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clicks 325 View   Vote 0 Like   4:33pm 29 Oct 2016   Catogery: poem  
Blogger: pradeep singh beedawat at चेतना के स्वर...
मैं दर्द होता तोआपकी आंखों से बहकर अपना अस्तित्व समाप्त करना चाहता
उस खारे आंसू की तरह जो
देश दुनिया की फिक्र से दूर बच्चों की
आंखों से निश्चल बहा करता है।
मैं खुशी होता तो
आपकी मुस्कुराहट के रूप में
होठों पर बिखरना चाहता
उसी स्वच्छंद
रूप में जब कोई नन्हा शावक
मृगया क...
 
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