POPULAR ENGLISH+ SIGNUP LOGIN

Blog: कविता "जीवन कलश"

Blogger: पुरुषोत्तम कुमार सिन्हा
अश्क जितने, इन नैनों की निधि में,बंध न पाएंगे, परिधि में!बन के इक लहर, छलक आते हैं ये अक्सर,तोड़ कर बंध,अनवरत, बह जाते है,इन्हीं, दो नैनों में!अश्क जितने, इन नैनों की निधि में..हो कोई बात, या यूँ ही बहके हों ये जज्बात, डूब कर संग,अश्कों में, डुबो जाते हैं,पल, दो पल में!अश्क जितने, ... Read more
clicks 26 View   Vote 0 Like   6:06pm 4 Apr 2021 #आँगन
Blogger: पुरुषोत्तम कुमार सिन्हा
विशेष थी तुम, ओ दीदी....अब, शेष हैं, बस बीती बातें, और तेरी यादें!यूँ तो, विधाता नें, सब कुछ दिया,पर, पल भर को ही!सुख तेरा, हँसता मुख तेरा, उनसे देखा ना गया,ले चला, वो असमय छीन कर,तुझसे पहले, तेरी खुशी,अवशेष थी, बस शेष थी, तुम ओ दीदी....भले ही, उस पार तुम्हें मिल जाए,खोया सा, तेरा संसा... Read more
clicks 24 View   Vote 0 Like   2:41am 7 Mar 2021 #यादें
Blogger: पुरुषोत्तम कुमार सिन्हा
सत्य है यह, या थोड़ा सा अर्धसत्य!सत्य, क्या महज इक नजरिया?या समक्ष होकर, कहीं कुछ है विलुप्त!फिर, जो समक्ष है, उसका क्या?जो प्रभाव डाले, उसका क्या?सत्य है यह, या थोड़ा सा अर्धसत्य!पहाड़ों पर, वो तलाशते हैं क्या?वो अनवरत, पत्थरों को सींचते हैं क्यूँ?सजदे में क्यूँ, झुक जाते हैं ... Read more
clicks 41 View   Vote 0 Like   2:41am 29 Jan 2021 #ईश्वर
Blogger: पुरुषोत्तम कुमार सिन्हा
बोझ सारे लिए, उभर आती हैं झुर्रियाँ,ताकि, सांझ की गर्दिश तले, यादें ओझिल न हो, सांझ बोझिल न हो!उम्र, दे ही जाती हैं आहट!दिख ही जाती है, वक्त की गहरी बुनावट!चेहरों की, दहलीज पर, उभर आती हैं.....आड़ी-टेढ़ी, वक्र रेखाओं सी ये झुर्रियाँ,सहेजे, अनन्त स्मृतियाँ!वक्त, कब बदल ले करवट!... Read more
clicks 42 View   Vote 0 Like   11:22pm 18 Jan 2021 #कृतज्ञ
Blogger: पुरुषोत्तम कुमार सिन्हा
फिर वर्षों सहेजते!किताबों में रख देने से पहले,खत तो पढ़ लेते!यूँ ना बनते, हम, तन्हाई के, दो पहलू,एकाकी, इन किस्सों के दो पहलू,तन्हा रातों के, काली चादर के, दो पहलू!यूँ, ये अफसाने न बनते,किताबों में रख देने से पहले,वो खत तो पढ़ लेते!वो चंद पंक्तियाँ नहीं, जीवन था सारा,मूक मनोभाव... Read more
clicks 42 View   Vote 0 Like   4:13pm 10 Jan 2021 #किताब
Blogger: पुरुषोत्तम कुमार सिन्हा
आसां नही, किसी के किस्सों में समा जाना,रहूँ मैं जैसा! हूँ मगर आज का हिस्सा,कल के किस्सों में, शायद रह जाऊँ बेगाना!आसां नहीं, किसी और का हो जाना!जीवंत, एक जीवन, सुसुप्त करोड़ों भावना,कितना ही नितांत, उनका जाग जाना!कितने थे विकल्प, पर न थी एक संभावना,आसां नहीं, किसी और का हो जाना!... Read more
clicks 52 View   Vote 0 Like   4:04am 16 Dec 2020 #आसां
Blogger: पुरुषोत्तम कुमार सिन्हा
