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Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at चर्चामंच...
सादरअभिवादन।सोमवारीयप्रस्तुतिमेंआपकास्वागतहै।8 अगस्त 2021 को संपन्न होने जा रहे ऑलम्पिक खेलों में कल भारत की बेटी पी.वी.सिंधु ने बैडमिंटन (महिला वर्ग ) में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रचा।दो ऑलम्पिक पदक जीतनेवाली वे पहली भारतीय महिला हैं।   हमारी ओर से ढे... Read more
clicks 1 View   Vote 0 Like   6:31pm 1 Aug 2021 #
Blogger: akhtar khan akela at आपका-अख्तर खा...
सुन, ज़िन्दगी, एक तीली माचिस की, अंधेरे को रोशन करने के लिये दिया जलाती है , वही दूसरी तीली , लोगों के घर जलाती है , वही तीसरी तीली लोगों के चूल्हे जलाती है , तो वही तीली बहुएं जलाती है , वही तीली , लुहार के रोज़गार की भट्टी जलाती है , तीली तीली में यह फ़र्क़ क्यों , किसलिए बनाया है,, w... Read more
clicks 18 View   Vote 0 Like   1:47am 1 Aug 2021 #
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at चर्चामंच...
सादर अभिवादन। रविवारीय प्रस्तुति में आपका स्वागत है।आज चर्चामंच की ओर से अतिथि चर्चाकार के रूप में प्रस्तुति लेकर आई हैं वरिष्ठ ब्लॉगर एवं लेखिका आदरणीया कुसुम कोठारी जी। आज अपनी पसंद के ब्लाॅग चुनने का मौका मिला मन प्रसन्न तो था पर डर भी लग रहा था, क्योंकि इतने स... Read more
clicks 13 View   Vote 0 Like   6:31pm 31 Jul 2021 #
Blogger: rozkiroti at रोज़ की रोटी -...
 रोज़ की रोटी ब्लॉग के सन्देश 1 अगस्त 2021 से एक बदले हुए स्वरूप में होंगे। अब अंग्रेज़ी की दैनिक मनन के संदेशों की पुस्तिका Our Daily Bread के संदेशों के अनुवाद के स्थान पर, इसी ब्लॉग के लिए लिखे गए सन्देश पोस्ट किए जाएँगे।           जो पाठक Our Daily Bread के संदेशों को हिन्दी ... Read more
clicks 22 View   Vote 0 Like   3:00pm 31 Jul 2021 #
Blogger: अरुण कुमार निगम at अरुण कुमार नि...
                            ग़ज़लसियासतदां की सोहबत में कभी हम रह नहीं पायेकिसी दरबार में जा के गजल हम कह नहीं पाये।भले दिखने में हैं इक खंडहर दुनिया की नजरों मेंगमों के जलजले आये मगर हम ढह नहीं पाये।कभी खूं से कभी अश्कों से लिख देते हैं अपना ग़ममगर लफ़्ज़ों की ऐय्... Read more
clicks 1 View   Vote 0 Like   6:12am 31 Jul 2021 #
Blogger: Rajesh Tripathi at Kalam Ka Sipahi /a blog by Rajesh T...
ॐ ऐसा चमत्कारिक शब्द है जिसका नियम और श्रद्धापूर्वक किया गया जाप  सारे कष्ट दूर कर सकता है। अगर निरंतर इसका जाप किया जाये तो इससे आपका जीवन भी बदल सकता है। ऊं अक्षरका अर्थ है जिसका कभी क्षरण अर्थात क्षय ना हो। अ उ और म से मिल कर बने ॐ को साक्षात ब्रह्म का रूप माना जाता ह... Read more
clicks 1 View   Vote 0 Like   3:53pm 30 Jul 2021 #
Blogger: Jaydeep Shekhar at कभी-कभार...
        आज मौसम बढ़िया था, तो गाँव की ओर निकल गये। यह भी देखना था कि दो-तीन हफ्ते पहले जो तीस आम के पेड़ बड़े तालाब के किनारे-किनारे लगवाये थे, वे सही-सलामत हैं या नहीं।        तो उसी सफर के दौरान की कुछ तस्वीरें। ये तस्वीरें ही सब कुछ कह रही हैं, व्याख्या या वर्... Read more
clicks 0 View   Vote 0 Like   3:41pm 29 Jul 2021 #
Blogger: Sweta sinha at मन के पाखी...
मुंडेर परदाना चुगने आतीचिडियों के टूटे पंखइकट्ठा करती,नभ में उड़ते देखउनके कलरव परआनंदित होतीमैं चिड़िया हो जानाचाहती हूँ,मुझे चिड़िया पसंद हैक्योंकि अबूझ भाषा मेंमुझसे बिना कोई प्रश्न कियेवो करती हैं मुझसे संवाद।मखमली,कोमल,खिलती कलियों, फूलों कीपंखुड़ियों को छूकर ... Read more
clicks 1 View   Vote 0 Like   2:46pm 28 Jul 2021 #
Blogger: समीर लाल at उड़न तश्तरी .......
