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Blog: 'दि वेस्टर्न विंड' (pachhua pawan)

Blogger: pawan kumar mishra
कंगना राणावत और दिलजीत दोसांझ के मध्य संवाद का एक समाजशास्त्रीय पहलू है और वह है  उसमें स्त्री पुरुष की आइडेंटिटी से जुड़े मुद्दे। बातचीत कुछ भी हुयी हो पर कंगना को आखिरकार  लैंगिक  दांव से ही पटका जा सका। ट्विटर पर चले ट्रेंड ‘दिलजीत कंगना को पेल रहा है’ ने इस बात ... Read more
clicks 61 View   Vote 0 Like   4:49am 20 Dec 2020 #सेक्सी
Blogger: pawan kumar mishra
 बहुत कम किताबें ऐसी होती हैं जो एक बैठक में ही समाप्त हो जाती हैं। मतलब एक बार पढ़ना शुरू किये तो आप बिना खत्म किये उठ नहीं सकते। फरवरी नोट्स एक ऐसा ही उपन्यास है।प्रेम सृष्टि की सबसे मीठी अनुभूति का नाम है। कातिक के नए गुड़ की तरह, जेठ में पेंड़ पर पके पहले आम की तरह... यह व्... Read more
clicks 39 View   Vote 0 Like   4:38pm 6 Nov 2020 #
Blogger: pawan kumar mishra
 फरवरी नोट्स (प्रेम गली अति सांकरी...)फरवरी का महीना प्रेम का प्यार का महीना जाना जाता है , प्रेम का महीना और पूरे साल के महीनों में सबसे कम दिन वाला , शायद प्रेम से जुड़ा है इसलिए कुछ छूटा हुआ सा लगता है यह पूरे साल में। इसी महीने के नाम पर डॉ पवन विजय जी का लिखे उपन्यास "#फर... Read more
clicks 45 View   Vote 0 Like   6:04am 6 Oct 2020 #
Blogger: pawan kumar mishra
बारिशें लौटकर आती हैं, पतझड़ और वसंत लौटकर आता है, ठीक इसी तरह पहला प्यार भी जीवन के किसी ना किसी मोड़ पर अवश्य लौटकर आता है, चाहे वह स्मृतियों के रूप में या सदेह हो। मन के श्याम पट्ट पर स्नेह के श्वेत अक्षरों में लिखे गये शब्द समय के डस्टर से मिटाए नही मिटते। जीवन की आपा ध... Read more
clicks 43 View   Vote 0 Like   7:24am 25 Aug 2020 #फरवरी नोट्स
Blogger: pawan kumar mishra
प्रेम में पड़ी स्त्रियाँ हो जाती हैंगोमुख से निकली गंगाजिसके घाटों पर बुझती हैप्यासों की प्यासलहरों पर पलते हैं धर्मस्पर्श मात्र से तर जाती हैं पीढ़ियाँकंकर कंकर शंकरहरियरा उठते हैं खेतभर जाते हैं कोठार अन्न सेप्रेम में पड़ी स्त्रियों को चुकाना होताप्रेम में नदी बन ... Read more
clicks 53 View   Vote 0 Like   12:50pm 27 Jul 2020 #
Blogger: pawan kumar mishra
स्त्री की सुंदरता देखनी हैउसकी आँखों में नहीआँखों के नीचे बने काले घेरों में देखोये घेरे इस बात के साक्षी हैंकि उसकी सुंदरता आरोपित नही हैउसकी सुंदरता रात रात में अपने बच्चे को लोरी सुनाने और उसका बिस्तर बदलने से आई हैउसकी सुंदरता किसी को आंखों में बसाने से आई हैवे ल... Read more
clicks 44 View   Vote 0 Like   3:28pm 20 Jul 2020 #
Blogger: pawan kumar mishra
मैं चाहता हूँ कि 'पारले जी'कभी न बदलेवही पैकेजिंगवही स्वादवही दाम(सरकार सब्सिडी दे इसके लिए)न उसके खाने में होकोई इनोवेशनचाय में डुबा डुबा,या चाय का हलवा बनाया पानी के साथयात्रा में, पिकनिक पर,नाश्ते में, शाम को कविता सुनतेया स्टडी टेबल पर ठीक वैसे जैसे हम बचपन में ... Read more
clicks 58 View   Vote 0 Like   2:43pm 30 Jun 2020 #पारले जी
Blogger: pawan kumar mishra
दुःखों की वसीयतजब बंट रहे थे खेत खलिहान दुआर मोहारगोरु बछेरु बरतन भांड़े ताल तलैया बाग बगीचेजब बंट रहे थेहाथी घोड़े जर जमीनलाल मोहर गिन्नी  अशर्फी रुपिया यहां तक कि जब हुआठाकुर जी का बंटवाराकितने दिन किसके यहां रहेंगेजब इस बात को भी तय किया गया किबाबा की बुढ़ौती ... Read more
clicks 66 View   Vote 0 Like   6:20am 16 May 2020 #वसीयत
Blogger: pawan kumar mishra