गर हो तो, रुको....कुछ देर, जगो तुम साथ मेरे,देखो ना, कितने नीरस हैं, रातों के ये क्षण!अंधियारों ने, फैलाए हैं पैने से फन,बेसुध सी, सोई है, ये दुनियाँ!सुधि, ले अब कौन यहाँ!गर हो तो, रुको....नीरवता के, ये कैसे हैं पहरे!चंचल पग सारे, उत्श्रृंखता के क्यूँ हैं ठहरे!लुक-छुप, निशाचरों ने डा... Read more
clicks 90 View   Vote 0 Like   1:26am 14 Oct 2020 #जगण
Blogger: पुरुषोत्तम कुमार सिन्हा
जागी सी आँखों में, बिखरा सा इक स्वप्न है,वो सच था? या इक भ्रम में हम हैं!क्या वो, महज इक मिथ्या था?सत्य नहीं, तो वो क्या था?पूर्णाभास, इक एहसास देकर वो गुजरा था,बोए थे उसने, गहरे जीवन का आभास,कल्पित सी, उस गहराई में,कंपित है जीवन मेरा,ये सच है? या इक भ्रम में हम हैं!जागी सी आँखो... Read more
clicks 89 View   Vote 0 Like   4:05am 23 Sep 2020 #एहसास
Blogger: पुरुषोत्तम कुमार सिन्हा
वो चाँद चला, छलता, अपने ही पथ पर!बोल भला, तू क्यूँ रुकता है?ठहरा सा, क्या तकता है?कोई जादूगरनी सी, है वो  स्निग्ध चाँदनी,अन्तः तक छू जाएगी,यूँ छल जाएगी!वो चाँद चला, छलता, अपने ही पथ पर!कुछ कहता, वो भुन-भुन-भुन!कर देता हूँ मैं, अन-सुन!यथासंभव, टोकती है उसकी ज्योत्सना,यथा-पूर्व जब... Read more
clicks 125 View   Vote 0 Like   6:26am 7 Sep 2020 #चाँद
Blogger: पुरुषोत्तम कुमार सिन्हा
पल भर को, रुक जरा, ऐ मेरे मन यहाँ,चुन लूँ, जरा ये खामोशियाँ!चुप-चुप, ये गुनगुनाता है कौन?हलकी सी इक सदा, दिए जाता है कौन?बिखरा सा, ये गीत है!कोई अनसुना सा, ये संगीत है!है किसकी ये अठखेलियाँ,कौन, न जाने यहाँ!पल भर को, रुक जरा, ऐ मेरे मन यहाँ,चुन लूँ, जरा ये खामोशियाँ!उनींदी सी हैं, कि... Read more
clicks 80 View   Vote 0 Like   6:14pm 31 Aug 2020 #खामोशियाँ
Blogger: पुरुषोत्तम कुमार सिन्हा
यूँ भड़क उठती है, कहीं पीड़ बड़ी!ज्यूँ, विध्वंस की है घड़ी!शून्य चेतना, गगनभेदी सी गर्जना,टूटती शिला-खंड सी, अन्तहीन वेदना,चुप-चुप, मूक सी पर्वत खड़ी,विध्वंस की, है ये घड़ी!यूँ भड़क उठती है, कहीं पीड़ बड़ी!हर तरफ, सन्नाटों की, इक आहट,गुम हो चली, असह्य चीख-चिल्लाहट,अनवरत, आँसू... Read more
clicks 84 View   Vote 0 Like   5:09am 9 Aug 2020 #चेतना
Blogger: पुरुषोत्तम कुमार सिन्हा
दो बूँद बनकर, आँखों में उतरे,मन की, सँकरी गली से, वो जब भी गुजरे!वो, भिगोते थे, कभी बारिशों में,लरजते थे, कभी सुर्ख फूलों पे हँस कर,यूँ, सिमट आते थे, दबे पाँव चलकर,अब वो मिले, दो बूँद बनकर,और, नैनों में उतरे!यूँ मन की गली से, वो गुजरे!दो बूँद बनकर, आँखों में उतरे.......यूँ अनवरत, बहती ह... Read more
clicks 78 View   Vote 0 Like   6:08pm 2 Aug 2020 #किनारा
Blogger: पुरुषोत्तम कुमार सिन्हा
सिमट रहे, ये दलीचे उम्र के,ख्वाब कोई, अब, आए ना मुड़ के!मन के फलक, धुंधलाए हैं, हल्के-हल्के,दूर तलक, साए ना कल के,सांध्य प्रहर, कहाँ किरणों का गुजर,बिखरे हैं, टूट कर ख्वाब कई,रख लूँ चुन के!सिमट रहे, ये दलीचे उम्र के,ख्वाब कोई, अब, आए ना मुड़ के!हम-उम्र कोई होता, तो ख्वाब पिरो लेता,प... Read more
clicks 111 View   Vote 0 Like   2:23am 18 Jul 2020 #उम्र
