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Blog: "कुछ कहना है"

Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
प्रश्न कभी गुत्थी कभी, कभी जिन्दगी ख्वाब।सुलझा के साकार कर, रविकर खोज जवाब।।फूले-फूले वे फिरें, खुद में रहे भुलाय |उसको फिर भी दूँ दुआ, फूले-फले अघाय ||दीदा पर परदा पड़ा, बहू न आये बाज।परदा फटते फट गया, परदादी नाराज।।दो मन का तन तनतना, लगा जमाने धाक।उड़ा जमाने ने दिया, बचा न एक... Read more
clicks 154 View   Vote 0 Like   1:27pm 30 Oct 2017 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
समस्यायें समाधानों बिना प्राय: नहीं होती।नजर आता नहीं हल तो, बढ़ा है आँख का मोती।करो कोशिश मिलेगा हल, समस्या पर न पटको सिर।नही हल है अगर उसका, उसे प्रभु-कोप समझो फिर।।परिस्थितियाँ अगर विपरीत, यदि व्यवहार बेगाना।सुनो कटु शब्द मत उनके, कभी उस ओर मत जाना।नहीं हर बात पर उनकी... Read more
clicks 148 View   Vote 0 Like   9:09am 30 Oct 2017 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
जो पुस्तकें पढ़ता नहीं, जो पर्यटन करता नहीं, अपमान जो प्रतिदिन सहा, जो स्वाभिमानी ना रहा,जो भी अनिश्चय से डरे।तिल तिल मरे, आहें भरे।।जो जन नहीं देते मदद , जो जन नहीं लेते मदद,संगीत जो सुनता नहीं, रिश्ते कभी बुनता नहीं, जो पर-प्रशंसा न करे।तिल तिल मरे, आहें भरे।।र... Read more
clicks 130 View   Vote 0 Like   5:52am 16 Oct 2017 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
अभिमुख ध्रुव-तारा लखे, पाणिग्रहण संस्कार | हुई प्रज्ज्वलित अग्नि-शुभ, होता मंत्रोच्चार | होता मंत्रोच्चार, सात फेरे लगवाते | सात वचन के साथ, एक दोनों हो जाते | ले उत्तरदायित्व, परस्पर बाँटें सुख-दुख | होय अटल अहिवात, कहे ध्रुव-तारा अभिमुख |सात वचन/1चले जब तीर्थ यात... Read more
clicks 111 View   Vote 0 Like   8:43am 10 Oct 2017 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
कूड़ा यहाँ कचड़ा वहाँ मत फेंकिए यूँ मार्ग पर।उपयोग कूड़ेदान का नियमित करें हे मित्रवर।दीवाल पथ पर पार्क में यूँ थूकना अच्छा नहींलघु-दीर्घ-शंका के लिए संडास हैं उपयोग कर।।अब नोट पर दीवार पर ड्राइंग बनाना छोड़िए।अपशब्द बकना छोड़िये, मत क्रोध में सिर फोड़िए।बिजली बचे पानी... Read more
clicks 85 View   Vote 0 Like   8:41am 9 Oct 2017 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
विधाता छंदनिमंत्रण बिन गई मैके, करें मां बाप अन्देखी।गई जब यज्ञशाला में, बघारे तब बहन शेखी।कहीं भी भाग शिव का जब नहीं देखी उमा जाकर।किया तब दक्ष पुत्री ने कठिन निर्णय कुपित होकर।स्वयं समिधा सती बनती, हुआ विध्वंस तब रविकर।उठाकर फिर सती काया, वहां ताँडव करें शंकर।।प्र... Read more
clicks 75 View   Vote 0 Like   7:32am 26 Sep 2017 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
 खलिश बढ़ती रही घर में, मगर कुछ बोल ना पाता।फजीहत जब हुई ज्यादा, शहर को रंग दिखलाता।रजाई ओढ़कर सोता, मगर ए सी चलाता है।नहाकर पूत गीजर को, खुला ही छोड़ जाता है।सतत् चलता रहे टी वी, जले दिन रात बिजली भीनहीं कोई सुने घर में, बढ़ा बिल जान खाता है।बढ़ा जो रेट बिजली का, मियां तब खूब झल... Read more
clicks 71 View   Vote 0 Like   5:58am 25 Sep 2017 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
बहस माता-पिता गुरु से, नहीं करता कभी रविकर ।अवज्ञा भी नहीं करता, सुने फटकार भी हँसकर।कभी भी मूर्ख पागल से नहीं तकरार करता पर-सुनो हक छीनने वालों, करे संघर्ष बढ़-चढ़ कर।।~ dhanyavaad ~... Read more
clicks 103 View   Vote 0 Like   4:40am 19 Sep 2017 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
