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Blog: मन के पाखी

Blogger: Sweta sinha
संवेदना से भरीसाधारण स्त्रियाँ   अपनी भावनाओं को ज्ञानेंद्रियोंसे ज्यादा महसूसती हैस्नेहिल रिश्तों कोनाजुक डोर कीपक्की गाँठ से बाँधकरस्वजनों के अहित,उनसे बिछोह कीकल्पनाओं के भय कोव्रत,उपवास के तप में गलाकरअपनी आत्मा के शुद्ध स्पर्श से नियति को विनम्रता से... Read more
Blogger: Sweta sinha
(१)--------------------भोर की पहली किरण फूटने पर छलकी थी तुम्हारी मासूम मुस्कान कीशीतल बूँदेंजो अटकी हैं अब भीमेरी पलकों के भीतरी तह मेंबड़े जतन सेरख दिया है साँसों के समुंदर मेंतुम्हारे जाने के बाद जब-जब भावों की लहरें छूती है मन के किनारों कोजीवन के गर्म रेत परबिखरकर इ... Read more
clicks 18 View   Vote 0 Like   4:28am 22 Sep 2021 #
Blogger: Sweta sinha
नामचीन औरतों कीलुभावनी कहानियाँक्या सचमुचबदल सकती हैंहाशिये में पड़ीस्त्री का भविष्य...?उंगलियों परगिनी जा सकने वालीप्रसिद्ध स्त्रियों कोनहीं जानतीपड़ोस की भाभी,चाची,ताई,बस्ती की चम्पा,सोमवारीलिट्टीपाड़ा के बीहड़में रहनेवालीमंगली,गुरूवारीस्पोर्ट्स शू पहनेमंगला ... Read more
clicks 6 View   Vote 0 Like   11:11am 19 Sep 2021 #
Blogger: Sweta sinha
आज भी याद है मुझेतुम्हारे एहसास की वोपहली छुअनदिल की घबरायी धड़कनसरककर पेट में तितलियां बनकरउड़ने लगी थी,देह की थरथराती धमनियों मेंवेग से उछलतीधुकधुकी के स्थान परआ बैठी थी नन्ही-सी बुलबुलबेघर कर संयत धड़कनों कोअपना घोंसलाअधिकारपूर्वक बनाकरतुम्हारे मन का प्रेम ग... Read more
clicks 38 View   Vote 0 Like   7:14am 16 Sep 2021 #
Blogger: Sweta sinha
शिक्षक मेरे लिए मात्र एक वंदनीय शब्द नहीं है, न ही मेरे पूजनीय शिक्षकों की मधुर स्मृतियाँ भर ही।मैंने स्वयं शिक्षक के दायित्व को जीया है।मेरी माँ सरकारी शिक्षिका रही हैं,मुझसे छोटी मेरी दोनों बहनें भी वर्तमान में सरकारी शिक्षिका हैं। उनके शिक्षक बनने के सपनों से य... Read more
clicks 20 View   Vote 0 Like   3:05pm 5 Sep 2021 #
Blogger: Sweta sinha
 अवतारों की प्रतीक्षा मेंस्व पर विश्वास न कम होतेरी कर्मठता की ज्योतिसूर्यांश,तारों के सम हो।सतीत्व की रक्षा के लिएचमत्कारों की कथा रहने दो,धारण करो कृपाण,कटारआँसुओं को व्यर्थ न बहने दो। व्याभिचारियों पर प्रहार प्रचंडउष्मा ज्वालामुखी सम हो।अवतारों की प्रतीक्... Read more
clicks 117 View   Vote 0 Like   4:47pm 30 Aug 2021 #
Blogger: Sweta sinha
 बर्बरता के शिकाररक्तरंजित,क्षत-विक्षत देह,गिरते-पडते,भागते-कूदतेदहशत के मारेआत्महत्या करने को आमादालोगों कीतस्वीरों के भीतर कीसच की कल्पनाभीतर तक झकझोर रही है।पुरातात्विक विश्लेषकों के साथसभ्यताओं की अंतिम सीढ़ी पर लटके जिज्ञासुओं की भाँतिदेखकर अनुमान क... Read more
clicks 41 View   Vote 0 Like   5:59pm 18 Aug 2021 #
Blogger: Sweta sinha
करती हूँ प्रणाम उनको,शीश नत सम्मान में है,प्राण दे,इतिहास के पृष्ठों में अंकित हो गयेजिनकी लहू की बूँद से माँ धरा पावन हुईमाटी बिछौना ओढ़ जो तारों में टंकित हो गये।चित्रलिखित चित्त लिए चिता सजाते पुत्र की क्षीर, नीर, रिक्त आँचल स्मृतियाँ टटोले सूत्र की,मौली,रोली राखी ... Read more
Blogger: Sweta sinha
मुंडेर परदाना चुगने आतीचिडियों के टूटे पंखइकट्ठा करती,नभ में उड़ते देखउनके कलरव परआनंदित होतीमैं चिड़िया हो जानाचाहती हूँ,मुझे चिड़िया पसंद हैक्योंकि अबूझ भाषा मेंमुझसे बिना कोई प्रश्न कियेवो करती हैं मुझसे संवाद।मखमली,कोमल,खिलती कलियों, फूलों कीपंखुड़ियों को छूकर ... Read more
