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Tag: बचपन

Blogger: कुमारेन्द्र सिंह सेंगर at रायटोक्रेट क...
बचपन के वे दिन याद आ गए जबकि हम तीनों भाइयों में तुम ही सबसे चंचल, सबसे शैतान थे। शैतानी के साथ तुम्हारी मासूमियत सबको हँसा देती थी। घर के लोग तुम्हारी शैतानी भूल जाया करते थे। तुम्हारी चंचलता तुमसे शैतानियाँ करवाती रहती। किस-किस को याद करें, कितना याद करें। अब बचपन से ... Read more
clicks 55 View   Vote 0 Like   6:21pm 19 Jan 2021 #बचपन
Blogger: कुमारेन्द्र सिंह सेंगर at रायटोक्रेट क...
नए-पुराने फाउंटेन पेन की अपनी छोटी सी बगिया में आज सैर करने निकले तो बहुत सी यादें ताजा हो गईं. जी हाँ, हमारे लिए वह बगिया ही है और उस बगिया में ढेर सारे अलग-अलग तरह के फाउंटेन पेन खुशनुमा चेहरों के साथ उपलब्ध हैं. पेन के इस खुशनुमा चेहरों के एहसास को वह बहुत सहजता से महसूस ... Read more
clicks 48 View   Vote 0 Like   11:12am 15 Dec 2020 #बचपन
Blogger: कुमारेन्द्र सिंह सेंगर at रायटोक्रेट क...
वर्तमान परिदृश्य में अभिभावकों के लिए बच्चों के मनोविज्ञान को समझना एक जटिल कार्य होता जा रहा है. उनके लिए बच्चों का लालन-पालन, उनकी परवरिश को लेकर भी आये दिन समस्याजनक होता जा रहा है. अभिभावकों और बच्चों का एकदूसरे के प्रति व्यवहार भी रूखा और असंयत होता दिखता है. इसके ... Read more
clicks 155 View   Vote 0 Like   6:28pm 29 May 2020 #बचपन
Blogger: Kavita Rawat at KAVITA RAWAT...
लम्बी उम्र सब चाहते हैं पर बृढ़ा होना कोई नहीं चाहता है यौवन गुलाबी फूलों का सेहरा तो बुढ़ापा कांटों का ताज होता है छोटी उम्र या कोरे कागज पर कोई भी छाप छोड़ी जा सकती है युवा के पास ज्ञान तो वृद्ध के पास सामर्थ्य की कमी रहती है बूढ़ा भालू धीमें-धीमें करके ही नाचना सीख पाता है... Read more
clicks 358 View   Vote 0 Like   2:30am 16 Nov 2018 #बचपन
Blogger: Kavita Rawat at KAVITA RAWAT...
लम्बी उम्र सब चाहते हैं पर बूढ़ा होना कोई नहीं चाहता है यौवन गुलाबी फूलों का सेहरा तो बुढ़ापा कांटों का ताज होता है छोटी उम्र या कोरे कागज पर कोई भी छाप छोड़ी जा सकती है युवा के पास ज्ञान तो वृद्ध के पास सामर्थ्य की कमी रहती है बूढ़ा भालू धीमें-धीमें करके ही नाचना सीख पाता ह... Read more
clicks 66 View   Vote 0 Like   2:30am 16 Nov 2018 #बचपन
Blogger: sunny kumar at Life iz Amazing...
बनवास पे था मेरे घर का बचपन, सबको खबर हो वो अब लौट आया है, चहकने लगी है आज सीढिया छत की, जो उनसे लिपटने, उनपे रेंगने, नन्हें कदमों का दौड़ आया है.. सज रही है खिड़की पार की पेड़-पौधे-झाड़ियां, कि उनको समझने, उनकी बात करने, नई नज़र लिए मेहमान आया है, बनवास पे था जो मेरे घर का बचपन, सबको ख़ब... Read more
clicks 143 View   Vote 0 Like   3:42pm 11 May 2018 #बचपन
Blogger: ajay kumar jha at बुकमार्क ... ...