Blogger: पुरुषोत्तम कुमार सिन्हा
यूँ संग तुम्हारे,देर तक, तकता हूँ, मैं भी तारे,हो, तुम कहीं,एकाकी हूँ, मैं कहीं,हैं जागे,रातों के, पल ये सारे!यूँ तुमको पुकारे,शायद तुम मिलो, नभ के किसी छोर पर,कहीं, सितारों के कोर पर,मिलो, उस पल में, किसी मोड़ पर,एकाकी पल हमारे,संग तुम्हारे,व्यतीत हो जाएंगे, सारे!यूँ बिन तुम्ह... Read more
clicks 98 View   Vote 0 Like   3:40am 12 Jul 2020 #चंचल
Blogger: पुरुषोत्तम कुमार सिन्हा
धुंधले हुए, स्वप्न बहुतेरे,धुंधलाए,नयनों के घेरे,धुंधला-धुंधला, हर मौसम,जागा इक, चेतन मन!मौन अपनापन,वो ही,सपनों के घेरे!धूमिल, प्रतिबिम्बों के घेरे,उलझाए,उलझी सी रेखाएं,बदलते से एहसासों के डेरे,अल्हड़, वो ही मन,तेरा अपनापन,तेरे ही,ख्यालों के घेरे!बदली छवि, तुम न बदले,तु... Read more
clicks 109 View   Vote 0 Like   2:35am 8 Jul 2020 #छवि
Blogger: पुरुषोत्तम कुमार सिन्हा
निष्क्रिय हुए, आकर्षण,विलक्षणताओं से भरे वो क्षण,गुम हैं कहीं!सहज हों कैसे, विकर्षण के ये क्षण!ये दिल, मानता नहीं,कि, हो चले हैं, वो अजनबी,वही है, दूरियाँ,बस, प्रभावी से हैं फासले!यूँ ही, हो चले, तमाम वादे खोखले!गुजरना था, किधर!पर जाने किधर, हम थे चले,वही है, रास्ते,पर, मंजिलों स... Read more
clicks 116 View   Vote 0 Like   3:04am 7 Jul 2020 #अरमान
Blogger: पुरुषोत्तम कुमार सिन्हा
रह जाए जैसे, जिज्ञासा!रह गए हो तुम, वैसे ही, जरा सा!नजर में समेटे, दिव्य आभा,मुखर, नैनों की भाषा,चुप-चुप, बड़े ही, मौन थे तुम,न जाने, कौन थे तुम?हौले-हौले, प्रकंपित थी हवा,विस्मित, थे क्षण वहाँ,कुछ पल, वहीं था, वक्त ठहरा,जाने था, कैसा पहरा!हैं तेज कितने, वक्त के चरण,न ओढ़े, कोई आवरण,... Read more
clicks 104 View   Vote 0 Like   5:46pm 23 Jun 2020 #जज्बात
Blogger: पुरुषोत्तम कुमार सिन्हा
बिन पिता!जलती है जैसे,जीवन की भट्ठी में, जीते जी!इस जीवन की,इक चिता!है आँखों में मेरी, जीवन्त चेहरा तुम्हारा,है ख्यालों पर मेरी, तेरा ही पहरा,पर, दर्शन वो अन्तिम तेरा,मेरे ही, भाग्य न आया!अन्त समय, पापा, मैं तुझको देख न पाया!यूँ तो, संग रहे तुम, करुणामय यादों में,है गूंज तुम्हा... Read more
clicks 101 View   Vote 0 Like   2:50am 22 Jun 2020 #चिता
Blogger: पुरुषोत्तम कुमार सिन्हा
मेरी सुसुप्त संवेेेेदनाओं को फिर पिरोने,वो कौन आया?मन हो चला पराया!लचकती डाल पर,जैसे, छुप कर, कूकती हो कोयल,कदम की ताल पर,दिशाओं में, गूंजती हो पायल,है वो रागिनी या है वो सुरीली वादिनी!वो कौन है?जो लिए, संगीत आया!जग उठी, सोई सी संवेदनाएँ,मन हो चला पराया!आँखें मूंद कोई,कुछ कह ... Read more
clicks 83 View   Vote 0 Like   11:30pm 18 Jun 2020 #गिरह
Blogger: पुरुषोत्तम कुमार सिन्हा
जब ताकती हो, शून्य को, मेरी आँखें,रुक सी गई हों, ये मेरी, चंचल सी पलकें,ठहरा वहीं हो, बादल गगन पे,तो, समझना, वो तुम हो,और, याद तुझको, मैंने किया है!विचलित हो जब, कभी मन तुम्हारा,जब लेना पड़े, तुम्हें तन्हाईयों का सहारा,लगे कोई बुलाए, हलके-हलके,तो, समझना, वो मैं हूँ,और, याद तुझको, मै... Read more
