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Blog: रविकर-पुंज

Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
पटेल होने का मतलब देश की अस्मिता के लिए काम करना। अखंडता को बनाये रखना हैVirendra Kumar Sharma  ram ram bhai   शिक्षा से क्रिश्चियन हूँ, रोप दिया यूरोप |संस्कार से मुसलमाँ, चला कटारी घोप |चला कटारी घोप, हिन्दु हूँ इत्तेफाक से |इसीलिए तो कोप, डुबाता हूँ खटाक से |राष्ट्रवाद बकवास, नीति... Read more
clicks 368 View   Vote 0 Like   6:00am 12 Nov 2013 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
(१)बारी बारी से करें, दरबारी स्तुतिगान |गरिमा से गणतंत्र की, खेल रहे नादान |खेल रहे नादान, अधिकतर गलतबयानी |खानदान वरदान, सयानी रविकर रानी  |कई पालतू सिंह, पाय के मनसबदारी ।  जी हुजूर आदाब, बजाते कुल- दरबारी । (२)मंशा पर करते खड़े, क्यूँ आयोग सवाल । भल-म... Read more
clicks 391 View   Vote 0 Like   10:08am 8 Nov 2013 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
खीरा-ककड़ी सा चखें, हम गोली बारूद |पचा नहीं पटना सका, पर अपने अमरूद |पर अपने अमरूद, जतन से पेड़ लगाये |लिया पाक से बीज, खाद ढाका से लाये |बिछा पड़ा बारूद, उसी पर बैठ कबीरा |बने नीति का ईश, जमा कर रखे जखीरा ||... Read more
clicks 364 View   Vote 0 Like   3:36am 6 Nov 2013 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
Tuesday, 30 July 2013खिलें इसी में कमल, आँख का पानी, कीचड़कीचड़ कितना चिपचिपा, चिपके चिपके चक्षु |चर्म-चक्षु से गाय भी, दीखे उन्हें तरक्षु |दीखे जिन्हें तरक्षु, व्यर्थ का भय फैलाता |बने धर्म निरपेक्ष, धर्म की खाता-गाता |कर ले कीचड़ साफ़,  अन्यथा पापी-लीचड़ |खिलें इसी में कमल, आँख का पान... Read more
clicks 251 View   Vote 0 Like   2:44am 6 Nov 2013 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
नक्सल आतंकी कहीं, कर बैठें ना कोप |शान्ति-भंग रैली करे, सत्ता का आरोप |सत्ता का आरोप, निभाता नातेदारी |विस्फोटक पर बैठ, दिखें अलमस्त बिहारी |दशकों का अभ्यास, सँभाले हमने भटकल |रैली से आतंक, इलेक्शन से हैं नक्सल ||... Read more
clicks 267 View   Vote 0 Like   5:07am 5 Nov 2013 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
नक्सल आतंकी कहीं, फिर ना जायें कोप |शान्ति-भंग रैली करे, सत्ता का आरोप |सत्ता का आरोप, निभाता नातेदारी |विस्फोटक पर बैठ, मस्त सरकार बिहारी |दशकों का अभ्यास, सँभाले रक्खा भटकल |रैली से आतंक, इलेक्शन से हैं नक्सल ||... Read more
clicks 139 View   Vote 0 Like   5:07am 5 Nov 2013 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
बापू होते खेत पर, भारत चाचा खेत |सेत-मेत में पा गए, वंशावली समेत |वंशावली समेत, समेंटे सत्ता सारी |छाया फिर परिवार पाय के कुल मुख्तारी |"ताल-कटोरा"पाय, लगाते घोंघे गोते |धोते अपना पाप, आज गर बापू होते -... Read more
clicks 290 View   Vote 0 Like   4:39am 3 Nov 2013 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
बापू होते खेत इत, भारत चाचा खेत |सेत-मेत में पा गए, वंशावली समेत |वंशावली समेत, समेंटे सत्ता सारी |  अहंकार कुल छाय, पाय के कुल-मुख्तारी |"ताल-कटोरा" आय, लगाते घोंघे गोते |धोते "रविकर" पाप, आज गर बापू होते -पाव पाव दीपावली, शुभकामना अनेक-रविकरपाव पाव दीपावली, शुभकामना अनेक |व... Read more
clicks 136 View   Vote 0 Like   4:39am 3 Nov 2013 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
