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Blog: शब्दों का सफर

Blogger: अजित वडनेरकर
कबीर जब कहते हैं कि “रे दिल गाफिल गफलत मत कर, एक दिना जम आवेगा”तब दरअसल वे लोगों से अपनी आत्मा को जगाने की बात कहते हैं । यमलोक से बुलावा किसी भी दिन आ सकता है । जीवन अनित्य है इसलिए अंतरात्मा में ज्ञानजोत जलाने की ज़रूरत है । इसमें ग़ाफ़िल औरग़फ़लतदो शब्दों का प्रयोग कि... Read more
clicks 335 View   Vote 0 Like   1:53pm 30 May 2013 #पद उपाधि
Blogger: अजित वडनेरकर
  पेड़ के अर्थ में पूर्वी भारतीय बोलियों में‘गाछ’शब्द बहुत आम है। बांग्ला में भी ‘गाछ’ का अर्थ वृक्ष ही है। पूर्वी बोलियों में ‘गाछी’ शब्द का अभिप्राय वृक्षवाटिका भी होता है और आम्रकुंज भी। खासतौर पर आम, कटहल, पीपल जैसे पेड़ों के समूह के लिए इस शब्द का प्रयोग होता है। ... Read more
clicks 314 View   Vote 0 Like   1:16pm 24 May 2013 #वनस्पति
Blogger: अजित वडनेरकर
भाषा का विकास प्राकृतिक ध्वनियों का अनुकरण करने से हुआ है। पानी के बहाव का संकेत ‘कल-कल’ध्वनि से मिलता है। इस ‘कल’ के आधार पर देखते हैं कि हमारी भाषाओं को कितने शब्द मिले हैं। कल् की अर्थवत्ता बहुत व्यापक है। नदी-झरने की कल-कल और भीड़ के कोलाहल में यही कल ध्वनि सुनाई पड... Read more
clicks 291 View   Vote 0 Like   12:27pm 21 Apr 2013 #शरीर
Blogger: अजित वडनेरकर
ऐसे शब्द जो हिन्दी की तत्सम शब्दावली के हैं मगर बोलचाल की हिन्दी में आज भी डटे हुए हैं उनमें छद्म शब्द भी शामिल है। कपटपूर्ण व्यवहार के संदर्भ में हिन्दी में इसका प्रयोग होता है। छल-छद्म एक आम मुहावरा है जिसका अर्थ है छल, कपट या धोखे का प्यवहार।छद्मवेषीव्यक्ति वह है जो ... Read more
clicks 265 View   Vote 0 Like   5:25pm 20 Apr 2013 #shelter
Blogger: अजित वडनेरकर
आलसी और महामूर्ख के अर्थ में‘घोंघाबसन्त’मुहावरा खूब प्रचलित है। ‘घोंघा’ शब्द भी अपने आप में ‘गावदी’ या ‘घोंचू’ प्रकृति के व्यक्ति के लिए प्रयुक्त होता है। गुमसुम या चुपचाप रहने वालों को भी ‘घोंघा’ कहा जाता है। घोंघा के साथ ‘बसन्त’ का मेल चौंकाता है। जिस तरह से गधे क... Read more
clicks 352 View   Vote 0 Like   3:03pm 15 Apr 2013 #पद उपाधि
Blogger: अजित वडनेरकर
जोशब्द ग़लत बर्ताव के शिकार हैं, उनमें ‘नस्ल’ का ‘नस्लीय’ रूप भी शामिल है। ‘नस्ल’ मूलतः अरबी शब्द है। शब्दकोशों में हिन्दी रूप ‘नसल’ होता है पर ‘अस्ल’ के ‘असल’ रूप की तरह यह आम नहीं हो पाया और इसका प्रयोग वाचिक ही बना रहा। नस्ल के मूल में अरबी क्रिया नसाला है जिसमें उपज... Read more
clicks 201 View   Vote 0 Like   3:53pm 5 Apr 2013 #रहन-सहन
Blogger: अजित वडनेरकर
