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Blog: हालात-ए-बयाँ/Halat-E-Bayaan

Blogger: Abhishek Kumar Jha Abhi
विरह की आग ऐसी है, क़ि हम जलते हैं रात-दिनये सोचा, करते हैं अक्सर, कहाँ गये, वो पल छिनक़यामत हमपे बरपी, जब जुदाई क़ा हुआ मौसमतड़प के रह गया, ये दिल, वो ऐसा था आलमआज भी यादों में जीते हैं, मन को कर के खिन्नविरह की आग ऐसी है, क़ि हम जलते हैं रात-दिनबसर करते हैं, हर लम्हें, हम तेरी सद... Read more
clicks 85 View   Vote 0 Like   2:41pm 23 Mar 2014 #
Blogger: Abhishek Kumar Jha Abhi
प्रेम के मायने, क्यूँ बदल हैं रहेदेख दिल रो पड़ा, लिख ग़ज़ल हैं रहेइश्क़ की राह में, लोग फिसले बहुतजानते हैं सभी, पर फिसल हैं रहेमैं कहाँ था, कहाँ आज, हूँ आ गयाबात सुन के यहाँ, कर अमल हैं रहेदौर कैसा चला, किस तरह का चलनमुंह मुझको चिढ़ा, खिल कमल हैं रहे जानते एक दिन, मौत आनी म... Read more
clicks 84 View   Vote 0 Like   1:18pm 18 Mar 2014 #
Blogger: Abhishek Kumar Jha Abhi
ओ बांके छोरे तू, छोड़ मोरी बहियाँनहि कर बरजोरी, नहि गलबहियाँपिया नहि पास मोहे, कैसे खेलूँ होरीमन सुन आँगन सुना, पास तन्हाईयाँओ बांके छोरे तू, छोड़ मोरी बहियाँभाए नहि तीज़ ये, भाए न त्यौहार है मन को भाए मोहे, पसरी ख़ामोशियाँनहि कर बरजोड़ी, नहि गलबहियाँकरम मोहे मीर... Read more
clicks 90 View   Vote 0 Like   10:51am 15 Mar 2014 #
Blogger: Abhishek Kumar Jha Abhi
आज ईक बार, फिर से, तुम आ जाओ फिर वही, मधुर बोली, तुम सुना जाओ.सुकूँ की नींद, सोने की, है हसरत जागीमिलन की आस, फिर मन को, है लागीआ जाओ, तुम सारे, बंधन को तोड़कर न आ सको, तो ख्वाबों में, ही आ जाओ.आज ईक बार, फिर से, तुम आ जाओ फिर वही, मधुर बोली, तुम सुना जाओ.वो लड़कपन से, भरी तुम्हारी,... Read more
clicks 84 View   Vote 0 Like   3:04pm 13 Mar 2014 #
Blogger: Abhishek Kumar Jha Abhi
भरी हैरत निग़ाहों से न देखो हम तो नाविक हैंकरो चाहे क़त्ल मेरा मगर हम तेरे आशिक़ हैंअज़ब दुनियाँ गज़ब के ही यहाँ पर खेला होता हैजिसे होना मुलाज़िम था बने बैठे वो मालिक हैंधरम के आज ठेकेदार वो अपने को कहते हैंरहे चालाक छल कपटी बड़े जो ढोंगी नास्तिक हैंचलन कैसा चला है आज ... Read more
clicks 97 View   Vote 0 Like   12:19pm 11 Mar 2014 #
Blogger: Abhishek Kumar Jha Abhi
ये धूप, और इसकी, तपिश मौलाये मुफ़्लिसी, इसकी, ख़लिश मौलाहै खिंच गई, सरहदें, ज़मीं पे यहाँहो गई परिंदों, पे भी, बंदिश मौलातूने सभी को, एक सा बनाया थाफिर किसने बोई, ये रंजिश मौलाहैं फूल से लगते, पैदाइश के वक़्तताउम्र वैसे रहें, ये ख्वाहिश मौलामैं आज, पल पल, मर रहा हूँ यहाँदेख ... Read more
