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Blog: Nayekavi

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जलते रहेजीवन के आले मेंस्मृति दीपक।**जीवन चाहेहर हाल में ढ़लबने रहना।**जो ढ़ल गयासतत-जीवन सावो ही जी गया।**जीवन-गतिकोष बद्ध स्पन्दितशाश्वत शक्ति****बासुदेव अग्रवाल 'नमन'तिनसुकिया22-05-19... Read more
clicks 11 View   Vote 0 Like   4:15am 24 Aug 2021 #हाइकु
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"नरक चतुर्दशी"नरकासुर मार श्याम जब आये।घर घर मंगल दीप जले तब, नरकचतुर्दश ये कहलाये।।भूप प्रागज्योतिषपुर का वह, चुरा अदिति के कुण्डल लाया,सौलह दश-शत नार रूपमति, कारागृह में लाय बिठाया,साथ सत्यभामा को ले हरि, दुष्ट असुर के वध को धाये।नरकासुर मार श्याम जब आये।।पक्षी राज ... Read more
clicks 38 View   Vote 0 Like   11:27am 20 Aug 2021 #बासुदेव अग्रवाल
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बह्र :- 2122 2122 2122 212देश की ख़ातिर सभी को जाँ लुटाने की कहो,दुश्मनों को खून के आँसू रुलाने की कहो।देश की चोड़ी हो छाती और ऊँचा शीश हो,भाव ऐसे नौजवानों में जगाने की कहो।ज्ञान की जिस रोशनी में हम नहा जग गुरु बने,फिर उसी गौरव को भारत भू पे लाने की कहो।बेसुरे अलगाव के जो गीत गायें अब उन... Read more
clicks 46 View   Vote 0 Like   12:09pm 4 Aug 2021 #बासुदेव अग्रवाल
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आरोही अवरोही पिरामिड(1-11 और 11-1)को नहींजानतजग में तुदूत राम को।महिमा दी तूनेसालासर ग्राम को।राम लखन को लाएपावन किष्किंधा धाम को।सागर लांघा  लंकिनी  मारीलंका में छेड़ दिया संग्राम को।सौंप मुद्रिका, उजाड़ी  वाटिकाजारे तब लंका ललाम को।स्वीकार   करो  बजरंगीतुम ... Read more
clicks 18 View   Vote 0 Like   2:47am 21 Jun 2021 #वर्ण पिरामिड
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पहचान ले नारी तू ताकत जो छिपी तुझ में,कारीगरी उसकी जो सब ही तो सजी तुझ में,मंजिल न कोई ऐसी तू पा न सके जिसको,भगवान दिखे उसमें ममता जो बसी तुझ में।(221  1222)*2***********बदी के बदले भलाई सदा न पाओगे,सितम ढहाओगे, तुम भी वफ़ा न पाओगे,सदा ही जुल्म किया औरतों पे मर्दों ने,डरो ख़ुदा से नहीं तो प... Read more
clicks 59 View   Vote 0 Like   10:25am 15 Jun 2021 #शब्द विशेष मुक्तक
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(दोहा छंद)पंकज जैसा मन रखो, चहुँ दिशि चाहे कीच।पाप कभी छू नहिं सके, जितने रहलो बीच।।कमल खिले सब पंक में, फिर भी पूजे जाय।गुण तो छिप सकते नहीं, अवगुण बाहर आय।।जग काजल की कोठरी, मन ज्यों धवल कपास।ज्यों बूड़े त्यों श्याम हो, बूड़े नहीं उजास।।जब उमंग मन में रहे, बनते बिगड़े काम।ग... Read more
clicks 55 View   Vote 0 Like   11:29am 10 Jun 2021 #बासुदेव अग्रवाल
