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Blog: कविता

Blogger: अनामिका
सौ साल पहले भी मैंने तुम पर कविता रचा थासौ साल बाद आज तुम पढ़ने आई IIआँखों की भाषा जो मैंने उस समय पढ़ लिया थासौ साल बाद आज तुम कहने आई IIजिन आँखों को आंसुओं से  धोया था हमनेउस वक़्त को इशारों से रोका था जो हमनेधूप छाँव सी ज़िन्दगी में अब बचा ही क्या है ?सौ साल बाद आज तुम रंग भरने ... Read more
clicks 186 View   Vote 0 Like   4:42pm 11 Apr 2015 #
Blogger: अनामिका
           लम्हा जब लकीरों में बंटा तो उस पार मैं खड़ा था इस पार   तुम थी-शायद मैं इस इंतज़ार में था कि ये दाग मिट जाए पर हो न सका !!शायद तुम इस फ़िराक में थी कि  ये दाग पट जाए तो लांघने की नौबत न आये पर लम्हों को इन हरकतों का इल्म पहले से था शायद दाग गहराते च... Read more
clicks 190 View   Vote 0 Like   4:09pm 28 Mar 2015 #
Blogger: अनामिका
वो शख्स नहीँ मिलाजो आईना सा मुझे अक्स दिखाएआंखोँ के कोरो में छुपी लालिमा मेदिल का छुपा जख्म दिखायेवो खुद्दारी ही थीजो तेरी यादों से हमेशा जूझता रहाअपने घर के दरो दीवार मेँ हींअपने साये को टटोलता रहावो मैं ही थाजो वफा पे वफा किए जा रहा थाबिना कसूर के  बरसों से ये दिलज... Read more
clicks 161 View   Vote 0 Like   3:03pm 16 Mar 2015 #
Blogger: अनामिका
रेत  से घर नहीं बनता पानी में ख्वाव नहीं बहते मन के अन्तर्निहित गहराई किसी पैमाने से नहीं नपते नए कोपलों में दिखता है पौधों की हरियाली की चाहत फूलों से भरी है गुलशन पर कलिओं को खिलने से नहीं राहत देह के नियम है अजीब थकता नहीं है सांस लेने में नींद म... Read more
clicks 190 View   Vote 0 Like   4:32pm 5 Oct 2014 #
Blogger: अनामिका
सांस जब तक चल रही है तुम भी  ज़िंदा हो पथिकतुम अकेले ही नहीं हो -चॉंद  तारे भी सहितपाँव के नीचे जो धरती है वो राह दिखलायेमोह माया त्याग दे कहीं ये न तुझे भरमायेदंश भूखे पेट की तुझको समझना है अभीबेघरों का आशियाना तुझको बनना है अभीशून्य में ही भ्रमण करना नही... Read more
clicks 199 View   Vote 0 Like   2:15pm 27 Jun 2014 #
Blogger: अनामिका
झरनों सा गीत गाता ये मन सरिता की कलकल मधुगान सृष्टि है.... अनादि-अनंत भावनाओं से भरा है ये प्राण वरदान है कण-कण में छुपा दुःख-वेदना से जग है भरा पर स्वर्ण जीवन से भरा है नदी-सागर और ये धरा गूंजता स्वर नील-नभ में मोरनी … नाचे वन  में गा  रहा है गीत ये म... Read more
clicks 171 View   Vote 0 Like   3:45pm 13 Jun 2014 #
Blogger: अनामिका
जिस्मों से परे दो रूहों को-मिलाता है इश्क़ जीते है साथ और जीने की ख़ुशी -दिलाता है इश्क़ प्रेम दरिया में डूबकर भी प्यासा रह जाता है इश्क़ समंदर सी गहराई औ नदी सा-मीठा पानी है इश्क़ बादल गरजे तो बूँद बन जिस्म भिगोती है इश्क़ प्रेम-ज्वार परवान तो चढ़े पर भाटा न आने ... Read more
clicks 172 View   Vote 0 Like   2:14pm 6 Jun 2014 #प्रेम
Blogger: अनामिका
पत्तों के हिलने मे तेरे आने की आहट सुनूँ तुम मेरे शहर मे आये तुमसे मिलने का ख्वाब बुनूं ||शाम ढलने लगी  चिरागों से बात करने लगी तुम्हारे आने की इंतज़ार मे लम्हा-लम्हा पिघलती रही  ||वफ़ा-ए -इश्क़ की कौन सी तस्वीर है ये तेरे पाँव के निशाँ  मे ही अपना वज़ूद ढूंढ़ती ... Read more
clicks 151 View   Vote 0 Like   11:04am 27 Apr 2014 #कविता
Blogger: अनामिका
