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Blog: रायटोक्रेट कुमारेन्द्र

Blogger: कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
समाज में सदैव से किसी न किसी तरह के मूल्य चलन में रहे हैं. इनका उद्देश्य समाज को नियमबद्ध रूप से,एक आदर्शात्मक व्यवस्था के रूप में चलाना था. समाज अपने आपमें एक व्यवस्था का नाम है,जहाँ प्रत्येक व्यक्ति के लिए नियमों,कानूनों का पालन करना सुनिश्चित किया गया है. भारतीय संदर... Read more
clicks 8 View   Vote 0 Like   5:04pm 12 Oct 2021 #समाज
Blogger: कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
आर्थिक रूप से सशक्त होने के लिए लोगों ने अपने शरीर की परवाह किये बिना धनोपार्जन की परवाह करना शुरू कर दिया. वैश्वीकरण के दौर ने इस काम में उत्प्रेरक का काम किया है. अब लोगों को अपने स्वास्थ्य,घर-परिवार से ज्यादा चिंता अपने धन की रहती है,अपनी आर्थिक स्थिति की रहती है. इस क... Read more
clicks 17 View   Vote 0 Like   5:44pm 29 Sep 2021 #दिल
Blogger: कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
पिछले साल जब कोरोना की पहली दस्तक देश में हुई थी तो उसके बाद लगे लॉकडाउन के समय लोगों के विचार ऐसे बने जैसे अब वे बहुत कुछ सीख चुके हैं. इसके बाद जैसे ही अनलॉक की प्रक्रिया शुरू हुई वैसे ही सब पुराने ढर्रे पर वापस आ गया था. इसके बाद जैसे ही दूसरी खतरनाक,जानलेवा लहर समाज में... Read more
clicks 36 View   Vote 0 Like   5:31pm 8 Sep 2021 #कोरोना वायरस
Blogger: कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
आजकल ओलम्पिक की चर्चा है सभी जगह. जो लोग खेलों में रुचि रखते हैं,वे बहुत प्रसन्न नजर आ रहे हैं. उनकी ख़ुशी उस समय और भी देखने लायक होती है जबकि हमारी कोई टीम या फिर हमारा कोई खिलाडी पदक जीतने के नजदीक होता है. ऐसे समय में एक-दो व्यक्ति नहीं बल्कि लगभग समूचा देश पूरी ऊर्जा के ... Read more
clicks 32 View   Vote 0 Like   6:02pm 2 Aug 2021 #खेल
Blogger: कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
आज, 31 जुलाई को विश्व पत्र दिवस का आयोजन किया जाता है. हमारे छोटे भाई शरद इसे लेकर विगत कई वर्षों से एक अभियान छेड़े हुए हैं. चूँकि हमें पत्र लेखन का बहुत पुराना शौक है. आज भी प्रतिमाह पत्र लिखना होता है, भले ही किसी का जवाब आये या न आये.आज इस मौके पर उन दिनों की एक घटना याद आ रही... Read more
clicks 36 View   Vote 0 Like   6:18pm 31 Jul 2021 #पत्र लेखन
Blogger: कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
बुन्देलखण्ड के इतिहास की बारीकियों से परिचित करवाने वाले देवेन्द्र सिंह जी की कलम से...+++++++++++++++++++१७ जुन,१८५८ महारानी लक्ष्मीबाई का बलिदान दिवस, आज १७ जून है तो आज की पोस्ट उन्हीं को समर्पित करता हुआ ग्वालियर में लड़े गए युद्ध का विवरण.१७ जून से एक दिन पहले कल यानि १६ जून को र... Read more
clicks 51 View   Vote 0 Like   6:28pm 17 Jun 2021 #पुण्यतिथि
Blogger: कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
बाल श्रम की जब भी बात होती है तब हम सभी सार्वजनिक रूप से अपने आदर्श स्वरूप में दिखने लगते हैं. जैसे ही बाल श्रम की बात ख़त्म होती है वैसे ही तुरंत सबकुछ भूल कर हम भी एक सामान्य इंसान की तरह पेश आने लगते हैं. हमारा एक मानना ये है कि यदि हम किसी भी तरह से कोई सकारात्मक काम कर सक... Read more
clicks 32 View   Vote 0 Like   6:25pm 12 Jun 2021 #प्रशासन
Blogger: कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
आप में से बहुतों को शीर्षक पढ़कर आश्चर्य हुआ होगा. यदि ये कहें कि आश्चर्य से ज्यादा कुछ अजीब सी अनुभूति आई होगी, हमारे प्रति एक अलग तरह की ही सोच बनी होगी तो इसमें आश्चर्य न होगा. हमने खुद इस शीर्षक को लिखने के पहले बहुत सोचा मगर सच यही लगा कि हम सबने अब मौत को ‘एन्जॉय’ करना ... Read more
