगा प्रसाद उपाध्याय, बाँके बिहारी तिवारी, हरदेव मिश्र, शि... Read more
clicks 134 View   Vote 0 Like   6:16pm 14 Aug 2015 #समाज
Blogger: HARSHVARDHAN SRIVASTAV at हिन्दी चिट्ठ...
बुद्ध ने कहा था कि किसी बात पर इसीलिए विश्वास मत करो कि वह मेरे गुरु ने कहा था या ग्रंथ ऐसा कहते हैं। हर शब्द को तर्कों के तराजू पर तौलो और अपनी बुद्धिमता से सही-गलत का निर्णय करो। इन ज्ञानी पुरुषों के दिए दिव्य ज्ञान को छोड़कर हम उनकी प्रतिमाओं के आगे झुक जाते हैं। अपने ह... Read more
clicks 269 View   Vote 0 Like   3:48pm 8 Jun 2015 #समाज
Blogger: S.M.MAasum at हक और बातिल...
मानवाधिकार उन अधिकारों में से है जो मानवीय प्रवृत्ति का अनिवार्य अंश है। मानवाधिकार का स्थान, सरकारों की सत्ता से ऊपर होता है और विश्व की सभी सरकारों को उसका सम्मान करना चाहिए। संयुक्त राष्ट्र संघ के सदस्यों ने वर्ष १९४८ में विश्व मानवाधिकार घोषणापत्र को तीस अनुच... Read more
clicks 199 View   Vote 0 Like   7:45pm 9 Apr 2015 #समाज
Blogger: राजीव उपाध्याय at स्वयं शून्य...
हर गुनाह के जाने ही कितने पहलू और पक्षकार होते हैं लेकिन दिन के उजाले में कुछ ही पहलू और पक्षकार आते हैं और बाकी विभिन्न पक्षकारों की सुविधा के अनुसार छिपा दिए जाते हैं। इस काम को करने में बुद्धिजीवियों की महत्तपूर्ण भूमिका होती है जो अपनी सुविधाओं (जिनका हुक्म बजात... Read more
clicks 145 View   Vote 0 Like   8:04pm 23 Mar 2015 #समाज
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