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Blog: palash "पलाश"

Blogger: अपर्णा त्रिपाठी
 पूरा दिन चिलचिलाती धूप में काम करने के बाद, ऐसा कौन सा ऐसा मजूर होगा जो मजदूरी पा कर खुश ना होता हो। एक मजदूर सुबह से शाम तक हाड तोड मेहनत यही सोचते सोचते करता है कि जब दिन ढले वह आटा, नमक, तेल और चार पैसे हाथ में ले घर में जायगा, तभी तो उसकी घरवाली चूल्हा जलायेगी,  उसका और ... Read more
clicks 153 View   Vote 0 Like   6:06am 30 Jan 2021 #आदमी
Blogger: अपर्णा त्रिपाठी
 बॉलीवुडऔरहिंदीएकदूसरेकेपर्यायहैजबबॉलीवुडकीबातहोतीहैतोहमारेमनमेंएकऐसीतस्वीरउभरतीहैजिसनेसभीभाषाकेक्षेत्रोंवसीमाओंकोतोड़तेहुएहिंदीकोजनसुलभऔरलोकप्रियभाषाकेपदपरआरूढ़करनेमेंमहत्वपूर्णभूमिकानिभाई।भारतीयसिनेमाजगतकोपहलीसवाकफिल्मदेनेवाली 'आलमआर... Read more
clicks 180 View   Vote 0 Like   4:22am 6 Oct 2020 #सिनेमा
Blogger: अपर्णा त्रिपाठी
 माँ, भाभी, बहन को देखकरकुंवारेपन से ही देखने लगती हैस्वप्नजब वो भी करेगी व्रतअपने पति के लिये होते ही सुहागनकरने लगती है कामनासुहाग के अमर होने कीसहर्षसप्रेमबुनतीहैकवचदीर्घायुकासौभाग्यकासमृद्धिकाकभीपुत्र कभीपति कभीपरिवारकेलिएकरतीहैउपवासकभीबिनाअन्नक... Read more
clicks 177 View   Vote 0 Like   8:40am 3 Oct 2020 ##male
Blogger: अपर्णा त्रिपाठी
मै आज चुपचाप देख रही हूँ, अपनों को, अपनों की प्रतिक्रियाओं को। आज ना मेरे मोबाइल की घंटी नही बज रही है ना ही मेरी डोर बेल, हाँ सुबह से कोई सौ सवा सौ नोटीफिकेसन्स आ चुके हैं, मेरे फेसबुक, ट्वीटर, इन्स्टाग्राम पर भी लगातार कुछ मैसेजेस आ रहे हैं। मेरे आस पास दो चार मानव आकार के ... Read more
clicks 242 View   Vote 0 Like   9:40am 28 Sep 2020 #
Blogger: अपर्णा त्रिपाठी
 आज से पहले मैने ना इस दिवस के बारे में सुना था, ना ही पढा था, किंतु जब अखबार में इस दिवस के बारे में पढा तो कुछ सोचने पर मजबूर अवश्य हो गयी। कई सारी घटनाएं याद आने लगी, खास कर कई फिल्मी हस्तियों( दिव्या भारती, जिया खान, इंदर कुमार, कुशल पंजाबी जैसे कई नाम इसमें शामिल हैं) का ... Read more
clicks 377 View   Vote 0 Like   12:16pm 12 Sep 2020 ##जीवन
Blogger: अपर्णा त्रिपाठी
 आज से पहले मैने ना इस दिवस के बारे में सुना था, ना ही पढा था, किंतु जब अखबार में इस दिवस के बारे में पढा तो कुछ सोचने पर मजबूर अवश्य हो गयी। कई सारी घटनाएं याद आने लगी, खास कर कई फिल्मी हस्तियों( दिव्या भारती, जिया खान, इंदर कुमार, कुशल पंजाबी जैसे कई नाम इसमें शामिल हैं) का ... Read more
clicks 175 View   Vote 0 Like   12:16pm 12 Sep 2020 ##जीवन
Blogger: अपर्णा त्रिपाठी
प्यार के गीत गाते रहोहर हाल मुस्कुराते रहो ॥जीत हार से होकर परे ।जश्न ए खुशी मनाते रहो ॥छोड़ परेशानी जमाने की ।तराने नये गुनगुनाते रहो ॥गिरा दीवारें जात पात की ।गिरों को गले से लगाते रहो ॥बढ़ता चल,चलना ही जिंदगी ।ठहरों को बात ये बताते रहो ॥चमकना तन ही काफी नहीं ।मैले म... Read more
clicks 255 View   Vote 0 Like   5:32am 26 Aug 2020 ##Relation
Blogger: अपर्णा त्रिपाठी
आखिर क्या है सम्बंध सगे- सम्बंधी मेंया बिना संबंध के हीरहते हैं एक साथजैसे रहते हैं कई बार लोगया दोनों है एक दूसरे के पूरकक्या इस युग्म में समाहित हैंवो संबंध भी जिनके मध्यनहीं है कोई संबंध, संबंध होकर भीक्या ये मिलकर बनाते हैं परिधिजिसमें समा सकते हैंसारे रिश्तेइक... Read more
