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Blog: मन के पाखी

Blogger: Sweta sinha
चित्र:मनस्वीसदियों से एक छविबनायी गयी है,चलचित्र हो या कहानियांहाथ जोड़े,मरियल, मजबूरज़मींदारों की चौखट पर मिमयाते,भूख से संघर्षरतकिसानों के रेखाचित्र...और सहानुभूति जताते दर्शक  अन्नदाताओं कोबेचारा-सा देखना कीआदत हो गयी है शायद...!!अपनी खेत का समृद्ध मालिकपढ़ा-लि... Read more
clicks 120 View   Vote 0 Like   4:41am 16 Dec 2020 #
Blogger: Sweta sinha
कोहरे की रजाई मेंलिपटा दिसंबर,जमते पहाड़ों परसर्दियाँ तो हैंपर, पहले जैसी नहीं...।कोयल की पुकार परउतरता है बसंत आम की फुनगी सेमनचले भौंरे महुआ पीकरफूलों को छेड़ते तो हैंपर, पहले जैसा नहीं...।पसीने से लथपथ,धूप से झुलसता बदनगुलमोहर की छाँव देखसुकून पाता तो हैपर,पहले जैसा... Read more
Blogger: Sweta sinha
पकड़ती हूँ कसकर उम्र की उंगलियों मेंऔर फेंक देती हूँ गहरे समंदर में ज़िंदगी के जाल एक खाली इच्छाओं से बुनी..तलाश मेंकुछ खुशियों की।भारी हुई-सी जाल  निकालती हूँ जब उत्सुकतावश,आह्लाद से भर  अक़्सर जाने क्योंकरफिसल जाती हैं सारी खुशियाँ।और .. रह जाती है... Read more
clicks 185 View   Vote 0 Like   12:27pm 9 Dec 2020 #
Blogger: Sweta sinha
चित्र: मनस्वी प्रांजलधान ,गेहूँ,दलहन,तिलहनकपास के फसलों के लिएबीज की गुणवत्ताउचित तापमान,पानी की मापमिट्टी के प्रकार,खाद की मात्रानिराई,गुड़ाई या कटाई कासही समयमौसम और मानसून का प्रभावभूगोल की किताब मेंपढ़ा था मैंने भीपर गमलों में पनपतेबोनसाईकी तरह जीने कीविवशता न... Read more
clicks 115 View   Vote 0 Like   3:40pm 6 Dec 2020 #
Blogger: Sweta sinha
ठिठुरती रात,झरती ओस कीचुनरी लपेटेखटखटा रही हैबंद द्वार कासाँकल।साँझ से हीछत की अलगनीसे टँगाझाँक रहा हैशीशे के झरोखे सेउदास चाँदतन्हाई का दुशाला ओढ़े।नभ केनील आँचल सेछुप-छुपकरझाँकता आँखों कीख़्वाबभरी अधखुलीकटोरियों कीसारी अनकही चिट्ठियों की स्याही पीकर बौर... Read more
clicks 89 View   Vote 0 Like   4:41pm 30 Nov 2020 #प्रकृति की कविताएँ
Blogger: Sweta sinha
सृष्टि के प्रारंभ से हीब्रह्मांड के कणों मेंघुली हुईनश्वर-अनश्वर कणों की संरचना के अनसुलझेगूढ़ रहस्यों की पहेलियों की  अनदेखी करज्ञान-विज्ञान,तर्कों के हवाले सेमनुष्य सीख गयापरिवर्तित करनाकर्म एवं मानसिकता सुविधानुसारआवश्यकता एवंपरिस्थितियों काराग... Read more
clicks 133 View   Vote 0 Like   3:13am 28 Nov 2020 #
Blogger: Sweta sinha
मुझे डर नहीं लगतात्रासदी के घावों सेकराहती,ढुलमुलातीचुपचाप निगलतीसमय कीखौफ़नाक भूख से।मुझे डर नहीं लगताकफ़न लेकरचल रही हवाओं केदस्तक से खड़खड़ातेसाँकल केभयावह पैगाम से।मुझे डर नहीं लगताआग कोउजाला समझकरभ्रमित सुबह कीउम्मीद के लिए टकटकी बाँधेनिरंतर जागती जिजीव... Read more
