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Blog: अनवर सुहैल का रचना संसार

Blogger: anwar suhail
समीक्षा: उपन्यास ‘पहचान’ किसी भी समाज को गर अच्छी तरह से जानना-पहचाना है, तो साहित्य एक बड़ा माध्यम हो सकता है। साहित्य में जिस तरह से समाज की सूक्ष्म विवेचना होती है, वैसी विवेचना समाजशास्त्रीय अध्ययनों में भी मिलना नामुमकिन है। कोई उपन्यास, कहानी या फिर आत्मकथ्य जिस ... Read more
clicks 77 View   Vote 0 Like   2:53pm 22 Jun 2013 #
Blogger: anwar suhail
हिना फिरदौस की पेंटिंग उसने मुझसे कहाये क्या लिखते रहते होगरीबी के बारे मेंअभावों, असुविधाओं,तन और मन पर लगे घावों के बारे में रईसों, सुविधा-भोगियों के खिलाफउगलते रहते हो ज़हर निश-दिन, चारों पहरतुम्हे अपने आस-पासक्या सिर्फ दिखलाई देता हैअन्याय, अत्याचारआतंक, भ्रष्टाच... Read more
clicks 205 View   Vote 0 Like   2:52pm 20 Jun 2013 #
Blogger: anwar suhail
-के रवीन्द्र का रेखांकन-उनके जीवन में है दुःख ही दुःखऔर हम बड़ी आसानी से कह देतेउनको दुःख सहने की आदत है...वे सुनते अभाव का महा-आख्यानवे गाते अपूरित आकांक्षाओं के गानचुपचाप सहते जाते जुल्मो-सितमऔर हम बड़ी आसानी से कह देतेअपने जीवन से ये कितने सतुष्ट हैं...वे नही जानते कि उन... Read more
clicks 135 View   Vote 0 Like   2:16pm 18 Jun 2013 #
Blogger: anwar suhail
कब मिलेगी फुर्सत कब मिलेगा मौका कब बढ़ेंगे कदम कब मिलेंगे हम अब्बू आपसे...बेशक, आप खुद्दार हैं बेशक, आप खुद-मुख्तार हैं बेशक, आप नहीं देना चाहते तकलीफ         अपने वजूद से,                       किसी को भी बेशक , आप नहीं बनना चाहते                    बोझ किसी पर..तो क्या इसी बिना पर हम आपक... Read more
clicks 82 View   Vote 0 Like   3:13pm 11 Jun 2013 #
Blogger: anwar suhail
के रवीन्द्र की पेंटिंग उसके जाते हीबदल गए उसके लोगकरते थे जो निश-दिनउसका कीर्ति-गानउनका था ऐसा आचरणजैसे वे हों खानदानी भाट-चारणजबकि उसनेजो भी कदम उठायेगलत ही उठायेलेकिन उसके मुरीदसाधे रहे  चुप्पीकहीं नहीं था कोई विरोधउसके डर सेतथा-कथित योद्धाओं के तलवारजंग खाते र... Read more
clicks 136 View   Vote 0 Like   3:21pm 8 Jun 2013 #
Blogger: anwar suhail
मेरी कविताओं मेंनही दीखते उड़ान भरते पंछीनहीं दीखता शुभ्र-नीला आकाशनही दीखते चमचमाते नक्षत्रनही दीखता अथाह विशाल समुद्रनही दीखता सप्तरंगी इन्द्रधनुषक्या ऐसा इसलिए हैकि भूमिगत कोयला खदान के अँधेरों मेंखो गयी मेरी कल्पना शक्तिखो गयी मेरी सृजनात्मक दृष्टिखो गयी म... Read more
clicks 90 View   Vote 0 Like   3:53pm 28 May 2013 #
Blogger: anwar suhail
अद्भुत कला हैबिना कुछ कियेदूजे के कामों कोखुद से किया बताकरबटोरना वाहवाही...जो लोगमहरूम हैं इस कला सेवो सिर्फ खटते रहते हैंकिसी बैल की तरहकिसी गधे की तरहऐसा मैं नही कहताये तो उनका कथन हैजो सिर्फ बजाकर गालदूसरों के किये कामों कोअपना बताकर गिनाते अपनी उपलब्धियां...क्य... Read more
clicks 131 View   Vote 0 Like   2:51pm 26 May 2013 #
Blogger: anwar suhail
कैप्शन जोड़ेंज़रूरी नहीं कि हम पीटें ढिंढोरा कि हम अच्छे दोस्त हैं कि हमें आपस में प्यार है कि हम पडोसी भी हैं कि हमारे साझा रस्मो-रिवाज़ हैं कि हमारी मिली-जुली विरासतें हैं कतई ज़रूरी नहीं है ये कि हम दुनिया के सामने अपने प्यार का इज़हार करें क्योंकि जब दोस्ती टूटती है जब प... Read more