‘पंचहत्यारी’ शिवाजी की सैन्य शब्दावली का एक शब्द है जिससे ऐसा जान पड़ता है मानों इसका रिश्ता पाँच जनों की हत्या करने वाली से हो। दरअसल यह एक विशेषण, पद या उपाधि है जिसका अर्थ है बंदूक, भाला, ढाल, तलवार और तीर-कमान से सज्जित सैनिक या शिकारी पशु। यहाँ अभिप्राय मुख समेत चार... Read more
clicks 215 View   Vote 0 Like   7:34am 31 Mar 2013 #पद उपाधि
Blogger: अजित वडनेरकर
कभी ‘ऐषाराम’सुना है ? संस्कृत शब्दावली का शब्द लगता है। बौद्ध विहारों के संदर्भ में सुने हुए ‘संघाराम’ जैसा । यह हिन्दी का नहीं बल्कि मराठी का शब्द है और इसका आशय हिन्दी के ऐशो-आरामसे है । यूँ हिन्दी का ऐशो-आराम मूलतः फ़ारसी के ‘ऐश-ओ-आराम’ से आ रहा है जिसमें आनंद, विलास य... Read more
clicks 232 View   Vote 0 Like   6:38am 15 Mar 2013 #shelter
Blogger: अजित वडनेरकर
पत्रकार एम. हुसैन ज़ैदी की मुंबई माफ़िया पर लिखी क़िताब डोंगरी टू दुबई मराठी अनुवाद पढ़ते हुए एक नए शब्द से साबका पड़ा- बिलंदर। दाऊद इब्राहिम के अंडरवर्ल्ड में बढ़ते असर के संदर्भ में उसे बिलंदर कहा गया। कुछ कुछ अंदाज़ तो था कि इस बिलंद का हिन्दी-फ़ारसी के बुलंद से रिश... Read more
clicks 228 View   Vote 0 Like   4:48am 10 Mar 2013 #पद उपाधि
Blogger: अजित वडनेरकर
हिन्दी की प्रचलित शब्दावली में ‘बर्ताव’ शब्द का शुमार भी है। व्यवहार, ढंग, आचरण या शैली के संदर्भ में इस शब्द का प्रयोग होता है मसलन- “उनके बर्ताव को सही नहीं कहा जा सकता”। हिन्दी शब्दकोशों में हालाँकि बर्ताव की वर्तनी ‘बरताव’ बताई गई है मगर अब आम चलन बर्ताव का ही है। ब... Read more
clicks 258 View   Vote 0 Like   4:54pm 5 Mar 2013 #योग्यता
Blogger: अजित वडनेरकर
समूचे भारतीय उपमहाद्वीप में ‘दारा’नाम शक्ति का प्रतीक माना जाता है। पश्चिम में पेशावर से लेकर पूर्व में पूर्णिया तक ‘दारा’ नामधारी लोग मिल जाएँगे जैसे हिन्दुओं में दारा के साथ ‘सिंह’ का प्रत्यय जोड़ कर दारासिंह जैसा प्रभावी नाम बना लिया जाता है वहीं मुस्लिमों में ... Read more
clicks 254 View   Vote 0 Like   6:09pm 1 Mar 2013 #पद उपाधि
Blogger: अजित वडनेरकर
दुनियाभर में प्रचलित मुहावरों-कहावतों में शासकों या प्रभावशाली लोगों का अत्याचारी, सनकी चरित्र भी झलकता है। ऐसे क़िरदारों में रावण, कंस, नीरो या तुग़लक जैसे नाम स्पष्ट पहचाने जा सकते हैं। कुछ नामों के पीछे न तो कहानी नज़र आती है न ही क़िस्सा। ऐसा ही एक नाम है दक़ियानू... Read more
clicks 274 View   Vote 0 Like   11:48am 25 Feb 2013 #पद उपाधि
Blogger: अजित वडनेरकर
कल्पना करें कि किसी सुबह आपको ये फ़रमान सुनने को मिले कि दिनभर आप जो भी बोलेंगे, उसमें ‘अगर’, ‘मगर’, ‘वरना’या ‘लेकिन’का इस्तेमाल नहीं करेंगे तो क्या इसे मंजूर कर लेंगे? व्यक्तिगत रूप से मैं इस चुनौती को स्वीकार नहीं कर पाऊंगा। यह नामुमकिन है। ये जानकर भी ताज्जुब हो सकत... Read more