 तिवारी जी पान की दुकान की तरफ सर झुकाए चले आ रहे थे। हाथ में एक किताब थामे थे। किसी से कोई बात चीत नहीं। न जाने मन ही मन क्या सोच रहे थे। चेहरे की गंभीरता को देख कर अनुमान लगाया जा सकता था कि निश्चित ही किसी बड़ी योजना की उधेड़बुन में लगे हैं। अभी सुबह का सात भी ठीक से नहीं ब... Read more
clicks 14 View   Vote 0 Like   12:57am 25 Jul 2021 #
Blogger: Deepak Kumar Bhanre at मेरी अभिVयक्त...
मौसम हो रहा है #कातिल , और दिल है उफान पर, सेल्फी जरा लेना ,होश अपने संभाल कर ।फिसलन भरी है राहें ,अरमां भी है आसमान पर ,उतरना जरा कहीं भी ,कदम अपने #संभालकर ।लगने लगे जब आलम ,सुहाना दिलों जान पर,#तस्वीरोंकी जगे तमन्ना ,हंसी यादों के नाम पर ।हो जाये कैद यादें ,तस्वीरों के सामान ... Read more
clicks 4 View   Vote 0 Like   1:49pm 22 Jul 2021 #
Blogger: श्यामल सुमन at मनोरमा...
भाषण, विज्ञापन में कहते, भारत मालामाल हुआहुई झूठ की इतनी बारिश, झूठ शर्म से लाल हुआजमाखोर से ज्यादा अब तो, लूट मची है सरकारीसच को ढंकते यूँ झूठों से, बुरा सत्य का हाल हुआलोकतंत्र के मंदिर तक में, झूठ निडरता से बोले आमलोग को सुखी बताते, जो सचमुच कंगाल हुआतरसे जीवन भर रोटी... Read more
clicks 0 View   Vote 0 Like   11:22am 22 Jul 2021 #
Blogger: चन्दर मेहेर at लाईफ मज़ेदार......
 🌻🌼🌻🌼🌻🌼*आज के सत्संग से*आदरणीय अंकल ने बताया-सृष्टि में, सज़ा देने का हक सिर्फ माँ को है। किंतु सज़ा देने के उपरांत सबसे अधिक दुख भी माँ को ही होता है। ईश्वर माँ के जैसे ही हैं। अपने बच्चों को दुखी देख कर ईश्वर को सबसे अधिक दुख होता है। किंतु इसे सहने की शक्ति भी वही देते ह... Read more
clicks 0 View   Vote 0 Like   6:10pm 20 Jul 2021 #
Blogger: Deepak Kumar Bhanre at मेरी अभिVयक्त...
 सुबह का पता न शाम का ,खाने की सुध न आराम का ,लगातार सर झुकाये बैठे हो ,#स्क्रीन पर नजर गड़ाये बैठे हो ,कभी दर्द की शिकायत ,तो उससे निजात की कवायद ,एक अलग ही दुनिया बनाये बैठो हो ,साथ अपनों का गवाये बैठो हो ,ध्यान जरा अपना हटाकर ,सर को अपने  ऊपर उठाकर ,उंगलियों का अपनी विराम द... Read more
clicks 16 View   Vote 0 Like   2:34pm 14 Jul 2021 #
Blogger: Pratibha Saksenas at लालित्यम्...
राग-विराग 15."भौजी, भौजी हो . . . कहाँ गईं? . . देखो तो तुम्हारे लिये क्या आया है?"साड़ी के पल्ले से भीगे हाथ पोंछती रत्नावली आते-आते बोली, "बड़े उछाह में हो देवर जी, ऐसा क्या ले आये हो?"देखा, दुआरे नन्ददास खड़े, दोनों हाथों में ग्रंथ सँभाले, रत्ना की गति में वेग आ गया, "तैय्यार हो गई! व... Read more
clicks 2 View   Vote 0 Like   11:03pm 11 Jul 2021 #
Blogger: Randhir Singh Suman at लो क सं घ र्ष !...
 मीनाक्षीताई साने ;सरदेसाई का जन्म, 18 मई 1909 को सोलापुर महाराष्ट्रद्ध में हुआ था। भाकपा केसुप्रसि( नेता कामरेड एस.जी. सरदेसाईउनके बड़े भाई थे। जाहिर है मीनाक्षीने सरदेसाई से बहुत-कुछ सीखा औरउन्हीं के प्रभाव से आगे चलकर भारतीयकम्युनिस्ट पार्टी में शामिल हुईं।मीनाक्षी... Read more
clicks 16 View   Vote 0 Like   5:20am 10 Jul 2021 #
Blogger: sandhya arya at हमसफ़र शब्द...