clicks 32 View   Vote 0 Like   3:44pm 1 Jun 2021 #मृत्यु
Blogger: कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
कोरोना के संक्रमण गति बढ़ने के कारण देश में फिर एक बार लगभग सभी गतिविधियों पर विराम सा लगा हुआ है. बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी लोग घर पर रहते हुए ही अपने काम को पूरा कर रहे हैं. इस स्थिति में बड़ों के लिए यह समय भले ही ज्यादा सोचनीय न हो,ज्यादा चिंता का कारण न हो मगर बच्चों के ल... Read more
clicks 50 View   Vote 0 Like   10:11am 16 May 2021 #कोरोना वायरस
Blogger: कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
कोरोना ने सबसे पहले जकड़ा था ज्योति, मेरी भाभी, सबसे छोटे भाई की पत्नी को. उसे तुरंत आइसोलेट किया गया. वृद्ध सास-ससुर के मन को संभालने-समझने वाली विनम्र ज्योति के सामने वायरस-असुर टिक नहीं पाया, दो दिन के ज्वर के बाद भाग निकला. फिर 6-7 दिन बाद संदीप, ज्योति के ... Read more
clicks 86 View   Vote 0 Like   6:20pm 14 May 2021 #कोरोना विजेता
Blogger: कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
कोरोनाकाल फिर एक बार सबको डराने में लगा है. इस डर के पीछे एक कारण लोगों का अनावश्यक रूप से दहशत फैलाना भी है. बहुतेरे लोग ऐसा जानबूझ कर करने में लगे हैं और बहुत से लोग ऐसे हैं जो ऐसा अनजाने में करने में लगे हुए हैं. कोरोना संक्रमित लोगों में से बहुत सारे लोग ऐसे हैं जो पूरी ... Read more
clicks 132 View   Vote 0 Like   5:40pm 28 Apr 2021 #भय
Blogger: कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
जीतने की कोशिश और हार जाने का डर. ऐसा कब होता है? जब प्रतिद्वंद्वी आपका अपना अभिन्न हो. यह भले अजूबा सा लगे मगर आजकल ऐसा बहुत होने लगा है जबकि प्रतिद्वंद्वी आपका अपना ख़ास, आपका अपना विशेष होता है. इन दिनों कुछ ऐसी ही स्थिति से गुजरना हो रहा है. कहा जाये तो खुद से ही लड़ना हो र... Read more
clicks 54 View   Vote 0 Like   5:45pm 14 Apr 2021 #
Blogger: कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
बहुत से लोगों के लिए यह मजाक का विषय बन जाता है कि मधुबाला आज भी हमारे मोबाइल में, लैपटॉप में वॉलपेपर के रूप में उपस्थित रहती हैं. मधुबाला आज भी हमारे आसपास किसी न किसी रूप में मौजूद रहती हैं. मधुबाला से कब प्रेम सा हो गया पता नहीं मगर जिस दिन से उनसे प्रेम जैसा कुछ हुआ,उस द... Read more
clicks 52 View   Vote 0 Like   6:27pm 5 Apr 2021 #मधुबाला
Blogger: कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
अपने जीवन का बहुत लम्बा समय सामाजिक क्षेत्र में व्यतीत करने के कारण बहुत से व्यावहारिक अनुभवों को करीब से देखने का अवसर मिला है. इन अनुभवों में कुछ अनुभव बहुत सुखद रहे तो कुछ अनुभव तो अत्यंत दुखद रहे. सामाजिक क्षेत्र में बहुत से ऐसे लोगों से परिचय हुआ जो निस्वार्थ भाव स... Read more
clicks 54 View   Vote 0 Like   5:47pm 8 Mar 2021 #समाज
Blogger: कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
कहते हैं कि समय घावों को भर देता है. इसके बाद भी कुछ बातें, कुछ यादें ऐसी होती हैं जिनको समय भी धुंधला नहीं कर पाता है. वे मन-मष्तिष्क पर ज्यों की त्यों अंकित रहती हैं. वे यादें, वे बातें अक्सर, समय-असमय सामने आकर खड़ी हो जाती हैं. गुजरता समय लगातार गुजरता रहता है. इस समय-यात्र... Read more
clicks 74 View   Vote 0 Like   5:32pm 23 Feb 2021 #यादें
Blogger: कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
कहते हैं कि समय घावों को भर देता है. ऐसा सही होता भी होगा किन्तु कई बार लगता है कि समय सभी घावों को भरने में सक्षम नहीं होता है. बहुत सारे घाव ऐसे होते हैं जिनको समय कभी भी नहीं भर पाता बल्कि समय के साथ-साथ इन घावों की टीस और बढ़ती रहती है. अपने व्यक्तिगत अनुभव के आधार पर ऐसा म... Read more
