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Blog: Nayekavi

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हाय अनाथआवास फुटपाथजाड़े की रात।**दीन लाचारशर्दी गर्मी की मारझेले अपार।**हाय गरीबजमाना ही रकीबखोटा नसीब।**तेरी गरीबीबड़ी बदनसीबीसदा करीबी।**लाचार दीनदुर्बल तन-मनकैसा जीवन?**दैन्य का जोरतपती लू सा घोरकहीं ना ठौर।**दीन की खुशीनित्य की एकादशीओढ़ी खामोशी।**सुविधा हीनदुख पर... Read more
clicks 3 View   Vote 0 Like   4:55am 16 Jan 2021 #हाइकु
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जुल्म का हो बोलबाला, मुख पे न जड़ें ताला,बैठे बैठे चुपचाप, ग़म को न पीजिये।होये जब अत्याचार, करें कभी ना स्वीकार,पुरजोर प्रतिकार, जान लगा कीजिये।देश का हो अपमान, टूटे जब स्वाभिमान,कभी न तटस्थ रहें, मन ठान लीजिये।हद होती सहने की, बात कहें कहने की,सदियों पुराना अब, मौन त्याग द... Read more
clicks 11 View   Vote 0 Like   10:44am 10 Jan 2021 #मनहरण घनाक्षरी
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बह्र:- 2122  2122  2122  212जनवरी के मास की छब्बीस तारिख आज है,आज दिन भारत बना गणतन्त्र सबको नाज़ है।ईशवीं उन्नीस सौ पच्चास की थी शुभ घड़ी,तब से गूँजी देश में गणतन्त्र की आवाज़ है।आज के दिन देश का लागू हुआ था संविधान,है टिका जनतन्त्र इस पे ये हमारी लाज है।सब रहें आज़ाद हो रोजी कमाएँ ... Read more
clicks 16 View   Vote 0 Like   12:40pm 4 Jan 2021 #बासुदेव अग्रवाल
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हिफ़ाजत करने फूलों की रचे जैसे फ़ज़ा काँटे, खुशी के साथ वैसे ही ग़मों को भी ख़ुदा बाँटे,अगर इंसान जीवन में खुशी के फूल चाहे नित,ग़मों के कंटकों को भी वो जीवन में ज़रा छाँटे।(1222×4)*********मौसम-ए-गुल ने फ़ज़ा को आज महकाया हुआहै,आमों पे भी क्या सुनहरा बौर ये आया हुआ है,सुर्ख पहने पैरहन हैं ... Read more
clicks 7 View   Vote 0 Like   8:55am 26 Dec 2020 #शब्द विशेष मुक्तक
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बहर:- 22  121 22,  22  121 22(पदांत का लोप, समांत 'आरी')ममता की जो है मूरत, समता की जो है सूरत,वरदान है धरा पर, ये बेटियाँ हमारी।।माँ बाप को रिझाके, ससुराल को सजाये,दो दो घरों को जोड़े, ये बेटियाँ दुलारी।।जो त्याग और तप की, प्रतिमूर्ति बन के सोहे,निस्वार्थ प्रेम रस से, हृदयों को सींच मो... Read more
clicks 19 View   Vote 0 Like   7:53am 18 Dec 2020 #बासुदेव अग्रवाल
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लावणी छंद आधारितभारत के उज्ज्वल मस्तक पर, मुकुट बना जो है शोभित,जिसके पुण्य तेज से पूरा, भू मण्डल है आलोकित,महादेव के पुण्य धाम को, आभा से वह सजा रहा,आज हिमालय भारत भू की, यश-गाथा को सुना रहा।तूफानों को अंक लगा कर, तड़ित उपल की वृष्टि सहे,शीत ताप छाती पर झेले, बन मशाल अनवरत दह... Read more
clicks 32 View   Vote 0 Like   12:23pm 15 Dec 2020 #विविध गीत
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कई कौंधते प्रश्न अचानक, चर्चा से विषकन्या की।जहर उगलती नागिन बनती, कैसे मूरत ममता की।।गहराई से इस पर सोचें, समाधान हम सब पाते।कलुषित इतिहासों के पन्ने, स्वयंमेव ही खुल जाते।।पहले के राजा इस विध से, नाश शत्रु का करवाते।नारी को हथियार बना कर, शत्रु देश में भिजवाते।।जहर ... Read more
clicks 9 View   Vote 0 Like   6:18am 10 Dec 2020 #लावणी छंद
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जय भारत जय पावनि गंगे, जय गिरिराज हिमालय;सकल विश्व के नभ में गूँजे, तेरी पावन जय जय।तूने अपनी ज्ञान रश्मि से, जग का तिमिर हटाया;अपनी धर्म भेरी के स्वर से, जन मानस गूँजाया।।उत्तर में नगराज हिमालय, तेरा मुकुट सजाए;दक्षिण में पावन रत्नाकर , तेरे चरण धुलाए।खेतों की हरियाली त... Read more
clicks 34 View   Vote 0 Like   5:20am 10 Dec 2020 #सार छंद
