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Blog: कविता मंच

Blogger: kuldeep thakur
 रमेशराज की तेवरियाँ ----------------------------------------------------------रमेशराज की तेवरी....1 .............................................हर कोई आहत मिलता है दर्दों में जड़वत मिलता |कुंठा जलन घुटन सिसकन का अब खुशियों को खत मिलता |नवयुवकों के अहंकार में एक महाभारत मिलता |अभिवादन को खड़ीं तल्खियाँ पीड़ा का स्वागत मिलता |सबके स... Read more
clicks 136 View   Vote 0 Like   3:15pm 25 Sep 2018 #
Blogger: kuldeep thakur
एक साधू किसी नदी के पनघट पर गया और पानी पीकर पत्थर पर सिर रखकर सो गया....!!!पनघट पर पनिहारिन आती-जाती रहती हैं!!!पनिहारिने आईं तो एक ने कहा- "आहा! साधु हो गया, फिर भी तकिए का मोह नहीं गया...पत्थर का ही सही, लेकिन रखा तो है।"पनिहारिन की बात साधू ने सुन ली...उसने तुरंत पत्थर फेंक दि... Read more
clicks 97 View   Vote 0 Like   9:33am 22 Aug 2018 #
Blogger: kuldeep thakur
शहरशहर ..... ही शहरहै,फैला हुआ,जहाँ तलक जाती नजर है शहर ..... ही शहरहै|फैली हुई कंक्रीट और का बड़ा अम्बार,वक्त की कमी से बिखरते रिश्ते,बढ़ती हुयी दूरी का कहर है,शहर ..... ही शहरहै|पैरो से कुचला हुआ,है अपनापन,बस खुद से खुद के साथ,विराना सफर है,शहर ...... ही शहरहै|मेरे दिल को ना भाया यह शह... Read more
clicks 210 View   Vote 0 Like   6:10am 12 May 2018 #Hindi
Blogger: kuldeep thakur
                      वो जो अक्सर फजर से उगा करते हैसुना है बहुत दिल से धुआं करते है।जलता है इश्क या खुद ही जल जाते हैकलमे में खूब चेहरे पढा करते है।फजल की बात पर खामोशी थमा देते हैबेवजह ही क्यों खुद को खुदा करते है?आयतें रोज ही लिखते है मदीने के लिएऔर अक्सर मगरिब ... Read more
clicks 139 View   Vote 0 Like   7:56am 11 May 2018 #
Blogger: kuldeep thakur
राजेश त्रिपाठी          वक्त कुछ इस कदर हम बिताते रहे ।दर्द  दिल  में  छिपा मुसकराते रहे ।।     जिसपे भरोसा किया उसने हमको छला।     परोपकार करके हमें क्या मिला।।     पंख हम बन गये जिनके परवाज के।     आज बदले हैं रंग उनके अंदाज के।। मुंह... Read more
clicks 157 View   Vote 0 Like   2:41pm 1 May 2018 #
Blogger: kuldeep thakur
पाँच लिंकों का आनन्द: 911... मेले- लोहड़ी-खिचड़ी की शुभकामनायें... Read more
clicks 144 View   Vote 0 Like   5:32am 17 Mar 2018 #
Blogger: kuldeep thakur
मंद मंद आंसू,आंखो में प्यास,सरकारी चिट्टीसूखा बदन,माथे से लगाए अपने खेत की मिट्टीदिल में उम्मीद,सीने में दर्द,भूखा और प्यासाकल दिखा इक किसान मुझे ओढ़े निराशाबंगला था साहब का,साहब भी आलीशान थाबैठा था बाहर भूखा इसी देश का किसान थावो आया था आशा लिए,संग लिए बेटी छोटीएक पन... Read more
clicks 162 View   Vote 0 Like   9:47am 16 Mar 2018 #
Blogger: kuldeep thakur
कविता मंच का बहुत बहुत आभार आपने मुझे अपने ब्लॉग पक आमंत्रित किया ।।दो पंक्तियो मे मेरा परिचयशिव शंकर का डमरू बाजे ताण्डव करे भयंकर ।उन शिव की मै पूजा करता मेरा नाम भयंकर ।।... Read more
