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Blog: नीड़ का निर्माण फिर-फिर...

Blogger: डा. गायत्री गुप्ता 'गुंजन'
सुन्दरता को हमारेसमाजनेसर्वोच्चस्थानपरस्थापितकरदियाहै... यहीवजहहैकिआजशारीरिकऔरमानसिकरूपसेअपंगलोगोंकेप्रतिसमाजकाव्यवहारबहुतहीगंदाहै,क्योंकिउनकाशरीरऔरचेहराविकृतहोजाताहै, जिससेवेइनकी SO CALLED सुन्दरताकीकसौटीपरखरेनहींउतरते...भलेहीवोकितनेहीगुणवानक्योंन... Read more
clicks 177 View   Vote 0 Like   7:41am 13 Dec 2013 #
Blogger: डा. गायत्री गुप्ता 'गुंजन'
गांधीजी को श्रद्धांजलि की श्रृंखला में आज एक और कड़ी...  सबसे ज्यादा अगर लोग गाँधी को किसी बात पर धिक्कारते नज़र आते हैं तो वो इस बात पर कि उन्होंने देश का बंटवारा करवा दिया... साथ ही वो लोग भी जो ऐसा नहीं मानते, उनके मन में भी कभी-२ ये प्रश्न ज़रूर उठता होगा कि क्यों, आखिर... Read more
clicks 171 View   Vote 0 Like   7:29am 2 Dec 2013 #
Blogger: डा. गायत्री गुप्ता 'गुंजन'
आपके लेखन पर किसी की टिप्पणी या समीक्षा। कितना महत्व है इन मामूली से दिखने वाले दो शब्दों का। अगर गहराई में जाकर देखें, तो ये मामूली से दिखने वाले शब्द भी बड़े असरदार साबित हो सकते हैं, आपके लेखन को नई दिशा देने में; बशर्ते आप उन्हें सही अर्थों में आत्मसात करें। कई बार उन ... Read more
clicks 202 View   Vote 0 Like   3:50am 14 Sep 2013 #
Blogger: डा. गायत्री गुप्ता 'गुंजन'
अपराजिता नाम था उसका और अपने नाम के अनुरुप ही कभी हार नहीं मानी उसने। वक्‍त की हर ठोकर को अपने मनोबल से उसने एक नया मुकाम दिया।अपने माता-पिता की एकमात्र सन्‍तान थी वो। उसके माता-पिता ने उसे लेकर जो सपने देखे थे, वो उस वक्‍त चूर-2 हो गये; जब 5 वर्ष की उम्र में पोलियो ने उसे व... Read more
clicks 173 View   Vote 0 Like   5:23am 5 Aug 2013 #
Blogger: डा. गायत्री गुप्ता 'गुंजन'
बहुत पहले मैंने एक फ़िल्म देखी थी ‘मेरी सूरत, तेरी आँखें’। इस फ़िल्म ने मेरे मन पर एक गहरा प्रभाव छोड़ा और सोचने पर मजबूर कर दिया कि क्या तन की सुन्दरता इतनी आवश्यक होती है, जिसके ना होने पर अपने साथ छोड़ जाते हैं। और मन की सुन्दरता ? क्या वह आवश्यक नहीं ?एक कहावत हम सब ने सुनी ह... Read more
clicks 215 View   Vote 0 Like   5:55am 15 Jul 2013 #
Blogger: डा. गायत्री गुप्ता 'गुंजन'
आरोही जब भी कोई शिकायत करती पलाश से; जवाब में वो कोई फ़िल्मी गीत गाने लगता या किसी शायर की कोई पंक्तियाँ..........। आरोही भी मुस्कुरा कर उसकी तरफ़ देखने लगती और सोचती..........काश..! ज़िन्दगी के हर सवाल का जवाब इतना ही आसान होता, किसी गीत या कविता की तरह और ज़िन्दगी इतनी ही प्यारी होती, बि... Read more
clicks 198 View   Vote 0 Like   6:16am 18 Jun 2013 #
Blogger: डा. गायत्री गुप्ता 'गुंजन'
                (भारतीय सामाजिक व्यवस्था पर एक कटु व्यंग्य)जिस दिन ‘वो’ विदा होकर आई और उसका तांगा ससुराल की ड्योढ़ी पर रुका। मुहल्ले भर के बच्चों ने उसे घेर लिया। सभी उसकी एक झलक भर पाने को बेताब थे। कोई उसके सुन्दर हांथों की तारीफ़ कर रहा था, तो कोई उसके गोरे-२ पैरों की, साथ मे... Read more
clicks 185 View   Vote 0 Like   4:42am 20 May 2013 #
Blogger: डा. गायत्री गुप्ता 'गुंजन'
हमारे एक परिचित आजकल बहुत परेशान रहते हैं, वो इतना टूट गये हैं कि ज़िन्दगी से ही मुख मोड़ लिया है उन्होंने। बार-२ एक ही बात उन्हें झकझोरती है कि क्यों नहीं उन्होंने हमारी बात मान ली थी, जो हमने उनसे २ साल पहले कही थी। हमने उन्हें Health Insurance कराने की सलाह दी थी, जो उन्होंने हँसते ... Read more
clicks 219 View   Vote 0 Like   1:04pm 5 Mar 2013 #
Blogger: डा. गायत्री गुप्ता 'गुंजन'
किसी का जरा सा लालच और हम में से ही कुछ लोगों की ज़रा सी बेफ़िक्री कितनी बडी घटना और तबाही का वायस हो सकती है, यह अभी हाल की ही एक घटना से प्रकाश में आया है। एक प्राइवेट हास्पीटल की एक नर्स के लालच से एक हँसता-खेलता परिवार तबाह हो गया। वह नर्स हास्पीटल के ब्लड-बैंक में तैनात थ... Read more