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बह्र:- 221 1221 1221 122मूली में है झन्नाट जो, आलू में नहीं है,इमली सी खटाई भी तो निंबू में नहीं है।किशमिश में लचक सी जो है काजू में नहीं है,जो लुत्फ़ है भींडी में वो कद्दू में नहीं है।बेडोल दिखे, गोल सदा, बाँकी की महिमा,जो नाज़ है बरफी में वो लड्डू में नहीं है।जितनी भी करूँ तुलना मैं घर... Read more
clicks 29 View   Vote 0 Like   11:33am 4 Dec 2020 #बासुदेव अग्रवाल
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मधुवन महकत, शुक पिक चहकत,जन-मन हरषत,  मधु रस बरसे।कलि कलि सुरभित, गलि गलि मुखरित,उपवन पुलकित, कण-कण सरसे।तृषित हृदय यह, प्रभु-छवि बिन दह,दरश-तड़प सह, निशि दिन तरसे।यमुन-पुलिन पर, चित रख नटवर,'नमन'नवत-सर, ब्रज-रज परसे।।*****जनहरण विधान:- (कुल वर्ण संख्या = 31 । इसमें चरण के प्रथम 30 वर... Read more
clicks 79 View   Vote 0 Like   8:03am 15 Nov 2020 #बासुदेव अग्रवाल
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बम बम के हम उद्घोषों से, धरती गगन नाद से भरते।बोल 'बोल बम'के पावन सुर, आह्वाहन भोले का करते।।पर तुम हृदयहीन बन कर के, मानवता को रोज लजाते।बम के घृणित धमाके कर के, लोगों का नित रक्त बहाते।।हर हर के हम नारे गूँजा, विश्व शांति को प्रश्रय देते।साथ चलें हम मानवता के, दुखियों की ... Read more
clicks 34 View   Vote 0 Like   4:41am 11 Nov 2020 #बासुदेव अग्रवाल
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बह्र:- 212*4जो गिरे हैं उन्हें हम उठाते रहे,दर्द में उनके आँसू बहाते रहे।दीप हम आँधियों में जलाते रहे।लोग कुछ जो इन्हें भी बुझाते रहे।जो गरीबी की सह मार बेज़ार हैं,आस जीने की उन में जगाते रहे।राह मज़लूम की तीरगी से घिरी,रस्ता जुगनू बने हम दिखाते रहे।खुद परस्ती ओ नफ़रत के इस दौ... Read more
clicks 23 View   Vote 0 Like   6:38am 5 Nov 2020 #बासुदेव अग्रवाल
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(1)हैरुतपावस,वर्षा बूंदेंकरे फुहार,,मिटा हाहाकार,भरा सुख-भंडार।***(2)क्योंहोती विनष्ट,आँखें मूंदजल की बूंद,ये न है स्वीकार,हो ठोस प्रतिकार।***बासुदेव अग्रवाल 'नमन'तिनसुकिया09-07-19... Read more
clicks 26 View   Vote 0 Like   4:00am 23 Oct 2020 #वर्ण पिरामिड
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सोया पड़ा हुआ शासन,कठिन बड़ा अब पेट भरण,शरण कहाँ? केवल शोषण,***ले रहा जनतंत्र सिसकी,स्वार्थ की चक्की चले,पाट में जनता विवस सी।***चुस्त प्रशासन भी बेकार,जनता सुस्त निकम्मी,लोकतंत्र की लाचारी।***बासुदेव अग्रवाल 'नमन'तिनसुकिया2-05-20... Read more
clicks 40 View   Vote 0 Like   6:53am 15 Oct 2020 #बासुदेव अग्रवाल
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2212*4 (हरिगीतिका छंद आधारित)(पदांत 'को जाने नहीं', समांत 'आन')प्रतिरूप बालक प्यार का भगवान का प्रतिबिम्ब है,कितना मनोहर रूप पर अभिमान को जाने नहीं।।पहना हुआ कुछ या नहीं लेटा किसी भी हाल में,अवधूत सा निर्लिप्त जग के भान को जाने नहीं।।चुप था अभी खोया हुआ दूजे ही पल रोने लगे,मनम... Read more
clicks 48 View   Vote 0 Like   6:43am 15 Oct 2020 #बासुदेव अग्रवाल
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वो मनभावन प्रीत लगा।छोड़ चला मन भाव जगा।।आवन की सजना धुन में।धीर रखी अबलौं मन में।।खावन दौड़त रात महा।आग जले नहिं जाय सहा।।पावन सावन बीत रहा।अंतस हे सखि जाय दहा।।मोर चकोर मचावत है।शोर अकारण खावत है।।बाग-छटा नहिं भावत है।जी अब और जलावत है।।ये बरखा भड़कावत है।जो विरहाग... Read more
clicks 48 View   Vote 0 Like   1:39pm 10 Oct 2020 #सारवती छंद
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नर्तत त्रिपुरारि नाथ, रौद्र रूप धारे।डगमग कैलाश आज, काँप रहे सारे।।बाघम्बर को लपेट, प्रलय-नेत्र खोले।डमरू का कर निनाद, शिव शंकर डोले।।लपटों सी लपक रहीं, ज्वाल सम जटाएँ।वक्र व्याल कंठ हार, जीभ लपलपाएँ।।ठाडे हैं हाथ जोड़, कार्तिकेय नंदी।काँपे गौरा गणेश, गण सब ज्यों बंदी... Read more
