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Blog: मंथन

Blogger: Meena Bhardwaj
                         शुक्ल पक्ष की चाँदनी में भीगी रातें..,जब होती हैंअपने पूरे निखार परतब... रात की रानी मिलकर रजनीगंधा के साथटांक दिया करती हैं उनकी खूबसूरती औरमादकता मेंचार चाँद ..उन पलों के आगेकुदरत का सारा का सारासौन्दर्यठगा ठगाऔरफीका फीक... Read more
clicks 47 View   Vote 0 Like   5:18pm 10 Jun 2021 #
Blogger: Meena Bhardwaj
बादल!सावन में अब की बरसो तो…लाना कुछ ऐसाजिससे हो इम्यूनिटी बूस्टजरूरत है उसकीमनु संतानों कोजो रख सकेउनके श्वसन को मजबूतचन्द्र देव!बड़े इठला रहे होयह ठसककिस काम की ?जब...सदियों से तुम्हारी प्रशंसा में  कसीदे पढ़ने वालों की  नींव... दरक रही है धीरे-धीरेसुनो ! ... Read more
clicks 8 View   Vote 0 Like   8:45am 21 May 2021 #
Blogger: Meena Bhardwaj
                 लबों को रहने दो खामोशकाफी है, आँखों की मुस्कुराहट ।बर्फ ही तो हैइस आँच से ,बह निकलेगी ।**हौंसला और जिजिविषा देन है तुम्हारी । विश्वास की डोर का छोर भी ,तुम्हीं से बंधा है ।जानती हूँ रात के आँचल के छोर से,यूं ही तो बंधी होती है ।उजली भोर के,स... Read more
clicks 14 View   Vote 0 Like   5:28pm 2 May 2021 #
Blogger: Meena Bhardwaj
                      लीक पर चलती पिपीलिका..एकता-अनुशासन औरसंगठन की प्रतीक हैआज हो या कल बुद्धिजीवी उनकीकर्मठता का लोहा मानते  हैंप्रकृति के चितेरे सुकुमार कवि सुमित्रानंदन पंत जी ने भी कहा है-"चींटी को देखा?वह सरल, विरल, काली रेखाचींटी है प्राणी सामा... Read more
clicks 33 View   Vote 0 Like   5:01am 18 Apr 2021 #
Blogger: Meena Bhardwaj
                       नाराज हैं मुझसेमेरी सबसे गहरी दोस्त किताबें..कल धूल झाड़ करीने से लगा रही थी तोमानो कर रहीं थीं शिकायत-माना 'कोरोना काल'हैएक साल से तुम परेशान हो..लहरें आ रहीं हैं - पहले पहली और अब दूसरीयह भी सच है किबाहर आना-जाना मना हैदूरी बनाये र... Read more
clicks 18 View   Vote 0 Like   3:18am 14 Apr 2021 #
Blogger: Meena Bhardwaj
        कई दिनों से...अक्षरों के ढेरी से तलाश रही हूँकुछ अनकहा सा..जिसमें भावों कीमज्जा का अभाव न होसंवेदनाओं केवितान में..प्राणों का वास होभूसे के ढेर से सुई की तरह बस..उन्हीं की खोज में हूँ ऐसे समय मेंसिमट रहा है मन कच्छप सदृशतृष्णा के अनन्त सागर सेनहीं ... Read more
clicks 26 View   Vote 0 Like   5:02am 4 Apr 2021 #
Blogger: Meena Bhardwaj
                     झरें होंगे चाँदनी मे , हरसिंगार... निकलेंगे अगर घर से, तो देख लेंगे । नीम की टहनी पर, झूलता सा चाँद.. मिला फिर से अवसर, तो देखने की सोच लेंगे। शूल से चुभें, और द्वेष से सने..आ गिरे सिर पर ,वो पल तो झेल लेंगे।जिन्दगी छोटी सी, और उलझन... Read more
clicks 93 View   Vote 0 Like   5:04am 30 Mar 2021 #
Blogger: Meena Bhardwaj
                     गहमागहमी.. बेतहाशा हताशा के दौर में ..मन की निराशाकिसी कलमकार के मन की..अंत:सलिला बन बहती हैकाग़ज और कलम के साथनहीं उकेरे जाते चंद अक्षर..एक संगतराश जैसे हाथ मिलते हैं दिलो-दिमाग के साथऔर अनगढ़ से भावों कोतराशते हैं ..अभिव्यक्त... Read more
clicks 75 View   Vote 0 Like   3:39am 5 Mar 2021 #
Blogger: Meena Bhardwaj
