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Blog: स्वप्न मेरे

Blogger: दिगम्बर नासवा
उम्र तारी है दरो दीवार पर.खाँसता रहता है बिस्तर रात भर. जो मिला, मिल तो गया, बस खा लिया,अब नहीं होती है हमसे न-नुकर.  सुन चहल-कदमी गुज़रती उम्र की,वक़्त की कुछ मान कर अब तो सुधर.  रात के लम्हे गुज़रते ही नहीं,दिन गुज़र जाता है खुद से बात कर. सोचता कोई तो होगा,है वहम,कौन करत... Read more
clicks 21 View   Vote 0 Like   6:30am 15 Sep 2021 #स्वप्नमेरे
Blogger: दिगम्बर नासवा
किसी हसीन के जूड़े में सज रहा होता.खिला गुलाब कहीं पास जो पड़ा होता. किसी की याद में फिर झूमता उठा होता,किसी के प्रेम का प्याला जो गर पिया होता. यकीन मानिए वो सामने खड़ा होता,वो इक गुनाह जो हमने कहीं किया होता. हर एक हाल में तन के खड़ा हुआ होता,खुद अपने आप से मिलता कभी लड़ा ह... Read more
clicks 43 View   Vote 0 Like   6:25am 7 Sep 2021 #Hindi Gazal
Blogger: दिगम्बर नासवा
साहिल की भीगी रेत से लहरों की गुफ़्तगू.सुन कर भी कौन सुनता है बहरों की गुफ़्तगू.कुछ सब्ज पेड़ सुन के उदासी में खो गए,खेतों के बीच सूखती नहरों की गुफ़्तगू.अब आफ़ताब का भी निकलना मुहाल है,इन बादलों से ... Read more
clicks 21 View   Vote 0 Like   2:14pm 30 Aug 2021 #गज़ल
Blogger: दिगम्बर नासवा
न महफ़िल न किस्से न बातों ने खोले.सभी राज़ उनकी निगाहों ने खोले. शहर तीरगी के मशालों ने खोले,कई राज़ मिल के सितारों ने खोले. मुहर एक दिन सब लगा देंगें इस पर,तरक्की के रस्ते किताबों ने खोले. रहस्यों का खुलना, मेरा मानना है,लगातार होते सवालों ने खोले. अदा है के मासूमियत,क... Read more
clicks 35 View   Vote 0 Like   5:46am 24 Aug 2021 #Hindi Gazal
Blogger: दिगम्बर नासवा
सात घोड़ों में जुता सूरज सुबह आता रहा.धूप का भर भर कसोरा सर पे बरसाता रहा.काग़ज़ी फूलों पे तितली उड़ रही इस दौर में,और भँवरा भी कमल से दूर मंडराता रहा.हम सफ़र अपने बदल कर वो तो बस चलते रहे,और मैं उनकी डगर में फूल बिखराता रहा.एक दिन काँटा चुभा पगडंडियों में हुस्न की,ज़िन्दग... Read more
clicks 153 View   Vote 0 Like   4:49pm 7 Aug 2021 #सूरज
Blogger: दिगम्बर नासवा
अब लगी, तब ये लगी, लग ही गई लत तेरी Iकब हुई, कैसे हुई, हो गई आदत तेरी I ख़त किताबों में जो गुम-नाम तेरे मिलते हैं,इश्क़ बोलूँ के इसे कह दूँ शरारत तेरी I तुम जो अक्सर ही सुड़कती हो मेरे प्याले से,चाय की लत न कहूँ क्या कहूँ चाहत तेरी I तुम कहीं मेरी खिंचाई तो नहीं करती हो,एक अनस... Read more
clicks 36 View   Vote 0 Like   3:01pm 26 Jul 2021 #मुहब्बत
Blogger: दिगम्बर नासवा
