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Blog: अमृतरस

Blogger: डॉ. नूतन डिमरी गैरोला- नीति
यह मामला दिल्ली का ही नहीं, यह मामला सम्पूर्ण देश का है| ………यह मामला महज आदिवासी, शहरी, ग्रामीण, शिक्षित अशिक्षित, गरीब या पैसे वाली नारी या किसी धर्म और जातिवर्ग का नहीं, यह मामला संपूर्ण नारी जाति का है | ………… ……………. यह मामला सिर्फ नारी से ही नहीं जुड़ा है यह हर पुरुष से जुड... Read more
clicks 183 View   Vote 0 Like   8:58am 26 Dec 2012 #
Blogger: डॉ. नूतन डिमरी गैरोला- नीति
    एक लंबा पथ लक्ष्य की ओर अग्रसर अभिशरण, उन्मार्ग करती भ्रमित रास्ते की बाधाएं.......   बदबू , दुर्गन्ध, बास पर तुम हो कि चुन चुन लाते हो,सुगंध धुंआ होती अगरबत्ती सेऔर मैं चन्दन हो जाती हूँ सुवासित |   कंकड़, प्रस्तर, अँधेरे और तुम रश्मिपुंजों को थाम समावेशित हो जाते हो मेरे भी... Read more
clicks 74 View   Vote 0 Like   4:00am 16 Dec 2012 #
Blogger: डॉ. नूतन डिमरी गैरोला- नीति
                          सुबह पर्दों पर दस्तक सी देती हुई कमरे में उतर कर बिखर जाती है ..  सुबह अक्सर जब आती है तो चिंताएं छोटी पड़ जाती .. सुबह के हाथों में या तो करामाती  छड़ी होती जिसके शीर्ष पर चमकता वह जादूई सूरज अपनी रौशनी से दुःख के अंधेरों कों हल्का कर देता ... या कि सुबह अपन... Read more
clicks 86 View   Vote 0 Like   3:59am 30 Oct 2012 #
Blogger: डॉ. नूतन डिमरी गैरोला- नीति
         तुम्हें याद है क्या कि तुम किसी अनजान की कविता सुना रहे थे उस रात …..शायद तुमको तो  मालूम था तब कि कविता किसकी थी …... मैं तो  बस सुन रही थी …...सुनना मेरा काम था और सुनाना तुम्हारा  ….. तुम  तो कविता में खोये थे और मैं? .. . मैं  तुम  में ..तुम  बोले जा रहे थे --कुछ विकल जगारों की ... Read more
clicks 90 View   Vote 0 Like   5:53pm 15 Oct 2012 #
Blogger: डॉ. नूतन डिमरी गैरोला- नीति
                    एक बेडी तोड़ने का प्रयास .. बेहद कस दिया था जिसने जीवन .. बैल की नाक नकेल ..कोल्हू में फिर फिर पेरा गया बैल .. पिंजरे का दरवाजा .. बंद हुआ था ... एक बंद कमरा ... नक्कारखाने में आवाजों का घन सर पर चलता रहा .. तूती प्रताड़ित भयभीत और भी सिमटती रही .. अपने होने की हर जिम्मेदा... Read more
clicks 80 View   Vote 0 Like   6:15am 12 Oct 2012 #
Blogger: डॉ. नूतन डिमरी गैरोला- नीति
           इम्तिहान, इम्तिहान, इम्तिहान,.. न जाने जिंदगी कितने इम्तिहान लेगी, हर बार एक नया चौराहा, हर बार खो जाने का भय , मंजिल किस डगर होगी कुछ भी तो उसे खबर नहीं ,……. ……..मंथन मंथन मंथन जाने कितना ही आत्ममंथन, हर बार पहुंची उसी जगह ज्यूँ शून्य की परिधि पर चलती हुई …………..चढ़ते, चढ... Read more
clicks 83 View   Vote 0 Like   5:43pm 4 Oct 2012 #
Blogger: डॉ. नूतन डिमरी गैरोला- नीति
  ये संस्मरण,राष्ट्र में एक भाषा की अनिवार्यता पर लिखें हैं - जिसके बिना हम अपने ही देश में परदेसी हो जाते हैं| हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा है, यह देश के हर नागरिक की भाषा होनी चाहिए| कम से कम देश के नागरिकों कों हिंदी की जानकारी तो होनी ही चाहिए| हिंदी का  साहित्यिक स्तर पर कि... Read more
clicks 83 View   Vote 0 Like   2:11am 14 Sep 2012 #
Blogger: डॉ. नूतन डिमरी गैरोला- नीति
      मेरी हदों को पार कर मत आना तुम यहाँ मुझमे छिपे हैं शूल और विषदंश भी जहाँ |फूल है तो खुश्बू मिलेगी तोड़ने के ख्वाब न रखना| सीमा का गर उलंघन होगा कांटो की चुभन मिलेगी …सुनिश्चित है मेरी हद मैं नहीं मकरंद मीठा शहद .. हलाहल हूँ मेरा पान न करना |याद रखना मर्यादाओं का उलंघन न क... Read more
clicks 273 View   Vote 0 Like   5:28pm 30 Aug 2012 #
Blogger: डॉ. नूतन डिमरी गैरोला- नीति
