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Blog: रायटोक्रेट कुमारेन्द्र

Blogger: कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
कोरोनाकाल फिर एक बार सबको डराने में लगा है. इस डर के पीछे एक कारण लोगों का अनावश्यक रूप से दहशत फैलाना भी है. बहुतेरे लोग ऐसा जानबूझ कर करने में लगे हैं और बहुत से लोग ऐसे हैं जो ऐसा अनजाने में करने में लगे हुए हैं. कोरोना संक्रमित लोगों में से बहुत सारे लोग ऐसे हैं जो पूरी ... Read more
clicks 67 View   Vote 0 Like   5:40pm 28 Apr 2021 #भय
Blogger: कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
जीतने की कोशिश और हार जाने का डर. ऐसा कब होता है? जब प्रतिद्वंद्वी आपका अपना अभिन्न हो. यह भले अजूबा सा लगे मगर आजकल ऐसा बहुत होने लगा है जबकि प्रतिद्वंद्वी आपका अपना ख़ास, आपका अपना विशेष होता है. इन दिनों कुछ ऐसी ही स्थिति से गुजरना हो रहा है. कहा जाये तो खुद से ही लड़ना हो र... Read more
clicks 12 View   Vote 0 Like   5:45pm 14 Apr 2021 #
Blogger: कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
बहुत से लोगों के लिए यह मजाक का विषय बन जाता है कि मधुबाला आज भी हमारे मोबाइल में, लैपटॉप में वॉलपेपर के रूप में उपस्थित रहती हैं. मधुबाला आज भी हमारे आसपास किसी न किसी रूप में मौजूद रहती हैं. मधुबाला से कब प्रेम सा हो गया पता नहीं मगर जिस दिन से उनसे प्रेम जैसा कुछ हुआ,उस द... Read more
clicks 16 View   Vote 0 Like   6:27pm 5 Apr 2021 #मधुबाला
Blogger: कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
अपने जीवन का बहुत लम्बा समय सामाजिक क्षेत्र में व्यतीत करने के कारण बहुत से व्यावहारिक अनुभवों को करीब से देखने का अवसर मिला है. इन अनुभवों में कुछ अनुभव बहुत सुखद रहे तो कुछ अनुभव तो अत्यंत दुखद रहे. सामाजिक क्षेत्र में बहुत से ऐसे लोगों से परिचय हुआ जो निस्वार्थ भाव स... Read more
clicks 17 View   Vote 0 Like   5:47pm 8 Mar 2021 #समाज
Blogger: कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
कहते हैं कि समय घावों को भर देता है. इसके बाद भी कुछ बातें, कुछ यादें ऐसी होती हैं जिनको समय भी धुंधला नहीं कर पाता है. वे मन-मष्तिष्क पर ज्यों की त्यों अंकित रहती हैं. वे यादें, वे बातें अक्सर, समय-असमय सामने आकर खड़ी हो जाती हैं. गुजरता समय लगातार गुजरता रहता है. इस समय-यात्र... Read more
clicks 25 View   Vote 0 Like   5:32pm 23 Feb 2021 #यादें
Blogger: कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
कहते हैं कि समय घावों को भर देता है. ऐसा सही होता भी होगा किन्तु कई बार लगता है कि समय सभी घावों को भरने में सक्षम नहीं होता है. बहुत सारे घाव ऐसे होते हैं जिनको समय कभी भी नहीं भर पाता बल्कि समय के साथ-साथ इन घावों की टीस और बढ़ती रहती है. अपने व्यक्तिगत अनुभव के आधार पर ऐसा म... Read more
clicks 43 View   Vote 0 Like   4:40pm 16 Feb 2021 #
Blogger: कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
सामान्य होने और सामान्य दिखने में बहुत बड़ा अंतर होता है। बहुत से लोग विभिन्न परिस्थितियों में सामान्य देखते रहते हैं परंतु वह अंदर से इतने सामान्य हो नहीं पाते हैं। जीवन की यह स्थिति लगभग प्रत्येक व्यक्ति के साथ होती है अनेक मौके आते हैं जबकि व्यक्ति को अपनी वास्तव... Read more
clicks 28 View   Vote 0 Like   6:08pm 10 Feb 2021 #
Blogger: कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
तुम्हारे साथ जो गुजरी वो छोटी जिंदगानी है, वही बाकी निशानी है वही बाकी कहानी है। तुम्हारे दूर जाने से न जीवन सा लगे जीवन,रुकी-रुकी सी है धड़कन न साँसों में रवानी है।तुम्हारी याद के साए में अब जीवन गुजरना है,लबों पर दास्तां तेरी इन आँखों को बरसना है।नहीं तुम सामने मे... Read more
