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clicks 118 View   Vote 0 Like   12:26pm 7 Sep 2012   Catogery:   
Blogger:  at My Poems/मेरी रचना...
गुलाबआया हूँ दूर से आपको उपहार देने इसको स्वीकार करें मेरी इस तुच्छ भेंट को न इंकार करें .तोड़ा था मैंने जबइनको उद्यान सेये भी सुरभित थे  ताजे मनमोहक थेबगिया के रौनक  थेठीक तुम्हारे सदृश ये भी इठलाते थेअल्हड़ बल खाते थेहलके से झोंके पर भीअलकें लहराते थे.पर ये गुलाब ह...
 
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