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Blog: THE INNER JOURNEY ::: अंतर्यात्रा

Blogger: vijay kumar sappatti
मेरे आत्मन ,आप सभी को मेरे प्रणाममाफ़ करना  इस संसार का सबसे श्रेष्ठ कार्य है . यदि आप किसी को क्षमा करते है तो इससे बड़ा व्यगतीगत दान , मेरी नज़र में कोई नहीं है .माफ़ी देने से आप खुद को ही बेहतर करते/ पाते  है . दुसरो की दगाबाजी , धोखेबाजी , या किसी भी अन्य प्रकार  के छल, स... Read more
clicks 190 View   Vote 0 Like   6:10am 2 Aug 2013 #मन की शांति .
Blogger: vijay kumar sappatti
मेरे प्रिय आत्मन ; नमस्कार , जैसे की अमिताभ बच्चन ने एक बार कहा था कि दुसरो की गलतियों से सीखे. क्योंकि हम इतने दिन नहीं जिंदा रह सकते है की उतनी गलतियां कर सके. आज की देशना यही है कि दोस्तों; हम ये समझे कि इस छोटे से जीवन में सीखना बहुत जरुरी है . और सीखने के लिए गलतियां  बहु... Read more
clicks 204 View   Vote 0 Like   6:55am 26 Jul 2013 #
Blogger: vijay kumar sappatti
हनुमान चालीसाश्री गुरू चरण सरोज रज, निज मन मुकुरु सुधारि,बरनउं रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि ॥1॥बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन कुमार,बल बुद्धि विद्या देहु मोहि, हरहु कलेस बिकार ॥2॥जय हनुमान ज्ञान गुन सागर,जय कपीस तिहुं लोक उजागर ॥3॥राम दूत अतुलित बल धामा,अंजनि-पुत... Read more
clicks 158 View   Vote 0 Like   12:03pm 23 Jul 2013 #ईश्वर
Blogger: vijay kumar sappatti
प्रिय दोस्तों ,नमस्कार ...कल मैंने पुछा था ....सोचो ; साथ क्या ले जाओंगे यारो .....उसका सीधा सा जवाब है ... हम कुछ भी साथ लेकर नहीं आये थे ... लेकिन हाँ, जाते समय , बहुत कुछ साथ जायेंगा , हमारा भलापन, हमारी अच्छाई , हमारा प्रेम , हमारी दया , हमारी क्षमा , जीवन के वो पल , जिनमे हमने इस दुनिया क... Read more
clicks 188 View   Vote 0 Like   2:44am 9 Jun 2013 #ईश्वर
Blogger: vijay kumar sappatti
प्रिय आत्मन , नमस्कार .मैं कुछ देर पहले ओशो के पत्र पढ़ रहा था . जो की उन्होंने अपने सन्यासियों को लिखा था . एक पत्र था जो उन्होंने अपने मित्र और सन्यासी श्री कोठारी जी को लिखा था . उसमे उन्होंने कहा था " हम चाहना ही नहीं जानते , वरना सत्य कितना निकट है " ये वाक्य मेरे मन मे... Read more
clicks 188 View   Vote 0 Like   3:40pm 4 Jun 2013 #ईश्वर
Blogger: vijay kumar sappatti
जीवन में जब सब कुछ एक साथ और जल्दी - जल्दी करने की इच्छा होती है , सब कुछ तेजी से पा लेने की इच्छा होती है , और हमें लगने लगता है कि दिन के चौबीस घंटे भी कम पड़ते हैं , उस समय ये बोध कथा , " काँच की बरनी और दो कप चाय " हमें याद आती है । दर्शनशास्त्र के एक प्रोफ़ेसर कक्षा में आये औ... Read more
clicks 192 View   Vote 0 Like   5:22am 30 May 2013 #
Blogger: vijay kumar sappatti
कस्तूरी कुँडली बसै, मृग ढूँढे बन माहिँ।ऐसे घटि घटि राम हैं, दुनिया देखे नाहिँ॥प्रेम ना बाड़ी उपजे, प्रेम ना हाट बिकाय।राजा परजा जेहि रुचे, सीस देई लै जाय॥माला फेरत जुग भया, मिटा ना मन का फेर।कर का मन का छाड़ि के, मन का मनका फेर॥माया मुई न मन मुआ, मरि मरि गया सरीर।आसा तृष्ण... Read more