clicks 97 View   Vote 0 Like   4:40pm 16 Feb 2021 #
Blogger: कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
सामान्य होने और सामान्य दिखने में बहुत बड़ा अंतर होता है। बहुत से लोग विभिन्न परिस्थितियों में सामान्य देखते रहते हैं परंतु वह अंदर से इतने सामान्य हो नहीं पाते हैं। जीवन की यह स्थिति लगभग प्रत्येक व्यक्ति के साथ होती है अनेक मौके आते हैं जबकि व्यक्ति को अपनी वास्तव... Read more
clicks 66 View   Vote 0 Like   6:08pm 10 Feb 2021 #
Blogger: कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
तुम्हारे साथ जो गुजरी वो छोटी जिंदगानी है, वही बाकी निशानी है वही बाकी कहानी है। तुम्हारे दूर जाने से न जीवन सा लगे जीवन,रुकी-रुकी सी है धड़कन न साँसों में रवानी है।तुम्हारी याद के साए में अब जीवन गुजरना है,लबों पर दास्तां तेरी इन आँखों को बरसना है।नहीं तुम सामने मे... Read more
clicks 76 View   Vote 0 Like   6:07pm 7 Feb 2021 #भाई
Blogger: कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
वर्ष 2020 को कोरोना के चलते बहुत बुरा समझा जा रहा था। देश, विदेश में तमाम परिवारों ने इस वर्ष में अपने परिजनों को खोया, निश्चित ही ऐसे परिवारों के लिए वर्ष 2020 अत्यंत दुखद, कष्टकारी कहा जाएगा। उस वर्ष के जल्द गुजर जाने और आने वाले वर्ष के सुखद, सुखमय होने की कामना लगातार की जा ... Read more
clicks 77 View   Vote 0 Like   8:25am 31 Jan 2021 #भाई
Blogger: कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
तुम हम सबको हमेशा के लिए उसी शाम छोड़कर चले गए गए थे. उस शाम से लेकर तुम्हारी पार्थिव देह के पंचतत्त्व में विलीन हो जाने तक एक आस सी जगती कि यह खबर गलत हो जाये और तुम हमेशा की तरह अपनी शैतानियों के साथ, अपने खिलंदड़ स्वभाव के साथ हम सबके बीच आ जाओ. उस झूठी आस के साथ लगातार तमाम ... Read more
clicks 86 View   Vote 0 Like   6:25pm 27 Jan 2021 #भाई
Blogger: कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
गणतंत्र दिवस पर देश की राजधानी में आन्दोलन कर रहे कथित किसानों ने ट्रैक्टर रैली के नाम पर उत्पात मचाया। उनके द्वारा लाल किले की प्राचीर पर तिरंगा उतार कर अपना झंडा फहरा दिया। इससे व्यथित हो समीक्षा जादौन ने एक कविता सोशल मीडिया पर पोस्ट की। वही कविता आप सभी के लिए।अपम... Read more
clicks 141 View   Vote 0 Like   6:26pm 26 Jan 2021 #
Blogger: कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
नेता जी सुभाष चन्द्र बोस के निधन को एक तरह की सरकारी मान्यता देने के बाद कि उनकी मृत्यु 18अगस्त 1945को एक विमान दुर्घटना में हो गई थी, अधिसंख्यक लोगों द्वारा इसे स्वीकार कर पाना मुमकिन नहीं हो पा रहा था और ये स्थिति आज भी बनी हुई है. नेताजी की मृत्यु की खबर और बाद में उनके जीव... Read more
Blogger: कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
ज़िन्दगी कब एकदम से रुख मोड़ दे, कहा नहीं जा सकता है। हँसती-खिलखिलाती हुई बगिया में कब आँसुओं की बरसात होने लगे, समझ नहीं आता है। खुशियों के बीच एकदम से दुखों का पहाड़ टूट पड़ना किस नियति के कारण है, आज भी समझ न आया। सबकुछ सही चलते-चलते सबकुछ गलत हो जाना प्रकृति का उचित कदम ... Read more
clicks 79 View   Vote 0 Like   4:33pm 20 Jan 2021 #
Blogger: कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
बचपन के वे दिन याद आ गए जबकि हम तीनों भाइयों में तुम ही सबसे चंचल, सबसे शैतान थे। शैतानी के साथ तुम्हारी मासूमियत सबको हँसा देती थी। घर के लोग तुम्हारी शैतानी भूल जाया करते थे। तुम्हारी चंचलता तुमसे शैतानियाँ करवाती रहती। किस-किस को याद करें, कितना याद करें। अब बचपन से ... Read more
clicks 88 View   Vote 0 Like   6:21pm 19 Jan 2021 #बचपन
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