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Blog: पूनम वाणी

Blogger: विजय राज बली माथुर
 अपने आप को परछाईं से बचाएं :चंद्रमा तारों और ग्रहों के साथ घूमता ही रहता है । वह तो जहां है वहीं है पर इंसान का मन भ्रमित रहता है इसलिए उसे परछाईं ही नज़र आती है ,अपनी नज़र से परछाईं को हटाएँ और वास्तविकता को समझें ।  ... Read more
clicks 120 View   Vote 0 Like   3:22pm 23 Oct 2013 #वास्तविकता
Blogger: विजय राज बली माथुर
 अपने अंदर के अहंकार को खत्म करें---... Read more
clicks 126 View   Vote 0 Like   10:54am 22 Oct 2013 #
Blogger: विजय राज बली माथुर
   Gaurav Singhal Senior Journalist's status.24 minutes ago 15 अक्तूबर 2013 एक आदमी बकरा काटरहा था,तभी बकरा हंसने लगा,आदमी बोला, मैँ तुझे काट रहा हूं, और तू हंसरहा हैबकरा बोला - ये सोच कर हंस रहा हूं कि मैँ तो जिँदगी भर घासखाता रहा, फिरभी मुझे इतनी दर्द नाक मौत मिल रही है,तूने तो जिंदगी भर दूसरोँ को मारकर खाया... Read more
clicks 99 View   Vote 0 Like   12:13pm 16 Oct 2013 #नज़मा हेपतुल्ला
Blogger: विजय राज बली माथुर
हर साल : बांस की खप्पचियों से बने रावण को फूंकने वालों रुको ,ढूंढो इसके इर्द -गिर्द खड़ी भीड़ में उन रावणोंको ढूंढो जो नित्य ही सीताओं का हरण ही नहीं बलात्कार के बाद उसकी हत्या भी करते हैं । क्या इससे यह रावण अच्छा नहीं जिसकी कैद में सीता की पवित्रत... Read more
clicks 102 View   Vote 0 Like   3:37am 13 Oct 2013 #रावण
Blogger: विजय राज बली माथुर
जल के बिना किसी का भीजीवित रहना बहुत मुश्किल है। इसीलिए जल को अमृत भी कहा गया है। हमारे देश में 'गंगा जल' को विशेष स्थान और महत्व दिया गया है। क्यों? निम्नलिखित स्कैन कापी में जिन तथ्यों का उल्लेख है उनके अतिरिक्त जो विशेष तथ्य है और जिसका उल्लेख नहीं किया गया है उसी ओर ध... Read more
clicks 101 View   Vote 0 Like   6:52am 11 Oct 2013 #गंगा जल
Blogger: विजय राज बली माथुर
 पेड़ देते छाया मत काटो उसकी काया :ध्वनि प्रदूषण से बचने के लिए अधिक से अधिक पेड़ लगाएँ । पेड़ सिर्फ छाया,फल-फूल ही नहीं देते हैं बल्कि बहरा तक कर देने वाले 'शोर' को भी पी लेते हैं और इस प्रकार मानव जीवन के लिए बहुत उपयोगी हैं। ... Read more
clicks 91 View   Vote 0 Like   1:24pm 10 Oct 2013 #मानव जीवन
Blogger: विजय राज बली माथुर
सबेरे सबेरे जब उठनी एखबार 'नई दिशाएँ'देखनी। ओकर पन्ना तीन पर देखनी एक गो चोर बूढ़ी औरत के साईकिल  लौटाल देलस । पढ़ के त मन बड़ा खुस हो गईल।  जब इंटर में पढ़त रहनी त एगो अङ्ग्रेज़ी के कविता पढ़ले रहीं   ओकरा में लिखल रहे 'CHILD IS THE FATHER OF MAN'। बच्चा के बड़ा रूप मनुष्य होला। लोग कहेला बच्... Read more
clicks 87 View   Vote 0 Like   11:53am 7 Oct 2013 #पइसा