                                                                                       वह आदमी ..एक छोटा बच्चा सा .. पहली बार मेरी पलकों का खुलना हुआ .. मैंने पाया अपलक निहारता मुझ पर झुका हुआ   .. बचपन का साथी रहा वह मेरा अब मेरे संग अधेड़ हुआ जा रहा था   .. कई कारवाँ जुड़े और टूटे पर उसका जुड़ाव कभी न टूट... Read more
clicks 71 View   Vote 0 Like   6:48am 3 Aug 2012 #
Blogger: डॉ. नूतन डिमरी गैरोला- नीति
  एक हल्की छुवन जैसे किसी ने मयूरपंख से छु कर प्रेम के अनजान सुप्त समुन्दर में लहरों को जगा दिया हो …..अनुभूतियां तरंगित हुवी लाज से वह सिमट गयी …माथे पे बूंदें शबनम सी घबरा के निखर गयी …गालों पे सुर्ख गुलाब शरमा के उभर आये ..चितचोर की झलक पे पलकें झुकी जब उठ न पाए …कहने को ... Read more
clicks 65 View   Vote 0 Like   3:18am 1 Aug 2012 #My Clicks My Photos
Blogger: डॉ. नूतन डिमरी गैरोला- नीति
   आज सुबह ७:१५ से ७:४५ (17/8/2012 )तक मैंने सैर की -- और अपने साथियों की तस्वीर खींच ली |आज चंद लम्हों में समेटा दुनियाँ जहां का प्यार मेरी बगिया की गिलहरी चिड़िया चीं चीं चहकती मुझसे बेपरवाह रहती मेरे इर्दगिर्द टहलती |और दीवार पर   मेरे समान्तर घूमते रहतेएक परिवार के नेवले आवाज ल... Read more
clicks 143 View   Vote 0 Like   8:09pm 17 Jul 2012 #
Blogger: डॉ. नूतन डिमरी गैरोला- नीति
               सतह पर पानी के   छमछम का शोर कर   थिरकती बूंद  अपनी थाप से   पानी के गीत गाती है जब|  छिछला पानी  आह्लादित हो कर   मोती सा हो जाता है तब|भूल कर अपनी हदों को छोड़ देता है सतह को बुलबुला हो जाता है तबअपने होने के अहसास मेंफूलता है और फूल कर फूट जाता है क्षणभर में तब|जबकि ... Read more
clicks 83 View   Vote 0 Like   4:17pm 4 Jul 2012 #
Blogger: डॉ. नूतन डिमरी गैरोला- नीति
काफी समय से मेरे डेशबोर्ड में कोई पोस्ट नहीं दिख रही है … पहले पहल तो मैंने सोचा कि यह समस्या खुद से ठीक हो जायेगी ..पर अब काफी लंबा समय हो गया है…. ऐसा क्यों हुवा … मैं ही एक हूँ या और भी ऐसी समस्या से झूझ रहे है…इसका समाधान क्या हो…. कृपया मार्गदर्शन करें |नूतन ... Read more
clicks 88 View   Vote 0 Like   6:15pm 30 May 2012 #
Blogger: डॉ. नूतन डिमरी गैरोला- नीति
              देखो न …..अभी मुझमे साँसों का आना जाना चल रहा है……जिंदगी के जैसे अभी कुछ लम्हें बचे हुवे है ….. आस का पंछी अभी तक पिंजरे में ठहरा  है …. सुबह पर अब सांझ का पहरा है …. और सांझ की इस बेला पर याद आने लगीं  है ..वो धुंधली परछाइयाँ  ....जब हम संग संग रोये थे…. और इक दूजे के पौंछ ... Read more
clicks 97 View   Vote 0 Like   2:53pm 26 May 2012 #
Blogger: डॉ. नूतन डिमरी गैरोला- नीति
              मेरी माँ जैसे पहाड               जो कल भी था               आज भी है               और सदा रहेगा |              और मैं पहाड की कन्या ||…. नूतन                                                                 जिंदगी में बेहद कडुवे घूंट के साथ जीना, बस एक चलती हुवी लाश बन कर अपनी ही जिंदगी को ढोना बस ऐ... Read more
clicks 112 View   Vote 0 Like   4:43pm 13 May 2012 #
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    सुंदरता के स्निग्ध गालों के पीछे, रेशमी बालों के नीचे ,मदभरी आँखों की हसीन झिलमिलाहट के अंदर…. दिल की जमीन पर -खाई खंदक और कितनी ही गहरी दरारें | दरारों की भीतरटीसते रिसते  बहते  हैं आंसू,पर टपकते नहीं जो आँखों से |कहीं पवित्रता की स्मिता का सबब या कहीं मंडी में बिकती द... Read more
clicks 70 View   Vote 0 Like   1:28pm 30 Apr 2012 #
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     सुंदरता के स्निग्ध गालों के पीछे, रेशमी बालों के नीचे ,मदभरी आँखों की हसीन झिलमिलाहट के अंदर….  दिल की जमीन पर -खाई खंदक और कितनी ही गहरी दरारें | दरारों की भीतरटीसते रिसते  बहते  हैं आंसू,पर टपकते नहीं है आँखों से | कहीं पवित्रता की स्मिता का सबब या कहीं मंडी में बिकती... Read more
