POPULAR ENGLISH+ SIGNUP LOGIN

Blog: रचना रवीन्द्र

Blogger: Rachana Dixit
ख्वाब और ख़ामोशी उजाले रोशनी से मिल,धूप में घुल मिल जो गये.बेहद नाजुक कुछ ख्वाब हमारे,होश के आगोश में बेहोश हो गये. भूख की फसल उगी ही थी अभी,वो आ के जुबाँ पे चरस बो गये.मौत भी इस कदर मिली हमसे,कांपते  कांपते खंजर भी रो गये.आवाज़  निकली भी तो ऐसे,ज्यों चीख के पाँव खो गये.ध... Read more
clicks 193 View   Vote 0 Like   3:00pm 23 May 2015 #रचना
Blogger: Rachana Dixit
जीवन और आशा  (१)जीवन है तो गति है गति है तो घर्षण है घर्षण है तो संघर्ष हैसंघर्ष है तो शुष्कता है शुष्कता है तो भंगुरता है कुछ चिर परिचित से नहीं लगते ये शब्दअगर हाँ तो क्या ये जीवन है ये संबंध है ये रिश्ते हैं या ये रिसते हैं (२)जीवन है तो गति है गति ह... Read more
clicks 81 View   Vote 0 Like   6:38am 17 May 2015 #गति
Blogger: Rachana Dixit
स्त्री नम्रता, विनम्रता आभूषण है स्त्रिओं के स्त्री हूँ, सो लोभ संवरण न कर सकी.अपने से बड़ों ने बुरा किया या सोचा मेरे लिए,समझा आशीर्वाद, रख लिया सर माथे पर.छोटों ने कहा कुछ भी,अबोध है, नासमझ हैं...समझा लिया मन को. कहते हैं पेड़ में फूल लगें,तो झुक जाता है.लगे फल तो झ... Read more
clicks 128 View   Vote 0 Like   4:38am 10 May 2015 #माँ
Blogger: Rachana Dixit
प्रतिभाएँजानती हूँ मैं एक आदरणीय, परम पूज्यनीय,    वन्दनीय, प्रातः स्मरणीय व्यक्ति को. लिखी हैं जिन्होंने हिन्दी संस्कृत में पुस्तकें. जीवन के अस्सी दशक बाद आज भी वही तेवर, वही मधुर मुस्कान आज भी गर्व है जिन्हें अपनी एक सम्मानित उपलब्धि ला पर.पूरे जीवन ... Read more
clicks 123 View   Vote 0 Like   12:30am 3 May 2015 #रचना
Blogger: Rachana Dixit
इसे निमंत्रण न कहोकुछ दिन पहले एक विवाह निमंत्रण ने झकझोर दिया. न इसे पढकर न इसे देखकर लगा कि यह निमंत्रणपत्र है. यह समाचार पत्र में छपे किसी समाचार की तरह एक पैराग्राफ मात्र था.पूर्व पुलिस निदेशक की पुत्री आई ऐ एस अधिकारी और नेत्र विशेषज्ञा की पुत्री, जिसने भारत के ... Read more
clicks 88 View   Vote 0 Like   12:30am 26 Apr 2015 #निमंत्रणपत्र
Blogger: Rachana Dixit
श्री गणेशकहते हैं लोग, करती हूँ मैं अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन भली भांति. हर परीक्षा में उत्तीर्ण होने का भरसक प्रयास कठिन परिस्थितियों में संयमशायद इसीलिए भगवान ने दी मुझे दो बेटियां.सोचने लगी पति और पुत्र के दीर्घायु व स्वस्थ्य जीवन के लिए हैंअनगिनत व... Read more
clicks 158 View   Vote 0 Like   4:25pm 16 Apr 2015 #पुत्र
Blogger: Rachana Dixit