clicks 107 View   Vote 0 Like   12:19pm 26 Nov 2020 #
Blogger: Sweta sinha
(१)कर्तव्य, सद् आचरण,अहिंसामानवता,दया,क्षमासत्य, न्याय जैसे'धारण करने योग्य''धर्म'का शाब्दिक अर्थहिंदू या मुसलमान कैसे हो सकता है?विभिन्न सम्प्रदायों के समूह,विचारधाराओं की विविधतासंकीर्ण मानसिकता वाले शब्दार्थ से बदलकरमानव को मनुष्यता का पाठ भुलाकर स्व के... Read more
clicks 102 View   Vote 0 Like   5:37pm 5 Nov 2020 #
Blogger: Sweta sinha
 २७ जून २०१८ को आकाशवाणी जमशेदपुरके कार्यक्रम सुवर्ण रेखा में पहली बार  एकल काव्य पाठ प्रसारित की गयी थी। जिसकी रिकार्डिंग २२ जून २०१८ को की गयी थी। बहुत रोमांचक और सुखद अवसर था। अति उत्साहित महसूस कर रही थी,मानो कुछ बहुमूल्य प्राप्त हो गया होउसी कार्यक्रम में... Read more
clicks 92 View   Vote 0 Like   12:37pm 31 Oct 2020 #
Blogger: Sweta sinha
मैं नहीं सुनाना चाहती तुम्हेंदादी-नानी ,पुरखिन या समकालीनस्त्रियों की कुंठाओं की कहानियां,गर्भ में मार डाली गयीभ्रूणों की सिसकियाँस्त्रियों के प्रति असम्मानजनक व्यवहारसमाज के दृष्टिकोण मेंस्त्री-पुरूष का तुलनात्मकमापदंड।मैं नहीं भरना चाहतीतुम्हारे हृदय में... Read more
clicks 146 View   Vote 0 Like   4:42pm 18 Jul 2020 #
Blogger: Sweta sinha
उज्जवल चरित्र उदाहरणार्थजिन्हें लगाया गया थासजावटी पुतलों की भाँतिपारदर्शी दीवारों के भीतरलोगों के संपर्क से दूरप्रदर्शनी मेंपुरखों की बेशकीमती धरोहर की तरह,ताकि ,विश्वास और श्रद्धा से नत रहे शीश,किंतु सत्य की आँच सेदरके भारी शीशों सेबड़े-बड़े बुलबुले स्वार्थपरत... Read more
clicks 153 View   Vote 0 Like   4:10pm 15 Jul 2020 #
Blogger: Sweta sinha
विश्व की प्राचीन एवं आधुनिक सभ्यताओं,पुरातन एवं नवीन धर्मग्रंथों में,पिछले हज़ारों वर्षों के इतिहास की किताबों में,पिरामिड,मीनारों,कब्रों,पुरातात्त्विक अवशेषों के साक्ष्यों में,मानवता और धर्म की स्थापना के लिए,कभी वर्चस्व और अनाधिकार आधिपत्य कीक्षुधा त... Read more
clicks 136 View   Vote 0 Like   11:42pm 11 Jul 2020 #शांति...बुकमार्क
Blogger: Sweta sinha
चित्र:मनस्वीमृदुल मुस्कान औरविद्रूप अट्टहास काअर्थ और फ़र्क़ जानते हैंकिंतु जिह्वा को टेढ़ाकरशब्दों को उबलने केतापमान पर रखनाजरूरी है।हृदय की वाहिनियों मेंबहते उदारता और प्रेमकी तरंगों कोतनी हुई भृकुटियों  और क्रोध से सिकुड़ी मांसपेशियों नेसोख लिया हैं।ठह... Read more
clicks 169 View   Vote 0 Like   12:05pm 9 Jul 2020 #
Blogger: Sweta sinha
चित्र:मनस्वीमृदुल मुस्कान औरविद्रूप अट्टहास काअर्थ और फ़र्क़ जानते हैंकिंतु जिह्वा को टेढ़ाकरशब्दों को उबलने केतापमान पर रखनाजरूरी है।हृदय की वाहिनियों मेंबहते उदारता और प्रेमकी तरंगों कोतनी हुई भृकुटियों  और क्रोध से सिकुड़ी मांसपेशियों नेसोख लिया हैं।ठह... Read more