clicks 166 View   Vote 0 Like   3:25am 5 May 2013 #
Blogger: vijay kumar sappatti
सत्य के दिशा में सबसे बड़ा अपराध तो तब हो जाता है , जब हम सत्य के संबंध में रूढ़ धारणाओं को बच्चो के ऊपर थोपने का आग्रह करते है ! यह अत्यंत घातक दुराग्रह है ! परमात्मा और आत्मा के संबंध में विश्वास या अविश्वास बच्चो पर थोपे जाते है ! गीता, कुरान, कृष्ण , महावीर उन पर थोपे जाते ... Read more
clicks 123 View   Vote 0 Like   3:22am 5 May 2013 #
Blogger: vijay kumar sappatti
मेरे प्रिय आत्मन ; नमस्कार आज आपको बताऊ , जीवन में सारे दुखो का कारण मात्र और मात्र अपेक्षा ही है . मानव का ये स्वभाव है की हम हर किसी  से अपेक्षा करते है . और कभी कभी ये अपेक्षाए जरुरत से ज्यादा हो जाती है और जब हमें , हमारी अपेक्षाए पूरी होती नहीं दिखाई देती; तब क्रोध, क्षोभ ... Read more
clicks 153 View   Vote 0 Like   2:39am 29 Apr 2013 #
Blogger: vijay kumar sappatti
हर घर में अगर अनुशासन का पालन किया जाए तो युवाओं द्वारा किए जाने वाले अपराधों में 95 प्रतिशत तक कमी जाऐगी । --- जे एडगर हूवर... Read more
clicks 174 View   Vote 0 Like   6:29am 26 Apr 2013 #
Blogger: vijay kumar sappatti
प्रतिज्ञा करें कि छोटों के साथ नरमी से, बड़ों के साथ करूणा से, संघर्ष करने वालों के साथ हमदर्दी से और कमजोर व ग़लती करने वालों के साथ सहनशीलता से पेश आने की। क्‍योंकि हम अपने जीवन में कभी न कभी इनमें से किसी न किसी स्थिति से गुजरते है। --- लायड शीयरर... Read more
clicks 163 View   Vote 0 Like   9:51am 21 Apr 2013 #
Blogger: vijay kumar sappatti
भक्ति ही एक ऐसा साधन है जिसको सभी सुगमता से कर सकते हैं और जिसमें सभी मनुष्यों का अधिकार है | इस कलिकाल में तो भक्ति के समान आत्मोद्धार के लिए दूसरा कोई सुगम उपाय है ही नहीं ; क्योंकि ज्ञान , योग , तप , त्याग आदि इस समय सिद्ध होने बहुत ही कठिन है | संसार में धर्म को मानने वाले ज... Read more
clicks 143 View   Vote 0 Like   2:57am 25 Mar 2013 #
Blogger: vijay kumar sappatti
।।ॐ कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने।। प्रणतः क्लेशनाशाय गोविंदाय नमो नमः।ॐ।। 'हे धनंजय! मुझसे भिन्न दूसरा कोई भी परम कारण नहीं है। माया द्वारा जिनका ज्ञान हरा जा चुका है, ऐसे आसुर-स्वभाव को धारण किए हुए, मनुष्यों में नीच, दूषित कर्म करने वाले मूढ़ लोग मुझको नहीं भजत... Read more
clicks 132 View   Vote 0 Like   7:06am 17 Mar 2013 #
Blogger: vijay kumar sappatti
मेरे आत्मन ,सोचिये तो .....!!... Read more
clicks 145 View   Vote 0 Like   6:49am 17 Mar 2013 #
Blogger: vijay kumar sappatti
एक महात्मा से किसी ने पूछा- 'ईश्वर का स्वरूप क्या है?' महात्मा ने उसी से पूछ दिया-'तुम अपना स्वरूप जानते हो?' वह बोला- 'नहीं जानता।' तब महात्मा ने कहा- 'अपने स्वरूप को जानते नहीं जो साढ़े तीन हाथ के शरीर में 'मैं-मैं कर रहा है और संपूर्ण विश्व के अधिष्ठान परमात्मा ... Read more
clicks 138 View   Vote 0 Like   3:59am 20 Feb 2013 #