जब जीवन की थकनउदासियों के बोझ तोड़ने लगते हैं कंधे तो लगता है लौट जाएं अपने घरजहां जीवन से भरी गेहूँ की बालियाँअब भी चैता गाती होंगीनेह छोह के रंग अभी भी छपे होंगेफागुन की दीवार परअसाढ़ के भीगे दिनसावन को गीत गाने आमंत्रित करते होंगेभादों झरता होगा दालान की ओरी सेअब... Read more
clicks 81 View   Vote 0 Like   1:28pm 13 May 2020 #
Blogger: pawan kumar mishra
शिलालेख पर यह अक्षय है,मधुरे! अपना मिलना तय है।।सुनना सांध्य गगन तारे से,सुनना मौसम हरकारे से।द्वार तुम्हारे जोगी आया,सुनना उसके इकतारे से।अहो कामिनी! मिलन यामिनी,लेकर आता हुआ समय है।।शिलालेख पर यह अक्षय है,मधुरे! अपना मिलना तय है।।हर पल तुमसे संवादित हूँ,तुम्हे सोच... Read more
clicks 61 View   Vote 0 Like   5:22pm 7 May 2020 #
Blogger: pawan kumar mishra
धर्म और राजनीति पर चर्चा करने के क्रम में धर्म को  समझना आवश्यक है। ‘धारयति इति धर्मः’ जो धारण करने योग्य है वही धर्म है । यह बहस का विषय हो सकता है कि क्या धारण करने योग्य है, देश काल परिस्थितियों में वह भिन्न भिन्न हो सकता है पर भिन्नता का आधार केवल रूपरेखा ही है विषयव... Read more
clicks 163 View   Vote 0 Like   3:44pm 29 Apr 2020 #
Blogger: pawan kumar mishra
पानी को पानी से मिलना जीवन तो सांसों का छल है ।मन कब का बैरागी होता  पर तन का अनुराग प्रबल है ।युगों युगों  की एक कहानी तृष्णा मन की बहुत पुरानी प्राणों की है प्यास बुझाना,लेकिन नए स्वाद भी पाना पतन हुआ था जिसको पाकर, मांगे वही स्वर्ग का फल है । मन कब का बैरागी ... Read more
clicks 66 View   Vote 0 Like   5:18pm 25 Apr 2020 #
Blogger: pawan kumar mishra
याचना से प्रिये कुछ मिलेगा नही,एक ही मार्ग है मुझपे अधिकार कर लो। फूल फिर भी नही कोई खिल पायेगा शाख पर छाये कितने भी मधुमास हों। प्राण की प्यास ऐसे यथावत रही सप्त सैन्धव निरंतर भले पास हों ।। जो अहम् से भरा ये हृदय है मेरा, मान गल जाएगा मुझको अंकवार भर लो। सब प्... Read more
clicks 67 View   Vote 0 Like   10:53am 15 Apr 2020 #
Blogger: pawan kumar mishra
समीरलाल 'उड़नतश्तरी'  जी का दिल्ली आगमन आनन फानन में ब्लॉग मीट के आयोजन का हेतु बन गया और इसके निमित्त बने भाई राजीव तनेजा । हिंदी ब्लॉगिंग  जब अपने शिखर पर थी तो हर ब्लॉग चाहे वह एक दिन पहले ही क्यों न बना हो या ब्लॉगर कोई अनचीन्हा हो या पोस्ट में कितना कच्चापन  क्यों ... Read more
clicks 67 View   Vote 0 Like   2:49am 23 Feb 2020 #
Blogger: pawan kumar mishra
                                  नोटबंदी  को लेकर रिज़र्व बैंक की रिपोर्ट आने के बाद जिस तरह का देश में माहौल बनाया जा रहा है वह विघटनकारी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस तरह के कड़े और साहसिक फैसले लिए उससे पारम्परिक राजनीति बुरी तरह तिलमिलाई हुयी ... Read more
clicks 106 View   Vote 0 Like   9:11am 8 Nov 2019 #नोटबंदी
Blogger: pawan kumar mishra
हम बचपन में जो कुछ पढ़ते सुनते हैं उसका असर पूरी उम्र तक बना रहता है. इस दुनिया को वही व्यक्ति बेहतर बना सकता है जिसके अंदर बचपने का भाव बना हुआ है. वाल्ट डिज्नी के बनाए कार्टून चित्र से लेकर हैरी पॉटर की लोकप्रियता केवल बच्चों तक ही सीमित नही है बल्कि इसे बड़े भी बढ़ चढ़ कर दे... Read more
clicks 155 View   Vote 0 Like   5:56pm 2 Jan 2019 #मेरा भाई नेवला
Blogger: pawan kumar mishra
नरेंद्र मोदी ने लोमड़ी का गुण अपनाना चाहा जिसका परिणाम उन्हें मिल गया है. जब शेर अपनी चाल और खाल बदल देता है तो उसका मुंह कुत्ते भी चाटने लगते हैं. भारत की जनता बहुरूपियों से परशान थी इसलिए उसे ऐसे नेता की तलाश थी जो जैसा दीखता है वैसा ही होने में कोई फर्क नही रखता है पर मोद... Read more