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बह्र:- 212*4दर्द दे वो चले पर दवा कौन दे,साँस थमने लगी अब दुआ कौन दे।चाहतें दफ़्न सब हो के दिल में रहीं,जब जफ़ा ही लिखी तो वफ़ा कौन दे।उनकी यादों में उजड़ा है ये आशियाँ,इसको फिर से बसा घर बना कौन दे।ख़ार उन्माद नफ़रत के पनपे यहाँ,गुल महब्बत के इसमें खिला कौन दे।देश फिर ये बँटे ख्वाब ... Read more
clicks 46 View   Vote 0 Like   11:20am 5 Jun 2021 #बासुदेव अग्रवाल
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(इंदिरा छंद / राजहंसी छंद)तमस की गयी ये विभावरी।हृदय-सारिका आज बावरी।।वह उड़ान उन्मुक्त है भरे।खग प्रसुप्त जो गान वो करे।।अरुणिमा रही छा सभी दिशा।खिल उठा सवेरा, गयी निशा।।सतत कर्म में लीन हो पथी।पथ प्रतीक्ष तेरे महारथी।।अगर भूत तेरा डरावना।पर भविष्य आगे लुभावना।।रह... Read more
clicks 31 View   Vote 0 Like   11:43am 3 Jun 2021 #बासुदेव अग्रवाल
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*कहमुकरी* साहित्यिक परिपेक्ष में:-हिंदी किंवा संस्कृत साहित्य में अर्थचमत्कृति के अन्तर्गत दो अलंकार विशेष रूप से प्रयुक्त होते हैं,, पहला श्लेष व दूसरा छेकापहृति,, श्लेष में कहने वाला अलग अर्थ में कहता है व सुनने वाला उसका अलग अर्थ ग्रहण करता है,, पर छेकापहृति में प्रस... Read more
clicks 90 View   Vote 0 Like   12:21pm 17 May 2021 #जय गोविंद शर्मा
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ओ ख़ुदा मेरे तु बता मुझे मेरा तुझसे एक सवाल है,जो ये ज़िन्दगी तुने मुझको दी उसे जीने में क्यों मलाल है,इसे अब ख़ुदा तु लेले वापस नहीं बोझ और मैं सह सकूँ,तेरी ज़िन्दगी को अब_और जीना मेरे लिए तो मुहाल है।(11212*4)*********जहाँ भी आब-ओ-दाना है,वहीं समझो ठिकाना है,तु लेकर साथ क्या आया,यहीं सब ... Read more
clicks 99 View   Vote 0 Like   11:11am 16 May 2021 #विविध मुक्तक
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मनहरण घनाक्षरीराजनायिकों के गले, मोदी का लगाना देख,राहुल तिहारी नींद, उड़ने क्यों लगी है।हाथ मिला हाथ झाड़, लेने की तिहारी रीत,रीत गले लगाने की, यहाँ मन पगी है।देश की परंपरा का, उपहास करो नित,और आज तक किन्ही, बस महा ठगी है।दुनिया से भाईचारा, कैसे है निभाया जाता,तुझे क्या, ते... Read more
clicks 73 View   Vote 0 Like   3:39am 12 May 2021 #मनहरण घनाक्षरी
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बह्र:- 221  2121  1221  212ढूँढूँ भला ख़ुदा की मैं रहमत कहाँ कहाँ,अब क्या बताऊँ उसकी इनायत कहाँ कहाँ।सहरा, नदी, पहाड़, समंदर ये दश्त सब,दिखलाएँ सब ख़ुदा की ये वुसअत कहाँ कहाँ।हर सिम्त हर तरह के दिखे उसके मोजिज़े,जैसे ख़ुदा ने लिख दी इबारत कहाँ कहाँ।अंदर जरा तो झाँकते अपने को भूल कर,ब... Read more
clicks 111 View   Vote 0 Like   5:40am 5 May 2021 #बासुदेव अग्रवाल
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क्षणिक सुखों में खो कर पहले, नेह बन्धनों को त्यज भागो,माथ झुका फिर स्वांग रचाओ, नीत दोहरी से तुम जागो,जीम्मेदारी घर की केवल, नारी पर नहिँ निर्भर रहती,पुरुष प्रकृति ने तुम्हें बनाया, ये अभिमान हृदय से त्यागो।(समान सवैया)... Read more
