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Blog: मंडली

Blogger: पुंज प्रकाश
पुंज प्रकाशमीडिया मूलतः दो प्रकार का है - प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक। रंगमंच के बारे में विद्वानों का मत है कि यह भी मूलतः दो प्रकार का ही है – शौकिया और व्यावसायिक। जात्रा, पारसी, नौटंकी के साथ ही साथ पारंपरिक रंगमंच लगभग लुप्तप्राय हो चुके हैं। भारत में व्यावसायिक रंगमं... Read more
clicks 217 View   Vote 0 Like   3:08pm 30 Jul 2015 #
Blogger: पुंज प्रकाश
पुंज प्रकाश का यह साक्षात्कार इप्टानामा के सम्पादक दिनेश चौधरी द्वारा लिया गया. इसे इप्टानाम के नए अंक और कल के लिए (अंक 87-88) में भी पढ़ा जा सकता है. हिंदी रंगमंच के समक्ष आज सबसे बड़ी चुनौती क्या है? पूंजी, प्रशिक्षण, पूर्वाभ्यास की जगह, नाट्य प्रदर्शन के लिए उचित सभागार... Read more
clicks 219 View   Vote 0 Like   3:03pm 30 Jul 2015 #
Blogger: पुंज प्रकाश
पुंज प्रकाशअपवादों को छोड़ दिया जाय तो हिंदी समाज में रंगमंच आर्थिक मामलों में कभी भी अपने पैरों पर खड़ा नहीं हो पाया और ना हीं कभी आवाम की ज़रूरतों में ही शामिल हो पाया है। इसीलिए टिकट खरीदकर नाटक देखने की प्रथा का विकास होना संभव ही नहीं हुआ। इसके केन्द्र में रंगमंच का अ... Read more
clicks 232 View   Vote 0 Like   7:05am 29 Jul 2015 #
Blogger: पुंज प्रकाश
पुंज प्रकाश अमेरिकी नाटककार व रंग-चिन्तक डेविड ममेट ने अपनी किताब “सत्य और असत्य” (true and false : heresy and common sense for the actors) में लिखा है कि “आपका काम नाटक को दर्शकों तक पहुंचना है, इसलिए शुतुरमुर्ग की तरह रेत में गर्दन घुसा लेने या विद्वता मात्र से काम नहीं बनेगा।"वैसे कुछ अति-भद्रजनों ... Read more
clicks 188 View   Vote 0 Like   7:25am 23 Feb 2015 #
Blogger: पुंज प्रकाश
बिहार के गांवों-कस्बों में उत्सवों के अवसर पर नाटकों को मंचित करने की अपनी एक अनूठी और रोचक परम्परा रही है। तमाम उतार चढाओं के बीच यह परम्परा आज भी कायम है। संजय कुमार का यह आलेख उसी नाट्य परम्परा की एक झलक पेश करती है। इस आलेख के केन्द्र में हैं फुलवरिया (भागलपुर) नामक ग... Read more
clicks 251 View   Vote 0 Like   5:17pm 30 Nov 2014 #
Blogger: पुंज प्रकाश
बंगला पुस्तक “प्रसंगः नाट्य” में प्रकाशित ख्याति प्राप्त रंगकर्मी शंभू मित्र द्वारा मूलतः बंगला में लिखित इस महत्वपूर्ण अभिनय चिंतन का हिंदी अनुवाद प्रसिद्द रंग-चिन्तक नेमीचन्द्र जैन ने किया था। जो वर्ष 1976में “नटरंग” के 25वें अंक में प्रकाशित हुआ था। शंभू दा ने रंग... Read more
clicks 271 View   Vote 0 Like   2:42pm 19 Oct 2014 #
Blogger: पुंज प्रकाश
नटमेठिया एक जीवनीपरक (Bio-graphical) नाटक है जिसके केन्द्र में हैं बिहार के लेखक, कवि, अभिनेता,निर्देशक, गायक, रंग-प्रशिक्षक भिखारी ठाकुर और भारतीय समाज की जटिल वर्गीय व जातीय बुनावट । भिखारी ठाकुर की संघर्षशील जीवनयात्रा का काल 1887से 1971 रहा है यानि ब्रिटिश राज स... Read more
clicks 248 View   Vote 0 Like   2:55pm 30 Aug 2014 #
Blogger: पुंज प्रकाश
पिछले दिनों बिहार संगीत नाटक अकादमी में व्याप्त भ्रष्टाचार, अराजकता और अकलात्मक नज़रिए के प्रतिरोध स्वरुप पटना के संस्कृतिकर्मियों ने आंदोलन किया । धरना, मशाल जुलुस, नुक्कड़ नाटक, जनगीत तथा आम जनता के बीच पर्चा वितरण का कार्यक्रम चलता रहा और कला-संस्कृति से जुड़ा सरकार... Read more
clicks 161 View   Vote 0 Like   2:54pm 30 Aug 2014 #
Blogger: पुंज प्रकाश