clicks 138 View   Vote 0 Like   10:36am 15 Mar 2018 #
Blogger: kuldeep thakur
सोचता हूँ गढ़ दूँ मैं भी अपनी मिट्टी की मूर्ति, ताकि होती रहे मेरे अहंकारी-सुख की क्षतिपूर्ति। मिट्टी-पानी का अनुपात अभी तय नहीं हो पाया है, कभी मिट्टी कम तो कभी पर्याप्त पानी न मिल पाया है। जिस दिन मिट्टी-पानी का अनुपात तय हो जायेगा, एक सुगढ़ निष... Read more
clicks 161 View   Vote 0 Like   2:00pm 13 Mar 2018 #रवीन्द्र सिंह यादव
Blogger: kuldeep thakur
दर्द  दिल  में  छिपा मुसकराते रहेराजेश त्रिपाठीवक्त कुछ इस कदर हम बिताते रहे ।दर्द  दिल  में  छिपा मुसकराते रहे ।।     जिसपे भरोसा किया उसने हमको छला।     परोपकार करके हमें क्या मिला।।        पंख हम बन गये जिनके परवाज के।       आज बदले हैं ... Read more
clicks 169 View   Vote 0 Like   5:47am 7 Mar 2018 #
Blogger: kuldeep thakur
हमारी पौराणिक कथाऐं कहती हैं होली की कथा निष्ठुर ,एक थे भक्त प्रह्लाद पिता  जिनका हिरण्यकशिपु  असुर। थी उनकी बुआ होलिका थी ममतामयी माता कयाधु ,दैत्य कुल में जन्मे  चिरंजीवी प्रह्लाद साधु। ईश्वर भक्ति से हो जाय विचलित प्रह्लाद पिता ने किये नाना प... Read more
clicks 189 View   Vote 0 Like   5:42am 2 Mar 2018 #होली की कथा
Blogger: kuldeep thakur
Monday, November 1, 2010मैं बदन बेचती हूँ--मैं बदन बेचती हूँ--उस औरत के तन काकतरा-कतरा फुट बहा है तभी तो चीख-चीख कहती हाँ मै बदन बेचती हूँ अपनी तपिश बुझाने को नही पेट की भूख मिटाने को नही मै बेचती हूँ बदन ,हां बेचती हूँ मै भूख से बिलखते रोते -कलपते दो नन्हे बच्चो के लिए मैं अ... Read more
clicks 246 View   Vote 0 Like   5:18pm 5 Feb 2018 #
Blogger: kuldeep thakur
चली वासन्ती मलयनभ्रमरों का ये अनुगूंजन हैनवकलियों का यौवनदेता निश्छल आमन्त्रण हैकामदेव का रति सेचला प्रणय अनुराग हैबावली बन फिर रहीतितली बैठी पराग है।वासन्ती रंग रँगी वसुधाफिजां में छाई बहार है।फूलों का ओढ़ चादरप्रेमरस भरा श्रृंगार है।रस से भीगी है रसा जोबनी हर क... Read more
clicks 157 View   Vote 0 Like   12:11am 27 Jan 2018 #
Blogger: kuldeep thakur
मधुमास के प्रथम दिवस मेंहै प्रियम का ये अभिनन्दन प्रियेपूर्णचन्द्र की क्षीण कला सीअम्बर को छूती चपला सीलहराई यूँ कनक लता सीधरा अम्बर का है ये मिलन प्रिये।अंतर की मधुमयी विकलताअधरों में छलकी थिरकन सांसों के मनमोहक सुर मेंपलकों का निश्चल आमन्त्रण प्रिये।याद कर रही ... Read more
clicks 119 View   Vote 0 Like   9:34am 22 Jan 2018 #पंकज भूषण पाठक "प्रियम"
Blogger: kuldeep thakur
जब अजनबी थे हमतुमने मुझे जानना चाहामैंने भी हंसकरअपने बारे में तुम्हें बतायाहम दोस्त बनेजब तुमने दोस्ती का हाथ बढ़ायाफिर तुमने मुझे प्रेमिका कहाजब मैंने प्रेम में अपना सर्वस्व समर्पण कर दियातो सबसे पहलेतुमने ही मुझेबनाया ‘वेश्या’! ... Read more
clicks 138 View   Vote 0 Like   10:30pm 19 Jan 2018 #
