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Blog: अंतर्नाद

Blogger: swadha ravindra
छोटे  छोटे  कदमों  से  हम  नापते  थे  आकाश  का  कद ,डग  थे  छोटे  मगर  सदा  था मेरे  विश्वासों  में  दम ,लगता  था  चोटी  पर  जा  कर  परचम  लहरा  दूं  अपना ,और  सत्य  कर  डालूँ  अपनी  आँखों  में  बसता जो  सपना ,कोई  रोक  न  पाया  मुझको , था  न  इरादों  में  कुछ  कम ,डग  थे  छोटे  मगर  सदा  ... Read more
clicks 79 View   Vote 0 Like   10:54am 27 May 2012 #
Blogger: swadha ravindra
मैंने अरमानो की बस्ती को सिन्दूरी करके ,उसमे कुछ इस तरह से आग लगा डाली है,जैसे आकाश भी लोहित हो धधक जाता है,जब एक नन्ही किरण सूर्य की गुस्साती है |... Read more
clicks 75 View   Vote 0 Like   10:52am 27 May 2012 #
Blogger: swadha ravindra
माँ किसी चेहरे का नाम नहीं ,माँ तो वो है जिसे आराम नहीं ,कभी रोटी से लिपट जाती है चटनी की तरह ,और कभी मुझको झिड़कने के सिवा , उसके पास कोई और काम नहीं.................बस सुबह उठ के चिडचिडाना शुरू करती है ,सुबह उठता क्यूँ नहीं कह के मुझसे लड़ती है ,लंच देती है मुझे बस्ता सही करती है, मेरी ... Read more
clicks 69 View   Vote 0 Like   10:50am 27 May 2012 #
Blogger: swadha ravindra
जिन दोनों के बीच हुए हैं सौदे उस व्यापार में ,वही जानते कौन नफे में कौन रहा नुक्सान में |प्यार की कश्ती खेने वाला मंझधारों से नहीं डरा ,उसको तो आराम मिला है नव चला तूफ़ान में |उसको चाँद दिखा कर जिसने चाँद ज़मीं का कह डाला ,वो क्या जाने ढूंढ रहा है दाग कोई ईमान में |अश्कों का क्... Read more
clicks 59 View   Vote 0 Like   10:49am 27 May 2012 #
Blogger: swadha ravindra
माया जी की माया में हैं उलझी ये मायापुरी ,माया जी की माया का ही हर और शोर है ,चारों और माया जी की मायामयी मूर्तियां ,और माया जी की माया का न ओर छोर है |अद्भुद है ये जाने कैसी है माया मेरी ,सबकी बहन है ये बात अनमोल है ,पर मेरी बहना का प्यार ज़रा देखिये तो ,भाइयों का हक़ वो तो कर गय... Read more
clicks 90 View   Vote 0 Like   10:48am 27 May 2012 #
Blogger: swadha ravindra
याद  है  मुझको  बचपन  के  दिन ,सुबह  जगाये  जाते  थे ,हम  रोते  थे  नहीं  नहाना ,पर  नहलाये  जाते  थे |रोज़  वही  रोटी  और  सब्जी  जब  मिलती  थी  खाने  को ,रोज़  नहीं  मिलता  था  हमको  पार्क  खेलने  जाने  को ,रोज़  वही  होमवर्क  का  झंझट ,रोज़  वही  आना  कानी ,कितनी  कोशिश  पर  भी  हो  न... Read more
clicks 78 View   Vote 0 Like   5:56am 26 May 2012 #
Blogger: swadha ravindra
फिर एक गुनाह करने जा रहा हूँ ,मैं तुझ पर आज मरने जा रहा हूँ |कोई समझेगा मेरा मौन ना अब , इसी कारन मैं कहने जा रहा हूँ |मै था इन्सान कल तक आज पर मै ,जहाँ की राह चलने जा रहा हूँ   |बहुत चाहत थी कुछ हो नाम मेरा ,मै अब बदनाम  होने जा रहा हूँ |मैं सहमा सा रहा इस बीड़ में पर ,उचक कर चाँद छून... Read more
clicks 97 View   Vote 0 Like   2:47am 26 May 2012 #
Blogger: swadha ravindra
आतंकित मन स्वर क्रंदन है भाषा कुछ टूटी फूटी है ,जाने क्यूँ जीवन पर मेरे ,श्रापों की छाया ऐसी है |वो भी मेरा साथ न देगा ,जो अपना सा लगता था ,मेरे दुःख में मुझसे पहले ,मेरा हाँथ पकड़ता था ज़ख्मों की गिनती कर कर के ,अनामिका मुझसे रूठी है ,जाने क्यूँ जीवन पर मेरे श्रापों की छाया ऐ... Read more
clicks 80 View   Vote 0 Like   2:40am 26 May 2012 #
Blogger: swadha ravindra
मौन था और मौन में निष्काम आयोजन छिपा था एक सभा का ,और फिर था ,मौन ,मुझको वो निमंत्रण जो मिला था |मौन भाषा कि तहों में अनगिनत प्रश्नों के उत्तर भी छिपे थे किन्तु वह भी मौन धारे ही खड़े थे |और मैं भी साथ उनके ,मौन को खुद में समेटे ,मौन प्रश्नों और उनके अनकहे हर एक उत्तर में स्वयं क... Read more
clicks 70 View   Vote 0 Like   2:35am 26 May 2012 #
Blogger: swadha ravindra
तेरे रूप में सृष्टि ब्रह्मांड और स्वयं ब्रह्म को पाहे शिव मैं पहचान गयी तुम्हे मन कलयुग में जन्मी पर फिर भी वही आत्मा है जो गौरा ने पाई थीतुमसे अलग नहीं है कुछ अस्तित्व हमारा इसी कारण नित्य जपती हूँ ओम् नमः शिवाय सत्यम शिवम सुन्दरम |पर मेरा प्रेम तुम्हे जीत न सका और तुम ... Read more
clicks 87 View   Vote 0 Like   2:31am 26 May 2012 #
Blogger: swadha ravindra
मैंने आज एक अनोखा स्वप्न देखा जिसमे एक छोटा सा बालक फूलों को एक ओर हटा काँटों से खेल रहा था |और तभी अचानक एक कांटा चुभ जाता है और वह बिलख उठता है माँ माँ |तभी माँ जो आँगन के दूसरे कोने पर मांज रही थी बर्तन बर्तनों को यूँ ही छोड़ करीब आती है पहले पुचकारती है धीमे से कांटा निकलत... Read more
clicks 91 View   Vote 0 Like   2:28am 26 May 2012 #
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