clicks 86 View   Vote 0 Like   3:33pm 5 Mar 2014 #
Blogger: Abhishek Kumar Jha Abhi
बंद कर लिफ़ाफ़े में उन्होंने भेजा जो पैग़ाम हैऐसी लाली छाई पढ़के कि हुआ वो सरेआम हैअब तलक डरते न थे जो किसी से भी हमअब यही बन्दा हो गया उन्हीं का ग़ुलाम है आफ़ताब से महताब तक बहुत देखा है हमनेपर जबसे उनको देखा उन्हीं से सुबहो-शाम हैमाना की बड़ी मुश्किल है इश्क़ के सफ़र... Read more
clicks 91 View   Vote 0 Like   4:48pm 2 Mar 2014 #
Blogger: Abhishek Kumar Jha Abhi
ये मेरी मज़बूरी है तुझे प्यार करनाचाहे सबब मिले हमें इंतज़ार करनामेरी आँखों ने की है ये गुस्ताख़ियाँकाम दिल का है ये बेक़रार करनाबड़े काम के थे हम भी इस ज़हाँ मेंहुस्न ने साज़िश किया बेक़ार करनाजो ज़िन्दगी में हैं पतझर के आलमहै तेरा काम अब उसे बहार करनाअब जो सिला दे ह... Read more
clicks 90 View   Vote 0 Like   1:34pm 28 Feb 2014 #
Blogger: Abhishek Kumar Jha Abhi
देश के चंद, सियारों से, बचके रहना भाईआज यही तो लूटते हैं, अपना गहना भाईदेखभाल के ही हमेशा, इस दुनियाँ में चलना,सफ़ेद लिबास काले लोग ने, है पहना भाईजिसको पालो पोशो आज, वही दिखाये आँखें,बच्चों का हर ज़ुल्म बाप को, पड़े सहना भाईलाख़ दुखों के ढ़हे पहाड़, फ़िर भी ज़िंदा रहना,नदी... Read more
clicks 91 View   Vote 0 Like   1:53pm 27 Feb 2014 #
Blogger: Abhishek Kumar Jha Abhi
प्यार के अल्फ़ाज़ सब बेईमानी हो गए हैंरिश्ते बनाके लोग अब मनमानी हो गए हैंअल्लाह ने रहमतों से नवाज़ा है ज़िंदगी कोआज पाके ज़िन्दगी सभी गुमानी हो गए हैंलूट की कमाई से भर लिया जिन्होंने घर कोदुनियाँ में देखो उनको ख़ानदानी हो गए हैंगोरों की क़ैद से हम सब आज़ाद हो ग... Read more
clicks 91 View   Vote 0 Like   5:29am 27 Feb 2014 #
Blogger: Abhishek Kumar Jha Abhi
दिल में जो ग़लत फ़हमी, तुमने पाली हैखोलोगे जब बंद मुठ्ठी, पाओगे खाली हैसाथ दुनियां में कोई, निभाए ना हर पल,हमसे ही तुम्हारे, होठों पे रहती लाली हैअपनी नज़रों में, नेक़ नियत रख हमेशा,ख़ुदा हर बंदे की, ख़ुद करता रखवाली हैबाग़ को खून पसीने से, सदा सजाते हैं,वो कोई और नहीं, गुल... Read more
clicks 95 View   Vote 0 Like   5:33pm 26 Feb 2014 #
Blogger: Abhishek Kumar Jha Abhi
कंचन है मुख पे छाईआँखों में है तरुणाईहे सुंदरी बताओ हमेंकहाँ से तुम हो आई.कंचन है मुख पे छाईआँखों में है तरुणाई.यौवन है दमका दमकाहै रूप चमका चमकाले सुबह तुमसे लाली और शाम ले अंगराई. कंचन है मुख पे छाईआँखों में है तरुणाई.आँखों ने देखा जबसे कानों ने सुना जबसेकिया ऐस... Read more
clicks 94 View   Vote 0 Like   12:43pm 26 Feb 2014 #
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