Blogger: kuldeep thakur
शहर में कोई हिन्दू मरामैं इसके खिलाफ हूंकोई मुस्लिमदंगों का शिकार हुआमैं उसके खिलाफ हूंकिसी सिक्ख के धर्म का अपमान हुआमैं उसके भी खिलाफ हूंकिसी ईसाई को अपने ही देश मेंविदेशी कह कर मारा जाएमैं इसके भी खिलाफ हूंमैं लडूंगीहर धर्म हर सम्प्रदायमें होने वाली हर ज्यादती ... Read more
clicks 145 View   Vote 0 Like   10:30pm 18 Jan 2018 #
Blogger: kuldeep thakur
सुजान न लेवहिं नाम यह तलाक न उमदह नाम।घ्रणित काम यह अति बुरा नहिं असलौं का काम।नहिं असलौं का काम नारि जो अपनी छोड़ै।करैं श्‍वान का काम हाथ दुसरी से जोडै़।।कहैं रहमान बसें खग मिलकर जो मूर्ख अज्ञान।कहु लज्‍जा है की न‍हीं दंपति लडै़ सुजान।। ... Read more
clicks 162 View   Vote 0 Like   10:30pm 17 Jan 2018 #
Blogger: kuldeep thakur
माँ, मैं शून्य था।तुम्हारी कोख में आने से पहलेशून्य आकार था। एकदम शून्यआपने जीवन दिया मुझे...अंश बना तुम्हारा...अनेक उपकार हैं तुम्हारेमैं आहवान करता हूँ माँ तुम्हारा!..............................................लिखी रेत पे कवितालिखा नाम तुम्हारालिखा क़लमा...परवाज़ रूह हो गयीजुगनू की रोशनी में...... Read more
clicks 135 View   Vote 0 Like   10:30pm 16 Jan 2018 #
Blogger: kuldeep thakur
ख्वाहिश मुझे जीने की ज़ियादा भी नहीं हैवैसे अभी मरने का इरादा भी नहीं हैहर चेहरा किसी नक्श के मानिन्द उभर जाएये दिल का वरक़ इतना तो सादा भी नहीं हैवह शख़्स मेरा साथ न दे पाऐगा जिसकादिल साफ नहीं ज़ेहन कुशादा भी नहीं हैजलता है चेरागों में लहू उनकी रगों काजिस्मों पे कोई ज... Read more
clicks 118 View   Vote 0 Like   10:30pm 15 Jan 2018 #
Blogger: kuldeep thakur
वो  हमको   ऐसा  बिसराये,  सावन   मेंआंख में आंसू भर—भर आये, सावन मेंबिजली  चमके  बादल  गरजे,  डर जाउंरिमझिम मन में प्यास जगाये,सावन मेंखिलते  फूल  महकती कलियां, न भायेंपुरवा   बैरन  आग  लगाये ,सावन   मेंइतना  हरजाई  निकलेगा,  सनम मेराइश्क&nbs... Read more
clicks 152 View   Vote 0 Like   6:30am 15 Jan 2018 #सुदेश यादव जख्मी
Blogger: kuldeep thakur
अगर ख़ुदा न करे सच ये ख़्वाब हो जाए तेरी सहर हो मेरा आफ़ताब हो जाए हुज़ूर! आरिज़ो-ओ-रुख़सार क्या तमाम बदन मेरी सुनो तो मुजस्सिम गुलाब हो जाए उठा के फेंक दो खिड़की से साग़र-ओ-मीना ये तिशनगी जो तुम्हें दस्तयाब हो जाए वो बात कितनी भली है जो आप करते हैं सुनो तो सीने की धड़कन रब... Read more
clicks 125 View   Vote 0 Like   10:30pm 13 Jan 2018 #
Blogger: kuldeep thakur
अगर कुछ दाँव पर रख दें, सफ़र आसान होगा क्यामगर जो दाँव पर रखेंगे वो ईमान होगा क्याकमी कोई भी वो ज़िन्दगी में रंग भरती हैअगर सब कुछ ही मिल जाए तो फिर अरमान होगा क्यामगर ये बात दुनिया की समझ में क्यों नहीं आतीअगर गुल ही नहीं होंगे तो फिर गुलदान होगा क्याबगोला-सा कोई उठता है... Read more
clicks 167 View   Vote 0 Like   10:30pm 12 Jan 2018 #

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