राजनीति इधर भीकभी अकड़ती इतरातीभाव खाती कोई सब्जीअचानक बेचारी हो जातीजब दूसरी दो चार सब्जियाँलजाती लड़खड़ाती गिर पड़ती,हम उसे थाम लेते बस जाती वोहमारी आँखों मेंसंकटमोचन बन,पर अब वो बात नहीं इसके पहले कि उपयुक्त समय जानकोई लजाये, लड़खड़ाये, गिर पड़े.भाव खाती सब्... Read more
clicks 159 View   Vote 0 Like   6:58am 25 Aug 2013 #रचना
Blogger: Rachana Dixit
दस्तक  रोती बिलखती हर गली मोहल्ले में,सांकल अपना पुराना घर ढूंढती है.सजी थी कभी मांग में जिसकी,वो चौखट वो दीवार ओ दर ढूंढती है.डाले बांहों में बांहे, किवाड़े किवडियाँ,आज भी अपना वो घर ढूंढती हैं.जहाँ छत ओ मुंडेरें थी सखी सहेली, आंगन पनाले वाला घर ढूंढती हैं.छोटे ओ गह... Read more
clicks 172 View   Vote 0 Like   4:46am 11 Aug 2013 #रचना
Blogger: Rachana Dixit
कभी यूँ भी ..मेरे शहर का एक पांच सितारा होटल कागज का टपकता चाय का कप उसे सहारा देने को लगाया गया एक और कप दुबली पतली काली निरीह जाने कैसी चा..य ..यूँ लगा उसे पानी कह कर पुकारूँ अगले ही पल सोचा पानी की इस तंगी में कल के अखबार की सुर्खियाँ ना बन जाए  "पानी क... Read more
clicks 168 View   Vote 0 Like   5:00am 7 Jul 2013 #चाय
Blogger: Rachana Dixit
विरक्ति सब कहते हैंमेरी माँ नेमेरे शरीर में रोपी थींकुछ नन्हीं कोपलेंगन्ने कीतब जब थी मैंउनके गर्भ मेंसमय के साथ बढती रहीमैं और वो फसलहंसना, खिलखिलाना,हँसाना, मिठास बिखेरनामेरा पर्याय हो गयाअचानक उम्र केकिसी मोड पर.छूट गया सब कुछ.सूखने लगी मैंऔर वो फसलजमने लगा शरीर... Read more
clicks 186 View   Vote 0 Like   1:00am 30 Jun 2013 #विरक्ति
Blogger: Rachana Dixit
विकास की इबारत आज कल देखती हूँ हर शामलोगों को बतियाते, फुसफुसातेजाती हूँ करीबकरती हूँ कोशिशसुनने की समझने कीकि पास के बाग मेंपेड़ों पर रहते हैं भूतनहीं करती विश्वास उन परपहुँचती हूँ बाग मेंदेखती हूँ हरी भरी घासछोटे नन्हें पौधों को अपनी छत्रछाया मेंबढ़ने और पनपने क... Read more
clicks 182 View   Vote 0 Like   1:30am 23 Jun 2013 #पेड़
Blogger: Rachana Dixit
जेठ की दुपहरी मेंजेठ की दुपहरी मेंआम और अम्बौरी मेंकोयल और गिलहरी मेंमन के आंगन और देहरी मेंछाया उस छरहरी मेंखुशबू तुम फुरहरी मैं.दग्ध प्रज्वलित बयारी मेंतन की क्यारी क्यारी मेंफल सब्जी तरकारी मेंहल्की झीनी सी सारी मेंराधा और बनवारी मेंगन्ना तुम खांडसारी मैं.इतने ... Read more
clicks 155 View   Vote 0 Like   1:00am 16 Jun 2013 #आम
Blogger: Rachana Dixit
आगसुलग रही हूँ जाने कब सेसमझने लगी थीनाते रिश्ते दुनिया जबसेकभी महकतीसबको महकातीखुशबू बिखेरतीकभी धुआं धुआंभीतर बाहर सब तरफकालिख ही कालिखजलना जलना सुलगनामेरी आदत हो गईउम्र के इस पड़ाव पर सुलग.नहीं जल रही हूँ आज भीपर एक लौ की तरहनहीं छोड़ती अब धुआंसुगंध या दुर्गंध... Read more
clicks 178 View   Vote 0 Like   1:30am 9 Jun 2013 #प्रकाश
Blogger: Rachana Dixit
