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Tag: बस यूँ ही

clicks 83 View   Vote 0 Like   6:00pm 19 Oct 2020 #बस यूँ ही
Blogger: vijay kumar sappatti at बस यूँ ही..........WR...
||| सज़दा |||आज कहीं भी किसी स्त्री के साथ बलात्कार नहीं हुआ,आज कहीं भी किसी औरत के साथ हिंसा नहीं हुई,आज कहीं भी किसी लड़की की भ्रूण हत्या नहीं हुई,......................................... ख़ुशी से हैरान ख़ुदा; आज पहली बार आदमी के सज़दे में झुका हुआ है !!!वि ज य .............................................................................मेरी हमेशा से ही ... Read more
clicks 150 View   Vote 0 Like   7:14am 17 Mar 2017 #बस यूँ ही
Blogger: Yashwant Yash at जो मेरा मन कह...
यहीं कहींकभी कभीमन केएक कोने मेछुप कर जी भरबातें करता हूँखुद से हीअनकही कोकहता हूँ अंधेरों से भरेसुनसान रस्तों परडरता हूँमगर चलता हूँहताशा-निराशा के पलों में झुरमुटों की ओट सेकिसी रोशनी कीतमन्नाऔर उम्मीद लियेअपने मन कीसुनता चलता हूँयूं ही जीता चलता हूँ।  ~यशवन्... Read more
clicks 188 View   Vote 0 Like   7:53am 27 Apr 2015 #बस यूँ ही
Blogger: Yashwant Yash at जो मेरा मन कह...
शून्य से चलकरशून्य पर पहुँच करशून्य मे उलझ करशून्य सा ही हूँजैसा था पहलेवैसा ही हूँ ।देखता हूँ सपनेसुनहरी राहों के नींद मेंहर सुबह को काँटों परचलता ही हूँजैसा था पहलेवैसा ही हूँ ।जो मन में आता हैउसे यहीं पर लिख कर कुछ अपने ख्यालों मेंजीता ही हूँजैसा था पहलेवैसा ही हू... Read more
clicks 184 View   Vote 0 Like   11:53am 20 Mar 2015 #बस यूँ ही
Blogger: Yashwant Yash at जो मेरा मन कह...
यूं तो हैं यहाँबहुत से किस्सेसुनने सुनाने को बहुत से सुनूँ क्याऔर क्या कहूँ किससे ....?नहीं दिखता यहाँकोई अपना साकुछ समझता साराह दिखाता साबस  खुद की परछाई सेअक्सर बातें करता सा....मन की आज़ादी कोबांटते हुए खुद सेमुझे नहीं कहनाकुछ भी किसी से।~यशवन्त यश©... Read more
clicks 113 View   Vote 0 Like   3:18pm 19 Feb 2015 #बस यूँ ही
Blogger: Yashwant Yash at जो मेरा मन कह...
 -पेश है मन की कही कुछ बेतुकी सी- कुछ नहीं तो रात में सपने ही भले तुम सोओ या जागो  अब हम तो चले बंद आँखों मे खुद की तस्वीर देखेंगे सुबह उठ कर शीशे में माथे की लकीर देखेंगे दिन मे यूं तो सब हमें फकीर समझेंगे हर शाम महलों के अमीर समझेंगे पर्दों-मुखौटों के हर राज़ नाराज़ हो चले ... Read more
clicks 141 View   Vote 0 Like   4:40pm 4 Dec 2013 #बस यूँ ही
Blogger: Yashwant Yash at जो मेरा मन कह...
कौन है वो अनजान  ? बिखरे बिखरे बालों वाला जिसका आधा चेहरा किसी पुरुष का है आधा किसी स्त्री का और उसका धड़ अवशेष है  किसी जानवर का .... न जाने कौन बनाता  है मन की काली दीवार पर सफ़ेद स्याही से  यह अजीब सी तस्वीर जो दिल के दर्पण मे परावर्तित हो कर कराती है एहसास सदियों से चेहरों ... Read more
clicks 98 View   Vote 0 Like   4:16pm 25 Nov 2013 #बस यूँ ही
Blogger: Yashwant Yash at जो मेरा मन कह...