clicks 216 View   Vote 0 Like   6:03pm 24 Aug 2020 #people
Blogger: अपर्णा त्रिपाठी
मिल जाता हैजन्म के साथ हीबहुत कुछ By Defaultलडकी के हिस्से आती हैसहनशीलता, ममता, त्याग और घर की इज्जत लडके को मिल जाती हैघर जायजाद की चाभीकुछ भी करने की आजादीBy Defaultसमय के साथ, पलते बढते है दोनोऔर इस बढते बचपन सेकुछ और मिलता है By Defaultअब तुम बडी हो रही हो,अब तुम बच्ची नहीं रहीये लड... Read more
clicks 201 View   Vote 0 Like   10:00am 24 Aug 2020 #समाज
Blogger: अपर्णा त्रिपाठी
 समझ नहीं आता हम किधर देखें|तड़पता जिगर या तेरी नज़र देखें||मिलन रुखसती तो दस्तूर जग का|मुड़ मुड़ कर क्यों सूनी डगर देखें||धूप छांव दोनों ही हैं मुदर्रिस मेरे|कैसे न फिर हम डूबी सहर देखें||खो जायें मदहोश&... Read more
clicks 306 View   Vote 0 Like   4:15am 20 Aug 2020 ##duniyadari
Blogger: अपर्णा त्रिपाठी
सुबह के काम लिपटाकर नाश्ता लेकर बैठी थी, एक हाथ में चाय का कप और दूसरे में टीवी. का रिमोट था, टीवी ऑन करने ही जा रही थी कि तभी किसी की आवाज सुनाई दी, डोरबेल की आवाज नही थी, फिर भी लगा शायद सूरज वापस आ गया हो, डाइनिंग टेबल से मेन गेट की तरफ उठी ही थी, कि फिर आवाज आई- अरे आप कही जाओ न... Read more
clicks 288 View   Vote 0 Like   10:56am 15 Jul 2020 ##equality
Blogger: अपर्णा त्रिपाठी
सुबह के काम निपटाकर नाश्ता लेकर बैठी थी, एक हाथ में चाय का कप और दूसरे में टीवी. का रिमोट था, टीवी ऑन करने ही जा रही थी कि तभी किसी की आवाज सुनाई दी, डोरबेल की आवाज नही थी, फिर भी लगा शायद सूरज वापस आ गया हो, डाइनिंग टेबल से मेन गेट की तरफ उठी ही थी, कि फिर आवाज आई- अरे आप कही जाओ न... Read more
clicks 163 View   Vote 0 Like   10:56am 15 Jul 2020 ##equality
Blogger: अपर्णा त्रिपाठी
आर. एस. बग्गा जी का नाम शायरी एवं गजल के क्षेत्र में आज किसी परिचय का मोहताज नही, और मेरी कलम में इतनी ताकत भी नही कि उनके बारे में लिख सकूं। उनके महान व्यक्तित्व को कलमबद्ध करने कें लिये मेरी ये अल्पमति पर्याप्त नही। फिर भी साहस करके कुछ शब्दों के माध्यम से आप के लिये दो श... Read more
clicks 170 View   Vote 0 Like   11:44am 8 Jul 2020 #R.S. Bagga
Blogger: अपर्णा त्रिपाठी
चांद की तरह वो अक्सर, बदल जाते हैं।मतलब अली काम होते निकल जाते हैं॥स्वाद रिश्तों का कडवा, कहीं हो जाय नाछोटे मोटे से कंकड, यूं ही निगल जाते हैशौक तिललियों का हमने पाला ही नहींबस दुआ सलाम करके निकल जाते हैंहौसले की पतवार हों, हाथों में जिनके।तूफानों में भी वो लोग, संभल जा... Read more
clicks 187 View   Vote 0 Like   7:03am 7 Jul 2020 ##life
Blogger: अपर्णा त्रिपाठी
कह दो जो मन में तेरे, नदियों को बह जाने दोमत रोक उसे जो जाता है, जो आता है आने दोदो चार दिनों का मेला है, रुकना है निकलना हैतोडो रस्मों की जंजीरे, उजले कल को आने दोक्या कहा, क्यूं कहा, इस हिसाब में क्या रखाबातें भूलों राहें जोडो, वापसी के चंद बहाने दोखुशी और गम दोनों में, ये मे... Read more
clicks 259 View   Vote 0 Like   11:08am 25 Jun 2020 ##life
Blogger: अपर्णा त्रिपाठी
रिया और समीर मूवी देखकर लौट रहे थे, कि अचानक रिया की नजर सडक से लगी हुई एक नर्सरी पर पडी। उसे और समीर दोनो को ही पेडों का बहुत शौक था, मगर अभी तक वो एक छोटे से फ्लैट में रहते थे, जिससे पेड पौधे लगाने का अरमान बस सोच ही बन कर रह गया था। उसने समीर से कहा- सुनो, देखो कितने सुन्दर पे... Read more