आजकल जो दीवानापन युवाओं का मोटरसाईकिल और युवतियों का स्कूटियों के प्रति और बच्चों की ललक भी स्कूटी दौडाने की और दिखाई देती है , ठीक वैसी ही और वैसी ही क्यूँ , बल्कि उससे कहीं ज्यादा (ये भी मैं बताउंगा कि उससे ज्यादा कैसे और क्यूँ ) उन दिनों में हमें और हमारी उम्र के बच्चों ... Read more
clicks 316 View   Vote 0 Like   4:13am 11 Nov 2017 #बचपन
Blogger: Kavita Rawat at KAVITA RAWAT...
रिमझिम सावनी फुहार-संग पावन पर्व रक्षाबंधन आया है घर-संसार खोई बहिना को मायके वालों ने बुलाया है मन में सबसे मिलने की उमंग धमा-चैकड़ी मचाने का मन है पता है जहाँ सुकूं भरी जिंदगी वह बचपन का घर-आंगन है याद है छोटी-छोटी बातों पर मुंह फुलाना कभी हंसते-गाते, खुशी-खुशी स्कूल ज... Read more
clicks 414 View   Vote 0 Like   3:30am 6 Aug 2017 #बचपन
Blogger: Krishna Kumar Yadav at शब्द-सृजन की ...
आधुनिक दौर में बच्चों में अध्ययन के प्रति समर्पण के साथ-साथ रचनात्मकता होना भी बहुत जरूरी है। यह रचनात्मकता ही हमें जिज्ञासु बनाती है और संवेदनशीलता को बरकरार रखती है। इसके लिए हमारे भीतर का बचपन जिन्दा रहना चाहिए। उक्त उद्गार राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र, जोधपुर के नि... Read more
clicks 355 View   Vote 0 Like   4:17pm 1 Dec 2016 #बचपन
Blogger: मनोज भारती at गूंजअनुगूंज...
एक दिन वह गांव की कच्ची गलियों में अपने हमउम्र  बच्चों के साथ खेल रहा था। खेलते-खेलते वह नीम की छांव तले  आ गया। पीछे-पीछे उसका दोस्त सुरेश भी आ गया। वह जमीन में देखने लगा। जमीन कभी गारे-गोबर से लीपी गई थी। जमीन में उसे दो चीज़ें दिखाई दी। जो गारे-गोबर के साथ जमीन में धंस ... Read more
clicks 204 View   Vote 0 Like   7:10pm 19 Sep 2016 #बचपन
Blogger: Krishna Kumar Yadav at शब्द-सृजन की ...
चलिए आज बचपन की कुछ यादें ताजा कर लेते हैं। शायद इसी बहाने फिर से वो बचपन लौट आये। याद है, बचपन में 1 रु. की पतंग के पीछे 2 किलोमीटर तक भागते थे। न जाने कितनी बार चोटें खाईं, पर फिर भी हमेशा वही जज्बा। आज पता चलता है, दरअसल वो पतंग नहीं थी; एक चैलेंज थी। वैसे भी खुशियाँ बैठे-बैठ... Read more
clicks 325 View   Vote 0 Like   5:54am 22 Sep 2015 #बचपन
Blogger: Anita nihalani at मन पाए विश्रा...
राखी का उत्सव सावन की पूनम जब आती है साथ चला आता है बचपन की यादों का एक हुजूम नन्हे हाथों में बंधी सुनहरी चमकदार बंधी राखियाँ और मिठाई से भरे मुँह उपहार पाकर सजल हुए नेत्र और मध्य में बहती स्नेह की अविरत धारा एक बार फिर आया है राखी का त्योहार लेकर शुभभावनाओं का अ... Read more
clicks 183 View   Vote 0 Like   7:48am 28 Aug 2015 #बचपन
Blogger: Anita nihalani at मन पाए विश्रा...