clicks 35 View   Vote 0 Like   6:07pm 7 Feb 2021 #भाई
Blogger: कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
वर्ष 2020 को कोरोना के चलते बहुत बुरा समझा जा रहा था। देश, विदेश में तमाम परिवारों ने इस वर्ष में अपने परिजनों को खोया, निश्चित ही ऐसे परिवारों के लिए वर्ष 2020 अत्यंत दुखद, कष्टकारी कहा जाएगा। उस वर्ष के जल्द गुजर जाने और आने वाले वर्ष के सुखद, सुखमय होने की कामना लगातार की जा ... Read more
clicks 37 View   Vote 0 Like   8:25am 31 Jan 2021 #भाई
Blogger: कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
तुम हम सबको हमेशा के लिए उसी शाम छोड़कर चले गए गए थे. उस शाम से लेकर तुम्हारी पार्थिव देह के पंचतत्त्व में विलीन हो जाने तक एक आस सी जगती कि यह खबर गलत हो जाये और तुम हमेशा की तरह अपनी शैतानियों के साथ, अपने खिलंदड़ स्वभाव के साथ हम सबके बीच आ जाओ. उस झूठी आस के साथ लगातार तमाम ... Read more
clicks 44 View   Vote 0 Like   6:25pm 27 Jan 2021 #भाई
Blogger: कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
गणतंत्र दिवस पर देश की राजधानी में आन्दोलन कर रहे कथित किसानों ने ट्रैक्टर रैली के नाम पर उत्पात मचाया। उनके द्वारा लाल किले की प्राचीर पर तिरंगा उतार कर अपना झंडा फहरा दिया। इससे व्यथित हो समीक्षा जादौन ने एक कविता सोशल मीडिया पर पोस्ट की। वही कविता आप सभी के लिए।अपम... Read more
clicks 80 View   Vote 0 Like   6:26pm 26 Jan 2021 #
Blogger: कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
नेता जी सुभाष चन्द्र बोस के निधन को एक तरह की सरकारी मान्यता देने के बाद कि उनकी मृत्यु 18अगस्त 1945को एक विमान दुर्घटना में हो गई थी, अधिसंख्यक लोगों द्वारा इसे स्वीकार कर पाना मुमकिन नहीं हो पा रहा था और ये स्थिति आज भी बनी हुई है. नेताजी की मृत्यु की खबर और बाद में उनके जीव... Read more
Blogger: कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
ज़िन्दगी कब एकदम से रुख मोड़ दे, कहा नहीं जा सकता है। हँसती-खिलखिलाती हुई बगिया में कब आँसुओं की बरसात होने लगे, समझ नहीं आता है। खुशियों के बीच एकदम से दुखों का पहाड़ टूट पड़ना किस नियति के कारण है, आज भी समझ न आया। सबकुछ सही चलते-चलते सबकुछ गलत हो जाना प्रकृति का उचित कदम ... Read more
clicks 36 View   Vote 0 Like   4:33pm 20 Jan 2021 #
Blogger: कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
बचपन के वे दिन याद आ गए जबकि हम तीनों भाइयों में तुम ही सबसे चंचल, सबसे शैतान थे। शैतानी के साथ तुम्हारी मासूमियत सबको हँसा देती थी। घर के लोग तुम्हारी शैतानी भूल जाया करते थे। तुम्हारी चंचलता तुमसे शैतानियाँ करवाती रहती। किस-किस को याद करें, कितना याद करें। अब बचपन से ... Read more
clicks 54 View   Vote 0 Like   6:21pm 19 Jan 2021 #बचपन
Blogger: कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
भारत में वेदान्त की कई प्रकार की व्याख्याएँ हुई हैं और सभी को प्रगतिशील माना गया है. वेदान्त का शाब्दिक अर्थ है वेद का अंत. वेद हिन्दुओं के आदि धर्मग्रन्थ हैं. विवेकानन्द जी के विचार धर्म के विषय में उल्लेखनीय हैं. वेदान्त दर्शन के सम्बन्ध में उनका नाम प्रमुख रूप से लिय... Read more
clicks 43 View   Vote 0 Like   4:58pm 12 Jan 2021 #दर्शन
Blogger: कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
किसी से पहचान होना, किसी से कोई रिश्ता बन जाना, किसी से सम्बन्ध हो जाना, किसी से दोस्ती होना, किसी से सामान्य सा व्यवहार रखना आदि ऐसा लगता है जैसे अपने हाथ में नहीं वरन पूर्व निर्धारित होता है. कोई अकारण ही मन को, दिल को पसंद आने लगता है. कभी ऐसा होता है कि किसी व्यक्ति ने कु... Read more
clicks 75 View   Vote 0 Like   7:25am 3 Jan 2021 #दोस्ती
Blogger: कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
