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Blog: मन के पाखी

Blogger: Sweta sinha
मुझे डर नहीं लगतात्रासदी के घावों सेकराहती,ढुलमुलातीचुपचाप निगलतीसमय कीखौफ़नाक भूख से।मुझे डर नहीं लगताकफ़न लेकरचल रही हवाओं केदस्तक से खड़खड़ातेसाँकल केभयावह पैगाम से।मुझे डर नहीं लगताआग कोउजाला समझकरभ्रमित सुबह कीउम्मीद के लिए टकटकी बाँधेनिरंतर जागती जिजीव... Read more
clicks 92 View   Vote 0 Like   12:19pm 26 Nov 2020 #
Blogger: Sweta sinha
(१)कर्तव्य, सद् आचरण,अहिंसामानवता,दया,क्षमासत्य, न्याय जैसे'धारण करने योग्य''धर्म'का शाब्दिक अर्थहिंदू या मुसलमान कैसे हो सकता है?विभिन्न सम्प्रदायों के समूह,विचारधाराओं की विविधतासंकीर्ण मानसिकता वाले शब्दार्थ से बदलकरमानव को मनुष्यता का पाठ भुलाकर स्व के... Read more
clicks 93 View   Vote 0 Like   5:37pm 5 Nov 2020 #
Blogger: Sweta sinha
 २७ जून २०१८ को आकाशवाणी जमशेदपुरके कार्यक्रम सुवर्ण रेखा में पहली बार  एकल काव्य पाठ प्रसारित की गयी थी। जिसकी रिकार्डिंग २२ जून २०१८ को की गयी थी। बहुत रोमांचक और सुखद अवसर था। अति उत्साहित महसूस कर रही थी,मानो कुछ बहुमूल्य प्राप्त हो गया होउसी कार्यक्रम में... Read more
clicks 79 View   Vote 0 Like   12:37pm 31 Oct 2020 #
Blogger: Sweta sinha
मैं नहीं सुनाना चाहती तुम्हेंदादी-नानी ,पुरखिन या समकालीनस्त्रियों की कुंठाओं की कहानियां,गर्भ में मार डाली गयीभ्रूणों की सिसकियाँस्त्रियों के प्रति असम्मानजनक व्यवहारसमाज के दृष्टिकोण मेंस्त्री-पुरूष का तुलनात्मकमापदंड।मैं नहीं भरना चाहतीतुम्हारे हृदय में... Read more
clicks 132 View   Vote 0 Like   4:42pm 18 Jul 2020 #
Blogger: Sweta sinha
उज्जवल चरित्र उदाहरणार्थजिन्हें लगाया गया थासजावटी पुतलों की भाँतिपारदर्शी दीवारों के भीतरलोगों के संपर्क से दूरप्रदर्शनी मेंपुरखों की बेशकीमती धरोहर की तरह,ताकि ,विश्वास और श्रद्धा से नत रहे शीश,किंतु सत्य की आँच सेदरके भारी शीशों सेबड़े-बड़े बुलबुले स्वार्थपरत... Read more
clicks 138 View   Vote 0 Like   4:10pm 15 Jul 2020 #
Blogger: Sweta sinha
विश्व की प्राचीन एवं आधुनिक सभ्यताओं,पुरातन एवं नवीन धर्मग्रंथों में,पिछले हज़ारों वर्षों के इतिहास की किताबों में,पिरामिड,मीनारों,कब्रों,पुरातात्त्विक अवशेषों के साक्ष्यों में,मानवता और धर्म की स्थापना के लिए,कभी वर्चस्व और अनाधिकार आधिपत्य कीक्षुधा त... Read more
clicks 125 View   Vote 0 Like   11:42pm 11 Jul 2020 #शांति...बुकमार्क
Blogger: Sweta sinha
चित्र:मनस्वीमृदुल मुस्कान औरविद्रूप अट्टहास काअर्थ और फ़र्क़ जानते हैंकिंतु जिह्वा को टेढ़ाकरशब्दों को उबलने केतापमान पर रखनाजरूरी है।हृदय की वाहिनियों मेंबहते उदारता और प्रेमकी तरंगों कोतनी हुई भृकुटियों  और क्रोध से सिकुड़ी मांसपेशियों नेसोख लिया हैं।ठह... Read more
clicks 158 View   Vote 0 Like   12:05pm 9 Jul 2020 #
Blogger: Sweta sinha