देखता हूँ कि एक चौराहे पर एक कलाकार माइक पर स्थानीय भाषा में किसी लोकगीत की पैरोडी गा रहा है, उसके बगल में दो स्त्रियां कठपुतलियों को नचाने की कोशिश में लगी है, एक नाल वादक ज़मीन पर उकडू सा बैठा गीत के साथ ताल मिला रहा है और पीछे पार्टी का बड़ा सा बैनर लगा है जिसमें एक खास पा... Read more
clicks 169 View   Vote 0 Like   2:53pm 30 Aug 2014 #
Blogger: पुंज प्रकाश
नेमीचन्द्र जैन की पुस्तक भारतीय नाट्य परम्परा के आधार पर बनाया गया संछिप्त नोट    आदिम या पौराणिक युगों से ही किसी न किसी तरह का रंगमूलक कार्यकलाप भारतीय जीवन का एक अनिवार्य अंग रहा है । कई शताब्दियों तक वह सामान्य लोक जीवन में केवल अनुष्ठानमूलक, गीत-नृत्य, ... Read more
clicks 205 View   Vote 0 Like   2:51pm 30 Aug 2014 #
Blogger: पुंज प्रकाश
गुरुशरण सिंहजन्म - सन 1929, निधन - 28 सितम्बर 2011हमारे समाज की यह कठोर, दुखद और त्रासदपूर्ण सच्चाई है कि जिन्हें हमारा आदर्श होना था उनकी स्थिति अधिकांशतः या तो दयनीय है, या हास्यास्पद या फिर उपेक्षित ! सदियों से वर्गों-वर्णों में विभाजित, रोटी-कपड़ा-मकान की जद्दोजह... Read more
clicks 188 View   Vote 0 Like   2:50pm 30 Aug 2014 #
Blogger: पुंज प्रकाश
भारत अपने चंद शहरों में नहीं बल्कि सात लाख गांवों में बसता है, लेकिन हम शहरवासियों का ख्याल है कि भारत शहरों में ही है और गांव का निर्माण शहरों की ज़रूरत पूरा करने के लिए हुआ है । –  गांधी.प्राकृतिक सुंदरता से लबरेज़ छत्तीसगढ़ का क़स्बा डोंगरगढ़, आज मूलतः बमलेश्वरी मंदिर ... Read more
clicks 220 View   Vote 0 Like   2:48pm 30 Aug 2014 #
Blogger: पुंज प्रकाश
विगत दिनों मुकेश बिजौल (आवरण), रोहित रूसिय, पंकज दीक्षित के रेखाचित्रों से सुसज्जित रंगमंच पर केंद्रित पत्रिका ‘इप्टानामा’ (भारतीय जन नाट्य संघ की वेब-पत्रिका का प्रथम वार्षिकांक) का प्रकाशन हुआ. पत्रिका का सम्पादन अविनाश गुप्ता व अपर्णा के सहयोग से दिनेश चौधरी न... Read more
clicks 178 View   Vote 0 Like   2:47pm 30 Aug 2014 #
Blogger: पुंज प्रकाश
सोमवार,(7 अक्टूबर 2013), की रात करीब बारह बजे बेगुसराय (बिहार) के युवा रंगकर्मी प्रवीन कुमार गुंजन काम खत्म करने के पश्चात अपने सहकर्मी के साथ बेगुसराय रेलवे स्टेशन पर चाय पी रहे कि पुलिस की जीप आकर रुकी और पूछताछ करने लगी. हम कलाकार हैं, काम खत्म करके स्टेशन चाय पीने आए ह... Read more
clicks 174 View   Vote 0 Like   2:44pm 30 Aug 2014 #
Blogger: पुंज प्रकाश
“हमें हिम्मत नहीं हारनी है. काम करते रहना है और बढ़ते रहना है, लेकिन खराब नाटक नहीं करना है, खराब गाने नहीं गाना है. लगातार नई चीज़ों को, नए लोगों को रंगमंच से जोड़ना है.” – ए के हंगल.चारों ओर से छोटी-छोटी पहाड़ियों और हर पहाड़ी पर विराजमान देवी-देवताओं और गुरुओं के आश्रमों... Read more
clicks 175 View   Vote 0 Like   2:42pm 30 Aug 2014 #
Blogger: पुंज प्रकाश
अमितेश कुमारमध्य मई और मध्य जून के बीच राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (आगे रानावि) रंगमंडल का ग्रीष्मोत्सव होता है। रानावि के बदले निजाम के तहत यह पहला ग्रीष्मोत्सव था और लंबी छुट्टी के बाद रंगमंडल प्रमुख भी इस बार  काम पर लौटे थे। इस बार महोत्... Read more
clicks 188 View   Vote 0 Like   2:14pm 6 Aug 2014 #
Blogger: पुंज प्रकाश
अपूर्वानंद का यह लेख समकालीन परिस्थितियों में राजनीति और संस्कृति के रिश्ते की पड़ताल करता है. और इस बात पर चिंता भी व्यक्त करता है कि जनता के बीच में राजनीति की ठीक ठीक समझ नहीं विकसित कर पाने में राजनीतिक पार्टियों की विफ़लता का कारण संस्कृतिकर्म से उनका अलगाव और इसके... Read more