Blogger: विजय राज बली माथुर
(इस ब्लाग की आज वर्षगांठ पर दो  वर्ष पूर्व शुक्रवार, 25 फरवरी 2011को प्रकाशित इस लेख को पुनर्प्रकाशित किया जा रहा है जो कि स्वम्य लेखिका को बेहद पसंद है ---विजय राजबली माथुर)  हमार भईय्या जब रेल से घरे आवत रहलन तब ट्रेन में उनकर साथी लोगन कहलन कि हमनी के त बहुत तरक्की कर ले ल... Read more
clicks 80 View   Vote 0 Like   4:08am 6 Oct 2013 #निमको रोटी
Blogger: विजय राज बली माथुर
कुछ सहेलीसुलझाए पहेलीकरती ठिठोलीसिर- माथे रोली  अविरल जीवन शैलीप्रखर मौलीयश खुशहालीदेश सम्हालीकोयल बोलीडाली-डालीउम्मीद हरियालीबगिया फूल वालीगदगद मालीसबको थालीपेट न खालीजेब सिक्कों वालीदिन होलीरात दीवालीबजाएँ तालीकव्वाली मतवालीअतीत गौरवशालीवर्तमान शक्त... Read more
clicks 103 View   Vote 0 Like   10:37am 5 Oct 2013 #सहेली
Blogger: विजय राज बली माथुर
 (1 )बात  है :परसों की है बातबना रही थी रोटी सातकलम और कागज की है बात  चकले  और बेलन की है बात न कागज था न दवात आ रहे थे मन में खयालात चूल्हे पर सेंक रही थी रोटी कभी चकले पर रोटी कभी तवे पर रोटी ख्याल आ -जा रहे थे जैसे पकने और जलने जैसे हाथ का काम कलम से भी था ह... Read more
clicks 131 View   Vote 0 Like   10:33am 4 Oct 2013 #समय
Blogger: विजय राज बली माथुर
गांधी शास्त्री जयंती  पर स्मरण :(1)बापू गांधी को टांग दीवार परश्रद्धांजलि देने का स्वांग करते 30 जनवरी परचलते नहीं उनकी लीक लकीर परबना महात्मा फूल चढाते दरो दीवाल  पर कैसा अंजाम किया इस फकीर परचाहते नहीं संसार के प्राणियों से प्यार करना परहरि व जन का  क्या जानें सम्... Read more
clicks 76 View   Vote 0 Like   6:29am 2 Oct 2013 #अहिंसा
Blogger: विजय राज बली माथुर
सूखी रोटी खाइये साईकिल पर चलिये पेट्रोल को आईना दिखाये प्रभु के गुण गाईये दिल की बीमारी से निजात पाईये प्रदूषण को मत बढ़ाइये सिगरेट और धूम्रपान से अपने को बचाईयेएक पेड़ लगाइयेहरियाली पाइयेसभी के जीवन को स्वस्थ बनाइयेकुदरत का खजाना पाइयेपानी कम गिराइयेप्र... Read more
clicks 73 View   Vote 0 Like   4:05am 29 Sep 2013 #
Blogger: विजय राज बली माथुर
जीवन में धैर्य मुश्किलों को आसान बना देता है तो दूसरों की प्रशंसा करके आत्म-संतोष भी मिलता है और सही कार्यों को प्रोत्साहन भी। इसी के साथ -साथ कभी-कभी 'ना' कहना भी बेहद ज़रूरी होता है। प्रस्तोता---पूनम माथुर ... Read more
clicks 99 View   Vote 0 Like   9:50am 26 Sep 2013 #धैर्य
Blogger: विजय राज बली माथुर
मतलब से लोग पूछा करते हैंमतलब निकल जाने के बाद भगाया करते हैंमतलब से लोग गधों कोभी  बाबा कहा करते हैंमतलब निकाल कर माँ-बाप को घर से निकाला करते हैंमतलब निकल जाने पर दुनिया वाले धक्का दिया करते हैंमतलब से दुनिया को सलाम किया करते हैंमतलब की है दुनिया,लोग बेमतलब के हुआ ... Read more