दायरेदेखती हूँ थोड़ी थोड़ी दूर पर खड़ेबांस के झुरमुटों कोकैसे खड़े हैं सीधे सतरअपने और सिर्फ अपनों कोअपनी बाँहों के दायरे में समेटेकभी कोई नन्हीं बांस की कोपलबढती है बढ़ना चाहती हैपास के बांस समूह की तरफएक वयोवृद्ध बांसझुकता नहींटूटता है टूट कर गिरता हैउस नन्हीं क... Read more
clicks 161 View   Vote 0 Like   1:30am 2 Jun 2013 #दूरियाँ
Blogger: Rachana Dixit
दिल्ली का दिल हमारे शहर मेंकोई व्याकुल हैब्याह रचाने कोतैयार हैं बारातीबैंड बाजा घोड़ी गाड़ी.पंडित करता है हर बारएक तिथि की घोषणादुल्हन की तरफ से हर बारआता है एक जवाब डाक्टर कादुलहन को समय चाहिए.दुलहन बीमार हैहर बार एक नई बीमारीमलेरिया, डेंगू, अपच, लकवा, पीलियामुहसे ... Read more
clicks 166 View   Vote 0 Like   1:30am 26 May 2013 #दिल्ली का दिल
Blogger: Rachana Dixit
संकेतफूलों का खिलना एकएक सकारात्मकता,एक उत्सव, एक उल्लास, एक उत्पत्ति.पास के एक गांव मेंएक विशेष प्रजाति के बांस का झुरमुटअचानक पट गया फूलों सेऔर पट गएगावं के बुजुर्गों के माथेचिंता की लकीरों से.इन फूलों का खिलना.एक नकारात्मकता, एक विपत्ति.धरती माँ की छाती फटने का संद... Read more
clicks 202 View   Vote 0 Like   1:30am 19 May 2013 #फूल
Blogger: Rachana Dixit
पहेली आजकल मेरे शहर मेंजब तब होता हैबादलों का जमावड़ाबादल की बाँहों में होती हैलुका छिपी वर्षा कीखुश होती हूँजानती हूँ दोनों के संगम सेजल्दी ही पनपेंगीकुछ नन्हीं बूंदेंवर्षा की कोख मेंहोगी कुछ हलचलफिर कौंध उठेगी बिजलीउठते ही प्रसव पीड़ा केजन्म लेंगी नन्ही नन्ही ... Read more
clicks 134 View   Vote 0 Like   1:30am 12 May 2013 #बूंदें
Blogger: Rachana Dixit
शमाकहते हैं उसेदर्द नहीं होतावो किसी के प्यार मेंपागल नहीं होतापलक पांवड़े नहीं बिछातागिरता नहीं बिखरता नहींबूंद बूंद रिसता नहींबहता नहीं टूटता नहींकल एक मोमबत्ती कोदिए के प्यार मेंजलते सुलगतेबिखरते टूटतेसीमाओं को तोड़ते देखाऔर दियाएक जलन तपिशआग रौशनी थी उधरफ... Read more
clicks 155 View   Vote 0 Like   1:30am 5 May 2013 #प्यार
Blogger: Rachana Dixit
महाभारत  आज के इस युग मेंजब देखो जहाँ देखोदिखाई सुनाई पड़तीमहाभारतपिता-पुत्र द्वन्दमेरा घर भीनहीं है अछूतान चाहते हुए भीसारा दिन हर पलहोता है यहाँ भीपिता पुत्र द्वन्दऔर कोई नहीं...ये हैं अर्जुन अभिमन्युअर्जुन सदैव तत्परत्वरित धीर गंभीरऑंखें स्थिरअपने लक्ष्य परम... Read more
clicks 232 View   Vote 0 Like   1:30am 28 Apr 2013 #महाभारत
Blogger: Rachana Dixit
बसंत विभावरी  बांधी है गठरी वसंत ने जब से,तपने लगी देह हवा की तबसे.मिलन की खुमारी उतरी नहीं थी,जुदाई के आँसू हैं राह में कब से.मायूस फूलों की धड़कन अधूरी,पराग औ भंवरें भी रूठे हैं रब से.पत्तों का पेड़ों से लिखा है बिछुड़ना,धरा पर विचरते ये फिर क्यूँ अजब से.न धानी चुनरिया न ... Read more
