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Blog: रविकर-पुंज

Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
 तोल-मोल कर व्यर्थ ही, त्योरी रहे चढ़ाय |लेना है तो टका दो, इक तोला ही आय |इक तोला ही आय, अन्यथा नापो रस्ता |मँहगा आलू प्याज, रुपैया पल पल सस्ता |लो सब्जी दी तौल, जेब तो रखो खोलकर |झोले का क्या काम, नहीं अब तोल मोल कर ||... Read more
clicks 153 View   Vote 0 Like   5:29am 5 Sep 2013 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
(1)नाजुक अंगों को छुवे, करे वासना शान्त |बने कान्त एकांत में, होय क्वारपन क्लांत |होय क्वारपन क्लांत, बुद्धि से संत अपाहिज |बढे दरिन्दे घोर, हुआ अब भारत आजिज |बड़ी सजा की मांग, सुरक्षा से है तालुक |मात पिता जा जाग, परिस्थिति बेहद नाजुक |ओसारे में बुद्धि-बल, मढ़िया में छल-दम्भ-(1)... Read more
clicks 128 View   Vote 0 Like   1:17pm 3 Sep 2013 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
कैडर से डर डर करे, कैकेयी कै-दस्त |कैटभ कैकव-अपर्हति, कैसे मुद्रा-पस्त |कैसे मुद्रा-पस्त, नहीं घर में हैं दाने |कोंछे में वंचिका, चली जा रही भुनाने |आये नानी याद, चाल चल रही भयंकर |दे गरीब के नाम, करे खुश लेकिन कैडर || कैकव-अपर्हति=असली बात बहाने से छिपाना ... Read more
clicks 146 View   Vote 0 Like   4:59am 29 Aug 2013 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
ठेले बरबस खींचते, मन भर भर के प्याज | पिया बसे परदेश में, यहाँ छिछोरे आज |यहाँ छिछोरे आज, बड़ा सस्ता दे जाते |रविकर नाम उधार, तकाजा करने आते |आया है सन्देश, बड़े हो रहे झमेले |जल्दी रुपये भेज, खड़े घर-बाहर ठेले - ... Read more
clicks 140 View   Vote 0 Like   6:57am 27 Aug 2013 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
(१ ३ )काची काया मन अथिर ,थिर थिर काम करंत , ज्यों - ज्यों नर निधड़क ,फिरे त्यों त्यों काल हसंतVirendra Kumar Sharma ram ram bhaiकबिरा को ही मुँह-बिरा, चिढ़ा रहा धर्मांध |करता आडम्बर निरा, तन मन बेड़ी-बाँध |तन मन बेड़ी-बाँध, भटकता मन्दिर महजिद |जिद में है इन्सान, भूलता अम्मा वालिद |मन पर चाबुक मार, आ... Read more
clicks 117 View   Vote 0 Like   5:35am 26 Aug 2013 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
(समाचार पर आधारित)झूठे वायदे हैं मना, बीबी से तो ख़ास |तीस बरस से मुम्बई, पर जाता ना बॉस |पर जाता ना बॉस, आज-कल करता रहता |मैडम जाती कोर्ट, कोर्ट यूँ रविकर कहता |टिकट कटा ले आज, आदमी अरे अनूठे | कटे जेल का टिकट, करे जो वायदे झूठे ||... Read more
clicks 117 View   Vote 0 Like   10:16am 22 Aug 2013 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
बचती भैया बोलकर, चर्चित दिल्ली-केस |पर बचती नहिं बालिका,  बापू करते ऐश |बापू करते ऐश, प्रवन्चन इनका प्रवचन  |कर खुद का कल्याण, वासना रखता तन-मन |मरें किन्तु दाभोल, बात रविकर नहिं पचती |जीते ढोंगी साधु, जहाँ बच्ची नहिं बचती |प्रवन्चना = धोखा ... Read more
clicks 122 View   Vote 0 Like   4:59am 22 Aug 2013 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
गुर्राता डालर खड़ा, लड़ा ठोकता ताल |रुपिया डूबा ताल में, पाए कौन निकाल |पाए कौन निकाल, जहाँ दल-दल में नारा |मगरमच्छ सरकार, अनैतिक बहती धारा |घटते यहाँ गरीब, देखिये फिर भी तुर्रा |पानी में दे ठेल, भैंसिया फिर तू गुर्रा ||... Read more
clicks 115 View   Vote 0 Like   11:19am 21 Aug 2013 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