बापू होते खेत इत, भारत चाचा खेत |सेत-मेत में पा गए, वंशावली समेत |वंशावली समेत, समेंटे सत्ता सारी |  अहंकार कुल छाय, पाय के कुल-मुख्तारी |"ताल-कटोरा"आय, लगाते घोंघे गोते |धोते "रविकर" पाप, आज गर बापू होते -पाव पाव दीपावली, शुभकामना अनेक-रविकरपाव पाव दीपावली, शुभकामना अनेक |वल... Read more
clicks 130 View   Vote 0 Like   4:39am 3 Nov 2013 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
 डरे सुपारी से अगर, कैसे होय सुपार |आज मरे या कल मरे, ये तो देंगे मार |ये तो देंगे मार, जमाना दुश्मन माना |शायद टूटे तार, किन्तु छोड़े क्यूँ गाना |दीवाना यह देश, देखता राह तुम्हारी |जीतोगे तुम रेस, आप से डरे सुपारी ||... Read more
clicks 272 View   Vote 0 Like   8:28am 1 Nov 2013 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
*फेलिन करता फेल जब, मनसूबे आतंक |बिना आर.डी.एक्स के, हल्का होता डंक |हल्का होता डंक, सुपारी फेल हुई है |पारा-पारी ब्लास्ट, महज छह जान गई है |कृपा ईश की पाय, कहाँ फिर मोदी मरता -आई एस आई चाल, फेल यह फेलिन करता ||मोदी मोधू में छिड़ी, जब वासंतिक जंग-मोदी मोधू में छिड़ी, जब व... Read more
clicks 161 View   Vote 0 Like   5:14am 1 Nov 2013 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
चालू संयोजन हुआ, थर्ड फ्रंट  का शोर |पॉलिटिक्स को मोड़ने, चले तीसरी ओर |चले तीसरी ओर, सजाई अपनी घोड़ी |जागी है उम्मीद, कहीं कुछ थोड़ी-मोड़ी |ले मोदी को रोक, जमा हैं सोलह *गालू |बने सीट कुछ जीत, किंग मेकर ये चालू ||*गाल बजाने वाले ... Read more
clicks 280 View   Vote 0 Like   3:41am 31 Oct 2013 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
रविकर हम सब दल दल में पिले, तुम बैठे बिलगाय |बड़े गए गुजरे दिखो, देश-भक्त तुम नाय |देश भक्त तुम नाय, हुवे पैदा केहि' कारण |भगवा हरा दुरंग, तिरंगा नीला धारण |कुरुक्षेत्रे रणक्षेत्र, दिखाना सबको करतब |अपना अपना युद्ध, लड़ेंगे अब तो हम सब ||... Read more
clicks 189 View   Vote 0 Like   11:52am 30 Oct 2013 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
20 OCTOBER, 2013रही हिलोरें मार, निकम्मी रविकर चाहेंलखनऊ से-(१)जाने ये क्या हो रहा, सपने पर इतबार । मर्यादा स्वाहा हुई, जीता धुवाँ-गुबार । जीता धुवाँ गुबार, खुदाई चालू आहे । रही हिलोरें मार, निकम्मी रविकर चाहें । बाबा तांत्रिक ढोंग, लगे फिर रंग जमाने । होय हाथ में खाज, खो... Read more
clicks 269 View   Vote 0 Like   3:05am 30 Oct 2013 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
तालाबों को ढक रहे, हाथी पिछली बार |कितनी छिछली हरकतें, कर आयोग विचार |कर आयोग विचार, किसानों की यह खेती |मधुमक्खी मकरंद, इन्हीं कमलों से लेती |दिखी कांग्रेस धूर्त, कलेजा कितना काला |पंजा दे कटवाए, साइकिल में भी ताला ||... Read more
clicks 250 View   Vote 0 Like   7:16am 29 Oct 2013 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
हाँ से खेलें देह दो, वर्षों कामुक खेल |दर्ज शिकायत इक करे, हो दूजे को जेल |हो दूजे को जेल, नौकरी शादी झाँसा |यह सिद्धांत अपेल, बना अब अच्छा-खाँसा |हुई मौज वह झूठ, कौन अब किसको फाँसे रिश्ते की शुरुवात, हुई थी लेकिन हाँ से |... Read more
clicks 281 View   Vote 0 Like   9:11am 10 Oct 2013 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
वायदा करते जाइये, भली करें ना राम |हक़ नाहक दे मत उन्हें, सकते छीन तमाम |सकते छीन तमाम, दुर्ग भी सकें भेद वे |वोट बैंक मजबूत, तभी दल चाटें तलवे |मुर्दे हुवे मुरीद, डराये अलग-कायदा |पलकों पर बैठाय, करे लीडरी वायदा ||... Read more