clicks 107 View   Vote 0 Like   2:58pm 10 Mar 2013 #
Blogger: anwar suhail
जाने क्यों आजकल जब भी देखता / सुनता हूँ ख़बरें तो धड़कते दिल से यही सुनना चाहता हूँ न हो किसी आतंकी घटना में किसी मुसलमान का हाथ...अभी जांच कार्यवाही हो रही होती है कि आनन्-फानन टी वी करने लगता घोषणाएं कि फलां ब्लास्ट के पीछे है मुस्लिम आतंकवादी संगठन...बड़ी शर्मिंदगी होती है ... Read more
clicks 82 View   Vote 0 Like   3:39pm 26 Feb 2013 #
Blogger: anwar suhail
मेरे यह सब कहने का मतलब यह नहीं है कि आज के जो भी जन आंदोलन हैं उनसे जुड़ी कविताएं एकदम नहीं लिखी जा रही हैं। ऐसी कविताएं लिखी जा रही हैं, पर वे कविताएं और कवि, हिन्दी कविकी मुख्यधरा से अलग हाशिये पर हैं और हाशिये की जिन्दगी की कविता लिखते हैं।अभी हाल में लीलाध्र मंडलोई क... Read more
clicks 74 View   Vote 0 Like   3:11pm 21 Feb 2013 #
Blogger: anwar suhail
सफल पुरुष होता है एक अच्छा अभिनेता भी...सफल पुरुष होता है जिद्दी, सनकी, आत्म-केंद्रित...सफल पुरुष ... रखता है जिस सीढ़ी पर कदम उसके नीचे के पायदान तोड़ देता है ताकि चढ़े न कोई और पहुंचे न कोई और उन बुलंदियों तक जहां गाडना है झंडे सफल पुरुष को...भूल जाता है सफल पुरुष अपने बीते दिन पु... Read more
clicks 92 View   Vote 0 Like   2:36pm 18 Feb 2013 #
Blogger: anwar suhail
पुराने लोग कहते हैं भरता है पाप का घडाएक दिन ज़रूर अन्याय का होता है अंत और मजलूम जनता के दुःख-दर्द दूर हो जाते हैं उस दिन...पुराने लोग कहते हैं इंसान को दुःख से नहीं चाहिए घबराना कि सोना भी निखरता है आग में तप-कर रंग लाती है हिना पत्थर में घिस जाने के बाद....पुराने लोग कहते है... Read more
clicks 86 View   Vote 0 Like   3:22pm 6 Feb 2013 #
Blogger: anwar suhail
reviw of hindi novel pehchan published by rajkamal prakashan review by Zahid Khan ... Read more
clicks 96 View   Vote 0 Like   2:47pm 3 Feb 2013 #
Blogger: anwar suhail
पहचान (pehchan): poster kavita: poster made by K Ravindra...... Read more
clicks 81 View   Vote 0 Like   1:07pm 28 Jan 2013 #
Blogger: anwar suhail
poster made by K Ravindra...... Read more
clicks 88 View   Vote 0 Like   12:45pm 28 Jan 2013 #
Blogger: anwar suhail
के रविन्द्र की पेंटिंग मेरी कविताओं में     नही दीखते उड़ान भरते पंछी नहीं दीखता शुभ्र-नीला आकाश नही दीखते चमचमाते नक्षत्र नही दीखता अथाह विशाल समुद्र नही दीखता सप्तरंगी इन्द्रधनुष क्या ऐसा इसलिए है कि भूमिगत कोयला खदान के अँधेरों में खो गयी मेरी कल्पना शक्ति खो गयी ... Read more
clicks 109 View   Vote 0 Like   1:35pm 25 Jan 2013 #
Blogger: anwar suhail
हिना फिरदौस मेरी बिटिया वह बोलती रेखाओं की भाषा जीवन की इक नई परिभाषा देती पिता को भरपूर दिलासा पापा "मुझमे है आशा ही आशा!"... Read more
clicks 92 View   Vote 0 Like   2:56pm 19 Jan 2013 #
Blogger: anwar suhail