बच्चा बँटता इस तरह, ज्यों बच्चों का खेल |रीयल्टी शो पाक का, आतंकी भी फेल |आतंकी भी फेल, दुधमुहाँ नए ठिकाने |लगा ठिकाने बाप, गई माँ जिसे बहाने | घर घर बच्चा माँग, यहाँ नक्सल को गच्चा |वहाँ पाक में स्वाँग, खेल में बँटता बच्चा ||... Read more
clicks 122 View   Vote 0 Like   2:31pm 4 Aug 2013 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
'बेशर्म' पाकिस्तानः कैप्टन सौरभ कालियाकी शहादत ...पाकिस्तान का झूठ एक बार फिर दुनिया के सामने आ गया है. कारगिल जंग के दौरान शहीद हुए कैप्टन सौरभ कालियाके बारे में पाकिस्तान ये कहता रहा कि उनका शव गड्ढे में मिला था, लेकिन इंटरनेट पर तेजी से फैल रहे एक वीडियो से जाहिर हो ...... Read more
clicks 136 View   Vote 0 Like   8:27am 1 Aug 2013 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
लेकर कुलकर आयकर, करती क्या सरकार |लोकतंत्र सुकरात का, वोटों की दरकार |वोटों की दरकार, गरीबी वोट बैंक है |  विविध भाँति सत्कार, तंत्र में फर्स्ट-रैंक है |दे अनुदान तमाम, मुफ्त में राशन देकर |करते अपना नाम, रुपैया हमसे लेकर ||... Read more
clicks 161 View   Vote 0 Like   4:39am 27 Jul 2013 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
लोरी कैलोरी बिना, बाल वृद्ध संघर्ष |किन्तु गरीबी घट गई, जय हे भारतवर्ष |जय हे भारत वर्ष, जयतु जन गन अधिनायक |फिर भी शेष गरीब, बड़े काहिल नालायक |कमा सकें नहिं तीस, खाय अनुदान अघोरी |या नेता चालाक, लूटते गाकर लोरी  ||... Read more
clicks 156 View   Vote 0 Like   8:37am 26 Jul 2013 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
बो के भ्रष्टाचार जो, ले कालाधन काट |वो ही खाए आम कुल,  बेंच गुठलियाँ हाट | बेंच गुठलियाँ हाट, लाट फिर से बन जाता |जमा हुन्डियां ढेर, पुश्त फिर कई खिलाता |क्या कर लेगा शेर, इकट्ठा गीदड़ होके |लेते रस्ता घेर, विदेशी देशी *बोके |*मूर्ख तब हम भला गरीब, बोल कैसे हो सकते-  पावरटी ... Read more
clicks 122 View   Vote 0 Like   5:13am 25 Jul 2013 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
छोरा छलता छागिका, छद्म-रूप छलछंद | नाबालिग *नाभील रति, जुवेनियल पाबन्द |जुवेनियल पाबन्द, महीने चन्द बिता के |दुर्मर-दामिनि देह, दुधमुहाँ-दानव ताके-दीदी दादी बोल, भूज छाती पर होरा |पा कानूनी झोल, छलेगा पुन: छिछोरा ||*स्त्रियों के कमर के नीचे का भाग... Read more
clicks 153 View   Vote 0 Like   3:51am 24 Jul 2013 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
  घटना पर घटना घटे, घटे नहीं सन्ताप |थे तो लाख उपाय पर, बाँट रहे दो लाख |बाँट रहे दो लाख, नहीं बच्चे बच पाए |मुआवजा ऐलान, दुशासन साख बचाए |बच्चे छोड़ें जगत, छोड़ते वे नहिं पटना  |बके बड़ा षड्यंत्र,  विपक्षी करते घटना ||मन्त्रालय रख तीस ठो, नीति नियम नीतीश |धूल धूसरित हो रहे, खा क... Read more
clicks 113 View   Vote 0 Like   2:35pm 17 Jul 2013 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
लघु कथा : दर्द (गणेश जी बागी)सिसकारे बिन सह गया, सत्तर सकल निशान |उन घावों को था दिया, हमलावर अनजान |हमलावर अनजान, किन्तु यह घाव भयंकर |एक अकेला घाव, दिया अपनों ने मिलकर |प्राणान्तक यह घाव, खाय कर रविकर हारे |अन्तर दिखता साफ़, आज अन्तर सिसकारे ||... Read more
clicks 125 View   Vote 0 Like   10:23am 16 Jul 2013 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
पुत्रीरूपी रत्न की प्राप्तिअरुन शर्मा 'अनन्त'  दास्ताँने - दिल (ये दुनिया है दिलवालों की) मेरी मंगल कामना, चल अब उँगली थाम |कर्तव्यों का सामना, सीधा सा पैगाम |सीधा सा पैगाम, ख्याल रख माँ बेटी का |रहे स्वस्थ खुशहाल, सीख ले तुरत सलीका |अरुण-मनीषाशीश, मिलें खुशियाँ बहुतेर... Read more
clicks 169 View   Vote 0 Like   9:30am 11 Jul 2013 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
