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Blog: अमृतरस

Blogger: डॉ. नूतन डिमरी गैरोला- नीति
शायद मैं अपना सब कुछ बचा जाना चाहती थी तुमसे दूर कूच कर जाना चाहती थी ..... पेड़ पहाड़ झरने गाँव खेत खलिहान रहट छाँव सबसे दूर कहीं दूर मेहराब वाली घनी आबादियों में ..इसलिए मैंने सांकलों में जड़ दिए थे ताले और तुम देते रहे दस्तक कि कभी तो दस्तक की आवाज पहुँच सके मुझ तक और मैंने का... Read more
clicks 92 View   Vote 0 Like   9:17am 29 Jun 2013 #
Blogger: डॉ. नूतन डिमरी गैरोला- नीति
उत्तराखंड में अपने पीडितों के दर्द को देख दिल रो उठता है बार बार ------------------------------------------------------------------------------------  तुम्हें याद न करूँ तो बेहतर ....मेरी परछाइयाँ जब डूब गयी पानी मेऔर बेअदब चिल्लाते हुए बादल फिर उमड़ रहे है ....परछाइयां सतहों से उठ उठ मांगती हैं हिसाब अपना लेना देना ...……………….अभ... Read more
clicks 84 View   Vote 0 Like   7:18am 28 Jun 2013 #
Blogger: डॉ. नूतन डिमरी गैरोला- नीति
    हम लिखेंगे प्रेम द्वार पर स्वागत गीत की तरहपत्थरों मे भित्तिचित्र की तरह दीवारों पर रौशनाई की तरहहवाओं में महकती खुश्बू की तरह छत पर छाया की तरह देह पर प्राण की तरह तब खिड़कियाँ होंगी बंद दरवाजे भीतर से .…….प्रेम ही प्रेम प्रेम मे डूबते हुए एक इतिहास की तरह भविष्य की ख... Read more
clicks 81 View   Vote 0 Like   2:46am 23 Jun 2013 #
Blogger: डॉ. नूतन डिमरी गैरोला- नीति
“और मुजरा चलता रहा” मेरी लिखी एक कहानी से ….   शहर की बस्ती में जब झिलमिलाने लगती है लाल बत्तियां छन से घुंघुरू गीत गाते हैं तेरे लिए ... रातों की स्याही से लिख देती हूँ चांदनी के उजालो में कुछ दर्द कुछ मुहब्बत तेरे हिस्से के ..... के गीत किसी दिन बन पड़े के गुनगुनाये सारा जहाँ ... Read more
clicks 104 View   Vote 0 Like   5:16pm 10 Jun 2013 #
Blogger: डॉ. नूतन डिमरी गैरोला- नीति
तेरा मेरा होनाजैसे न होना एक सदी कावक्त के परतों के भीतरएक इतिहास दबा सा |जैसे पत्थरों के बर्तनों मेअधपका हुआ सा खानाऔर गुफा मे एक चूल्हाऔर चूल्हे में आग का होना |तेरा मेरा होनाजैसे खंडहर की सिलाब मेंबीती बारिश का रिमझिम होनाऔर दीवारों की नक्काशियों मेंमुस्कुराते हु... Read more
clicks 105 View   Vote 0 Like   4:55am 3 Jun 2013 #
Blogger: डॉ. नूतन डिमरी गैरोला- नीति
     आ तेरी पलकों पर रख दूँ एक बोसा मेरे सकून कि तुझे मखमली नींद का अर्श दे दूँ | होना मत  उदासन तन्हा है तू कभी  | देख!तुझे पलकों पर लिए फिरती हूँ सदा कि ख्वाब से रहे हो तुम कि मूर्त कर दूँ मैं तुम्हें कि मैं दौड़ते क़दमों को कभी रोक लूँ ज़रा कि फुर्सत के चंद पलों में एक अदद छाँव म... Read more
clicks 134 View   Vote 0 Like   1:56pm 18 May 2013 #
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तुम कहाँ हो सीपी … सागर ने कभी बढ कर दो बूंद भर कर भी नहीं दिया पानीवह अपनी जगह लहराता रहा पानी से भरपूर है यह अहम जरूर उसमे हो गया था कहता था कि आओ कि डूब जाओ छोडो उस किनारे को|या दूर किसी पहाड़ के शिखर पर जाओ, चढते जाओरात के सर्द अंधेरों में ग्लेशियरों में जाओ, जा कर जम जाओ| य... Read more
clicks 141 View   Vote 0 Like   7:10pm 20 Apr 2013 #
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     तुम मेरे अनछुवे ख्वाब हो पाकीजा|जैसे किसी बच्चे की झोली में आ गिरे एक डॉलर होबेहद अनमोल, खर्च करने लायक नहीं हो जोसिक्कों की तरह|तंगहाली में भी पेट की भूख में भी रहता है  उसकी जेब में बंद एक रोटी की तरह एक सूरज की तरह|तुम मेरी पलकों में छुपा कर रखे हुए अदेखे ख्वाब होजिस... Read more
clicks 104 View   Vote 0 Like   8:28pm 9 Apr 2013 #
Blogger: डॉ. नूतन डिमरी गैरोला- नीति
