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Blog: चेतना के स्वर

Blogger: pradeep singh beedawat
200 सदस्य विधानसभा में 184 की वैवाहिक तिथियां वेबसाइट पर82 की शादी 21 या18 वर्ष (पुरूष अथवा महिला के अनुसार) की वैधानिक आयु से पहले 35 मंत्री और संसदीय सचिव13 की शादी बाल-विवाह की श्रेणी में 47 विधायक कांग्रेस के बाल विवाह वाले26 विधायक भाजपा के इस वर्ग में पाली। कम उम्र में विवाह नह... Read more
clicks 155 View   Vote 0 Like   5:14pm 23 May 2010 #बाल-विवाह
Blogger: pradeep singh beedawat
भाषा विज्ञानियों के लिए भले ही पहला शब्द ‘ए’ अथवा ‘अ’ या फिर ‘अलीफ’ या ‘बे’ होता होगा, लेकिन व्यावहारिकता में यह फार्मूला बेमानी लगता है। दुनिया में किसी बच्चे के कंठों से फूटने वाली पहली किलकारी में ‘मां’ शब्द छिपा हुआ रहता है। कहना गलत नहीं होगा कि कोई शब्द इससे पहल... Read more
clicks 164 View   Vote 0 Like   7:31pm 8 May 2010 #मदर्स डे
Blogger: pradeep singh beedawat
नजारा-एकछोटू जरा चाय लाना! आज श्रमिक दिवस है। चाय की एक थड़ी पर जमा चार लोग अखबार में छपी एक कृशकाय बच्चे की तस्वीर पर चर्चा कर रहे हैं। यह बच्चा बाल श्रमिक है, जो जवाहरात के नाजुक लेकिन खतरनाक काम को अपनी नन्ही अंगुलियों से बखूबी अंजाम दे रहा है। चारों की अलग-अलग राय है। ... Read more
clicks 173 View   Vote 0 Like   3:19pm 1 May 2010 #बाल श्रमिक
Blogger: pradeep singh beedawat
ग्रामीण विकास का आधार बन रही महिला शक्ति खुद मेहनत-मजदूरी कर बच्चों को शिक्षित करने का सपना साकार कर रही है|पारम्परिक परिधानों में लिपटी, संकुचाती घूंघटधारी ग्रामीण नारी अब गुजरे जमाने की बात हो चुकी है। ग्राम्य संस्कृति से ओत-प्रोत रहे मारवाड़ में कभी महिला का अकेल... Read more
clicks 153 View   Vote 0 Like   11:57am 8 Mar 2010 #नारी
Blogger: pradeep singh beedawat
अल सुबह सूरज ने आँख खोली धरती के माथे कुंकुम  और रोली भँवरे गायें तो कलियाँ भी बोली ब्रज में घूमे रसिओं की टोली अब आपके चेहरे पर भी तो मीठी मुस्कराहट हिल डोली  तो बोलो हैप्पी होली, हैप्पी होली सभी ब्लॉगर बांधवों और पाठकों को होली की हार्दिक मंगलमयी शुभकामनायें... Read more
clicks 128 View   Vote 0 Like   11:13am 28 Feb 2010 #ग़ज़ल
Blogger: pradeep singh beedawat
अक्सर प्रश्न उठता है कि प्रेम क्या है। आज तक प्रेम की कोई सर्वसम्मतपरिभाषा नहीं निकल पाई। इतना जरूर है कि प्रेम को ढाई अक्षरों का नाम देकर किताबों में समेट कर रखा नहीं जा सकता।जब सोणी ने महिवाल का हाथ थामा होगा अथवा हीर ने रांझे को चाहा होगा, तब कबीर लिखते हैं `ढाई आखर प्... Read more
clicks 156 View   Vote 0 Like   9:36am 14 Feb 2010 #उजाला
Blogger: pradeep singh beedawat
 लोग कहते हैं जिंदगी तो हुई मौत से बदतरजीवन प्रतिमान तय करे वो मीना जरूरी है॥शान ए अमीरी चाहे औरों को नहीं दिखेगर फट जाए कपड़ा तो सीना जरूरी है॥जख्म भले कितने भी दर्दभरे और गहरेजीवन सार है यही कि सीना जरूरी है॥नीन्द चाहिए शाम को चादर तान करके तोदिनभर की मेहनत का पसीन... Read more
clicks 171 View   Vote 0 Like   2:22pm 12 Feb 2010 #ग़ज़ल
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