clicks 37 View   Vote 0 Like   2:46pm 28 Jul 2021 #
Blogger: Sweta sinha
आत्मा को ललकारतीचीत्कारों को अनसुनाकरना आसान नहीं होता ...इन दिनों सोचने लगी हूँएक दिन मेरे कर्मों काहिसाब करतीप्रकृति ने पूछा कि-महामारी के भयावह समय मेंतुम्हें बचाये रखा मैंनेतुमने हृदयविदारक, करूण पुकारों,साँसों के लिए तड़प-तड़पकर मरतेबेबसों जरूरतमंदों की क्या... Read more
clicks 60 View   Vote 0 Like   11:23am 24 Apr 2021 #
Blogger: Sweta sinha
वक़्त के अजायबघर मेंअतीत और वर्तमान प्रदर्शनी में साथ लगाये गये हैं-ऐसे वक़्त मेंजब नब्ज़ ज़िंदगी कीटटोलने पर मिलती नहीं,साँसें डरी-सहमीहादसों की तमाशबीन-सीदर्शक दीर्घा में टिकती नहीं,ज़िंदगी का हर स्वादखारेपन में तबदील होने लगामुस्कान होंठो पर दिखती नहीं,नींद के इं... Read more
clicks 116 View   Vote 0 Like   3:21am 18 Apr 2021 #
Blogger: Sweta sinha
निर्लज्ज निमग्न होकर मनदेता है तुम्हें मूक निमंत्रणऔर तुम निर्विकार,शब्द प्रहारकरझटक जाते हो प्रेम अनदेखा करजब तुम्हारा मन नहीं होता...।घनीभूत आसक्ति में डूबाअपनी मर्यादा भूलप्रणय निवेदन करता मन तुम्हारे  दर्शन बखान परअपनी दुर्बलताओं के भान परलजाकर सोचता हैत... Read more
clicks 56 View   Vote 0 Like   3:52pm 9 Apr 2021 #
Blogger: Sweta sinha
१)बिना जाने-सोचे उंगलियाँ उठा देते हैं लोगबातों से बात की चिंगारियाँ उड़ा देते हैं लोगअख़बार कोई पढ़ता नहीं चाय में डालकरकिसी के दर्द को सुर्खियाँ बना देते हैं लोग२)चलन से बाहर हो गयी चवन्नियों की तरह,समान पर लिपटी बेरंग पन्नियों की तरह,कुछ यादें ज़ेहन में फड़फड़ाती हैं अक्... Read more
clicks 109 View   Vote 0 Like   8:23am 3 Apr 2021 #
Blogger: Sweta sinha
कली केसरी पिचकारी मन अबीर लपटायो,सखि रे! गंध मतायो भीनीराग फाग का छायो। चटख कटोरी इंद्रधनुषीवसन वसुधा रंगवायो,सरसों पीली,नीली नदियाँसुमनों ने माँग सजायो।कचनारी रतनारी डाली  लचक मटक इतरायो, सारंग सुगंध सुधहीन भ्रमर बाट बटोही बिसरायो।सखि रे! गंध मतायो भीन... Read more
clicks 65 View   Vote 0 Like   12:23pm 27 Mar 2021 #
Blogger: Sweta sinha
मुझे ठहरी हुई हवाएँबेचैन करती हैंबर्फीली पहाड़ की कठिनाइयाँअसहज करती हैतीख़ी धूप की झुलसन सेरेत पर पड़ी मछलियों की भाँतिछटपटाने लगती हूँकिसानों की तरह जीवट नहींऋतुओं की तीक्ष्णता सह नहीं पातीमैं बीज भी तो नहींजो अंकुरित होकरधान की बालियाँ बनेऔर किसी का पेट भर सकेमै... Read more
clicks 89 View   Vote 0 Like   3:05am 3 Mar 2021 #
Blogger: Sweta sinha
गुन-गुन छेड़े पवन बसंतीधूप की झींसी हुलसाये रे, वसन हीन वन कानन मेंजोगिया टेसू मुस्काये रे।ऋतु फाग के स्वागत में धरणी झूमी पहन महावर, अधर हुए सेमल के रक्तिमसखुआ पाकड़ हो गये झांवर,फुनगी आम्र हिंडोले बैठीकोयलिया बिरहा गाये रे,निर्जन पठार की छाती परजोगिया टेसू मुस्... Read more
clicks 114 View   Vote 0 Like   5:20am 25 Feb 2021 #
Blogger: Sweta sinha
कुछ भी लिखने कहने का दौर नहीं हैं।अर्थहीन शब्द मात्र,भावों के छोर नहीं हैं।उम्मीद के धागों से भविष्य की चादर बुन लेते हैंविविध रंगों से भ्रमित कोई चटक चित्र चुन लेते हैंसमय की दीर्घा में बैठे गुज़रती नदी की धार गिनतेबेआवाज़ तड़पती मीनों को नियति की मार लिखतेभेड़ों में ह... Read more