  फोटो साभार-भावना जी की फेसबुक वॉल  तन नहीं मन भिगोती हैं, देखो बरसती ये बूंदें मुस्कुरा कर गिरती हैं, कहीं खो जाती हैं ये बूंदें हर बार सोचता हूँ सहेज लूँगा कुछ बूंदें मन की प्याली मेंचूक जाता हूँ फिर भी न जाने किस बेख्याली में आना जाना जिंदगी का सिखा देती हैं ये बूं... Read more
clicks 100 View   Vote 0 Like   3:52am 7 Nov 2013 #बस यूँ ही
Blogger: Yashwant Yash at जो मेरा मन कह...
सबने बना रखी हैअपनी अपनी एक दुनियाजिसके भीतरसिमटे रहते हैं लोग  कृत्रिम हंसी कामुखौटा लगाए न बाहर जा पाते हैंअपनी धुरी सेन आने देते हैं भीतरबंद दरवाजों को साथ लियेअपने परिपथ परगोल गोल घूमती  सबकी अपनी अपनी दुनिया अनजान हैआस-पास केबदलावों सेकोई मीलों आगे हैकोई मीलो... Read more
clicks 65 View   Vote 0 Like   5:40am 9 Jun 2013 #बस यूँ ही
Blogger: रौशन at दिल एक पुराना...
जौनपुर वाराणसी मार्ग पर एक खाली पड़ी यज्ञशाला यज्ञशाला के समीप नदी संभवतः यहाँ कुछ समय पहले कोई बड़ा यज्ञ हुआ था उसके बाद यज्ञशाला यूँ ही खाली पड़ी है यज्ञशाला देख के हमें अपने गाँव में हुए शतचंडी यज्ञ की याद आई जो संभवतः हमारे जन्म से पूर्व हुआ था  पर लोग आज तक उसकी  च... Read more
clicks 362 View   Vote 0 Like   3:03pm 16 May 2013 #बस यूँ ही
Blogger: Yashwant Yash at जो मेरा मन कह...
काश!इन्सान भी होतावक़्त की तरहतो कहीं से भी हो करगुज़र सकता ....खुद ही मिल जातीअमरता ....न रुकता कहींन कभी थकता ....काश!इन्सान भीवक़्त की तरह होता।  ©यशवन्त माथुर©... Read more
clicks 98 View   Vote 0 Like   3:42am 29 Jan 2013 #बस यूँ ही
Blogger: कुमारेन्द्र सिंह सेंगर at रायटोक्रेट क...
            पिछले कुछ दिनों से मन कुछ चिन्तन करने जैसी हालत में पहुंचने की कोशिश करता और कुछ ही पल में उदास हो जाता। उसे चिन्तन करने के लिए नित ही तमाम सारे बिन्दु मिल रहे थे किन्तु चिन्तन करने का स्थान नहीं मिल पा रहा था। चिन्तन के लिए स्थान न मिल पाने के कारण चिन्तन करने व... Read more
clicks 141 View   Vote 0 Like   6:20pm 19 Jan 2013 #बस यूँ ही
Blogger: Yashwant Yash at जो मेरा मन कह...
मनोबलएक ऐसी दीवार होता हैजिसकी नींवकभी कभी संशय में रहती हैकभी तन करअपनी जगहबनाए रखती है दीवार कोऔर कभीएक ठोकर में हीढह जाने देती हैमेरा मनमेरा मनोबलस्थिर हैचिकने घड़े की तरहबे परवाह हैफिर भीलातों कीकोशिशें जारी हैंविध्वंस कोअंजाम देने की।  ©यशवन्त माथुर©... Read more
clicks 76 View   Vote 0 Like   10:30pm 18 Jan 2013 #बस यूँ ही
Blogger: Yashwant Yash at जो मेरा मन कह...