जिद्दी सा हो गया मनअब कहीं लगता ही नहींघर तो मेरा अपना है मगर अपना लगता नहींसारी सोचें बेमानी सी हैलफ्ज़ों में बयां होती कहाँ हैंकी बहुत कहने की कोशिशढंग कोई जँचता नहींदिल की जमीन परघर की नींव धरी हैनटखट सा कोई गोपालअब वहाँ हँसता नहींस्मृतियों की वीथियाँ भी हो रही... Read more
clicks 62 View   Vote 0 Like   5:01am 28 Feb 2021 #
Blogger: Meena Bhardwaj
                       नवनिर्माण की नींवऔर ऊसर सी जमीन परपूरी आब से इतरा रहे होकिसके प्रेम में हो गुलमोहरबड़े खिलखिला रहे होबिछड़े संगी साथीमन में खलिश तो रही होगीटूटी भावनाओं की किर्चेंतुम्हें चुभी जरूर होंगीबासंती बयार के जादू मेंबहे जा रहे होकिसके प्रेम ... Read more
clicks 38 View   Vote 0 Like   5:42am 24 Feb 2021 #
Blogger: Meena Bhardwaj
                           कभी अनजाने कभी पहचानने सांझ- सकारेदृग बाट निहारेमेरे मोहक अभिलाषित पल!आशा की बंदनवारेंमुक्त हृदय सेस्वागत मे तेरेबाँह पसारेमेरे मौन से मुखरित पल!कभी नीलकंठ बन मिलूं शुभ्र गगन में कभी राजहंस बन नीलम सी झील मेंमेरे झंकृत... Read more
clicks 60 View   Vote 0 Like   9:31am 18 Feb 2021 #
Blogger: Meena Bhardwaj
बहुत पुरानी एक कहानी ।ज्यों बहते दरिया का पानी ।।संदली सी हुईं फिज़ाएं ।उम्र की ऐसी रवानी ।।अक्सर उनका जिक्र सुना ।हर जगह पर मुँह जुबानी ।।दृग करते महफिल में बातें ।नादानी की एक निशानी  ।।वक्त ने फिर बदली करवट। नज़रें भी बन गई सयानी ।।***... Read more
clicks 63 View   Vote 0 Like   5:35pm 13 Feb 2021 #
Blogger: Meena Bhardwaj
                       उसने कहा था---मैं आत्मा हूँ उसकीमेरे से ही उसकी सम्पूर्णता हैमैं जीये जा रही हूँअपनी अपूर्णता के साथताकि…मैं उसकी सम्पूर्णता बनी रहूँ--- बाल्टी भर धूप ढकी रखी हैएक कोने में…अंधेरा घिर आए तोछिड़क लेना…रोशनी में...मन का आंगन हँस देगा---द... Read more
clicks 74 View   Vote 0 Like   6:10am 10 Feb 2021 #
Blogger: Meena Bhardwaj
                          सागर तू आज कैसे है मौन ।अंतस् भेद की गांठें खोल ।।अचलता नहीं प्रकृति तेरी ।चंचलता लहरों की चेरी ।।सोने की थाली सा सूरज ।तल की ओर सरकता है ।।कुंकुम तेरे अंचल में घोल ।देखो तो फिर दिन ढलता है ।।चाँदी सा झिलमिल वस्त्र ओढ़ ।रजनी पकड़े घूं... Read more
clicks 63 View   Vote 0 Like   1:30am 22 Jan 2021 #
Blogger: Meena Bhardwaj
एक अहसास..हवा के छुवन लियेस्वेटर के रेशों को चीर समा गया रूह मेंसिहरन सी भर करन्यूज़ में.. अभी-अभी पढ़ा-पहाड़ों पर बर्फ़ गिरी हैतभी मैं कहूँ ...नाक और अंगुलियाँ यूं सुन्न से क्यों है...छत पर हवाओं मेंघुली ठंडी धूप में नजर पसारी तो पायागेहूँ की बालियों पर भी आज…बरफ की ... Read more
clicks 65 View   Vote 0 Like   4:17am 15 Jan 2021 #
Blogger: Meena Bhardwaj
               रेशम के धागों सामन उलझाउलझन की गांठ पकड़अपना बन सुलझा दे कोई..जीवन  की हलचल मेंउठती नित नई तरंगों में कभी हाथ पकड़ जीने की राहदिखला दे  कोई...सीलन से भरी मन की देहरी स्वर्णिम सूरज सेले मुट्ठी भर धूपमन के आंगन मेंबिखरा दे कोई...***... Read more
clicks 67 View   Vote 0 Like   10:41am 10 Jan 2021 #
Blogger: Meena Bhardwaj
                     मंगल मोद मनाये कुछ हँस ले कुछ गाए नये साल में...भूलें जो दुःस्वप्न सरीखा थाजो भी था सब अपना थाआशा के दीप जलाएनये साल में..प्रकृति का खिला अंग-प्रत्यंगसृष्टि का दिखा अभिनव सा रंगबंद घरों में रह कर सीखाजीने का एक नया ढंग खुल जाएँ आंग... Read more