clicks 233 View   Vote 0 Like   5:33pm 11 Dec 2018 #election december 2018
Blogger: pawan kumar mishra
तुम्हे छोड़ कर जाऊं कैसे ?बंधन यदि यम का यह होता तो भी उसे तोड़ मैं देता,अनुबंधन वचनों के होते पल भर नही निर्वहन करता ।किन्तु नेह के कच्चे धागेउसे तोड़ कर जाऊं कैसे,मेरे एकमात्र अधिकारी, तुम्हे छोड़ कर जाऊं कैसे?मन पत्थर है पर विह्वल है एक तुम्हारी सुधियों से,सिद्ध और समृद्ध ... Read more
clicks 220 View   Vote 0 Like   5:05am 22 Nov 2018 #हर सिंगार
Blogger: pawan kumar mishra
तुम्हारी ज़ुल्फ़ से गिरती मेरे कंधे भिगोती है,बिना बादल बिना मौसम के ये बरसात कैसी है।सियाही ख़त्म होती है मगर पन्ने नही भरते,तुम्हे पाकर तुम्हे खोना कहानी बस ज़रा सी है।उधर होंटों पे पाबन्दी इधर अल्फाज़ रूठे से ,हमारे बीच खामोशी की इक दीवार उठती है ।बना कर बाँध क्या करते न... Read more
clicks 157 View   Vote 0 Like   8:56am 14 Nov 2018 #बारिश
Blogger: pawan kumar mishra
The tradition of reconsidering and recasting characters from Indian epics in(to) contemporary genric forms, and considering contemporary problems through them is hardly a new phenomenon. Not only do Indian epics form the source material for a wide range of texts in premodern India, but literature and other media during the pre- and post-Independence periods have also relied on these characters to grapple with and express contemporary questions.  Dr. Pawan Vijay’s novel is located within this pre-existing tradition. Taking a sympathetic view towards Mahābhārata characters generally portrayed as a darker grey than the others (there is hardly any black or white in the Mahābhārata) ha... Read more
clicks 279 View   Vote 0 Like   9:36am 31 Jan 2018 #Tarinee
Blogger: pawan kumar mishra
व्याख्या और पुनर्व्याख्या की सुस्थापित भारतीय परम्परा में एक और प्रस्तुति हमारे हाथ में है। पाठ और प्रघटना की व्याख्या-पुनर्व्याख्या सहज मानवीय स्वभाव है, किन्तु अपने सर्वाधिक सुव्यवस्थित एवं सहज स्वीकार्य रूप में इसे भारतीय परम्परा में ही देखा जा सकता है। भारती... Read more
clicks 306 View   Vote 0 Like   5:13am 5 Jan 2018 #
Blogger: pawan kumar mishra
'बोलो गंगापुत्र!'डॉ पवन विजय‘अंत में धर्म की विजय होती है।’, ऐसा इसलिए कहा जाता है ताकि अन्तिम परिणाम को न्यायोचित ठहराया जा सके। वस्तुत: राजनीति में ‘विजय ही धर्म’ है। राजकुल में सत्ता ही सत्य, धर्म और नैतिकता है। जब हम इसका अवलोकन, महाभारत के सन्दर्भ में देखते हैं, तो स... Read more
clicks 419 View   Vote 0 Like   3:54pm 18 Dec 2017 #
Blogger: pawan kumar mishra
                सामान्यतः हम जिस परिवेश में रहते हैं उसी के हिसाब से हमारे तौर तरीके विकसित हो जाते हैं जिसके अनुसार  हम ताउम्र व्यवहार करते हैं या सोचते हैं।  मनुष्य की आदतें उसके सीखने और सामंजस्य करने पर आधारित होती हैं।  जो एक बार सीख गया या जीवन में जहा... Read more
clicks 291 View   Vote 0 Like   7:02am 1 Sep 2017 #किन्नर
Blogger: pawan kumar mishra
मैं पत्थर हूँ न देखता हूँ न सुनता हूँ न ही कोई संवेदना महसूस करता हूँ किसी के दुःख निवारण  की बात तो दूर मैं इतना असहाय हूँ कि पड़ा हुआ हूँ सदियों से एक ही  जगह बारहों मौसम सोचो मुझे पूजने वालों अगर मैं कहने सुनने समझने और  करने वाला होता तो पत्थर  ... Read more
clicks 264 View   Vote 0 Like   4:16pm 13 Aug 2017 #
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