clicks 155 View   Vote 0 Like   9:05am 1 Dec 2012 #
Blogger: डा. गायत्री गुप्ता 'गुंजन'
आज मैं उस विषय पर संक्षेप में लिखने जा रही हूँ, जो अक्सर ही मेरे मर्म को भेदता है... मैंने ये महसूस किया है कि लोगों के बीच में गाँधी की बस इतनी सी पहचान है कि उन्होंने भगत सिंह को मरवा दिया, अंग्रेज सरकार से उन्हें बचाने के लिए भीख नहीं मांगी...इस विषय में मैं इतना ही कहूँग... Read more
clicks 197 View   Vote 0 Like   11:03am 27 Nov 2012 #
Blogger: डा. गायत्री गुप्ता 'गुंजन'
 मुझे उनकी काया पाषाण की तरह लगती थी हमेशा। क्‍योंकि उस काया में सोच के ही बवंडर उठते थे, वो सोच जिसका रास्‍ता सिर्फ मस्‍तिष्‍क से होकर जाता था। उस रास्‍ते पर दूर-2 तक कोई पगडंडी नहीं दिखाई देती थी, जो दिल को छू कर भी गुजरती हो। जिन्‍दगी के हर फलसफे को तराजू में तौल कर देख... Read more
clicks 195 View   Vote 0 Like   5:01am 29 Oct 2012 #कहानी
Blogger: डा. गायत्री गुप्ता 'गुंजन'
 एक बार एक कहानी पढी थी, जो आज तक मेरे ज़ेहन से नहीं निकली है और जब-तब मेरे मस्तिष्क को झकझोरती रहती है... एक सवाल बार-२ उठता है मेरे मन में, क्या प्यार सिर्फ साथ-२ हंसने-खेलने का नाम है ?  शायद नहीं................जब तक एक की आँख का आंसू दूसरे की आँख से ना निकले, तब तक प्यार की इब्तिदा नहीं ... Read more
clicks 180 View   Vote 0 Like   10:50am 8 Oct 2012 #कहानी
Blogger: डा. गायत्री गुप्ता 'गुंजन'
अभी कुछ दिनों से एक अलग तरह की बयार फिजां में तैर रही है कि बच्चों को किस तरह संस्कार दिए जाएँ तथा कैसे उनमें अपने माता-पिता के प्रति प्यार एवं आदर उत्पन्न किया जाये...इसकी एक बानगी फिल्म 'फेरारी की सवारी'में भी देखने को मिलती है... ऐसा नहीं है कि ये समस्या अभी हाल में ही उत... Read more
clicks 181 View   Vote 0 Like   12:20pm 27 Aug 2012 #
Blogger: डा. गायत्री गुप्ता 'गुंजन'
आपने अक्सर लोगों को नारी स्वतंत्रता के विषय में बात करते सुना होगा और शायद लोगों की नज़र में काफी हद तक नारी स्वतन्त्र हो भी चुकी है, पर क्या ये स्वतंत्रता सही मायने में नारी-स्वातंत्र्य है... क्या वेशभूषा, भाषा में क्रांतिकारी बदलाव, घूमना-फिरना, मनमानी आज़ादी यही नारी स... Read more
clicks 184 View   Vote 0 Like   10:47am 14 Aug 2012 #
Blogger: डा. गायत्री गुप्ता 'गुंजन'
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में प्रत्येक ५ मिनट पर एक व्यक्ति आत्महत्या करता है... जहाँ पहले आत्महत्या का कारण मानसिक अवसाद एवं मानसिक बीमारियाँ हुआ करती थीं, वहीँ अब छोटी-२ बातों को लेकर लोग आत्महत्या करने लगे हैं... लोगों की सहनशक्ति धीरे-२ क... Read more
clicks 207 View   Vote 0 Like   10:59am 30 Jul 2012 #
Blogger: डा. गायत्री गुप्ता 'गुंजन'
कभी एक सड़क के किनारे एक भिखारी बैठा करता था... वो हमेशा भीख में १ रु. का सिक्का ही लेता था, कोई ज्यादा देना भी चाहे, तो मना कर देता था... एक दिन एक व्यक्ति उसकी परीक्षा लेने के उद्देश्य से उसके पास गया और उसे १०००/- का नोट निकाल कर देने लगा...उस भिखारी ने इंकार की मुद्रा में सिर ह... Read more
clicks 200 View   Vote 0 Like   11:12am 16 Jul 2012 #
Blogger: डा. गायत्री गुप्ता 'गुंजन'
                         बचपन से मेरी एक आदत रही है कि जहाँ कही भी मुझे ऐसी पंक्तियाँ या विचार दिखाई देते थे, जिनसे मुझे प्रेरणा मिलती थी, तो मै उन्हें अपनी डायरी में लिख लेती थी...इन विचारों ने मेरे व्यक्तित्व निर्माण में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई... अचानक ख्याल आया कि इन विचा... Read more
clicks 141 View   Vote 0 Like   12:00pm 5 Jul 2012 #
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