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Blog: यूं ही कभी

Blogger:  राजीव कुमार झा
                                                                                  कल की चिंता से मुक्तआज के सुख में डूबे परिंदों को नहीं परवाह जिंदगी की कड़वाह्टों कीसूखे पत्तों को हांक रही मंद हवा मोहपाश में जकड़ी हुई हलकी और भारहीन रेशम ... Read more
clicks 166 View   Vote 0 Like   2:00am 11 Apr 2015 #दरख़्त
Blogger:  राजीव कुमार झा
भर गए आकाशभूरे बादलों से रात आलोकित हुई अब बिजलियों से खिड़कियों से आ रही चंचल हवाएं यादों के गलियारों से झांकते मनुहार वाले दिन ओस में भींगे  क्यारियों में पुष्प भ्रमरों को नए संवाद देता बूंद से बोझिल सलोनी पत्तियां भी हैं बजाती जा रही अब पायलें रुनझुन आ गए अब मनुहार... Read more
clicks 182 View   Vote 0 Like   2:10am 4 Apr 2015 #भ्रमर
Blogger:  राजीव कुमार झा
सब कुछ पाकर बहुत कुछ खोना पड़ा मुझेअनजान राहों पर कितना भटकना पड़ा मुझे  हम तुम मिले थे कभी याद तो नहीं  भूलने से पहले दिल पर पत्थर रखना पड़ा मुझे क्या बात हुई कि गैर को अपना लिया तुमने अपना तो मैं भी था फिर भी तड़पना पड़ा मुझे पेंड़ की अनचाही डाल समझ काटना चाहा तुमने इस बात... Read more
clicks 156 View   Vote 0 Like   2:30am 28 Mar 2015 #गैर
Blogger:  राजीव कुमार झा
क्या पता कैसी खुमारी आज पलकों में समाईमोहिनी उषा कपोलों में संवर के मुस्कुरायी पवन चल परदेश से प्रिय की पदचाप लायी थाम लो उर हर्ष विह्वल मधुनिशा फिर संग लायी करवटें लेने लगीं फिर कल्पनाएं जन्म लेने लग गयी फिर कोई कहानी यादों की हरीतिमामधुर स्मृति बन  बंद होठों में न... Read more
clicks 180 View   Vote 0 Like   2:15am 22 Mar 2015 #खुमारी
Blogger:  राजीव कुमार झा
                                                                                                           बीत गए दिन गुड़ियों वालेपरियों वाली रात गयी पंख लगाकर उड़ी कल्पना चाहत जागी नयी नयी  मांग अटपटी सी रखती है तन्हाई में आज ... Read more
clicks 175 View   Vote 0 Like   3:40am 15 Mar 2015 #गुड़िया
Blogger:  राजीव कुमार झा
गम की नहीं खुशियों की बात हो अब उदासी नहीं मुस्काने की बात होगिले शिकवे भूलने दिलों को जोड़ने की बात हो स्नेह और प्रेम की अपनेपन की बात हो दिल में चुभने वाली नहीं सहलाने की बात हो सतरंगे सपनों के आगोश में खो जाने की बात हो      ... Read more
clicks 176 View   Vote 0 Like   3:10am 8 Mar 2015 #गिले-शिकवे
Blogger:  राजीव कुमार झा
                                                                                                यहां चेहरे तो लाखों हैं इंसां मगर दिखता नहीं   पत्थर हाथ में न रखो शीशे का मकां मिलता नहीं आदमी आदमी में जबसे भेद होने लगा है  हाथ म... Read more
clicks 154 View   Vote 0 Like   2:30am 28 Feb 2015 #चेहरे
Blogger:  राजीव कुमार झा
                                                                                               अपनों से दिल टूट गया गैरों में हम चलते हैंसुनने वाला कोई नहीं ख़त्म कहानी करते हैं उम्र भर रस्ता देखा आंखें भी पथराती रहीं इस राह आना ही नही... Read more
clicks 148 View   Vote 0 Like   2:30am 21 Feb 2015 #राह
Blogger:  राजीव कुमार झा