clicks 175 View   Vote 0 Like   4:31pm 22 Feb 2021 #
Blogger: Sweta sinha
मैं प्रकृति के प्यार में हूँ...।किसी उजली छाँह की तलाश नहीं हैकिसी मीठे झील की अब प्यास नहीं है,नभ धरा के हाशिये के आस-पासधडक रही है धीमे-धीमे -साँस,उस मीत के सत्कार में हूँ।मैं प्रकृति के प्यार में हूँ...।सृष्टि की निभृत पीड़ाओं से मुक्त होदिशाओं के स्वर पाश से उन्मुक्त ... Read more
clicks 120 View   Vote 0 Like   5:08am 11 Feb 2021 #
Blogger: Sweta sinha
शताब्दियों सेविश्व की तमाम सभ्यताओं केआत्ममुग्ध शासकों के द्वाराप्रजा के लिए बनाये नियमऔर निर्गत विशेषाधिकार के समीकरणों से असंतुष्ट,असहमति जीभ पर उठायेउद्धारक एवं प्रणेता...शोषित एव शासकों,छोटे-बड़े का वर्गीकरण करते समाजिक चेतना कीमहीन रेखाओं की गूढ शब्दा... Read more
clicks 134 View   Vote 0 Like   5:18pm 6 Feb 2021 #
Blogger: Sweta sinha
 व्यक्ति से विचारऔर विचार से फिरवस्तु बनाकर भावनाओं के  थोक बाज़ार में ऊँचे दामों में में बेचते देख रही हूँ।चश्मा,चरखा,लाठी,धोती,टोपीखादी,बेच-बेचकर संत की वाणीव्यापारी बहेलियों कोशिकार टोहते देख रही हूँ।सत्य से आँखें फेर,आँख,कान,मुँह बंद किये आदर्शो... Read more
clicks 88 View   Vote 0 Like   4:31pm 30 Jan 2021 #
Blogger: Sweta sinha
उड़ती गर्द मेंदृश्यों को साफ देखने की चाहत मेंचढ़ाये चश्मों सेपरावर्तित होकरबनने वाले परिदृश्यअब समझ में नहीं आते तस्वीरें धुंधली हो चली हैनिकट दृष्टि में आकृतियों कीभावों की वीभत्सता सेपलकें घबराहट सेस्वतः मूँद जाती हैं,दूर दृष्टि मेंविभिन्न रंग केसारे चेहर... Read more
clicks 88 View   Vote 0 Like   5:32pm 28 Jan 2021 #
Blogger: Sweta sinha
राष्ट्रीय त्योहार पर कर अर्पित सुमनअनाम बलिदानियों को नमन करती है,धन्य धरा,माँ नमन तुम्हें करती हैधन्य कोख,सैनिक जो जन्म करती है।-----शपथ लेते, वर्दी देह पर धरते ही साधारण से असाधारण हो जातेबेटा,भाई,दोस्त या पति से पहले,माटी के रंग में रंगकर रक्त संबंध,रिश्ते स... Read more
clicks 166 View   Vote 0 Like   5:34am 26 Jan 2021 #
Blogger: Sweta sinha
(१)सर्द रातगर्म लिहाफ़ मेंकुनमुनाती,करवट बदलतीछटपटाती नींदपलकों से बगावत करबेख़ौफ़ निकल पड़ती हैकल्पनाओं के गलियारों में,दबे पाँव चुपके से खोलते हीसपनों की सिटकनीआँगन में कोहरा ओढ़े चाँद माथे को चूमकरमुस्कुराता हैऔर नींद मचलकरमाँगती है दुआकाश!!पीठ पर उग आए रेश... Read more
clicks 92 View   Vote 0 Like   4:29pm 23 Jan 2021 #
Blogger: Sweta sinha
धरती की गहराई कोमौसम की चतुराई कोभांप लेती है नन्ही चिड़ियाआगत की परछाई को।तरू की हस्त रेखाओं कीसरिता की रेतील बाहों कीबाँच लेती है पाती चिड़ियाबादल और हवाओं की।कानन की सीली गंध लिएतितली-सी स्वप्निल पंख लिएनाप लेती है दुनिया चिड़ियामिसरी कलरव गुलकंद  लिए।सृष्टि मे... Read more
clicks 122 View   Vote 0 Like   2:19pm 19 Jan 2021 #प्रकृति कविता
Blogger: Sweta sinha
हरी-भूरी छापेवालीवर्दियों में जँचताकठोर प्रशिक्षण से बनालोहे के जिस्म मेंधड़कता दिल,सरहद की बंकरों मेंप्रतीक्षा करता होगामेंहदी की सुगंध में लिपटे कागज़ों की,शब्द-शब्दबौराये एहसासों कीअंतर्देशीय, लिफ़ाफ़ों की।उंगलियां छूती होंगी रह-रहकरमाँ की हाथों से बँधी ताबी... Read more
clicks 114 View   Vote 0 Like   8:43am 15 Jan 2021 #
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