clicks 50 View   Vote 0 Like   3:59am 25 Apr 2021 #मुक्तक
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बेजुबां की पीड़ा का गर न दर्द सीने में,सार कुछ नहीं फिर है इस जहाँ में जीने में।मारते हो जीवों को ढूँढ़ते ख़ुदा को हो,गर नहीं दया मन में क्या रखा मदीने में।(212  1222)*2*********इस जमीं के सिवा कोई बिस्तर नहीं, आसमाँ के सिवा सर पे है छत नहीं।मुफ़लिसी को गले से लगा खुश हैं हम, ये हमारे लिये ... Read more
clicks 66 View   Vote 0 Like   7:51am 16 Apr 2021 #शब्द विशेष मुक्तक
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बह्र:- 2122 2122 2122 2पर्वों में सब से सुहानी आ गयी होली,फागुनी रस में नहाई आ गयी होली।टेसुओं की ले के लाली आ गयी होली,रंग बिखराती बसंती आ गयी होली।देखिए अमराइयों में कोयलों के संग,मंजरी की ओढ़ चुनरी आ गयी होली।चंग की थापों से गुंजित फाग की धुन में,होलियारों की ले टोली आ गयी होली।द... Read more
clicks 315 View   Vote 0 Like   10:06am 5 Apr 2021 #बासुदेव अग्रवाल
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अरे रामा! सावन की रुत जी जलाये - 2सखि मोहे सजना की याद सताये,हाये सखि सजना की याद सताये।कारे मेघा उमड़ डरायें,अरे रामा मेघा डरायें!!!कारे मेघा उमड़ डरायें,देख बिजुरिया जी घबराये,ऐसे में भर अंक सजनवा,सखि भर अंक सजनवा,अरे रामा छतिया से वे चिपकायेंसखि मोहे सजना की याद सताये।खि... Read more
clicks 58 View   Vote 0 Like   12:44pm 25 Mar 2021 #लोकगीत
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रवि को छिपता देख, शाम ने ली अँगड़ाई।रक्ताम्बर को धार, गगन में सजधज आई।।नृत्य करे उन्मुक्त, तपन को देत विदाई।गा कर स्वागत गीत, करे रजनी अगुवाई।।सांध्य-जलद हो लाल, नृत्य की ताल मिलाए।उमड़-घुमड़ कर मेघ, छटा में चाँद खिलाए।।पक्षी दे संगीत, मधुर गीतों को गा कर।मोहक भरे उड़ान, पंख ... Read more
clicks 75 View   Vote 0 Like   5:09am 12 Mar 2021 #रोला छंद
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तेरी ईश सृष्टि की महिमा, अद्भुत बड़ी निराली है;कहीं शीत है कहीं ग्रीष्म है, या बसन्त की लाली है।जग के जड़ चेतन जितने भी, सब तेरे ही तो कृत हैं;जो तेरी छाया से वंचित, वे अस्तित्व रहित मृत हैं।।धैर्य धरे नित भ्रमणशील रह, धार रखे जीवन धरती;सागर की उत्ताल तरंगें, अट्टहास तुझसे कर... Read more
clicks 64 View   Vote 0 Like   5:00am 12 Mar 2021 #लावणी छंद
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बह्र:- 2122  1212  22प्यास दिल की न यूँ बढ़ाओ तुम,जान ले लो न पर सताओ तुम।पास आ के जरा सा बैठो तो,फिर न चाहे गलेे लगाओ तुम।चोट खाई बहुत जमाने से,कम से कम आँख मत चुराओ तुम।इल्तिज़ा आख़िरी ये जानेमन,अब तो उजड़ा चमन बसाओ तुम।खुद की नज़रों से खुद ही गिर कर के,आग नफ़रत की मत लगाओ तुम,बीच सड़को... Read more