clicks 177 View   Vote 0 Like   1:30am 21 Apr 2013 #फूल
Blogger: Rachana Dixit
अनबुझे प्रश्नतुम मुझे बहुत याद आते हो,मेरी तनहाइओं में,सुनसान वीरानों में,मेरे अनबुझे से प्रश्न।क्यों होते हैं कुछ रिश्ते,कांच से नाज़ुक,कुछ ढाल से मजबूत,कुछ रौशनी में परछाई, कुछ कागज़ पर रोशनाई।तुम मुझे बहुत याद आते हो,मेरे अनबुझे से प्रश्न।क्यों नाज़ुक रिश्ता दरज... Read more
clicks 149 View   Vote 0 Like   1:30am 14 Apr 2013 #अनबुझे प्रश्न
Blogger: Rachana Dixit
माँ(एक बाल कविता)मेरी माँ जैसी कोई माँ हो,ऐसा कभी हुआ न होगा।स्नो व्हाइट सिन्ड्रेला सी, शांत सौम्य और सुन्दरता में,उसका जैसा हुआ न होगा।रात अँधेरी सुबह सवेरे,जब भी देखो जब भी मांगोउसका प्यार बरसता होगा।मेरी माँ जैसी कोई माँ हो,ऐसा कभी हुआ न होगा।दुर्गा काली सी गरिमा औ... Read more
clicks 209 View   Vote 0 Like   1:30am 7 Apr 2013 #माँ
Blogger: Rachana Dixit
पासवर्ड मैं पासवर्ड हूँअजब अनोखामैं हैक होना चाहता हूँहैंग होना चाहता हूखो जाना चाहता हूँभुला देना चाहता हूँ अपने आपकोएक बार आजमा कर तो देखोहां मैं तुम्हारा और केवल तुम्हारापासवर्ड हूँ.और फिरपिछले कुछ दिनों सेबस एक ही मैसेजबार बार देखती हूँआपका अकाउंट किसी ने खोल... Read more
clicks 213 View   Vote 0 Like   1:30am 31 Mar 2013 #सपने
Blogger: Rachana Dixit
फागुन मेंतन मेरा महुआ हुआ जाता है फागुन में,हर घाव मरहम हुआ जाता है फागुन में.ये खुमारी ये सिहरन अजब सी हवा में,नशा भांग को हुआ जाता है फागुन में.अंबर की सियाही से खत चाँद ने लिखा,आंचल बदली का ढला जाता है फागुन में.बालों की लटों से ढांप रखा है चेहरा उसने,मुख  गुलाल हुआ जात... Read more
clicks 173 View   Vote 0 Like   1:30am 24 Mar 2013 #फागुन
Blogger: Rachana Dixit
तुम्हारे लियेएक बार फिरकल तुमने इतनी दूर से हीमेरे मन मेरी आत्मा कोमेरे भीतर कहीं दूर तक छुआ.तुम्हारे शब्द कानों के रास्तेमेरे शरीर में अब तक घुल रहे हैं धीमे धीमे. और मैं भीजानती हूँ ये सबकेवल मेरा मन रखने कोनहीं कहा था तुमने.इतने इतने इतने सालों बाद भीतुम्हारी आवाज... Read more
clicks 147 View   Vote 0 Like   1:00am 17 Mar 2013 #तुम्हारे लिये

Share:

Members Login

    Forget Password? Click here!
  • Latest
  • Week
  • Month
  • Year
  हमारीवाणी.कॉम पर ब्लॉग पंजीकृत करने की विधि बहुत सरल हैं। इसके लिए सबसे पहले प्रष्ट के सबसे ऊपर दाईं ओर लिखे ...
  हमारीवाणी पर ब्लॉग-पोस्ट के प्रकाशन के लिए 'क्लिक कोड' ब्लॉग पर लगाना आवश्यक है। इसके लिए पहले लोगिन करें, लोगिन के उपरांत खुलने वाले प...
और सन्देश...
कुल ब्लॉग्स (3993) कुल पोस्ट (195269)