 ये लोकतंत्र है  या वोटतन्त्र !!है त्रस्त  जनता और भ्रष्ट मंत्री नहीं देश प्रेम है  गुंडों का राज जनता के हाथ  कब आये राज II प्रशासन है यूं… मौन क्यों हत्याएं और लूटपाट यूं क्यों हो रहे यूं सरे आम अधीन मंत्री हो ,राजा अवाम II शायद फिर हो सुशासन  की आस... Read more
clicks 218 View   Vote 0 Like   12:35pm 10 Apr 2014 #
Blogger: अनामिका
 ये लोकतंत्र है  या वोटतन्त्र !!है त्रस्त  जनता और भ्रष्ट मंत्री नहीं देश प्रेम है  गुंडों का राज जनता के हाथ  कब आये राज II प्रशासन है यूं… मौन क्यों हत्याएं और लूटपाट यूं क्यों हो रहे यूं सरे आम अधीन मंत्री हो ,राजा अवाम II शायद फिर हो सुशासन  की आस... Read more
clicks 173 View   Vote 0 Like   12:35pm 10 Apr 2014 #
Blogger: अनामिका
तुम अनन्या तुम लावण्यातुम नारी सुलभ लज्जा से आभरणातुम सहधर्मिनी तुम अर्पितातुम पूर्ण नारीश्वर गर्विताउत्तरदायित्वों की तुम निर्वाहिनीतुम ही पुरुष की चिरसंगिनीतुम सौन्दर्य बोध से परिपूर्णातुम से ही धरित्री आभरणातुम ही स्वप्न की कोमल कामिनीतुमसे सजी है दिवा औ'य... Read more
clicks 216 View   Vote 0 Like   8:15am 8 Apr 2014 #कविता
Blogger: अनामिका
आसमान का रंग हो आज चाहे  फीका आज बारिश भी न कर पाये तन को गीला फूल चाहे आज खिले अधखिले से पर आज तुम मिले आज ही वसंत !! चाहे मैं बस न पाऊँ तुम्हारी यादों में मेरा पूर्ण प्रेम न मिले इतिहासों में मेरा तुम्हारा प्रणय है समय से परे नयन भर देखा तुम्हे आज ही आ... Read more
clicks 167 View   Vote 0 Like   4:15pm 4 Apr 2014 #
Blogger: अनामिका
पाखी उड़ जा रे बहती हवा में महकी फ़िज़ा में, कल-कल बहती सरित-झरनों में, शीत का अंत है ये !!!पीले हरे फूलों के रंग- पलाश-ढाक के पत्तों के संग,भ्रमर गुंजायमान,वसंत के ढंग,फागुन का रंग है ये !!!!प्रेम-प्लावित ह्रदय अनुराग; आह्लादित मन  गाये विहाग; ऋतुराज ने छेड़ा वसं... Read more
clicks 292 View   Vote 0 Like   3:46pm 30 Mar 2014 #कविता
Blogger: अनामिका
अकेला ये मन सोचे हरदमसुख-दुख का झमेला जीवनमारे दंश फिर भी सहे जायेयह ही हृदय का दमखम ।।नहीं कोई मरहम समय अति निर्ममखारे आँसू भी न करे दर्द कम मन बहलाने को जीते है हमदेख कर ये धरा-प्रकृति का संगम ।।आह! मुख से न निकले है कभीमनुष्य है...ऐसे ही जीते है सभीदुःख-सुख है पहिया जी... Read more
clicks 213 View   Vote 0 Like   5:57pm 22 Mar 2014 #जीवन
Blogger: अनामिका
स्याही सी है ज़िन्दगीलिखती मिटाती उकेरतीकुछ भी ये कह जातीकागज़ों पर बसती ज़िन्दगीरंगीन सपनों को कहतीसुख-दिख में है उलझातीपाती या फिर हो फ़सानासुलझाती है ये ज़िन्दगीसादा कागज़ सा ये मनउस पर यर रंगीन आखरजाने क्यों नहीं छिपता हैबयाँ हो जाती ज़िंदगीअफ़साने कितने अधूरेअनसुने... Read more
clicks 203 View   Vote 0 Like   4:00pm 12 Mar 2014 #
Blogger: अनामिका
ईश्वरीय प्रेम। …।जग में है सब अपनेमुक्ताकाश , पंछी , सपनेसुगन्धित धरती ,निर्झर झरनेआह्लादित तन मनप्रेमदान का स्वर्गीय आनंद।।प्रकृति चित्रण। ………धरा,सरिता,औ' नील गगनप्रस्फुटित पुष्प,वसंत आवागमन,दारुण ग्रीष्म,शीत,और हेमंतखग कलरव - गुंजायमान दिक्-दिगंत,प्रकृति से प... Read more
clicks 171 View   Vote 0 Like   4:24am 27 Feb 2014 #कविता
Blogger: अनामिका
मन कोयला बन जल राख  हुई धूआं उठा जब इस दिल  से  तेरा ही नाम लिखा फिर भी               हवा ने , बड़े जतन से         तेरी याद मन के कोने से         रह-रह कर दिल को भर जाए         जिन आँखों में बसते थे तुम               उन आँखों को रुला जाए जान... Read more