नदी और घास सूखती रहीं और कही इनसे दूर हमसब अपने हिस्से के धूप पर रोते रहे तभी तो खोया है जंगल खोयी है मीट्टी और खोयी है ख़ुशबू धरती की एक भूख ने दूसरे भूख को खाया है बारी-बारी पत्थर के ज़मीन पर घासें नहीं उगा करतीइस तरह कुछ टुकड़ा टुकड़ा हो जाती है धरती लाख आईना सूरत दिखाय... Read more
clicks 0 View   Vote 0 Like   4:08pm 5 Jul 2021 #
Blogger: रश्मि at रूप-अरूप...
‘खरी चवन्नी चांदी की, जय बोल महात्मा गांधी की…’ शायद किसी को याद हो अब भी यह नारा। इस नारे से चवन्नी का महत्व समझा जा सकता है, जिसके अस्तित्व को समाप्त हुए आज 30 जून को पूरे 10 वर्ष गुजर गए। कहने वाले कहेंगे कि कितना कुछ तो बदल गया है…अब न वो दुनिया रही न इंसान वही, तो इन सिक्क... Read more
clicks 0 View   Vote 0 Like   2:08pm 30 Jun 2021 #
Blogger: Rashmi B at एक नई दिशा !...
 सच कितना सुन्दर है यह हमारी अभिलाषा पर निर्भर करता है। पर कभी-कभी इसके परिणाम बहुत कष्टकारी हो सकते हैं। क्या हमनें कभी अपने चहेतों पर लगाम लगाई है ? शायद नहीं। दूसरों के अच्छे कपड़े देखे तो बढ़-चढ़ कर खरीदारी की। बड़ी गाड़ी देखी तो उसे पास होने की चाहत की। कोई नया मोब... Read more
clicks 5 View   Vote 0 Like   4:10am 23 Jun 2021 #
Blogger: Bal Sajag at बाल सजग...
"जीओ खुलकर जीओ " जीने में  क्या बुराई हैं |  चाहें हम जैसे जीए ,पर जीना तो हम सब को |  चाहें खुश हो के जीए ,और चाहें दुखी हो के जीए |  जीना तो हर हाल में हैं ,ऐसे जीने से क्या फायदा |  जिसमे कोई मज़ा ही नहीं ,जीओ तुम खुलकर जीओ | बिना डर के , बिना शर्म के ,जीओ खुलकर जीओ | चाहे... Read more
clicks 7 View   Vote 0 Like   8:03am 21 Jun 2021 #
Blogger: VIMAL KUMAR SHUKLA at मेरी दुनिया...
अब न हाथ में किताबें, कन्धों पर बस्ते होंगे,सड़क पर मिल जायें तो भी एक न रस्ते होंगे।जो बिक चुके हैं दूसरे की दहलीज पर प्यारे,क्या करें महबूब का महबूब जो सस्ते होंगे।।अन्तर्जाल से साभारकृपया पोस्ट पर कमेन्ट करके प्रोत्साहित अवश्य करें|... Read more
clicks 1 View   Vote 0 Like   3:33am 21 Jun 2021 #
Blogger: akhtar khan akela at आपका-अख्तर खा...
और हमने जहन्नुम का निगेहबान तो बस फरिश्तों को बनाया है और उनका ये शुमार भी काफ़िरों की आज़माइश के लिए मुक़र्रर किया ताकि एहले किताब (फौरन) यक़ीन कर लें और मोमिनो का ईमान और ज़्यादा हो और अहले किताब और मोमिनीन (किसी तरह) शक न करें और जिन लोगों के दिल में (निफ़ाक का) मर्ज़ है (व... Read more
clicks 1 View   Vote 0 Like   1:39am 21 Jun 2021 #
Blogger: Deepali Pant Tiwari at दिशा...
कितना प्यारा, कितना न्यारा अपना यह पंचांग है चन्द्रमा के रूप बदलने से तिथियों का विधान है। तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण इसके अंग हैं इसीलिए पंचांग कहलाए कितने इसके ढंग हैं  शुक्लपक्ष और कृष्णपक्ष के बीच महीना बँटता है इन दोनों के मध्य चंद्रमा घट... Read more
clicks 0 View   Vote 0 Like   1:40pm 20 Jun 2021 #
Blogger: अर्चना तिवारी at कुछ लम्हे दिल...
 पिता जब वृद्ध होने लगे थेआहिस्ता-आहिस्ता बदलने लगे थे आदतें बदल गईं,  प्रयोग की वस्तुएँ भी बदल गईं थीं कुछ तर्कसंगत थीं तो कुछ अतार्किक भीतन पर रहने वाले शर्ट-पैंट हैंगर पर लटक गए हमेशा के लिए कुर्ता-धोती स्थापित हो गए थेजाड़े में गाउन पहनना भारी लगने लगारफ्फ... Read more
clicks 4 View   Vote 0 Like   11:32am 20 Jun 2021 #
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