मिली मदमस्त महबूबा मुझे मंजिल मिली मेरी।दगा फिर जिन्दगी देती, खुदारा आज मुँहफेरी।कभी भी दो घरी कोई नहीं यूँ पास में बैठासुबह से ही मगर घरपर, बड़ी सी भीड़ है घेरी।अभी तक तो किसी ने भी नहीं कोई दिया तोह्फा।मगर अब फूल माला की लगाई पास में ढेरी।तरसते हाथ थे मेरे किसी ने भी नह... Read more
clicks 73 View   Vote 0 Like   4:58am 18 Sep 2017 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
पिलाकर दूध झट शिशु को, फटाफट हो गई रेडी। उठाई पर्स मोबाइल घड़ी चाभी चतुर लेडी। इधर ताके उधर ताके नहीं जब ध्यान कुछ आया। लगा आवाज आया को, वही फिर प्रश्न दुहराया। कहीं कुछ रह तो नहीं गया। हाय री ममता मुई मया।। बिदा बिटिया हुई जैसे, हुई बारात भी ओझल। अटैची बैग लेकर के हुए तैया... Read more
clicks 76 View   Vote 0 Like   8:26am 12 Sep 2017 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
रस्सी जैसी जिंदगी, तने तने हालात |एक सिरे पे ख्वाहिशें, दूजे पे औकात ||है पहाड़ सी जिन्दगी, चोटी पर अरमान।रविकर झुक के यदि चढ़ो, हो चढ़ना आसान।।खले मूढ़ की वाह तब, समझदार जब मौन।काव्य शक्ति-सम्पन्न तो, कवि को भूले कौन।।दल के दलदल में फँसी, मुफ्तखोर जब भेड़ ।सत्ता कम्बल बाँट दे, उ... Read more
clicks 109 View   Vote 0 Like   6:29am 11 Sep 2017 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
दोहेतरु-शाखा कमजोर, पर, गुरु-पर, पर है नाज ।कभी नहीं नीचे गिरे, ऊँचे उड़ता बाज।।सत्य बसे मस्तिष्क में, होंठों पर मुस्कान।दिल में बसे पवित्रता, तो जीवन आसान।।कुंडलियाँ गुरुवर करूँ प्रणाम मैं, रविकर मेरो नाम |पाया अक्षर ज्ञान है, पाया ज्ञान तमाम |पाया ज्ञान तमाम, निपट अज्... Read more
clicks 89 View   Vote 0 Like   8:25am 5 Sep 2017 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
(1)विजयदशमी मना मानव, जलाता जो बड़ा रावण।वही तो वर्ष भर हरदिन जलाता भूमि बिन कारण।सिया सी देवि को हर के, सियासी दांव चलता हैसदा सच्चा करे सौदा, मगर आफ़त असाधारण।।(2)दिया हनुमान को दानव, नहीं संजीवनी लाने।तभी तो खा रहे शिशु को, सुषेणों के दवाखाने।कहीं पर बाढ़ का रावण, हजारों ... Read more
clicks 132 View   Vote 0 Like   11:36am 1 Sep 2017 #विजयदशमी
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
जब छोड़ कर जाते बड़े तो भाग्य छोटों का संवारे।भाई-बहन को कर प्रतिष्ठित स्वयं की वह चाह मारे।बच्चे मनाकर पर्व नौ नौ, बाप की बखिया उघारे।जब नारि रो के कम करे गम मर्द रोके अश्रु सारे।~ dhanyavaad ~... Read more
clicks 137 View   Vote 0 Like   8:35am 19 Jan 2017 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
रविकर यदि राशन दिया, दे वह भूख मिटाय।यदि मकान देते बना, घर बनाय वह भाय।घर बनाय वह भाय, भाय वह चौबिस घंटा।किन्तु करो यदि रार, करेगी वह भी टंटा।लल्लो चप्पो ढेर, करे हैं मर्द अधिकतर।हे बच्चों की माय, दंडवत करता रविकर।।😂😂~ dhanyavaad ~... Read more
clicks 149 View   Vote 0 Like   5:01am 18 Jan 2017 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
हरिगीतिका छंदनौ माह तक माँ राह ताकी आह होंठो में दफन।दो साल तक दुद्धू पिला शिशु-लात खाई आदतन।माँ बुद्धि विद्या पुष्टता हित नित्य नव करती जतन ।फिर राह ताके प्रौढ़ माँ पर द्वार पर ओढ़े कफन।। ~ dhanyavaad ~... Read more
clicks 149 View   Vote 0 Like   8:06am 16 Jan 2017 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
तुम गुरूर में रह रही, सजा सजाया फ्लैट।रहता मैं औकात में, बिछा फर्श पर मैट। बिछा फर्श पर मैट, बसा था तेरे दिल में।रविकर आठों याम, जमाया रँग महफिल में।रहो होश में बोल, निकाली तुम सुरूर में।इधर होश औकात, उधर हो तुम गुरूर में।~ dhanyavaad ~... Read more