clicks 95 View   Vote 0 Like   1:51am 17 Jun 2020 #कल
Blogger: पुरुषोत्तम कुमार सिन्हा
हँस उठी, कोख!मूर्त हो उठी, अधूरी कोई कल्पना!हँस उठी, कोख!तब, कोख ने जना,एक सत्य, एक सोंच, एक भावना,एक भविष्य, एक जीवन, एक संभावना,एक कामना, एक कल्पना,एक चाह, एक सपना,और, विरान राहों में,कोई एक अपना!हँस उठी, कोख!वो हँसीं, एक जन्मी,विहँस पड़ी, संकुचित सी ये दिशाएँ,जगे बीज, हुए अंकुरि... Read more
clicks 109 View   Vote 0 Like   6:43pm 10 Jun 2020 #गर्भ
Blogger: पुरुषोत्तम कुमार सिन्हा
वो, जो गौण था!जरा, मौन था!वो, तुम न थे, तो वो, कौन था?मंद सी, बही थी वात,थिरक उठे थे, पात-पात,मुस्कुरा रही, थी कली,सज उठी, थी गली,उन आहटों में, कुछ न कुछ, गौण था!वो, तुम न थे, तो वो कौन थासिमट, रही थी दिशा,मुखर, हो उठी थी निशा,जग रही थी, कल्पना,बना एक, अल्पना,उस अल्पना में, कुछ न कुछ, गौण था!व... Read more
clicks 96 View   Vote 0 Like   2:17am 2 Jun 2020 #आहट
Blogger: पुरुषोत्तम कुमार सिन्हा
देती रही, आहटें,धूल-धूल होती, लिखावटें,बिखर कर,मन के पन्नों पर!अकाल था, या शून्य काल?कुछ लिख भी ना पाया, इन दिनों....रुठे थे, जो मुझसे वे दिन!छिन चुके थे, सारे फुर्सत के पल,लुट चुकी थी, कल्पनाएँ,ध्वस्त हो चुके थे, सपनों के शहर,सारे, एक-एक कर!देती रही, आहटें,धूल-धूल होती, लिखावटें,ब... Read more
clicks 129 View   Vote 0 Like   2:24pm 25 May 2020 #कचोट
Blogger: पुरुषोत्तम कुमार सिन्हा
COVID 19:अविस्मरणीय संक्रमण के इस दौर में, कोरोना से खौफजदा जिन्दगियों की चलती फिरती लाशों के मध्य, जिन्दगी एक वीभत्स रूप ले चुकी है। हताशा में यहाँ-वहाँ भटकते लोग, अपनी कांधों पे अपनी ही जिन्दगी लिए, चेतनाशून्य हो चले हैं । मर्मान्तक है यह दौर। न आदि है, ना ही अंत है! हर घड़ी... Read more
clicks 101 View   Vote 0 Like   12:37am 20 May 2020 #अंत
Blogger: पुरुषोत्तम कुमार सिन्हा
उड़ चले विहग, क्षितिज पे कहीं दूर!उन्हीं, असीम सी, रिक्तताओं में,हैं कुछ, ढ़ूंढ़ने को मजबूर,मुट्ठी भर आसमां, कहीं गगन पे दूर,या, अपना, कोई आकाश,लिए, अंतहीन सा, इक तलाश!उड़ चले विहग, क्षितिज पे कहीं दूर!गुम हैं कहीं, पंछियों के कलरव,कहीं दूर जैसे, उन से हैं रव,शून्य में घुला, व... Read more
clicks 104 View   Vote 0 Like   10:03am 8 May 2020 #आकाश
[ Prev Page ] [ Next Page ]

Share:

Members Login

    Forget Password? Click here!
  • Latest
  • Week
  • Month
  • Year
  हमारीवाणी.कॉम पर ब्लॉग पंजीकृत करने की विधि बहुत सरल हैं। इसके लिए सबसे पहले प्रष्ट के सबसे ऊपर दाईं ओर लिखे ...
  हमारीवाणी पर ब्लॉग-पोस्ट के प्रकाशन के लिए 'क्लिक कोड' ब्लॉग पर लगाना आवश्यक है। इसके लिए पहले लोगिन करें, लोगिन के उपरांत खुलने वाले प...
और सन्देश...
कुल ब्लॉग्स (3990) कुल पोस्ट (194332)