देख कर तुमको जहाँ में और कुछ भाया नहीं.कैसे कह दूँ ज़िन्दगी में हमने कुछ पाया नहीं. सोच लो तानोगे छतरी या तुम्हे है भीगना,आसमाँ पे प्रेम का बादल अभी छाया नहीं. प्रेम की पग-डंडियों पर पाँव रखना सोच कर,  लौट कर इस राह से वापस कोई आया नहीं. पत्थरों से दिल लगाने का हुनर भ... Read more
clicks 63 View   Vote 0 Like   4:11pm 11 Jun 2021 #स्वप्नमेरे
Blogger: दिगम्बर नासवा
इक पुरानी याद दिल से मुद्दतों लिपटी रही.घर, मेरा आँगन, गली, बस्ती मेरी महकी रही. कुछ उजाले शाम होते ही लिपटने आ गए,रात भर ये रात छज्जे पर मेरे अटकी रही. लौट कर आये नहीं कुछ पैर आँगन में मेरे,इक उदासी घर के पीपल से मेरे लटकी रही. उनकी आँखों के इशारे पर सभी मोहरे हिले,जीत क... Read more
clicks 167 View   Vote 0 Like   10:23am 3 Jun 2021 #स्वप्नमेरे
Blogger: दिगम्बर नासवा
घुमड़ते बादलों को प्रेम का कातिब बना देना.सुलगती शाम के मंज़र को गजलों में बता देना. बदल जाएगा मौसम धूप में बरसात आएगी,मिलन के चार लम्हे जिंदगी के गुनगुना देना. बुराई ही नहीं अच्छाई भी होती है दुनिया में,बुरा जो ढूंढते हर वक़्त उनको आईना देना. तलाशी दे तो दूं दिल की तुम... Read more
clicks 54 View   Vote 0 Like   6:37am 26 May 2021 #बादल
Blogger: दिगम्बर नासवा
जेबों में चराग़ों को अपने ले के निकलना.मुमकिन है के थम जाए आज रात का ढलना. है गाँव उदासी का आस-पास संभालना.हो पास तेरे कह-कहों का शोर तो चलना. मासूम पतंगों की ज़िन्दगी से न खेलो,हर बार तो अच्छा नहीं मशाल का जलना. कश्ती को चलाने में होंसला है ज़रूरी,मंज़ूर नहीं हम को साहिलो... Read more
clicks 152 View   Vote 0 Like   12:43pm 11 May 2021 #स्वप्नमेरे
Blogger: दिगम्बर नासवा
लुप्त हो जाते हें जब इस रात के बोझिल पहर.मंदिरों की घंटियों के साथ आती है सहर.शाम की लाली है या फिर श्याम की लीला कोई,गेरुए से वस्त्र ओढ़े लग रहा है ये शहर. पूर्णिमा का चाँद हो के हो अमावस की निशा,प्रेम के सागर में उठती है निरंतर इक लहर. एक पल पर्दा उठा, नज़रें मिलीं, उफ़ क्या... Read more
clicks 92 View   Vote 0 Like   7:21am 4 May 2021 #शिव
Blogger: दिगम्बर नासवा
पाँव बादल पे उसी रोज़ पड़ गए होते.पीठ पर हम जो परिन्दों के चढ़ गए होते. जिस्म पत्थर है निकल जाता आग का दरिया,एक पत्थर से कभी हम रगड़ गए होते. ढूँढ़ते लोग किसी फिल्म की कहानी में,घर से बचपन में कभी हम बिछड़ गए होते. फिर से उम्मीद नई एक बंध गई होती,  वक़्त पे डाल से पत्ते जो झड़ गए ... Read more
clicks 67 View   Vote 0 Like   10:45am 20 Apr 2021 #स्वप्नमेरे
Blogger: दिगम्बर नासवा
ले कर गुलाब रोज़ ही आएँ … मुझे न दें.गैरों का साथ यूँ ही निभाएँ … मुझे न दें. गम ज़िन्दगी में और भी हैं इश्क़ के सिवा,कह दो की बार बार सदाएँ … मुझे न दें. इसको खता कहें के कहें इक नई अदा,हुस्ने-बहार रोज़ लुटाएँ … मुझे न दें. सुख चैन से कटें जो कटें जिंदगी के दिन,लम्बी हो ज़िन्दग... Read more
