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clicks 215 View   Vote 0 Like   7:27pm 15 Apr 2012   Catogery: कुछ कविता सी  
Blogger: Sash at Shaken... Not Stirred...
निर्मम, निष्ठुर, निर्मोह लगत हैअब यह जीवन-धारमाया तृष्णा अहं में लिप्त चिररहे काम मदमातअंखियन से कबहूँ देखा नालालसा के पारप्रीत, स्नेह, अपनत्व भूलअंसुवन दिए अपारनिज बोये, निज ही दुःख काटेपर दोष धरे संसारअजब पहेली अजब है खेला,ये जीवन मंझधारहिय में जैसे फाँस लगत हैअब र...
 
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