clicks 257 View   Vote 0 Like   7:50am 14 Feb 2013 #इधर उधर
Blogger: अजित वडनेरकर
हिन्दी के प्रचलित शब्द भंडार में होशियार, होशियारीजैसे शब्द भी हैं जिसका इस्तेमाल रोज़मर्रा की भाषा में खूब होता है । होशियारशब्द दरअसल फ़ारसी मूल से भारतीय भाषाओं में दाख़िल हुआ है जिसका प्रयोग बतौर विशेषण सजग और बुद्धिमान के अर्थ में किया जाता है । चतुर, निपुण, कुश... Read more
clicks 240 View   Vote 0 Like   2:46pm 9 Feb 2013 #शरीर
Blogger: अजित वडनेरकर
इस बार पेश है डॉक्टर पुरुषोत्तम अग्रवाल की ताज़ा पुस्तक "हिन्दी सरायः अस्त्राखान वाया येरेवान" की चर्चा । पुस्तक सोलहवीं-सत्रहवी सदी के उन भारतीय व्यापारियों की जड़ों की तलाश के बहाने से समूची भारतीय / हिन्दू संस्कृति की वैश्विक धरातल पर विद्वत्तापूर्ण पड़ताल क... Read more
clicks 211 View   Vote 0 Like   4:41pm 4 Feb 2013 #पर्यटन
Blogger: अजित वडनेरकर
मरम्मत हिन्दी में खूब रचा-बसा शब्द है । अरबी मूल का यह शब्द फ़ारसी के ज़रिये हिन्दी समेत कई भारतीय भाषाओं में प्रचलित हुआ । मरम्मतशब्द का अर्थ है बिगड़ी वस्तु को सुधारना, उद्धार करना, संशोधन करना, सँवारना, कसना, योग्य बनाना, सुचारू करना, कार्यशील बनाना आदि । इन तमाम भावो... Read more
clicks 196 View   Vote 0 Like   1:23pm 29 Jan 2013 #तकनीक
Blogger: अजित वडनेरकर
हिन्दी से प्यार करने वालों का उसके साथ बर्ताव और व्यवहार भी अनोखा होता है । मिसाल के तौर पर चर्चा की बात करें । उर्दू-हिन्दी में बातचीत, कथन, उल्लेख, ज़िक़्र के संदर्भ मेंचर्चाशब्द का प्रयोग होता है । यह बहुत प्रचलित शब्द है । अक्सर यह बहस भी चलती रहती है किचर्चास्रीवाच... Read more
clicks 208 View   Vote 0 Like   12:16pm 15 Jan 2013 #रहन-सहन
Blogger: अजित वडनेरकर
सर्दियों में शाम से ही धुंध छाने लगती है जिसे कोहराया कुहासाकहते हैं । ठंड के मौसम में आमतौर पर हवा भारी होती है जिसकी वजह वातावरण में नमी का होना है । धरती की ऊपरी परत जब बेहद ठण्डी हो जाती है तो हवा की नमी सघन होकर नन्हें-नन्हें हिमकणों में बदल जाती है इसे ही कोहरा जमना ... Read more
clicks 309 View   Vote 0 Like   12:16pm 13 Jan 2013 #shelter
Blogger: अजित वडनेरकर
ग्रामीण अंचल के लिए गाँव-देहातशब्दयुग्म का हिन्दी में खूब प्रयोग होता है । “वे दूर देहातसे आए हैं,” “देहातमें रहने के अपने फ़ायदे हैं,” जैसे वाक्यों में देहात का अर्थ गाँव ही है । गँवई या ग्रामीण के लिए देहात से देहातीविशेषण बनता है । देहात हमें भारतीय परिवेश से जुड़ा ... Read more