आए दिन रिश्तों की बदलती परिभाषा देखने को मिलती है। अचानक से सम्बन्धों की प्रगाढ़ता में नकारात्मक परिवर्तन उत्पन्न हो जाते हैं। रिश्तों, सम्बन्धों की ऐसी प्रगाढ़ता के अचानक से समाप्त होने के पीछे की स्थिति का आकलन लोग करने के बजाय सम्बन्धों, रिश्तों को तोड़ने में ज्याद... Read more
clicks 102 View   Vote 0 Like   7:30am 30 Dec 2020 #मानसिकता
Blogger: कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
सुबह लगभग दस बजे का समय है. बाजार में हलचल अभी शुरू होती जा रही है. दुकानें भी आराम-आराम से खुलती दिख रही हैं. ऐसी ही सामान्य सी सुस्त सुबह में सड़क के किनारे एक महिला बेहोशी की हालत में सड़क किनारे गिरी हुई है. वह अकेली नहीं है बल्कि उसके आसपास कई लोगों की भीड़ भी है. भीड़ भले ही ... Read more
clicks 54 View   Vote 0 Like   6:27pm 16 Dec 2020 #महिला
Blogger: कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
हमारा और कलम का जैसे पिछले जन्मों का सम्बन्ध है. बचपन से अभी तक साथ बना हुआ है. फाउंटेन पेन किसी भी तरह के हों, सस्ते हों या मँहगे, प्लास्टिक के हों या धातु के, फाउंटेन पेन हों या बॉल पेन सभी हमें बहुत पसंद हैं. किसी नए शहर में जाना होता है तो वहाँ का प्रसिद्द सामान एकबारगी भ... Read more
clicks 49 View   Vote 0 Like   6:27pm 15 Dec 2020 #फाउंटेन पैन
Blogger: कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
नए-पुराने फाउंटेन पेन की अपनी छोटी सी बगिया में आज सैर करने निकले तो बहुत सी यादें ताजा हो गईं. जी हाँ, हमारे लिए वह बगिया ही है और उस बगिया में ढेर सारे अलग-अलग तरह के फाउंटेन पेन खुशनुमा चेहरों के साथ उपलब्ध हैं. पेन के इस खुशनुमा चेहरों के एहसास को वह बहुत सहजता से महसूस ... Read more
clicks 47 View   Vote 0 Like   11:12am 15 Dec 2020 #बचपन
Blogger: कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
अधिकांशतः देखने में आता है कि जब कोई हमारे साथ होता है, हमारी नज़रों के सामने होता है, हमारी पहुँच में होता है तब हमें उसकी कदर नहीं होती है. यह स्थिति व्यक्ति, वस्तु, समय आदि सभी के लिए एकसमान रूप से प्रभावी होती है. हमारे पास जिसकी उपलब्धता होती है, उसकी फ़िक्र हम नहीं करते ... Read more
clicks 96 View   Vote 0 Like   5:29pm 8 Dec 2020 #अनुभव
Blogger: कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
समझ नहीं आता है कि जैसे-जैसे हम लोग साक्षर होते जा रहे हैं, पढ़ते-लिखते जा रहे हैं वैसे-वैसे ही क्यों दिमागी रूप से कुंद होते जा रहे हैं? इधर बहुत सोच-विचार कर इस बारे में लिखने का मन बनाया. कुछ दिनों से देश की राजधानी पर किसान आन्दोलन का संकट दिख रहा है. इस आन्दोलन के बहाने स... Read more
clicks 73 View   Vote 0 Like   6:20pm 2 Dec 2020 #कृषि
Blogger: कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
रोज ही आपको सड़क दुर्घटनाओं की खबर पढ़ने को मिलती होगी,दुर्घटनाओं में लोगों के मारे जाने की भी खबरें मिलती होंगीं, हो सकता है कि आप, आपके परिजन, परिचित, सहयोगी आदि कभी बाइक, कार आदि दुर्घटना के शिकार हुए हों, दुर्भाग्य से आपके बीच का कोई सदस्य दुर्घटना में आपने हमेशा-हमेश... Read more
clicks 69 View   Vote 0 Like   6:23pm 24 Nov 2020 #कोरोना वायरस
Blogger: कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
राष्ट्रीय सांप्रदायिक सद्भाव प्रतिष्ठान द्वारा 19-25नवम्बर 2020 तक सांप्रदायिक सद्भाव सप्ताह का आयोजन कर रहा है. इसके लिए उसके द्वारा देश भर में विभिन्न आयोजन उसके द्वारा करवाए जा रहे हैं. इसकी स्थापना 19 फरवरी 1992 को की गई थी. इसका उद्देश्य देशभर में सांप्रदायिक सद्भावना की... Read more
clicks 97 View   Vote 0 Like   2:03pm 23 Nov 2020 #मुस्लिम
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