सड़कों पर गूँजते नारेहक की बुलंद आवाज़ेंगुस्सा,आक्रोश,जुनून,सब थम जाता हैचीखता गलाथक जाता हैकिये धरे पर पानीफिर जाता है....शरीर पर चटकतीपुलिस की लाठीयों से नहीं ...सड़क पर बहतेखून की धार से नहीं....बल्कि मशीन पर लगेउस नीले बटन सेजब चुनाव आता हैवोट उसी को जाता हैजो हम को सताता ... Read more
clicks 75 View   Vote 0 Like   10:30pm 10 Jan 2013 #बस यूँ ही
Blogger: Yashwant Yash at जो मेरा मन कह...
अभावों के भावइसी मौसम में बढ़ते हैंजब ‘नाम’ की उम्मीद में भावदर दर भटकते हैंकहीं कंबल ऊनीकहीं कागजी दुशाले हैं किस्मत मेंरैन बसेरों मेंसीले अलाव भी ठिठुरते हैंहैं वो ही ‘यशवंत’जो बंद कमरों में बैठ करआरंभ से अंत तकबेतुकी लिखा करते हैंअभावों के भावइसी मौसम में बढ़ते ... Read more
clicks 82 View   Vote 0 Like   3:49am 9 Jan 2013 #बस यूँ ही
Blogger: Yashwant Yash at जो मेरा मन कह...
कुछ बातेंहोती हैंहाथी के दांतों की तरहजो सोची जाती हैंकहीं नहीं जातींजो कही जातीं हैंसोची नहीं जातींफिर भीकभी मजलिसों में  महफिलों में या तीखी बहसों मेंकह दी जाती हैंहाथी दांत के जैसा खुद काअक्स दिखाने को। ©यशवन्त माथुर©... Read more
clicks 101 View   Vote 0 Like   9:12am 15 Dec 2012 #बस यूँ ही
Blogger: Yashwant Yash at जो मेरा मन कह...
बादलों संग खेलते कूदतेमंद सूरज  कीमस्ती में जाड़े की नर्म धूपपूनम के चाँद कीबिखरती चाँदनीकी तरहबंद आँखों के पार मन के शून्य मेंअपनेक्षणिक एहसास के साथकहती हैइस पल को  जी भर जीने कोक्योंकिदुनिया के  दूसरे कोने मेंअंतिम सांसें गिनताअंधेराकर रहा हैउसका इंतज़ार!©यशवन्... Read more
clicks 96 View   Vote 0 Like   3:39am 12 Dec 2012 #बस यूँ ही
Blogger: कुमारेन्द्र सिंह सेंगर at रायटोक्रेट क...
            12-12-12इस ऐतिहासिक घड़ी में आप सभी का स्वागत है। हो सकता है कि हम में से बहुत से लोग इस पल को ज्योतिष से, अंकशास्त्र से जोड़ कर इसका हानि-लाभ के साथ आकलन करें किन्तु हमारी दृष्टि में यह एक पल ही है, बस कुछ मायनों में ऐतिहासिक बन गया है। 12-12-12के इस पल में कुछ खास तब और भी हो जा... Read more
clicks 130 View   Vote 0 Like   6:58pm 11 Dec 2012 #बस यूँ ही
Blogger: Yashwant Yash at जो मेरा मन कह...
बदलते मौसम का असर नज़र आने लगा है 6 बजे से शाम को अंधेरा छाने लगा है खिली होती थी इस समय कभी धूप जून के महीने में घूमते घूमते धरती को चक्कर आने लगा है 7 बजे खोलता है सुबह सूरज भी अपनी आँखें बादलों की रज़ाई में आसमां छुप जाने लगा है बदलते मौसम का असर नज़र आने लगा है एक चादर मे सिमट... Read more
clicks 90 View   Vote 0 Like   1:26pm 7 Nov 2012 #बस यूँ ही
Blogger: सु-मन (Suman Kapoor) at बावरा मन...