                                                साथ गर आपका जो मिल जाएसफ़र जिंदगी का आसां से कट जाए मन का बंद दरवाजा खुलने को है खुशबुओं की राह से जो गुजरा जाए  मौसम सर्दियों का जाने लगा हैधूप भी इतराती इठलाती आएहल हो जाएगा खुदबखुद एक दिन मसलों को सव... Read more
clicks 112 View   Vote 0 Like   2:30am 14 Feb 2015 #मलाल
Blogger:  राजीव कुमार झा
न चैन तुम्हें है न हमें आराम है दोनों की सुबह उदास और तनहा शाम है कभी दर्द बनकर कभी दवा बनकर रह गई उम्र फ़लसफ़ा बनकर रंजिश न बढ़ा न रहा जाए हर मुलाकात फासला बनकर     ... Read more
clicks 145 View   Vote 0 Like   2:17am 7 Feb 2015 #तनहाई
Blogger:  राजीव कुमार झा
कैसे-कैसे रंग दिखाती है जिंदगी कभी हंसाती कभी रुलाती है जिंदगी सफ़र ये कैसा है रूह भी थकने लगी मील के पत्थरों से टिककर हांफती है जिंदगी नींद के आगोश में कोई जाए कब तक एक आहट से सहमकर जागती है जिंदगी दुश्वारियों के बियाबां में घिरने लगे बंद दरवाजों से सहमकर झांकती है जिंद... Read more
clicks 172 View   Vote 0 Like   2:30am 31 Jan 2015 #रूह
Blogger:  राजीव कुमार झा
वसंत में बौराया है मनफगुनाहट की आहट हैपीले सरसों के गंध सुगंध सेउल्लासित कर जाता है मनवसंत में बौराया है मनवन उपवन टेसू फूलेवसंत के सज गए मेलेबर्फीले सफ़ेद चादरों सेढँक जाता है तन मनवसंत में बौराया है मननभ में विहग कलरव करतेबूँद बूँद पत्तों से झरतेमधुमय मधुमास सजाकर... Read more
clicks 171 View   Vote 0 Like   2:30am 24 Jan 2015 #मौसम
Blogger:  राजीव कुमार झा
फिर से खिले टेसूफिर से महकीमन की गलियांप्यार की गंध लिएआँचल मेंसजा बंदनवार मन का अनुराग सभी दृष्टि में निचुड़ गया सतरंगी सपनों का सागर उमड़ गया बिखर गई अंतस तक केसरिया चांदनी नीलकंवल छवि हुई हंसी के संतूर बजे शब्द-शब्द झरे जैसे मदिरा मधुर अंगूर उगे ... Read more
clicks 192 View   Vote 0 Like   2:30am 20 Jan 2015 #छवि
Blogger:  राजीव कुमार झा
                 हम जब भी मिला करते हैं           क्यों लोग गिला करते हैंकदम तपती राहों पर कब थमते हैं फूल प्यार के खिजां में खिला करते हैं तनहाइयों से डर क्यूँ जाते होआँखों के कटोरों को नम क्यों कर जाते हो फासले जमीं-आसमां के कब मिटा करते हैंदर्दे दिल यू... Read more
clicks 202 View   Vote 0 Like   2:30am 15 Jan 2015 #दिल
Blogger:  राजीव कुमार झा
                                                                        इक महका ख्वाब है तेरी आखें               मेरे ख़त का जबाब है तेरी आँखेंपलकें करें सजदा चाहत बनकर अदब का आदाब है तेरी आँखें जुबां का मेरे समझ लेती हैं पैगाम मेरे दिल की ... Read more
clicks 146 View   Vote 0 Like   2:23am 10 Jan 2015 #माहताब
Blogger:  राजीव कुमार झा
एक और वर्ष बीत गयाजिंदगी का हिसाब-किताब लगाके रखनाक्या खोया,क्या पाया कुछ याद नहींउम्मीदों का चराग जलाये रखनाटिमटिमाते दिये को बुझा देते हैं हवा के झोंकेहथेलियों में लौ को छुपाये रखनादूर कहीं गूंजी कोयल की कूकअश्कों से दामन को भिंगोकर रखनावक्त बड़ा बेरहम है नहीं स... Read more
clicks 181 View   Vote 0 Like   2:48am 3 Jan 2015 #वर्ष
Blogger:  राजीव कुमार झा
जबजागोतभीसवेराहैरौशनीआती मिटताअँधेराहैदरख्तोंसे छन कर आतीरहीहर तरफखुशबुओंकाडेराहैवीरानियोंमेंगूंजती आवाजेंफ़जांमेंपर्बतोंकाडेराहैहमसफ़र साथन चलेहम-तुमइकराहतेराइकराहमेराहैकितनेदिनबीतेरहगुजरनहींवीरानियोंमेंभूतोंकाडेराहैतेरीजहाँसे कायन... Read more