clicks 181 View   Vote 0 Like   3:36pm 25 Jul 2014 #
Blogger: पुंज प्रकाश
मित्रो,एकाधिक विश्वस्त सूत्रों के अनुसार संस्कृति विभाग, भारत सरकार ने रंगमंच के क्षेत्र में दिए जाने वाले सभी प्रकार के अनुदानों (प्रोडक्शन ग्रांट, इंडीविजुअल ग्रांट, सैलरी ग्रांट और बिल्डिंग ग्रांट आदि) का मामला राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय को सौंपने का निर्णय किया ... Read more
clicks 170 View   Vote 0 Like   3:20pm 25 Jul 2014 #
Blogger: पुंज प्रकाश
नाटकों की श्रृंखला में मंडली के पाठकों के लिए पेश है रामजी यादव लिखित नाटक “फिर से चुनाव आया ।” इसे उपलब्ध कराया है रायगढ़ इप्टा की अपर्णा ने । यदि आप किसी रूप में नाटक का उपयोग करते हैं तो लेखक को ज़रूर सूचित करें । रामजी यादव से संपर्क करने के लिए यहाँ क्लिक करें । - मॉडरे... Read more
clicks 163 View   Vote 0 Like   10:07am 20 Jul 2014 #
Blogger: पुंज प्रकाश
दिल्ली में अच्छी पुस्तक एवं पत्र-पत्रिकाओं के लिए विक्रय-केन्द्र न के बराबर हैं। कुछ साल पहले तक मंडी हाउस स्थित श्रीराम सेंटर में वाणी प्रकाशन का एक पुस्तक केंद्र हुआ करता था, जहाँ हिंदी के श्रेष्ठ प्रकाशनों की पुस्तकों के अलावा पत्र-पत्रिकाएं और नाटकों की स्क्रिप्... Read more
clicks 177 View   Vote 0 Like   1:49pm 5 Apr 2014 #
Blogger: पुंज प्रकाश
हाथी का एक दृश्य दस्तावेज़ीकरण के प्रति हिंदी रंगमंच दृष्टिकोण बड़ा ही उदासीनता भरा रहता है । यह एक आम मान्यता है कि अभिनेता-निर्देशक लिखतें नहीं हैं । मंडली की कोशिश है कि इस खाई को यथासंभव कम किया जाय । पटना के युवा रंगकर्मी मो. जहांगीर ने अभी हाल ही में अपना पहला मंच ... Read more
clicks 135 View   Vote 0 Like   4:09pm 4 Apr 2014 #
Blogger: पुंज प्रकाश
विनोद कुमार का मौलिक नाटक.विभिन प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में लगातार लेखन कर रहे विनोद कुमार मूलतः साहित्य और पत्रकारिता से जुड़े हैं. समर शेष है, मिशन झारखण्ड (उपन्यास), आदिवासी संघर्ष गाथा (शोधपरक आलेख) आदि सहित कई कहानियां प्रकाशित. प्रस्तुत नाटक, नाट्यलेखन में उनका... Read more
clicks 121 View   Vote 0 Like   4:41am 3 Apr 2014 #
Blogger: पुंज प्रकाश
पुंज प्रकाश एक रंगमंचीय, एक साहित्यिक, एक कलात्मक अभिव्यक्ति जो अपने समय के लिए नहीं बोलती, उसकी कोई प्रासंगिकता नहीं है।- दरियो फ़ो, नोबेल पुरस्कार से सम्मानित रंगकर्मी।असहमति सृजन की जननी है और लोकतंत्र के मूल विचारों में से एक भी। रंगमंच, साहित्य,कला और संस्कृति क... Read more
clicks 121 View   Vote 0 Like   2:19am 28 Mar 2014 #
Blogger: पुंज प्रकाश
आप सबको विश्व रंगमंच दिवस की एक दिन बाद भी बधाई.... लेकिन एक बात बताइये, ये ख़ालिस बधाई-बधावे ले-देकर क्या कर लेंगे हम लोग... अब बधाइयों का ( और फेसबुक पर लाइक्स का ) अचार भी तो नहीं डाला जा सकता है न । मेरा मज़ाक़ करने का फिलहाल इरादा नहीं है । मैं जो बात कहना चाहता हूँ वो ये कि आज रं... Read more
clicks 191 View   Vote 0 Like   2:05am 28 Mar 2014 #
Blogger: पुंज प्रकाश
जहाँ कहीं भी मानव समाज है कला प्रदर्शन का अदम्य उत्साह स्पष्ट दिखायी देता है ।छोटे-छोटे गावों में पेड़ों की छाँव में, वैश्विक महानगरों के उच्च तकनीक से लैस मंचों पर, स्कूलों के प्रेक्षागृहों, खेतों  और मंदिरों में ; मलिन बस्तियों में, नगर चौक पर, सामुदायिक केंद्र और शहर... Read more
clicks 200 View   Vote 0 Like   2:54pm 22 Mar 2014 #

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