ऐ क्षितिज !जब लौट जायेंगे सब पाखीअपने आशियाने की ओर और सूरज दबे पाँव धीरे धीरे रात के आगोश में चला जायेगा आधा चाँद जब दूर कहीं होगा चाँदनी के इन्तजार में मेघ हौले हौले सूरज को देंगे विदा तब तुमसे मिलने आऊंगा समा लूँगा तुमको अपने अंदर खुद तुममें समा जाऊँगा ....!!तुम्हारा... Read more
clicks 212 View   Vote 0 Like   9:46am 28 Oct 2012 #बस यूँ ही
Blogger: Yashwant Yash at जो मेरा मन कह...
इन्हें शब्दों के बिखरते टुकड़े कहना सही रहेगा । अलग अलग समय पर अलग अलग मूड मे लिखे कुछ शब्दों को एक करने की कोशिश कर के यहाँ प्रकाशित कर रहा हूँ--जनता त्रस्त है,पार्षद मस्त हैमेयर व्यस्त है,विधायक भ्रष्ट हैसांसद को कष्ट है ,मौसम भी पस्त हैकहीं गरज है, छींटे हैं ,बौछारें है... Read more
clicks 114 View   Vote 0 Like   6:33am 11 Aug 2012 #बस यूँ ही
Blogger: Yashwant Yash at जो मेरा मन कह...
समझता हूँ खुद कोएक खुली किताबजिसका हर पन्नारंगा हैआड़ी तिरछी  स्याह सफ़ेदलकीरों सेऔरबीच बीच में उभरते  अनाम सा चेहरा बनातेकुछ छींटेकुछ धब्बेखट्टी मीठीयादों को साथ लियेघूर रहे हैंअगलेखाली पन्नों को। ©यशवन्त माथुर©... Read more
clicks 79 View   Vote 0 Like   3:08pm 25 Jul 2012 #बस यूँ ही
Blogger: Yashwant Yash at जो मेरा मन कह...
[Mobile Photo:10/07/2012]  ये चाँद भी बदसूरत है बेहयाई से दिखता है दोनों पक्षों में रात में और दिन में भी बिना सोचे बिना समझे 'फिकरों'* की फिकर किये बगैर ये चाँद करता है परिक्रमा मेरे साथ मेरी सोच कीदुनिया की। *फिकरा =ताना(व्यंग्य)©यशवन्त माथुर©... Read more
clicks 82 View   Vote 0 Like   10:41am 11 Jul 2012 #बस यूँ ही
Blogger: Yashwant Yash at जो मेरा मन कह...
शब्दों की उलझी हुई सीबेतरतीब सीइमारत -भावनाओं की उथलीदलदली नींव परकब तक टिकेगीपता नहीं  पर जब तकअस्तित्व में है बेढब कलाकारी कीझूठी तारीफ़ोंसच्ची आलोचनाओंतटस्थ दर्शकों कीचौंधियाती आँखों मेंझांक कररोज़  कहती हैएक मौन सच-'मुझे तो ढहना ही है' ©यशवन्त माथुर©... Read more
clicks 75 View   Vote 0 Like   3:36am 22 Jun 2012 #बस यूँ ही
Blogger: Yashwant Yash at जो मेरा मन कह...
टूटनाएक शीशे का होसपने का होया रिश्ते का होटूटनादिल का होबात का होया वादे का होटूटनाकसमों का होरस्मों का होया तिलिस्मों का होअच्छा होता हैकुछ चीजों का टूटनाऔर टूट कर बिखरनाउस एहसास के लियेकि जुड़ना आसान नहीं होता। ©यशवन्त माथुर©... Read more
clicks 85 View   Vote 0 Like   8:46am 16 Jun 2012 #बस यूँ ही
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