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Blog: क्षितिज

Blogger: kshitij ranjan
क्षितिज: बिहार के ज़ज्बात: वो जंगलों के नाम से था कभी मशहूर क्यूँ,? हाँ शेर तो थे कई पर इतना भी गुरुर क्यूँ,? सीखे थे सब पथिक यहीं से चलना दूर क्यूँ? जो ज्ञान कहीं नह...... Read more
clicks 172 View   Vote 0 Like   9:42pm 8 Oct 2011 #
Blogger: kshitij ranjan
आज पटना शहर थोरी उचीं लग रही थी क्योंकी उसमे एक नई पुल जुट गयी थी नए रास्तो का अनुभव बड़ा अजीब था क्योंकि कुछ आमिर था तो कुछ गरीब था जिनको हमने  अक्सर सर उठा के देखा था वे आज छोटी, बौनी  और गन्दा सा था कौन सी रेल अब किधर को जाएगी हमें अब मालुम पड़ जाएगी............ pearl  की टूटी दीवार... Read more
clicks 135 View   Vote 0 Like   2:46pm 3 Oct 2011 #
Blogger: kshitij ranjan
मेरे कॉलेज के प्रांगन  मेंदो गिलहरी थे मग्न से  I कभी पेड़ पर कभी दीवारों के ऊपर चढ़ते दन से Iकभी खिडकियों  से झाका  करते क्या शिक्षक पढ़ाते मन से I कबी कूद कर जामुन के पेड़ो पर जाते सन से झकझोरे डाली को ऐसे हो नई योवन से कभी दौर कर वर्ग में जाते कभी खाल्ली को उठाते कभी घुर ... Read more
clicks 124 View   Vote 0 Like   1:36pm 30 Jul 2011 #
Blogger: kshitij ranjan
आज मेरा मन थका- थका सा लाचार है शायद मुझे थोरा बुख़ार है दुसरे का बोझ उठाना तो दूर अपना कन्धा ही भार है  आंखे देखने को बार बार खोलता हूँ मैं पर ना जाने कैसी इसमें खुमार है  चाहता तो हूँ दौर कर दुनिया घूम लूं पर अपनी टांगे बेबस बेकार है मन की बात तो बताना चाहता हूँ ना जाने ... Read more
clicks 118 View   Vote 0 Like   12:38pm 21 Jul 2011 #
Blogger: kshitij ranjan
आज मेरे खून का जवाब माँगा गया उसके हर बूंद का हिसाब माँगा गया जो भी मिला था जीने के  लिए  उसकी कहानियों का किताब माँगा गया  परत दर  परत जोड़कर जिन्दा हूँ आज उसके भी फटे जुराब माँगा गया माना की तन ढकने को कपडे  दिए थे पर आज वो सारे कपडे  ख़राब माँगा गया जब भी रोता था भूख से त... Read more
clicks 114 View   Vote 0 Like   12:49pm 6 Jul 2011 #
Blogger: kshitij ranjan
कुछ वक्त गुजर गया दरिया बनकर जिसके इंतजार में आज भी हूँ! उस वक्त की कुछ दर्द छुट गयी है मेरे मन परकुछ धुंधली तस्वीरे अभी बाकी है यहाँ उसकी कुछ ख़ुशी और कुछ गम का लम्हां यादों में संभालें हूँ उस यादों की एक पोटली अभी बाकी है उसकीएक अफशोश है मेरे पास जो जाती ही नहीं है और ब... Read more
clicks 95 View   Vote 0 Like   1:11pm 15 Jun 2011 #
Blogger: kshitij ranjan
हर रोज़ सोने की आदत सी हो गयी है  आँखे  खुलीं है और रोने की आदत सी  हो गयी हैक्यों शोलो को भड़कने नहीं देते ...................... धुआँ तो उठते देखता हूँ पर  चिंगारी बुझाने की आदात सी हो गयी है  भले ही कबूतरों को खुला छोर रखा है ............... परिंदे जब भी उड़ते है उन्हें गिराने की आदत सी... Read more
clicks 101 View   Vote 0 Like   12:59pm 14 Mar 2011 #
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