clicks 229 View   Vote 0 Like   3:47pm 7 Apr 2021 #स्वप्नमेरे
Blogger: दिगम्बर नासवा
ये सोच-सोच के हैरान सी हैं दीवारेंघरों के साथ ही दिल में खिची हैं दीवारें लगे जो जोर से धक्केगिरी हैं दीवारेंकदम-कदम जो चले खुद हटी हैं दीवारें सभी ने मिल के ये सोचा तो कामयाबी है जहाँ है सत्य वहीं पर झुकी हैं दीवारें इन्हें तो तोड़ ही देना अभी तो हैं कच्ची   &nbs... Read more
clicks 87 View   Vote 0 Like   8:19am 31 Mar 2021 #स्वप्नमेरे
Blogger: दिगम्बर नासवा
ये सोच-सोच के हैरान सी हैं दीवारेंघरों के साथ ही दिल में खिची हैं दीवारें लगे जो जोर से धक्केगिरी हैं दीवारेंकदम-कदम जो चले खुद हटी हैं दीवारें सभी ने मिल के ये सोचा तो कामयाबी है जहाँ है सत्य वहीं पर झुकी हैं दीवारें इन्हें तो तोड़ ही देना अभी तो हैं कच्ची   &nbs... Read more
clicks 70 View   Vote 0 Like   8:19am 31 Mar 2021 #स्वप्नमेरे
Blogger: दिगम्बर नासवा
पाँव दौड़े,महके रिब्बन, चुन्नी लहराई, गई.पलटी, फिर पलटी, दबा कर होंठ शरमाई, गई. खुल गई थी एक खिड़की कुछ हवा के जोर से,दो-पहर की धूप सरकी,पसरी सुस्ताई,गई. आसमां का चाँद,मैं भी,रूबरू तुझसे हुए,टकटकी सी बंध गई,चिलमन जो सरकाई,गई. यक-ब-यक तुम सा ही गुज़रा,तुम नहीं तो कौन था,दफ-अतन ऐ... Read more
clicks 79 View   Vote 0 Like   1:15pm 10 Mar 2021 #मद्धम_मद्धम
Blogger: दिगम्बर नासवा
लोग तो चले गए मगर पते रहे.याद के बुझे से तार छेड़ते रहे.   जल गया मकान हाथ सेकते रहे.सब तमाशबीन बन के देखते रहे. इस तरफ तो कर दिया इलाज़ दर्द का,और घाव उस तरफ कुरेदते रहे.  फर्श पे गिरे हैं अर्श से जो झूठ के,ख़्वाब इतने साल हमें बेचते रहे. हार तय थी दिल नहीं था मानता मग... Read more
clicks 96 View   Vote 0 Like   10:12am 24 Feb 2021 #दिगम्बर_की_ग़ज़लें
Blogger: दिगम्बर नासवा
गम न हो गम ख़ुशी ख़ुशी ना हो. रब करे ऐसी ज़िन्दगी ना हो. रेत पर लिख दिया तुझे उस दिन,ख्वाहिशों की वहाँ नदी ना हो. चुप से आँसू हँसी में क्यों छलके,मुसकराहट ये खोखली ना हो. नींद कमबख्त दूर है बैठी,रात पहलू में जागती ना हो. खुशबुओं से महक उठा मौसम,तू कहीं पास ही खड़ी ना हो.&nb... Read more
clicks 89 View   Vote 0 Like   7:34am 18 Feb 2021 #स्वप्नमेरे
Blogger: दिगम्बर नासवा
आपकागमआपकीरुस्वाइयाँलेजाऊँगा.देखते ही देखतेपरछाइयाँलेजाऊंगा . आपनेमुझकोकभीमानानहींअपनामगर,ज़िन्दगीसेआपकीकठिनाइयाँलेजाऊँगा. हाथसेछूकरकभीमहसूसतोकरलोहमें, आपकेसरकीकसमतन्हाइयाँलेजाऊँगा. आपकीमहफ़िलमेंआकरआपकेपहलूसेमें, शोखनज़रोंसेसभीअमराइयाँल... Read more