ठहर गया है यायावर मन पलक झपकते ही तो जैसे बचपन बीता बीता यौवन, सांझ चली आई जीवन की कंप-कंप जाती दिल की धड़कन ! जाने कब यह पलक मुंदेगी किस द्वारे अब जाना होगा, मिलन प्रभु से होगा अपना या फिर लौट के आना होगा ! जो भी हो स्वीकार सभी है आतुरता से करें प्रतीक्षा, बोरा-बिस्त... Read more
clicks 75 View   Vote 0 Like   1:29pm 8 Nov 2014 #बचपन
Blogger: Aryaman Chetas Pandey at उन्मेष …...
दिन भर मन-ही-मन क्या-कुछ गुनती रहती हैमाँ बैठे-बैठे रिश्ते बुनती रहती हैनज़रों को दौड़ा लेती है हर कोने मेंमाँ घर की सब दीवारें रँगती रहती हैजो भी हो थाह समन्दर की, उससे ज़्यादामाँ गहरी, गहरी, गहरी, गहरी रहती हैधीरे-धीरे जैसे-जैसे मैं बढ़ता हूँमाँ वैसे-वैसे ऊँची उठती रहती हैघ... Read more
clicks 215 View   Vote 0 Like   10:53pm 30 Jul 2014 #बचपन
Blogger: राजीव कुमार झा at देहात...
पिछले कई सालों की भांति इस साल भी ग्रीष्मावकाश में मुंबई में था.छोटी बहन वहां के एक प्रतिष्ठित स्कूल में गणित की शिक्षिका है.एक महीने के लम्बे ग्रीष्मावकाश में उसे घर आने और सबों से मिलने-जुलने का अवसर मिल जाता है.वापसी में अक्सर मैं ही उसे पहुँचाने मुंबई जाता हूँ.इस बह... Read more
clicks 116 View   Vote 0 Like   12:40pm 7 Jul 2014 #बचपन
Blogger: Vibha Rani at Chhutpan ki Kavitayen...
इस ब्लॉग का उद्देश्य बालोपयोगी कविताओ को देना है, ताकि स्कूल जानेवाले हर उम्र के बच्चे अपनी ज़रूरत के मुताबिक इसमें से कविताएं ले सकें। लोगोंकी सहभागिता बढ़ाने के लिए हमने उनकी यादों से कविताएं मांगी। बच्चों से स्कूलों में पढ़ाई जानेवाली कविताएं। आपसे अनुरोध कि अपनी य... Read more
clicks 170 View   Vote 0 Like   10:13am 20 May 2014 #बचपन
Blogger: विजय राज बली माथुर at पूनम वाणी ...
बचपन मस्ताना कितना दीवाना गुजरता अनजाना फिर याद दिलाना बड़े होने का एहसास दिलाना । । ... Read more
clicks 262 View   Vote 0 Like   3:48pm 9 Feb 2014 #बचपन
Blogger: संतोष त्रिवेदी at बैसवारी baiswari...
(1)मृत्यु घिन आती है ऐसे समाज सेजहाँ हक की लड़ाईजमीन और जंगल के बहानेजान लेने पर उतारू है।जिस जमीन पर गिरता है पानीवहां बहाया जाता है रक्त।फसल में धान और सरसों की जगहलहलहाती हैं लाशें।उर्वर मानव-समाज को बंजर कर रहे जमीन की तरह...अपनी पीढ़ियों को उजाड़करबना रहे हैं ठूँठजंग... Read more
clicks 289 View   Vote 0 Like   6:03am 31 May 2013 #बचपन
Blogger: अमिता नीरव at अस्तित्व...
कोई-कोई बचपना भी अजीब होता है... बहुत, बहुत अजीब। ये न बचपना कहलाता है और न ही परिपक्वता... जाने इसे किस कैटेगरी में रखेंगे... मई दिवस के मौके पर ये बचपना लगातार ज़हन पर दस्तक दे रहा है। इसे तब बचपना कहा जा सकता था, लेकिन आज क्या कहा जाए, ये सवाल भी परेशान कर रहा है। जाने ये चेतना ... Read more
clicks 347 View   Vote 0 Like   4:56am 1 May 2013 #बचपन
Blogger: sanjay kumar chourasia at "जीवन की आपाध...