clicks 145 View   Vote 0 Like   4:06am 5 Mar 2021 #बासुदेव अग्रवाल
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(नेताजी)आज तेइस जनवरी है याद नेताजी की कर लें,हिन्द की आज़ाद सैना की हृदय में याद भर लें,खून तुम मुझको अगर दो तो मैं आज़ादी तुम्हें दूँ,इस अमर ललकार को सब हिन्दवासी उर में धर लें।(2122*4)*********तुलसीदास जी की जयंती पर मुक्तक पुष्पलय:- इंसाफ की डगर पेतुलसी की है जयंती सावन की शुक्ल सप... Read more
clicks 114 View   Vote 0 Like   5:51am 15 Feb 2021 #समसामयिक मुक्तक
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मन वांछित जब हो नहीं, प्राणी होता क्रुद्ध।बुद्धि काम करती नहीं, हो विवेक अवरुद्ध।।नेत्र और मुख लाल हो, अस्फुट उच्च जुबान।गात लगे जब काम्पने, क्रोध चढ़ा है जान।।सदा क्रोध को जानिए, सब झंझट का मूल।बात बढ़ाए चौगुनी, रह रह दे कर तूल।।वशीभूत मत होइए, कभी क्रोध के आप।काम बिगाड़े... Read more
clicks 61 View   Vote 0 Like   4:21am 10 Feb 2021 #बासुदेव अग्रवाल
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(मुक्तक शैली की रचना)अर्थव्यवस्था चौपट कर दी, भ्रष्टाचारी सेठों ने।छीन निवाला दीन दुखी का, बड़ी तौंद की सेठों ने।केवल अपना ही घर भरते, घर खाली कर दूजों का।राज तंत्र को बस में कर के, सत्ता भोगी सेठों ने।।कच्चा पक्का खूब करे ये, लूट मचाई सेठों ने।काली खूब कमाई करके, भरी तिजौ... Read more
clicks 83 View   Vote 0 Like   4:15am 10 Feb 2021 #बासुदेव अग्रवाल
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बह्र:- 2122 2122 2122 212जब से अंदर और बाहर एक जैसे हो गये,तब से दुश्मन और प्रियवर एक जैसे हो गये।मन की पीड़ा आँख से झर झर के बहने जब लगी,फिर तो निर्झर और सागर एक जैसे हो गये।लूट हिंसा और चोरी, उस पे सीनाजोरी है,आजकल तो जानवर, नर एक जैसे हो गये।अर्थ के या शक्ति के या पद के फिर अभिमान में,आज... Read more
clicks 87 View   Vote 0 Like   5:18am 4 Feb 2021 #बासुदेव अग्रवाल
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बहर :- 122*3+ 12 (शक्ति छंद आधारित)(पदांत 'रोटियाँ', समांत 'एं')लगे ऐंठने आँत जब भूख से,क्षुधा शांत तब ये करें रोटियाँ।।लखे बाट सब ही विकल हो बड़े, तवे पे न जब तक पकें रोटियाँ।।तुम्हारे लिए पाप होतें सभी, तुम्हारी कमी ना सहन हो कभी।रहे म्लान मुख थाल में तुम न हो, सभी बात मन की कह... Read more
clicks 175 View   Vote 0 Like   3:06pm 21 Jan 2021 #बासुदेव अग्रवाल
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हाय अनाथआवास फुटपाथजाड़े की रात।**दीन लाचारशर्दी गर्मी की मारझेले अपार।**हाय गरीबजमाना ही रकीबखोटा नसीब।**तेरी गरीबीबड़ी बदनसीबीसदा करीबी।**लाचार दीनदुर्बल तन-मनकैसा जीवन?**दैन्य का जोरतपती लू सा घोरकहीं ना ठौर।**दीन की खुशीनित्य की एकादशीओढ़ी खामोशी।**सुविधा हीनदुख पर... Read more
clicks 96 View   Vote 0 Like   4:55am 16 Jan 2021 #हाइकु
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