कुदरत रत रहती सतत, सिद्ध नियामक श्रेष्ठ ।किन्तु नियामत लूटता, प्राणिजगत का ज्येष्ठ। प्राणिजगत का ज्येष्ठ, निरंकुश ठेठ स्वार्थी । कर शोषण आखेट, भोगता मार पालथी ।बेजा  इस्तेमाल, माल का जब भी अखरत ।  देती मचा धमाल, बावली होकर कुदरत ॥माल=वन / क्षेत्र / धन-संपत्ति / सामग्... Read more
clicks 155 View   Vote 0 Like   5:09am 9 Jul 2013 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
 (1)रथ-वाहन हन हन बहे, बहे वेग से देह ।सड़क मार्ग अवरुद्ध कुल, बरसी घातक मेह ।बरसी घातक मेह, अवतरण गंगा फिर से ।कंकड़ मलबा संग, हिले नहिं शिव मंदिर से । करें नहीं विषपान, देखते मरता तीरथ । कैसे होंय प्रसन्न, सन्न हैं भक्त भगीरथ ॥ (2) रुष्ट-त्रिसोतात्रास दी, खोले नेत्र त्रिने... Read more
clicks 103 View   Vote 0 Like   9:59am 4 Jul 2013 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
बरसाती चेतावनी,  चूक चोचलेबाज |डूबे चारोधाम जब, चौकन्ना हो राज |चौकन्ना हो राज, बहाया तिनका तिनका |गिरा प्रजा पर गाज, नहीं कुछ बिगड़ा इनका |जल-समाधि जल-व्याधि, बहा मलबा आघाती |इधर इंद्र उत्पात , उधर इंद्रा का नाती ||होवे हृदयाघात यदि, नाड़ी में अवरोध ।पर नदियाँ बाँधी गईं, बिना य... Read more
clicks 162 View   Vote 0 Like   10:20am 1 Jul 2013 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
नमन नमस्ते नायकों, नम नयनों नितराम- (1)नमन नमस्ते नायकों, नम नयनों नितराम |क्रूर कुदरती हादसे, दे राहत निष्काम  |दे राहत निष्काम, बचाते आहत जनता |दिए बगैर बयान, हमारा रक्षक बनता |अमन चमन हित जान, निछावर हँसते हँसते |भूले ना एहसान, शहीदों नमन नमस्ते -  (2) उत्तरीय उतरे उमड़, उलथ उत... Read more
clicks 158 View   Vote 0 Like   3:32am 28 Jun 2013 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
जिभ्या के बकवाद से, भड़के सारे दाँत |मँहगाई के वार से, सूखे छोटी आँत || आँखे ताकें रोटियां, दंगा करते दाँत । जिभ्या पूछे जात तो, टूटे दायीं पाँत ||मतनी कोदौं खाय  के, माथा  घूमें जोर |बेहोशी में जो पड़े, दे उनको झकझोर ||हाथों के सन्ताप से, बिगड़ गए शुभ काम |मजदूरी पावे नहीं,  पड़े च... Read more
clicks 166 View   Vote 0 Like   6:10am 7 Jun 2013 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
दोहन हनन समान तब, जब मनमोहन मौन |हनवाना हरदिन करे, रोक सकेगा कौन |रोक सकेगा कौन, स्वयं कुदरत कुछ कर दे |करे स्वयं संतुलित, स्वयं कुछ ऐसा वर दे |सत्ता पाए शक्ति, सुधारे खुद के गोहन |रोके बन्दर बाँट, तभी रुक पाए दोहन ||... Read more
clicks 158 View   Vote 0 Like   4:37am 6 Jun 2013 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
 कमतर कमकस कमिश्नर, नर-नीरज पर दाग -कमतर कमकस कमिश्नर, नर-नीरज पर दाग । कफ़नखसोटी में लगा, लगा रहा फिर आग । लगा रहा फिर आग, कमीना बना कमेला । संभले नहीं कमान, लाज से करता खेला । गृहमंत्रालय ढीठ, राज्य की हालत बदतर । करे आंकड़े पेश,  बताये दिल्ली कमतर ॥ कमकस=कामचोर कमेला = कत्ल... Read more
clicks 112 View   Vote 0 Like   4:22am 23 Apr 2013 #रेप
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
दहले दिल्ली देश, दरिंदा दुष्ट दहाड़े - छद्म वेश धर दुष्टता, पाए क्योंकर ठौर ।  बोझिल है वातावरण , जहर बुझा नव-दौर ।   जहर बुझा नव-दौर, गौर से दुष्ट परखिये । भरे पड़े हैवान, सुरक्षित बच्चे रखिये । दादा दादी चेत, पुन: ले जिम्मा रविकर ।   विश्वासी आश्वस्त, लूटते छद्म वेश धर ॥ ... Read more
clicks 123 View   Vote 0 Like   4:21am 22 Apr 2013 #

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