मैंने अपने बेटे को देखा प्लेटफ़ॉर्म पर हाँथ फैलाते हुए ढावों पर चाय - पानी देते हुए गलियों में कचरा बीनते हुए खाने - पीने की चीजें चोरी करने पर पब्लिक से मार खाते हुए ........यूँ तो मेरा  बेटा अच्छे स्कूल में पढ़ता  है अच्छा खाता है पहनता है खेलता है !उसे ... Read more
clicks 212 View   Vote 0 Like   12:08pm 26 Apr 2013 #बचपन
Blogger: प्रवीण पाण्डेय at न दैन्यं न पल...
टेड पर श्री डेविड आर डो का सम्बोधनसुन रहा था, वह टेक्सास में एक वकील हैं और मृत्युदण्ड प्राप्त व्यक्तियों के मुक़दमे लड़ते हैं। जिन व्यक्तियों ने जघन्यतम अपराध किये होते हैं, जिन व्यक्तियों को न्यायालय ने किसी भी स्थिति में जीने योग्य नहीं पाया और जिनको सारी क्षमा-प्... Read more
clicks 142 View   Vote 0 Like   10:30pm 15 Feb 2013 #बचपन
Blogger: डा.राजेंद्र तेला "निरंतर at "निरंतर" क...
बचपन तोलौट नहीं सकतापर बच्चा बन कर तोरह सकता हूँआज झगडा कलदोस्ती तो कर सकता हूँपुरानी बातें को आसानी सेभूल तो सकता हूँहर खेल तो खेल सकता हूँउम्र में बड़ों कोभैया,चाचा,ताऊ तोकह सकता हूँकहीं बैठ सकता हूँकहीं खा सकता हूँबिना धर्म जात पांत जानेनए दोस्त तो बनासकता हूँबेफ... Read more
clicks 89 View   Vote 0 Like   1:30pm 5 Dec 2012 #बचपन
Blogger: प्रवीण पाण्डेय at न दैन्यं न पल...
बचपन की सुन्दर सुबहों का भीना झोंका,आँख खुली, झिलमिल किरणों को छत से देखा,छन छन कर जब पवन बहे, तन मन को छूती,शुद्ध, स्वच्छ, मधुरिम बन थिरके प्रकृति समूची,आज सबेरा झटके से उग आया पूरा,नही सलोनी सुबह, लगे कुछ दृश्य अधूरा,आज नहीं वह पेड़, कभी जो वहाँ बड़ा था,तना नहीं, ईटों का राक... Read more
clicks 148 View   Vote 0 Like   10:30pm 30 Oct 2012 #बचपन
Blogger: vikram meena at "जिंदगी का ...
कंप्यूटर का इस्तेमाल समय की बर्बादी नहीं है, लेकिन बच्चों को इसकी लत से बचाना मां-बाप की जिम्मेदारी है। उन्हें इस बात का ख्याल रखना है कि बच्चे कंप्यूटर के चक्कर में बर्बाद न हो जाएं। आइए इस मुश्किल को सुलझाने की टिप्स पर गौर करेंजब गुड़गांव में रहने वाले 13 साल के प्रण... Read more
clicks 368 View   Vote 0 Like   5:10pm 9 Oct 2012 #बचपन
Blogger: Prem Prakash at पूरबिया...
अगर देश में महज दो सालों के भीतर एक लाख से ज्यादा बच्चे लापता हुए हैं, तो यह सचमुच एक बड़े खतरे का संकेत है। बच्चों को लेकर परिवार और समाज में बढ़ी असंवेदनशीलता का यह एक क्रूर पक्ष है। भूले नहीं होंगे लोग कि देश में 42 फीसद बच्चों के कुपोषित होने की सचाई का खुलासा करने वाल... Read more
clicks 176 View   Vote 0 Like   12:33pm 19 Aug 2012 #बचपन
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