clicks 109 View   Vote 0 Like   7:07pm 29 Dec 2020 #
Blogger: Meena Bhardwaj
 आधी सी रात  में..धीमे से बादल उतरते ।मोती सी तुषार बूँदें..सरसों पर देखी बिखरते ।ऊन जैसा परस तेरा..सर्दियों के दिन हठीले ।चाय की वो चुस्कियाँ..शीत लहरों में ठिठुरते ।कहा भरे दिल से विदा...रोये फिर मुझ से बिछुड़ के । मैं तुम्हें कैसे  बताऊँ...दिन ये इतने कैसे बीते ।धूप क... Read more
clicks 105 View   Vote 0 Like   10:54am 24 Dec 2020 #
Blogger: Meena Bhardwaj
                    धीरे धीरे सांझ उतरी ,जीवन में गोधूलि बेला ।रीत जगत की चली आई  ,जीना चार दिन का खेला ।।हाथों में हैं नवल पाटल ,दृग संजोते नई आशा ।गा के सांध्य गीत कोई ,भरे मन में नव प्रत्याशा ।।कौन है  ऐसा जगत में ,जिसने ना एकांत झेला ।रीत जगत की चली आ रही ,जीना... Read more
clicks 81 View   Vote 0 Like   1:25pm 18 Dec 2020 #
Blogger: Meena Bhardwaj
उस पार बंधी हैलौकिक नैया  कौन खिवैयातम की चादर कर पार..भेद खोलना चाहती हैंथकन भरी  हैआँखों मेंबहुत दिन बीतेचैन से सोयेनींद भरे सागर में बावरी खोना चाहती हैं***... Read more
clicks 68 View   Vote 0 Like   5:23am 15 Dec 2020 #
Blogger: Meena Bhardwaj
                            मुस्कुराहट लबों पर, सजी रहने दीजिए ।ग़म की टीस दिल में, दबी रहने दीजिए ।। छलक उठी हैं ठेस से, अश्रु की कुछ बूंद ।दृग पटल पर ज़रा सी,नमी रहने दीजिए राय हो न पाए अगर ,कहीं पर मुक्कमल।मिलने-जुलने की रस्म,बनी रहने दीजिए ।।बिगड़ी हुई बात है,... Read more
clicks 145 View   Vote 0 Like   2:47am 9 Dec 2020 #
Blogger: Meena Bhardwaj
                          गोधूलि की...दहलीज़ परकभी हाँ…तो कभी ना में उलझा …घड़ी के पेंडुलम सास्थिरता..की चाह में झूलतास्थितप्रज्ञ मन…हक के साथबोनस मेंजो मिल रहा हैउसकी..चाह तो नहीं रखतावैसे ही…मन बेचारानिर्लिप्त जीव हैतुम्हारी सौगातेंजो भी है...सब की सबसिर ... Read more
clicks 98 View   Vote 0 Like   4:20pm 4 Dec 2020 #
Blogger: Meena Bhardwaj
गोधूलि संग हुआ अंधेरातारों ने  जादू बिखेराचाँदनी को साथ ले करनभ मंडल में चंद्र चितेराविहग की टहकार मध्यमटहनियों के मध्य बसेरानीड़ की रक्षा में व्याकुल आए ना कोई लुटेरा रोज के चुग्गे की  चिन्ताकब होगा सुख का सवेरा***【चित्र~गूगल से साभार】... Read more
clicks 78 View   Vote 0 Like   7:34pm 26 Nov 2020 #
Blogger: Meena Bhardwaj
                          【 चित्र-गूगल से साभार 】अनुबंध है प्रेम..प्राण से प्राण के मध्यब्रह्माण्ड सा असीमितबंधनमुक्तमगर फिर भी..बंधनों में ही पल्लवितअसंख्य परिभाषाओं से अंलकृत..मगर समय के साथ लुप्त प्रजाति कीवस्तु जैसा हो गया हैअसीम प्रगाढ़ता ही है ... Read more
clicks 71 View   Vote 0 Like   7:51am 17 Nov 2020 #
Blogger: Meena Bhardwaj
                           नये अर्थ दे करदर्द...जिंदगी को मांजता हैअंधेरों से डर करभागती जिंदगी कीअंगुली थाम..ला खड़ा करता हैधूप-छाँव की आँख-मिचौली केआँगन में...वक्त के साथजड़ पड़ीसंवेदनाओं का कोई मोल नहीं होताबस...नीम बेहोशी मेंअनीस्थिसिया सूंघे मरीज सी... Read more
clicks 74 View   Vote 0 Like   1:12pm 7 Nov 2020 #
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