clicks 122 View   Vote 0 Like   10:18am 12 Jan 2017 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
देना हठ दरबान को, अहंकार कर पार्क |छोड़ व्यस्तता कार में, फुरसत पे टिक-मार्क |फुरसत पर टिक-मार्क, उलझने छोड़ो नीचे |लिफ्ट करो उत्साह, भरोसा रिश्ते सींचे |करो गैलरी पार, साँस लंबी भर लेना |प्रिया खौलती द्वार, प्यार से झप्पी देना ||~ dhanyavaad ~... Read more
clicks 160 View   Vote 0 Like   9:45am 9 Jan 2017 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
कुंडलियाँबेटी ठिठकी द्वार पर, बैठक में रुक जाय।लगा पराई हो गयी, पिये चाय सकुचाय। पिये चाय सकुचाय, आज वापस जायेगी।रविकर बैठा पूछ, दुबारा कब आयेगी।देखी पति की ओर , दुशाला पुन: लपेटी।लगा पराई आज, हुई है अपनी बेटी।।दोहाबेटी हो जाती विदा, लेकिन सतत निहार।नही पराई हूँ कहे, ज... Read more
clicks 170 View   Vote 0 Like   5:47am 28 Dec 2016 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
तन्हाई में कर रही, यादें रविकर छेद।रिसे उदासी छेद से, टहले प्रेम सखेद।।मनमुटाव झूठे सपन, जोश भरें भरपूर।टेढ़ी मेढ़ी जिन्दगी, चलती तभी हुजूर।।बाज बाज आये नहीं, रहा अभी भी कूद।।यद्यपि बाजीगर करे, उन्हे नेस्तनाबूद।भजन सरिस रविकर हँसी, प्रभु को है स्वीकार।हँसा सके यदि अन्... Read more
clicks 137 View   Vote 0 Like   5:45am 26 Dec 2016 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
रोपी गयी नव-खेत में जब धान की बेरन बड़ी।लल्ली लगा ले आलता लावा उछाली चल पड़ी।।अलमारियों में पुस्तकें सलवार कुरते छोड़ के।गुड़िया खिलौने छोड़ के चुनरी खड़ी है ओढ़ के।रो के कहारों से कहा रोके रहो डोली यहाँ।घर द्वार भाई माँ पिता को छोड़कर जाऊँ कहाँ।लख अश्रुपूरित नैन से बारातिय... Read more
clicks 187 View   Vote 0 Like   5:47am 14 Dec 2016 #विदाई
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
रो रो के रोके प्रिया, फिर भी पिया अघाय।इक किडनी भी ले लिया, मर्दानगी दिखाय।भरो भरोसे हित वहाँ, चाहे तुम जल खूब।चुल्लू भर भी यदि लिया, कह देगी जा डूब।।चला कोहरा को हरा, कदम सटीक उठाय।धीरे धीरे ही सही, मंजिल आती जाय।।खा के नमक हराम का, रक्तचाप बढ़ जाय।रविकर नमकहराम तो, लेता क... Read more
clicks 117 View   Vote 0 Like   8:58am 12 Dec 2016 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
तू सर्व-व्यापी है मगर मैं खोजता-फिरता रहा।हर शब्द से तू तो परे पर नाम मैं धरता रहा ।तू सर्व ज्ञाता किन्तु इच्छा मैं प्रकट करता रहा।मैं पाप यह करता रहा वह कष्ट तू हरता रहा।।dohaरस्सी जैसी जिंदगी, तने तने हालात।एक सिरे पर ख्वाहिसें, दूजे पर औकात।।~ dhanyavaad ~... Read more
clicks 161 View   Vote 0 Like   10:06am 21 Nov 2016 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
टके टके पर टकटकी, खटके नोट हजार।बेखटके निर्धन डटे, खाय अमीरी खार।खाय अमीरी खार, बुखारी बदन गरम है।थमता नक्सलवाद, हुआ आतंक नरम है।भागा भ्रष्टाचार, पास अच्छे दिन फटके।लटके झटके देख, सुधरते जायें भटके ।।~ dhanyavaad ~... Read more
clicks 170 View   Vote 0 Like   8:44am 10 Nov 2016 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
करते काम गरीब तो, शोषण करे अमीर ।दोनों की रक्षा करे, क्रमश: सैनिक वीर।क्रमश: सैनिक वीर, इन्हें पाले करदाता।देख घुमक्कड़-ठाठ, पिये दारू मदमाता।बैंकर कसे नकेल, वकीलों से ये डरते।सबके बदले मौज, किन्तु ये नेता करते।।~ dhanyavaad ~... Read more
clicks 112 View   Vote 0 Like   4:18am 8 Nov 2016 #

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