clicks 156 View   Vote 0 Like   3:00am 29 Dec 2014 #सुबह
Blogger:  राजीव कुमार झा
(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); सूनुं कौन सी दस्तकन जाने कितनी बार कितने द्वारों पर देता रहा दस्तक !जन्म हुआ तो माता-पिता ने दी अस्पतालों,चिकित्सकोंके दरवाजों पर दस्तक !काबिल हुआ अपने क़दमों से चलने लायक माता-पिता देते रहे अंग्रेजी स्कूलों में दस्तक !पर ! दस्तक मूक रही पैसों की खनखन... Read more
clicks 148 View   Vote 0 Like   3:00am 21 Dec 2014 #दस्तक
Blogger:  राजीव कुमार झा
नयन खुले खोये खोये सेकहीं यादों के खंडहर में कहीं भविष्य के प्रांगण मेंमन का पंछी बस में नहीं उड़ता फिरता सपनों के असीमित गगन मेंआधा आजसताता हैबीते कल की यादों में  आधा औरमहकता है आने वाले कल के सपनों में.... Read more
clicks 156 View   Vote 0 Like   2:44am 15 Dec 2014 #सपने
Blogger:  राजीव कुमार झा
हवाओं की करधनी पहनहंसती है चांदनी दूर देश यादों के बसती है चांदनी बाजूबंद   बिजली हैं       चाँद,चंद्रहार हैं   आँखों में अश्कों के भरे ज्वार हैं रात गएचंदा संगचमकती है चांदनी   ... Read more
clicks 196 View   Vote 0 Like   4:00am 30 Mar 2014 #चांदनी
Blogger:  राजीव कुमार झा
स्वप्न सुनहरे चमक उठे हैंनयनों की इस झील में जैसे झिलमिल करते तारे अंबर नील में चिकने कोमल फूल सरीखी दमके कंचन काया रूप अनल में बड़ा मनोरम अलकों वाला साया नव कोंपल अब वन में फूटी फैली गंध सुगंध कर बैठा है प्रणय आजकल मौसम से अनुबंध     ... Read more
clicks 194 View   Vote 0 Like   3:00am 4 Mar 2014 #तारे
Blogger:  राजीव कुमार झा
नेह के रथ से मिलेसंकेत अमलतास के लौट आए टहनियों के लालनीलेपंख वाले दिन मन पलाशों के खिले हैं हर घड़ी-पल-छिन अंग फिर खुलने लगे हैं फागुनी लिबास के अधर गुनगुना उठे,ह्रदय में सुमन खिले हैं आस के रंग रंगीले दिन आये हैं मधुर हास-परिहास केकौन पखेरू धुन मीठी यहघोल गया है कान में ... Read more
clicks 176 View   Vote 0 Like   3:00am 24 Feb 2014 #वसंत
Blogger:  राजीव कुमार झा
दर्द तो होता है मगर सहा नहीं जाता तू सामने भी है मगर कहा नहीं जाता जब से दोस्ती पत्थरों से की मैंने शीशे के मकां में मुझसे रहा नहीं जाताजिंदगी जहर ही सही मगर पिया नहीं जाता जीते थे पहले भी तेरे बिन अब रहा नहीं जाताराहों में मिल गए तो समझा हमसफ़र तुझे चल तो दिए मग... Read more
clicks 180 View   Vote 0 Like   3:00am 17 Feb 2014 #दर्द
Blogger:  राजीव कुमार झा
आँगन में पसरी है फागुन की धूपमौसम की महक हुई कितनी अनूप बिंब लगे बननेकितने रंगों में उतरने लगी उमंग तन के अंगों में भर उठे आशा से मन के सब कूप बस गया यौवन पेड़ों की शाखों पर उतरा है पराग मस्त   फूलों की शाखों पर आँखों में थिरकतेसपनों के सूप कांपते... Read more
clicks 181 View   Vote 0 Like   3:37am 10 Feb 2014 #फागुन
Blogger:  राजीव कुमार झा
खिल गए पलाश के फूलमंगल कुमकुमकलश मधुरसधूल धूसरित तनमटमैला रंगपास सड़कों सेदूर वनों तकखिल उठा पलाशवर्ष भर विस्मृतरहता अनजानपर अकस्मात्सुन पीहू पुकारमालकौंश रागचटकदार पुष्पलिए सूर्ख  सिंदूरी लाल ... Read more
clicks 206 View   Vote 0 Like   3:00am 20 Jan 2014 #फूल

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