चित्र:मनस्वीमृदुल मुस्कान औरविद्रूप अट्टहास काअर्थ और फ़र्क़ जानते हैंकिंतु जिह्वा को टेढ़ाकरशब्दों को उबलने केतापमान पर रखनाजरूरी है।हृदय की वाहिनियों मेंबहते उदारता और प्रेमकी तरंगों कोतनी हुई भृकुटियों  और क्रोध से सिकुड़ी मांसपेशियों नेसोख लिया हैं।ठह... Read more
clicks 127 View   Vote 0 Like   12:05pm 9 Jul 2020 #
Blogger: Sweta sinha
रोटी-दाल,चावल-सब्जी से इतरथाली में परोसी गयी पनीर या खीर देखखुश हो जाना,बहुत साधारण बात होती है शायद...भरपेट मनपसंद भोजन औरआरामदायक बिस्तर परचैन से रातभर सो पाने की इच्छा।जो मिला जीवन मेंकुछ शिकायतों के साथनियति मानकर स्वीकार करनाबिना फेर-बदल कियेरस्मों रिवाजों,प... Read more
clicks 130 View   Vote 0 Like   4:19pm 6 Jul 2020 #
Blogger: Sweta sinha
वे पूछते हैं बात-बात परक्या आपके खून मेंदेशभक्ति का नमक है? प्रमाण दीजिए, मात्रा बताइयेनमक का अनुपात कितना है?एकदम ठंडा है जनाबखौलता क्यों नहीं कहिये नआपके रक्त का ताप कितना है?बारूद की गंध सूँघाते हैंकरते तोप और टैंकों की गणना सैन्य क्षमता का आकलन सनसनी रचते सम... Read more
clicks 130 View   Vote 0 Like   2:36pm 2 Jul 2020 #
Blogger: Sweta sinha
सूर्य की किरणें निचोड़ने पर उसके अर्क से गढ़ी आकृतियाँ, सैनिक मेरे देश के। चाँदनी की स्वप्निल डोरियों से उकेरे रेखाचित्र स्निग्ध,धवल बुनावट,यथार्थ की मोहक कलाकृतियाँ, सैनिक मेरे देश के। पर्वतों को गलाकर बाजुओं में धारते, वज्र के परकोटे, विषबुझी टहनियाँ, सैनिक मेरे देश के। लक्ष्मण रेखा, सीमाओं के ... Read more
clicks 150 View   Vote 0 Like   9:10am 1 Jul 2020 #Poem
Blogger: Sweta sinha
सूर्य की किरणें निचोड़ने पर उसके अर्क से गढ़ी आकृतियाँ, सैनिक मेरे देश के। चाँदनी की स्वप्निल डोरियों से उकेरे रेखाचित्र स्निग्ध,धवल बुनावट,यथार्थ की मोहक कलाकृतियाँ, सैनिक मेरे देश के। पर्वतों को गलाकर बाजुओं में धारते, वज्र के परकोटे, विषबुझी टहनियाँ, सैनिक मेरे देश के। लक्ष्मण रेखा, सीमाओं के ... Read more
clicks 145 View   Vote 0 Like   9:10am 1 Jul 2020 #Poem
Blogger: Sweta sinha
धरती के मानचित्र पर खींची गयीसूक्ष्म रेखाओं के उलझे महीन जाल,मूक और निर्जीव प्रतीत होतीअदृश्य रूप से उपस्थित  जटिल भौगोलिक सीमाएं अपने जीवित होने का भयावह प्रमाणदेती रहती हैं। सोचती हूँ अक्सर सरहदों कीबंजर,बर्फीली,रेतीली,उबड़-खाबड़,निर्जन ज़मीनों परजह... Read more
clicks 98 View   Vote 0 Like   5:08pm 28 Jun 2020 #
Blogger: Sweta sinha
सुनो ओ!जंगल के दावेदारोंविकास के नाम परलालच और स्वार्थ की कुल्हाड़ी लिएतुम्हारी जड़ को धीरे-धीरे बंजर करते,तुम्हारी आँखों में सपने भरकरसंपदा से भरी भूमि कोकंक्रीट में बदलते,हवा में फैले जंगली फूलों की  सुगंध सोखकर,धान के खेतों मेंकारखानों की चिमनी का ज़हरीला धुँ... Read more
clicks 118 View   Vote 0 Like   9:29am 10 Jun 2020 #छंदमुक्त
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