clicks 188 View   Vote 0 Like   11:06am 20 Jun 2020 ##बागबान
Blogger: अपर्णा त्रिपाठी
पहन लेती वो खामोशी, जब नाशाद होती है।तहजीबें हार जातीं, जब हया बर्बाद होती है॥देखे इन आंखों ने, सरहदों जमीं के बटवारें।हर खबरो बवालों की, इक मियाद होती है॥चढा कितनीं ही चादर, बांध मन्नत के धागे।कहाँ कबूल हर छोटी बडी, फरियाद होती है॥घडी दो घडी भर के, ये मातम, ये मलालें।उमर... Read more
clicks 171 View   Vote 0 Like   7:07am 20 Jun 2020 ##society
Blogger: अपर्णा त्रिपाठी
बेटा, एक बात कहनी थी, जरा इधर तो आओ- मिस्टर माथुर की आवाज में लडखडाहट थी। पापा आपको भी हमेशा मेरे ऑफिस जाते समय ही सारी बातें याद आती हैं, शाम को आता हूँ, तब सुन लूंगा आपकी बातें। विनीता जल्दी करो यार, तुमको पापा के घर छोडता हुआ ऑफिस -चला जाऊंगा। पीछे वाले कमरे से आवाज आई- बस प... Read more
clicks 186 View   Vote 0 Like   7:17am 19 Jun 2020 ##old parents
Blogger: अपर्णा त्रिपाठी
दिन इक और जिया या गुजरा, मालूम नहीखुद से खुश हूं या खफा खफा, मालूम नहीसांसे घडी घडी देतीं, गवाही जिन्दगी कीकितना जिंदा हूँ कितना मरा, मालूम नहीखरीदी फकीर सेकुछदुआएं,हमने भीहुआ सौदे में घाटायानफा,मालूमनहीं छोड पायल उसने, पैरों में घुंघरू पहनेमहज शौक है या इक़्तिज़ा, मा... Read more
clicks 187 View   Vote 0 Like   9:44am 15 Jun 2020 ##life
Blogger: अपर्णा त्रिपाठी
कर यकीं बन्द मुट्ठी की ताकत परसहारा औरों का करना छोड़ भी देखुश रखना खुद को तेरी जिम्मेदारीये रोना धोना सिसकना छोड़ भी देचांद का झूला महज किताबी कहानीजज़्बातों में बहके रहना छोड़ भी देहोते नहीं ख्वाब ख्यालों से मुकम्मललकीरें ताबीजें आजमाना छोड़ भी देबेमतलब के रिश्त... Read more
clicks 182 View   Vote 0 Like   11:51am 13 Jun 2020 ##life
Blogger: अपर्णा त्रिपाठी
कुछ अच्छे के लिये कुछ छोडना ही पडता है ... Read more
clicks 199 View   Vote 0 Like   10:26am 12 Jun 2020 #Poem
Blogger: अपर्णा त्रिपाठी
इन्तजार में महबूब, जरा पलकें तो बिछायें वक्त पर पहुचना, हमेशा अच्छा नही लगता... Read more
clicks 277 View   Vote 0 Like   3:26pm 10 Jun 2020 #Poem
Blogger: अपर्णा त्रिपाठी
किनारा कर लिया तुमने, तो जाओ छोड़ देते हैंन हमको याद अब करना, तेरा दर छोड़ देते हैं।तुम्हारी सांस में घुलकर, मिली थी जिंदगी हमकोतुम्हारे साथ लो अब ये, जहां भी छोड़ देते हैंकिनारा ....तुम्हारे साथ में बीते, हुए पल अब सताते हैंसफ़र मुमकिन नहीं आगे,ये राहें छोड़ देत... Read more
clicks 245 View   Vote 0 Like   6:31pm 29 May 2020 #
Blogger: अपर्णा त्रिपाठी
dreams never ends but it needs celebration whenever it comes true.... Read more
clicks 205 View   Vote 0 Like   7:26am 26 May 2020 #Poem
Blogger: अपर्णा त्रिपाठी
इश्क़ की राह के, हमसफ़र हम भी हुयेतुम बने जो आसमान, चांद हम भी हुयेमुकम्मल हुए ख्वाब सारे, बाद एक मुद्दत के रौशनीं में तेरी आज, आफताब हम भी हुयेचुभते रहे न जानिए, कितनों की निगाह मेंआपने जो थामा हाथ , गुलाब हम भी हुयेगुज़र रहे थे आम से, रात दिन बेज़ार सेहुई निगाह तुमसे चार... Read more
clicks 127 View   Vote 0 Like   7:11pm 25 May 2020 #

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