clicks 127 View   Vote 0 Like   1:25pm 10 Oct 2020 #बासुदेव अग्रवाल
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बह्र:- 2122*2रोग या कोई बला है,जिस में नर से नर जुदा है।हाय कोरोना की ऐसी,बंद नर घर में पड़ा है।दाव पर नारी की लज्जा,तंत्र का चौसर बिछा है।हो नशे में चूर अभिनय,रंग नव दिखला रहा है।खुद ही अपनी खोदने में,आदमी जड़ को लगा है।आज मतलब के हैं रिश्ते,कौन किसका अब सगा है।लेखनी मुखरित 'नमन'... Read more
clicks 44 View   Vote 0 Like   12:59pm 5 Oct 2020 #बासुदेव अग्रवाल
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मन नित भजो, राधेकृष्णा, यही बस सार है।इन रस भरे, नामों का तो, महत्त्व अपार है।।चिर युगल ये, जोड़ी न्यारी, त्रिलोक लुभावनी।भगत जन के, प्राणों में ये, सुधा बरसावनी।।जहँ जहँ रहे, राधा प्यारी, वहीं घनश्याम हैं।परम द्युति के, श्रेयस्कारी, सभी परिणाम हैं।।बहुत महिमा, नामों की है... Read more
clicks 81 View   Vote 0 Like   1:10pm 3 Oct 2020 #हरिणी छंद
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अत्याचार देख भागें,शांति शांति चिल्लाते,छद्म छोड़ अब तो जागें।***पीड़ा सारी कहता,नीर नयन से बहता,अंधी दुनिया हँसती।***बाढ कहीं तो सूखा है,उजड़ रहे वन सिसके,मनुज लोभ का भूखा है,***बासुदेव अग्रवाल 'नमन'तिनसुकिया28-04-20... Read more
clicks 70 View   Vote 0 Like   9:19am 20 Sep 2020 #बासुदेव अग्रवाल
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122  122  122  12फकीरी हमारे हृदय में खिली।बड़ी मस्त मौला तबीयत मिली।।कहाँ हम पड़ें और किस हाल में।किसे फ़िक्र हम मुक्त हर चाल में।।वृषभ से रहें नित्य उन्मुक्त हम।जहाँ मन, बसेरा वहीं जाय जम।।बना हाथ तकिया टिका माथ लें।उड़ानें भरें नींद को साथ लें।।मिले जो उसीमें गुजारा करे... Read more
clicks 112 View   Vote 0 Like   11:38am 16 Sep 2020 #शक्ति छंद
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भारी रोग निसड़्लो आयो, कोरोना,सगलै जग मैं रुदन मचायो, कोरोना,मिनखाँ नै मिनखाँ सै न्यारा, यो कीन्यो,कुचमादी चीन्याँ रो जायो, कोरोना।बासुदेव अग्रवाल 'नमन'तिनसुकिया30-08-20... Read more
clicks 74 View   Vote 0 Like   5:59am 9 Sep 2020 #बासुदेव अग्रवाल
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बह्र:- 212×4जगमगाते दियों से मही खिल उठी,शह्र हो गाँव हो हर गली खिल उठी।लायी खुशियाँ ये दीपावली झोली भर,आज चेह्रों पे सब के हँसी खिल उठी।आप देखो जिधर नव उमंगें उधर,हर महल खिल उठा झोंपड़ी खिल उठी।सुर्खियाँ सब के गालों पे ऐसी लगे,कुमकुमे हँस दिये रोशनी खिल उठी।आज छोटे बड़े के म... Read more
clicks 46 View   Vote 0 Like   6:38am 5 Sep 2020 #बासुदेव अग्रवाल
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(1222   1222   1222   1222)नहीं जो चाहते रिश्ते अदावत और हो जाती,न होते अम्न के कायल सियासत और हो जाती,दिखाकर बुज़दिली पर तुम चुभोते पीठ में खंजर,अगर तुम बाज़ आ जाते मोहब्बत और हो जाती।घिनौनी हरकतें करना तुम्हारी तो सदा आदत,बदल जाती अगर आदत तो फ़ितरत और हो जाती।जो दहशतगर्द हैं ... Read more
clicks 93 View   Vote 0 Like   6:30am 5 Sep 2020 #बासुदेव अग्रवाल
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शारद वंदन:-वंदन वीणा वादिनी,मात ज्ञान की दायिनी,काव्य बोध का मैं कांक्षी।***राम नाम:-राम नाम है सार प्राणी,बैल बना तू अंधा,जग है चलती घाणी।***सरयू के तट पर बसी,धूम अयोध्या में मची,ज्योत राम मंदिर की जगी।***बासुदेव अग्रवाल 'नमन'तिनसुकिया12-08-20... Read more
clicks 55 View   Vote 0 Like   11:39am 22 Aug 2020 #बासुदेव अग्रवाल
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