प्रिय ब्लॉग मित्रों! पिछले डेढ़ दो माह से मैं डेशबोर्ड में किसी भी ब्लॉग को नहीं देख पा रही हूँ... जिन्हें मैंने फोलो किया था .. न ही ब्लॉग के इस नए कलेवर को मैं समझ पा रही हूँ .. मैं सभी ब्लॉग पोस्टों को पढ़ने से वंचित हो गयी हूँ ... मैंने इस बीच गूगल प्लस पर क्लिक किया था जहाँ मि... Read more
clicks 109 View   Vote 0 Like   5:17pm 2 Apr 2013 #
Blogger: डॉ. नूतन डिमरी गैरोला- नीति
 नदी की खुशियाँ****************खुशियाँ जब जब आईंमैने मुट्ठी भर भर बिखरा दिया चारों तरफ इस आशा से कि लहलहाएं -खुशियों की हरियाली चारों दिशाओं में ...मुस्कुराते रहें चेहरे अपनी उमंगों मेंऔर उनकी मुट्ठी में रहे सलामत खुशियों की सौगातऔर उनको मुस्कुराते देखमेरे भी चेहरे पर निरापद ब... Read more
clicks 157 View   Vote 0 Like   6:01am 2 Apr 2013 #
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विश्व गौरैया दिवस २० मार्च २०१३ को मेरी भावना और मेरी खींची हुई तस्वीर =======================================================                  “चुनचुन करती आयी चिड़िया दाल का दाना लायी चिड़िया” .. माँ यह गीत गाती तो हम बच्चों की आँखें टुपुर- टूपूर छत और आँगन की ओर निहारने लगती .. फुदकी रहती वो सफ़ेद और भूरी गौरैय... Read more
clicks 127 View   Vote 0 Like   5:34am 21 Mar 2013 #
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   मैंने तुम्हें पन्नों पन्नों में ढूँढा है जहाँ कही भी मिली हो पढ़ा है | कलम उठाई तो उकेरा है हर कागज़ में| जानती हूँ .. तुम्हारा पन्नों से है गहरा वास्ता इसलिए मैंने तुम्हें दिल से उतार पन्नों में गढा है| तुम मेरे पन्नों में लिखी इबादत हो तुम मेरी गुफ्तगू का निज तत्व हो... Read more
clicks 111 View   Vote 0 Like   8:34pm 19 Mar 2013 #
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 मैंने पाया बसंत घर की दालान से बाहर आम्र मंजरी बन् पेड़ों पर खिलता रहा टेसू पर दहकती लालिमा लिए सरसों बसंत की ओढनी ओढ़े हुए कुहुक कर बुलाती कोयलिया मुझे और मैं दीवारों के भीतर के पतझड़ को चुनती रही मौन डाली से गिरे पत्तों को समेटती रही आस्था के जल से सीचती रही कि खिलेगी बह... Read more
clicks 95 View   Vote 0 Like   4:16pm 18 Mar 2013 #
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                              मित्रों! यह बताते हुए मुझे अति प्रसन्नता हो रही है कि १७ फरवरी को  धाद महिला एकांश, देहरादून द्वारा बालिकाओं (Teenager/ Adolescent ) के समग्र विकास  के लिए  एक कार्यशाला का आयोजित की गयी थी जिसमें बालिकाओं के स्वास्थ सम्बन्धी, मनोवैज्ञानिक, सामाजिक पहलुवों पर ... Read more
clicks 165 View   Vote 0 Like   7:25pm 3 Mar 2013 #
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 क्या तुम मुझे पहचान पाओगे…जब भी कानों में मद्दम सा इक राग गुनगुनायेगी हवामैं सुर की वीणा पर बैठ तुम्हारे अधरों में इक गीत बन जाउंगी  क्या तुम मुझे पहचान पाओगे?  क्या तुम मुझे पहचान पाओगे…जब भी तेरी यादों के पैमाने भरेंगे मेरे आँसुवों सेबरखा की रिमझिम बन बरस जाऊंगी तु... Read more
clicks 139 View   Vote 0 Like   7:30pm 6 Feb 2013 #
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                सुनो ! तुम जानते नहीं आज भी जब कभी मैं वो किताब उठाती हूँ जिंदगी की अलमारी में सहेजी हुई४५ गुणा ३६५ दिन की कहानियों में से, महज दो दिन की कहानी..... अनकही, अनसुनी, अनदेखी अस्पष्ट और अस्वीकृत......... पर यकीन नहीं होता कि ये तमाम स्वीकृतियों से भारी थी गवाह थी वो आँखें ज... Read more
clicks 121 View   Vote 0 Like   6:44pm 30 Jan 2013 #