clicks 147 View   Vote 0 Like   6:37pm 11 Feb 2021 #स्वप्नमेरे
Blogger: दिगम्बर नासवा
तुमझुकोगेनहींबातहोगीनही.ज़िन्दगीभरमुलाक़ातहोगीनही. थामलोहाथकिस्मतसेमिलताहैये,उम्रभरफिरयेसौगातहोगीनही. आजमौकामिलाहैतोदामनभरो,फिरयेखुशियोंकीबरातहोगीनहीं. धूपनेहैबनायाअँधेरोंमेंघर,देखनाअबकभीरातहोगीनही. दिलमेंनफरतकेदीपकजोजलतेरहे, मीठेपानीकी... Read more
clicks 75 View   Vote 0 Like   4:02pm 2 Feb 2021 #स्वप्नमेरे
Blogger: दिगम्बर नासवा
गिर गए हैं और कुछ खड़े हुए.पेड़ आँधियों में हैं डटे हुए. बंट रहा है मुफ़्त में ही कुछ कहीं,आदमी पे आदमी चढ़े हुए. दूध तो नसीब में नहीं है अब,हम तो छाछ से भी हैं जले हुए. रोज एक इम्तिहान है नया,हम भी इस तरह से कुछ बड़े हुए. बादलों का साथ दे रही हवा,सामने हैं सूर्य के अड़े हुए. च... Read more
clicks 129 View   Vote 0 Like   3:46pm 27 Jan 2021 #सामाजिक
Blogger: दिगम्बर नासवा
पीठ तेरी नज्र से जो जल गई.ज़िन्दगी तब से ही हमको छल गई. रौशनी आई सुबह ने कह दिया,कुफ्र की जो रात थी वो ढल गई. मुस्कुराए हम भी वो भी हंस दिए,मोम की दीवार थी पिघल गई. रात भर कश्ती संभाले थी लहर,दिन में अपना रास्ता बदल गई. इस तरफ कूआं तो खाई उस तरफ,बच के किस्मत बीच से निकल गई.&nb... Read more
clicks 202 View   Vote 0 Like   9:29am 18 Jan 2021 #रौशनी
Blogger: दिगम्बर नासवा
सच के लिए हर किसी से लड़ गया.नाम का झन्डा उसी का गढ़ गया. ठीक है मिलती रहे जो दूर से,धूप में ज्यादा टिका जो सड़ गया. हाथ बढ़ाया न शब्द दो कहे, मार के ठोकर उसे वो बढ़ गया. प्रेम के नगमों से थकेगा नहीं,आप का जादू कभी जो चढ़ गया. होश ठिकाने पे आ गए सभी,वक़्त तमाचा कभी जो जड़ गया. बा... Read more
clicks 103 View   Vote 0 Like   2:50pm 6 Jan 2021 #सामजिक ग़ज़ल
Blogger: दिगम्बर नासवा
२०२० कई खट्टी-मीठी यादें ले के बीत गया ... जीवन जीने का नया अंदाज़ सिखा गया ... आप सब सावधान रहे, संयम बरतें ... २०२१ का स्वागत करें ... मेरी बहुत बहुत शुभकामनायें सभी को ... हमारे प्यार की वो दास्ताँ बताते हैंमेरी दराज़ के कुछ ख़त जो गुनगुनाते हैं  चलो के मिल के करें हम भी अपने दि... Read more
clicks 124 View   Vote 0 Like   12:39pm 29 Dec 2020 #स्वप्न मेरे
Blogger: दिगम्बर नासवा
सागर की बाज़ुओं में उतरती हुई मिली.तन्हा उदास शाम जो रूठी हुई मिली. फिर से किसी की याद के लोबान जल उठे ,बरसों पुरानी याद जो भूली हुई मिली. बिखरा जो काँच काँच तेरा अक्स छा गया ,  तस्वीर अपने हाथ जो टूटी हुई मिली. कितने दिनों के बाद लगा लौटना है अब ,बुग्नी में ज़िन्... Read more
clicks 192 View   Vote 0 Like   3:30pm 22 Dec 2020 #गज़ल
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