clicks 187 View   Vote 0 Like   3:01pm 20 Dec 2013 #तन्हाई
Blogger: अनामिका
 100478 इस blog का  Total pageview  एक लाख के ऊपर पहुंच गया है।   इस    ब्लॉग के सभी पाठकों को अजस्र  धन्यवाद। आशा है आगे भी आप सब का आशीर्वाद यूं ही प्राप्त करती रहूँगी। मेरे पुराने पोस्ट से  एक रचना पेश है।  (1) चाँद खिला पर रौशनी नही आयी रात बीती पर दिन न चढ़ा अर्श से फर्श तक ... Read more
clicks 306 View   Vote 0 Like   10:58am 24 Nov 2013 #
Blogger: अनामिका
एक मुट्ठी धूप पसरा है छत परसोचती हूँ बादल का कोइ टुकड़ा ;गर ढक ले इस सुनहरे धूप को,तो क्या आँच आएगी इस आँच को !!आभास हुआ ......बादल तो नटखट हैउड़ जाएगा हवा के साथअटखेलियां  करता हुआपर धूप से बादल की मित्रता तो क्षणिक है,,वायु  और घन का साथ प्रामाणिक है ;अस्तित्व धूप का निर्वि... Read more
clicks 222 View   Vote 0 Like   3:03pm 15 Nov 2013 #प्रकृति
Blogger: अनामिका
painting by sh raja ravi vermaचुप हूँ मैं.…पर उदास नहीं सपने ओझल हुए पर बुझे नहीं है  अनोखी सी ये ज़िन्दगी और ये गुज़रते वक़्त का साथ  ॥ दिन-दोपहर-रात..... एक सा !आँखों में फैला एक धूआं सा ,छांव की तलाश में है आँखें उनींदी ,जाने कोई पकड़ ले वक़्त का हाथ    !!शहद सी मीठी जीवन की आस ,पर ... Read more
clicks 149 View   Vote 0 Like   3:26pm 9 Nov 2013 #
Blogger: अनामिका
बादलों की गर्जना मेंनीर भी है पीर भीकौन से वो आंसू है वो !खार भी है सार भी।। वेदना के अश्रु है याशबनमी बूंदों का खेलया धरा पर उतरती हैझर झर झरनों का बेल ॥  गात,पात,घाट,बाट प्लावित तन छलछलात विरही हृदय छटपटाये प्रणय सुर स्मरण आये ॥ सप्तरंग रंग बिखेरे सावन सं... Read more
clicks 159 View   Vote 0 Like   3:00pm 5 Sep 2013 #
Blogger: अनामिका
अकेले चले थे , तन्हां सफ़र थामुसाफिर मिले जो... राहें जुदा थी लम्बी सी सड़कें और दिन पिघले-पिघले तन्हाई के जाने ये आलम कौन सी ?पेड़ों के  कतारों की बीच की पगडण्डी कब से न जाने खड़ी है अकेली सुनसान राहें... न क़दमों की आहट इंतजार है उसको भी न जाने किसकी !!बस सूखे पत... Read more
clicks 174 View   Vote 0 Like   5:19pm 12 Aug 2013 #
Blogger: अनामिका
अकेले चले थे , तन्हां सफ़र थामुसाफिर मिले जो... राहें जुदा थी लम्बी सी सड़कें और दिन पिघले-पिघले तन्हाई के जाने ये आलम कौन सी ?पेड़ों के  कतारों की बीच की पगडण्डी कब से न जाने खड़ी है अकेली सुनसान राहें... न क़दमों की आहट इंतजार है उसको भी न जाने किसकी !!बस सूखे पत... Read more
clicks 174 View   Vote 0 Like   5:19pm 12 Aug 2013 #
Blogger: अनामिका
मधुर तेरा अंदाज़ मनहर सुर और नटवर साज़ भागे क्यों मन सुन आवाज़ सुरताल का तू सरताज मनभाया तेरा अंदाज़  !!मधुर तेरी मुस्कान विरहा ये मन पाए सुकून सुन मधुर बंसी की धुन किस बगिया से लाया चुन मन भागे पीछे पुन-पुन  !!मधुर तेरी माया बारिश की बूँदें रिमझिम इ... Read more
clicks 130 View   Vote 0 Like   3:42am 1 Aug 2013 #कविता
Blogger: अनामिका
बादलों की गर्जना से      घटाएं उमड़-घुमड़ गयी,चमन से सेहरे बने      धरा को देखती रही  !! फुहार जब कहर बना      जीवन लीलता गया ,चंद पलों में हज़ार साँसें      सिसकियों में बदल गया  !! कहर बन बरस मेघ      लाशें निगलता रहा ,नियति का खेल कैसा!    ... Read more
clicks 174 View   Vote 0 Like   3:27pm 24 Jul 2013 #कविता

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