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clicks 13 View   Vote 0 Like   5:37am 30 Nov 2021   Catogery: गज़ल  
Blogger: दिगम्बर नासवा at स्वप्न मेरे...
कहीं से छूट गए पर कही से उलझे हैं. हम अपनी ज़िन्दगी में यूँ सभी से उलझे हैं. नदी है जेब में पर तिश्नगी से उलझे हैं,अजीब लोग हैं जो खुदकशी से उलझे हैं. नहीं जो प्रेम, पतंगों की ख़ुद-कुशी कह लो,समझते-बूझते जो रौशनी से उलझे हैं. तरक्कियों के शिखर झुक गए मेरी खातिर,मगर ये दीद...
 
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