clicks 289 View   Vote 0 Like   10:06am 7 Oct 2013 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
-दिल्ली कल,कर्नाटक आज -कर्जा खाए पार्टियाँ, रही चुकाय उधार |मंत्री गृह-मंत्री कभी, कभी सकल सरकार |कभी सकल सरकार, तुम्हे दे सकल संपदा |तुम ही तारण-हार, हरोगे तुम ही विपदा |खोवे रविकर होश, पाय के दोयम दर्जा |हक़ अव्वल निर्दोष, उठा तू मोटा कर्जा |... Read more
clicks 208 View   Vote 0 Like   11:00am 6 Oct 2013 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
गाँधी कब का भूलते, दो अक्तूबर दोस्त |दायें बीयर बार पब, बाएं बिकता गोश्त |बाएं बिकता गोश्त, पार्क में अनाचार है |उधम मचे बाजार, तडपती दिखे नार है |इत मोदी का जोर, बड़ी जोरों की आँधी |उत उठता तूफ़ान, दिखा गुस्से में गाँधी ||... Read more
clicks 185 View   Vote 0 Like   4:50am 3 Oct 2013 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
वारे न्यारे कब किये, कब का चारा साफ़ |पर कोई चारा नहीं, कोर्ट करे ना माफ़ |कोर्ट करे ना माफ़, दिखे करनी सी भरनी |गौशाला आबाद, ,पार करले वैतरणी |फटता अध्यादेश, कहाँ अब जाय पुकारे |गैयों में आनंद, विलापें गधे दुवारे  |... Read more
clicks 167 View   Vote 0 Like   11:01am 30 Sep 2013 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
नक्सल ने नेता हने, गर्म दिखे युवराज |छत्तिसगढ़ सरकार को, कोस रहे हैं आज |कोस रहे हैं आज, आज ही घुस आतंकी |मारे सैनिक ढेर, नहीं बोले पर बंकी |नहीं दिखे अब शर्म, काम नहिं करती अक्कल |दिल्ली की ही देन, बड़े आतंकी नक्सल ||... Read more
clicks 169 View   Vote 0 Like   6:13am 27 Sep 2013 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
(1)भटके राही लक्ष्य बिन, भट के झूठे युद्ध |आशिक रूठे रूह से, देखूं ढोंग विशुद्ध |देखूं ढोंग विशुद्ध, लगा सज्जन उकसाने |बातें नीति विरुद्ध, बुद्ध पर लगा कहाने |गा मनमाने गीत, दिखा के लटके-झटके |मान बैठता जीत, जगत में क्यूँकर भटके ||(2)नारी अब अबला नहीं, कहने लगा समाज । है घातक हथ... Read more
clicks 201 View   Vote 0 Like   8:58am 24 Sep 2013 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
आ जम जा कुर्सी पड़ी, सिखा विधर्मी पाठ |वोट बैंक मजबूत कर, बढ़ा चढ़ा के ठाठ |बढ़ा चढ़ा के ठाठ, कहीं कातिल छुड़वाए |*जटा जाय जग माहिं, जुल्म का फल भी पाए |फिर भी गोटी लाल, लाल का करना क्या गम |कर अफसर बर्खास्त, वजीरे आजम आ-जम ||*ठगा जाना / धोखे में आकर हानि उठाना ... Read more
clicks 204 View   Vote 0 Like   11:04am 18 Sep 2013 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
चिंतित मानस पटल है, विचलित होती बुद्धि |प्रतिदिन पशुता बलवती, दुष्कर्मों में वृद्धि |दुष्कर्मों में वृद्धि, कहाँ दुर्गा है सोई |क्यूँ नहिं होती क्रुद्ध, जगाये उनको कोई |कर दे माँ उपकार, दया कर दे माँ समुचित |हम बेटी के बाप,  हमेशा रहते चिंतित ||... Read more
clicks 185 View   Vote 0 Like   5:59am 10 Sep 2013 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
बाजी रविकर हारता, जब मंदा बाजार |जार जार रोवें खड़ा, पड़ी गजब की मार |पड़ी गजब की मार, नहीं मुद्रा हँस पाए |चुप बैठी सरकार, हँसी जग में करवाए |उधर सीरिया युद्ध, चीन इत बैठा घुसकर |चल संसद की देख, चोचलेबाजी रविकर ||... Read more
clicks 200 View   Vote 0 Like   11:24am 6 Sep 2013 #

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