clicks 233 View   Vote 0 Like   2:53pm 11 Jan 2013 #shelter
Blogger: अजित वडनेरकर
हिन्दी में अहाताशब्द इतना प्रचलित है कि गाँव-देहात से शहरों तक लोगों की ज़बान पर ये शब्द किसी भी घिरे हुए स्थान के संदर्भ में फ़ौरन ज़बान पर आता है । इसकी मिसाल देखिए कि सरकार ने आबक़ारी नीति के तहत शराब की हर दुकान की बगल में अहाता खोलने का प्रावधान करके इस शब्द को हर आद... Read more
clicks 248 View   Vote 0 Like   12:41pm 4 Jan 2013 #shelter
Blogger: अजित वडनेरकर
हिन्दी के बहुप्रयुक्त शब्दों मेंक़िस्तका भी शुमार है हालाँकि अक्सर ज्यादातर लोग ‘क़िस्त’को ‘किश्त’ लिखने और बोलने के आदी हैं । ‘प्रसाद’ तथा ‘सौहार्द’ के ग़लत रूप ( प्रशाद, सौहार्द्र ) भी इसी तरह ज्यादा प्रचलित हैं । हिन्दी में क़िस्तका आशय हिस्सा, भाग, आंशिक भुगतान, ह... Read more
clicks 230 View   Vote 0 Like   4:54pm 2 Jan 2013 #business money
Blogger: अजित वडनेरकर
हिन्दी के तीन चकले-2चक्र काचकलारूप मूलतः हिन्दी, पंजाबी में है । हिन्दी के चकलामें चपटा, गोल, वृत्ताकार वाले आशय के साथ साथ प्रान्त का भाव भी है जबकि पंजाबी चकलामें वृत्ताकार, गोल, घेरदार, विस्तीर्ण के साथ साथ शहर का खुला चौक, ज़िला अथवा वेश्यालय का आशय भी है । ज़ाहिर है य... Read more
clicks 243 View   Vote 0 Like   1:18pm 31 Dec 2012 #पद उपाधि
Blogger: अजित वडनेरकर
हिन्दी के तीन चकले-1हिन्दी में तीन चकले बहुत प्रसिद्ध हैं । पहला‘चकला’है रसोई का जिसका साथ निभाता है बेलन । दूसरा ‘चकला’स्थानवाची अर्थवत्ता रखता है जैसे चकला-खानपुर या नरवर-चकला । तीसरा चकला  है रूपजीवाओं का ठिकाना जो कला-व्यापार से ज्यादा देह-व्यापार के लिए कुख्यात ... Read more
clicks 224 View   Vote 0 Like   8:07am 31 Dec 2012 #पद उपाधि
Blogger: अजित वडनेरकर
[ शब्द संदर्भ-असबाब,  अहदी,  मुसद्दी,  मुनीम,  जागीरदार, तहसीलदार,  वज़ीर,  सर्राफ़,  नौकर,  चाकर,  नायब,  फ़ौजदार, पंसारी,  व्यापारी,  दुकानदार,  बनिया-बक्काल,  क़ानूनगो,  लवाजमा, चालान,  जमादार,  भंडारी,  कोठारी,  किरानी,  चीज़,  गोदाम,  अमीर, वायसराय ]पिछली कड़ी- मोदी की जन्मकुंड... Read more
clicks 247 View   Vote 0 Like   6:12pm 25 Dec 2012 #पद उपाधि
Blogger: अजित वडनेरकर
[ शब्द संदर्भ-असबाब,  अहदी,  मुसद्दी,  मुनीम,  जागीरदार, तहसीलदार,  वज़ीर,  सर्राफ़,  नौकर,  चाकर,  नायब,  फ़ौजदार, पंसारी,  व्यापारी,  दुकानदार,  बनिया-बक्काल,  क़ानूनगो,  लवाजमा, चालान,  जमादार,  भंडारी,  कोठारी,  किरानी,  चीज़,  गोदाम,  अमीर, वायसराय ]प्रायः सभी भाषाओं के बुनिया... Read more
clicks 230 View   Vote 0 Like   8:50am 24 Dec 2012 #पद उपाधि
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