Blogger: vijay kumar sappatti
तुम्हारा जीवन तुम पर निर्भर है.....ओशोन कोई कर्म, न कोई किस्मत, न कोई ऐतिहासिक आदेश- तुम्हारा जीवन तुम पर निर्भर है। उत्तरदायी ठहराने के लिए कोई परमात्मा नहीं, सामाजिक पद्धति या सिद्धांत नहीं है। ऐसी स्थिति में तुम इसी क्षण सुख में रह सकते हो या दुख में।स्वर्ग अथवा नरक को... Read more
clicks 112 View   Vote 0 Like   3:49am 20 Feb 2013 #
Blogger: vijay kumar sappatti
प्रिय आत्मीय मित्रो , नमस्कार .आज आपसे एक बात कहूँगा ....जो भी कार्य करे होश में करे . एक awaken state of mind में करे. आप पायेंगे कि हर चीज और बेहतर हो गयी है . कार्य ऐसे न करे कि उसे किसी भी तरह से करना है . कार्य ऐसे करे कि , उस कार्य से प्रेम हो , उसे होश में करे, ध्यान देकर करे. आप पायेंगे , क... Read more
clicks 85 View   Vote 0 Like   9:14am 23 Nov 2012 #
Blogger: vijay kumar sappatti
प्रिय आत्मीय मित्रो , नमस्कार .आज आपसे एक बात कहूँगा ....जो भी कार्य करे होश में करे . एक awaken state of mind में करे. आप पायेंगे कि हर चीज और बेहतर हो गयी है . कार्य ऐसे न करे कि उसे किसी भी तरह से करना है . कार्य ऐसे करे कि , उस कार्य से प्रेम हो , उसे होश में करे, ध्यान देकर करे. आप पायेंगे , कि ... Read more
clicks 116 View   Vote 0 Like   9:14am 23 Nov 2012 #
Blogger: vijay kumar sappatti
प्रिय मित्रो , जीवन में सहजता और सरलता होनी चाहिए . हम अपने जीवन को जितना ज्यादा सरल और सहज बनायेंगे , जीवन उतना ही सुखमय होंगा .ये ही जीवन का मूल मन्त्र है . बस खुश रहिये , सहज रहिये . और जीवन के बहाव का आनंद लीजिये . आपका विजय ... Read more
clicks 143 View   Vote 0 Like   10:57am 1 Nov 2012 #
Blogger: vijay kumar sappatti
‘‘यह कहा जाता है कि यह दृष्टांत-कथा सूफ़ी सद्गुरु इमाम मुहम्मद बाकिर से ही संबंधित है। यह बोध होने पर कि मैं चीटियों की भाषा बोल और समझ सकता हूं, मैंने उनमें से एक चींटी से सम्पर्क किया और पूछा-‘तुम्हारा परमात्मा किस आकृति का है? क्या वह चींटी से मिलता जुलता है?उसने उत्त... Read more
clicks 115 View   Vote 0 Like   6:40am 30 Oct 2012 #
Blogger: vijay kumar sappatti
मेरे प्रिय आत्मन मित्रों .आज श्री कृष्ण जन्माष्टमी है . आप सभी को तथा इस धरा के हर व्यक्ति को इस पावन पर्व की शुभकामनाये.श्री कृष्ण मेरे आराध्य है , तथा प्रेम तथा भक्ति के प्रकाश रूप है . और हम हृदयम कम्यून में हरपल इसी उत्सव को मनाते है .आप सभी को इस महान उत्सव का आनंद प्राप... Read more
clicks 152 View   Vote 0 Like   2:07am 10 Aug 2012 #
Blogger: vijay kumar sappatti
गीतांजलि : रविन्द्रनाथ टैगोर मित्रो , हममें से शायद ही कोई होंगा , जिसने इस कृति को नहीं पढ़ा है . और अगर नहीं पढ़ा है तो मेरा निवेदन है कि जरुर ही पढ़ ले . इसलिए नहीं कि इसे सब महान कृति मानते है . ये है ही एक महान कृति. आप पढेंगे तो पता चलेंगा कि कवि गुरु ने कितने अच्छे शब्दों में ... Read more
clicks 145 View   Vote 0 Like   10:39am 25 Jul 2012 #

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