तुम कैसे बहके-बहके हो तुम कैसे उलझे-सुलझे हो तुम कैसी बातें करते हो तुम कैसी हरकत करते हो कोई जान नहीं पाता है कोई बूझ नहीं पाता है सब तुमसे डरते रहते हैं सब तुमरी बातें करते हैं चाहे तुम उनको देखो न चाहे तुम उनको चाहो न चाहे तुम उनको दुतकरो फिर भी वो तुमपे मरते हैं सब तुमस... Read more
clicks 82 View   Vote 0 Like   2:26pm 19 Jan 2013 #
Blogger: anwar suhail
मत भेजो मुझे प्यार भरे एसएमएसथोक भाव में समय-कुसमय रात-बिरात....मुझे मालूम है नही बना सकते तुम, भावनाओं से ओत-प्रोत ऐसे संदेशे... नही लिख सकते तुम प्रेम-प्रीत में डूबी ऐसी पंक्तियाँ...इन्हें ज़रूर किसी और ने भेजा है तुम्हें जिसे तुम बिना सोचे-समझे कर देते हो अग्रसारित...कि मैं... Read more
clicks 76 View   Vote 0 Like   3:09pm 14 Jan 2013 #
Blogger: anwar suhail
चलो अच्छा हुआ तुमने खुद कर लिया किनारा तुमने खुद छुडा लिया दामन तुमने खुद बचा लिया खुद को ..................................मुझसेमेरी परछाई भी अब नही पड़ेगी तुम पर तुम निश्चिन्त रहो कागज़ के उन पन्नों से क्यों डरते हो वे तो मैं नष्ट कर दूँगा उन तस्वीरों से क्यों डरते हो उन्हें मैं जला दूँगा हा... Read more
clicks 82 View   Vote 0 Like   2:10pm 4 Dec 2012 #
Blogger: anwar suhail
 K RAVINDRA'S PAINTINGS तुम बुड्ढे हो गए पिताअब तुम्हें मान लेना चाहिएआने वाला है ‘द एण्ड’तुम बुड्ढे हो गए पिताकि तुम्हारा इस रंगमंच मेंबचा बहुत थोड़ा-सा रोलज़रूरी नहीं कि फिल्म पूरी होने तकतुम्हारे हिस्से की रील जोड़ी ही जाएइसलिए क्यों इतनी तेज़ी दिखाते होचलो बैठो एक तरफबच्... Read more
clicks 103 View   Vote 0 Like   1:03pm 17 Nov 2012 #
Blogger: anwar suhail
फिर कम आने लगे मज़दूर फिर रुकने लगा खदान का विकासफिर खिलखिलाने लगे खलिहानफिर वयस्त हुए किसान... ये फसल कटाई का उत्सव है दोस्तोंये सपने पूरे होने की अलामतें हैंये आशा और विश्वास वाले दिन हैंये एक साल और जी लेने की ख्वाहिशें हैं...देखो तो कितने खुश हैं किसान कितनी प्रफुल्ल... Read more
clicks 71 View   Vote 0 Like   1:27pm 1 Nov 2012 #
Blogger: anwar suhail
सबूत कर रहा हूं इकट्ठा वो सारे सबूतवो सारे आंकडे जो सरासर झूटे हैंऔर जिसे बडी खूबसूरती सेतुमने सच का जामा पहनाया हैकितना बडा छलावा हैमेरे भोले-भाले मासूम जनब-आसानी आ जाते हैं झांसे मेंओ जादूगरों ओ हाथ की सफाई के माहिर लोगोंतुम्हारा तिलस्म है ऎसाकि सम्मोहित से लोग कर ... Read more
clicks 86 View   Vote 0 Like   1:53pm 24 Oct 2012 #
Blogger: anwar suhail
जुनून (चित्रकार के रवीन्द्र के लिए) होना चाहिए जुनून तभी मिल सकता है सुकून वरना किसे फुर्सत है किसी का नाम ले तुम्हारा जुनून ही तुम्हारी पहचान है जो देती है तुम्हें नित नई ऊंचाईयां नित नई उडान..... ... Read more
clicks 79 View   Vote 0 Like   3:31pm 23 Oct 2012 #
Blogger: anwar suhail
उसके बारे में प्रचलित है कि वह थकता नहीं वह हंसता नहीं वह रोता नहीं वह सोता नहीं उसके बारे में प्रचलित है कि डांटने-गरियाने का उस पर असर नहीं होता बडा ही ढीठ होता है चरित्र इनका पिन चुभोने से या कोडा मारने से उसे दर्द नहीं होता उसे लगती नहीं ठंड गरमी और बरसात कहते हैं कि उ... Read more
clicks 98 View   Vote 0 Like   2:10pm 21 Oct 2012 #

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