clicks 92 View   Vote 0 Like   2:30am 25 Sep 2013 #मतलब
Blogger: विजय राज बली माथुर
क्या ले के आए थे सपनाकोई नहीं है जग  में अपनासब हैं मृग मरीचिका के सतायेदुनिया में हैं सब अपने को बहलाये  सब  हैं बेगाने कहने को चले अपनेये क्या जाने खुदा के बनायेतीर   औरों पे  कहीं चलाये निशाना कहीं और लगायेचले किसी को गले लगानेपर क्या फायदा अपने को बचायेसब क... Read more
clicks 95 View   Vote 0 Like   3:40am 24 Sep 2013 #सपना
Blogger: विजय राज बली माथुर
विश्व बेटी दिवस पर : सम्मान करें बेटियों का मान करें बेटियों का अपमान न करें बेटियों का विज्ञापन न करें बेटियों का वरदान समझें बेटियों को योगदान समझें बेटियों का बेटियों को न मसलें न कुचलें सारा संसार है आपकी बगिया । । (दुनिया की सभी बेटियों को मेरी ओर ... Read more
clicks 96 View   Vote 0 Like   2:24pm 22 Sep 2013 #
Blogger: विजय राज बली माथुर
सभी छोटे-बड़ों का  कृतज्ञता दिवस के अवसर पर हार्दिक आभार ---पूनममाथुर ... Read more
clicks 187 View   Vote 0 Like   12:48pm 21 Sep 2013 #
Blogger: विजय राज बली माथुर
"मृत सी जीवन शैली को,ना जाने किसने सजीव कहा।हम भी भारत के बालक है,क्या हमको ही देश की नींव कहा।। .हमें दिनभर है मैला ढौना,चंद टुकड़ों के लिए है रोना।भुखे पेट प्यासी प्यास लेकर,फुटपाथ पर रोज हमें सोना।गरीबी रेखा के नीचे होने से,हमारा भी एक मकान बना।फिर उस मकान की छत के नीच... Read more
clicks 108 View   Vote 0 Like   10:38am 19 Sep 2013 #भारत के बालक
Blogger: विजय राज बली माथुर
एक गरीब बच्चे की नज़र से:-सिक्कों में खनकते हर एहसास को देखा..आज फिर मैंने अपने दबें हाल को देखा...अंगीठी में बन रही थी जो कोयले पे रोटियाँ..आज फिर मैंने अपनी माँ के जले हाथ को देखा...बट रही थी हर तरफ किताबे और कापियाँ..आज फिर मैंने अपने हिस्से के कोरे कागज़ को देखा...सज रही थी हर त... Read more
clicks 221 View   Vote 0 Like   9:41am 14 Sep 2013 #
Blogger: विजय राज बली माथुर
भारत की स्वाधीनता की 67 वीं वर्षगांठ पर समस्त देशवासियों को हार्दिक मंगलकामनाए ... Read more
clicks 69 View   Vote 0 Like   2:30am 15 Aug 2013 #
Blogger: विजय राज बली माथुर
इसे प्रभु की माया कहें या लीला।उत्तराखंड में जो कहर बरपा है। क्या आप पत्थर के भगवान को पूजने जा रहे थे? इससे तो कहीं अच्छा होता कि,रक्त दान या अंग दान कर देते तो परमात्मा की इस दुनिया को संवार सकते थे जबकि अब सम्पूर्ण अंग सड़ रहे हैं ,बह रहे हैं और प्रदूषण फैला रहे हैं। परमा... Read more
clicks 107 View   Vote 0 Like   12:40pm 25 Jun 2013 #अक्ल

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