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        वो गीत   जिसमे नायिका को थमा दिया था तुमने फूल, लाल गुलाब का गुच्छा...................सपनो के गलियारे से उतर आती पलकों के आँगन में और तुम्हारे सिरहाने पे रात के अंधियारे मेंमाथे को छूती  जीवन से भरपूर सुनहरी परी ............... तुमने जाना किलाल गुलाब पा वह मुस्कुराई होगी ....देखा भी नहीं ... Read more
clicks 130 View   Vote 0 Like   1:34pm 26 Jan 2013 #
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        बेगुनाही की मेरी न मुझको सजा दे,   खफा मुझसे तू क्यूँ, ए जिंदगी बता दे|   जिन्दा बमुश्किल चाक- ए- जिगर संग    हलाहल पिला के तू कुछ तो वफ़ा दे |     बहार आ न पाई, खिजां ढल गयी है,    खिली भी नहीं थी कि शाख गिर गयी है|   न मसल इस कदर तू कदम रख संभल के   उठा के कली को अब घर को सजा दे |   वो... Read more
clicks 111 View   Vote 0 Like   6:32pm 19 Jan 2013 #
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   दो दोस्त हवा और पानी .. बिछड़ गए , दूर हो गए  .. सिर्फ एक तड़पते अहसास की तरह बस गए मन में इक दूजे के  .. अहसास भी क्या है लहरों से आते जाते हैं .. जब तक पानी और हवा है, लहरें भी हैं .. हवा का पानी संग खेलना, पानी का हवा से टकराना .. भाता था उन्हें और खुशियों की लहरें तरंगित हो जाती चारो त... Read more
clicks 97 View   Vote 0 Like   7:51pm 18 Jan 2013 #
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                     वह, एक सितारा था, शहर के ऊपर घने बादलों के पार चाँद की दुनियां से भी बहुत दूर ... और वह औरत उसकी रौशनी में अंधेरों को मिटाती अकेले दुनियां के सफ़र में .. लोगो के लिए उसकी दुनियां चार दिवारी थी और खुद वह उस दीवार को कभी नहीं तोड़ पायी थी, न ही उस दरवाजे के ताले की चाभ... Read more
clicks 86 View   Vote 0 Like   7:37pm 17 Jan 2013 #कहानियां- अमृतरस
Blogger: डॉ. नूतन डिमरी गैरोला- नीति
               एक नाम गढ़ जाता है जब ….दिल पर किसी तीर जैसा, पत्थरों पर आलेख जैसा……… दिल पर या पत्थर पर लिखा नाम एक मौत और उसकी यादगार भर हो जाता है| ….. नूतन ... Read more
clicks 104 View   Vote 0 Like   6:24am 15 Jan 2013 #
Blogger: डॉ. नूतन डिमरी गैरोला- नीति
 लहरों सुनो!न इठलाओ तुम नहीं रखूंगी कदम उस ओर जहां तुम पांवों पर मचला करती हो| निमंत्रण देती हो डूब जाने को मेरी नियति नहीं कि मैं डूब जाऊं चाहा डूबना जब भी पत्थर से जा टकराउ |मेरे रास्ते के पत्थर अहिल्या बन कर सर झुकायेंगे नहीं चोट गहरी दे जायेंगे पत्थर फिर भी न शर्मायें... Read more
clicks 82 View   Vote 0 Like   6:11am 14 Jan 2013 #
Blogger: डॉ. नूतन डिमरी गैरोला- नीति
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clicks 83 View   Vote 0 Like   6:01am 14 Jan 2013 #
Blogger: डॉ. नूतन डिमरी गैरोला- नीति
सर कटा सकते हैं लेकिन सर झुका सकते नहीं ... और कितने कटेंगे सर : ( खून लाल ही होता है, किसी भी मजहब, जाति का हो, स्त्री पुरुष का हो, जब बहता है तो कितनी ही पीड़ा और दर्द का सैलाब ले आता है, कितने समंदर बह उठते हैं आँखों से, और सूख जाती हैं आँखें, कितने दिल तड़प उठते है, कितने लोंग बे... Read more
clicks 117 View   Vote 0 Like   5:47pm 10 Jan 2013 #
Blogger: डॉ. नूतन डिमरी गैरोला- नीति
     वो दो बड़ी सपनीली आँखें चंचल, भोलीभाली पर अभागी दुनियां की डगर से अनजान जिसका अभी अभी  था यौवन पर पहला पादान|मन की कलियाँ चटक रही थी रंग अनजाने भा रहे थे छु कर जाती जब हवाएं, वह कुछ शरमा सी जाती थी |चहका करती थी चिड़िया सी परवाज पहला था मगर आकाश नापने चली | अनभिग्य थी वह / कब ... Read more
clicks 124 View   Vote 0 Like   6:04pm 8 Jan 2013 #
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