clicks 139 View   Vote 0 Like   12:05pm 9 Jul 2020 #
Blogger: Sweta sinha
रोटी-दाल,चावल-सब्जी से इतरथाली में परोसी गयी पनीर या खीर देखखुश हो जाना,बहुत साधारण बात होती है शायद...भरपेट मनपसंद भोजन औरआरामदायक बिस्तर परचैन से रातभर सो पाने की इच्छा।जो मिला जीवन मेंकुछ शिकायतों के साथनियति मानकर स्वीकार करनाबिना फेर-बदल कियेरस्मों रिवाजों,प... Read more
clicks 138 View   Vote 0 Like   4:19pm 6 Jul 2020 #
Blogger: Sweta sinha
वे पूछते हैं बात-बात परक्या आपके खून मेंदेशभक्ति का नमक है? प्रमाण दीजिए, मात्रा बताइयेनमक का अनुपात कितना है?एकदम ठंडा है जनाबखौलता क्यों नहीं कहिये नआपके रक्त का ताप कितना है?बारूद की गंध सूँघाते हैंकरते तोप और टैंकों की गणना सैन्य क्षमता का आकलन सनसनी रचते सम... Read more
clicks 144 View   Vote 0 Like   2:36pm 2 Jul 2020 #
Blogger: Sweta sinha
सूर्य की किरणें निचोड़ने पर उसके अर्क से गढ़ी आकृतियाँ, सैनिक मेरे देश के। चाँदनी की स्वप्निल डोरियों से उकेरे रेखाचित्र स्निग्ध,धवल बुनावट,यथार्थ की मोहक कलाकृतियाँ, सैनिक मेरे देश के। पर्वतों को गलाकर बाजुओं में धारते, वज्र के परकोटे, विषबुझी टहनियाँ, सैनिक मेरे देश के। लक्ष्मण रेखा, सीमाओं के ... Read more
clicks 180 View   Vote 0 Like   9:10am 1 Jul 2020 #Poem
Blogger: Sweta sinha
सूर्य की किरणें निचोड़ने पर उसके अर्क से गढ़ी आकृतियाँ, सैनिक मेरे देश के। चाँदनी की स्वप्निल डोरियों से उकेरे रेखाचित्र स्निग्ध,धवल बुनावट,यथार्थ की मोहक कलाकृतियाँ, सैनिक मेरे देश के। पर्वतों को गलाकर बाजुओं में धारते, वज्र के परकोटे, विषबुझी टहनियाँ, सैनिक मेरे देश के। लक्ष्मण रेखा, सीमाओं के ... Read more
clicks 178 View   Vote 0 Like   9:10am 1 Jul 2020 #Poem
Blogger: Sweta sinha
धरती के मानचित्र पर खींची गयीसूक्ष्म रेखाओं के उलझे महीन जाल,मूक और निर्जीव प्रतीत होतीअदृश्य रूप से उपस्थित  जटिल भौगोलिक सीमाएं अपने जीवित होने का भयावह प्रमाणदेती रहती हैं। सोचती हूँ अक्सर सरहदों कीबंजर,बर्फीली,रेतीली,उबड़-खाबड़,निर्जन ज़मीनों परजह... Read more
clicks 108 View   Vote 0 Like   5:08pm 28 Jun 2020 #
Blogger: Sweta sinha
सुनो ओ!जंगल के दावेदारोंविकास के नाम परलालच और स्वार्थ की कुल्हाड़ी लिएतुम्हारी जड़ को धीरे-धीरे बंजर करते,तुम्हारी आँखों में सपने भरकरसंपदा से भरी भूमि कोकंक्रीट में बदलते,हवा में फैले जंगली फूलों की  सुगंध सोखकर,धान के खेतों मेंकारखानों की चिमनी का ज़हरीला धुँ... Read more
clicks 134 View   Vote 0 Like   9:29am 10 Jun 2020 #छंदमुक्त
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