clicks 99 View   Vote 0 Like   1:28pm 30 Apr 2012 #
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                अक्सर अस्पताल मुझे किसी आधुनिक ओस्वित्ज़ केम्प  से कम नहीं लगते जिसके प्रांगण में गूंजती है आवाजें करहाने की| जहां रेल में भर कर जोरजबरदस्ती कर लोग लाये नहीं जाते बल्कि आते है लोग खुद बैठ कार टेक्सी इक्का तांगे रिक्शे में |नाजी से कर्मी जुटे रहते है पुरजोर क... Read more
clicks 66 View   Vote 0 Like   6:26am 16 Apr 2012 #
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 मन नहीं मानता कि तुझ बिन जी गए हम आँख भर आई जब पिछले रास्ते देखे …… माँ  आज माँ की पुण्यतिथि परमाँ के बिना मैंने जीने की कल्पना नहीं की थी … और उनके बिना कैसे जी सकुंगी यह सोच भी मुझे डरा देता था …. जाने क्यों माँ बीमार ना होते हुवे भी अचानक एक ही दिन के पेट दर्द में चली गयीं ... Read more
clicks 120 View   Vote 0 Like   9:49am 8 Apr 2012 #
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                                                                                                                                                                                                                                चौकीदार  चौकीदार उनींदी आँखों सेरोज की तरह दिन की पार्ट-टाइम नौकरी के बाद रात के पिछले पहर सर्दी ... Read more
clicks 78 View   Vote 0 Like   3:52pm 30 Mar 2012 #
Blogger: डॉ. नूतन डिमरी गैरोला- नीति
    सुनो आदम!युगों से बंधी बेड़ियों से बंधन मुक्ति के लिए मैंने जब भी आवाज उठायी ..अवतित इच्छा को जान तुने नजरें चुरायी या भोहें तान कर कह दिया  तुम्हें बाँधा ही है किसने ..रोष में आ कर कर दिया मुझे आजाद और मुक्ति का शिकंजा कसने लगे |मुझे रंचभर भी न भाया तुम्हारा ये द्वैत रूप ... Read more
clicks 123 View   Vote 0 Like   8:06pm 25 Mar 2012 #
Blogger: डॉ. नूतन डिमरी गैरोला- नीति
कल का मेरा दिन नाजुक फूलों के साथ गुजरा ..महका महका  हरा भरा ,,कहीं खिलती थी चटख चांदनी ...कहीं भवरों का  पहरा था … और उस सुन्दर याद की तस्वीरें यहाँ ब्लॉग में साझा कर रही हूँ ...कई रंगों के साथ सिर्फ एक फोटो जिसमे मैं हूँ वह मेरी खींची नहीं :)) .. have a good day ... Nutan                                 ... Read more
clicks 162 View   Vote 0 Like   11:02am 17 Mar 2012 #
Blogger: डॉ. नूतन डिमरी गैरोला- नीति
प्रेम जैसे पहाड़ का सबसे ऊँचा शिखर एक अजीब खिंचाव पहाड़ को फ़तेह करने को एक प्रेमी मन विभोर खड़ी अडचने, उनको, पस्त हो हांफ हांफ कर करता पार पहुँचता है शिखर पर |लेकिन कठिन है ठहराव अविश्वास, अहंकार, असहमतियों की बारिश, शिखर पर जब बरसती है जोर से तब पहाड़ पर होता है भूस्खलन ऐसे मे... Read more
clicks 124 View   Vote 0 Like   10:39am 14 Mar 2012 #
Blogger: डॉ. नूतन डिमरी गैरोला- नीति
       कृष्ण का ब्रज से मथुरा चले जाना राधा को बहुत दुःख देता है| वृन्दावन की गलियां कृष्ण के बिना सूनी हो जाती हैं  | उस पर होली का त्यौहार भी राधा को उल्लासित नहीं कर पाता | वह कृष्ण के विरह में होली की रंगों की बरसात में भी खुद को जला और कुम्हलाया पाती है और वह कृष्ण से निवे... Read more
clicks 182 View   Vote 0 Like   6:40am 6 Mar 2012 #
Blogger: डॉ. नूतन डिमरी गैरोला- नीति
          निगेटिव प्रोग्रामिंगजहाँ कभी प्रभु भक्ति में डूबे भजन, शास्त्रीय  संगीत की लय पर भक्तिरस भरते, सितार की झंकार के साथ, घर की शोभा नीरा की मृदुल आवाज बरबस भजन की ओर सबका ध्यान आकर्षित करती, वहीँ आज नीरा की चीत्कार गूंज रही थी और बीच बीच में उसके नाजुक बदन पर चोट करते... Read more
clicks 91 View   Vote 0 Like   3:22pm 29 Feb 2012 #

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