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Blog: स्वप्न मेरे

Blogger: दिगम्बर नासवा
जेबों में चराग़ों को अपने ले के निकलना.मुमकिन है के थम जाए आज रात का ढलना. है गाँव उदासी का आस-पास संभालना.हो पास तेरे कह-कहों का शोर तो चलना. मासूम पतंगों की ज़िन्दगी से न खेलो,हर बार तो अच्छा नहीं मशाल का जलना. कश्ती को चलाने में होंसला है ज़रूरी,मंज़ूर नहीं हम को साहिलो... Read more
clicks 18 View   Vote 0 Like   12:43pm 11 May 2021 #स्वप्नमेरे
Blogger: दिगम्बर नासवा
लुप्त हो जाते हें जब इस रात के बोझिल पहर.मंदिरों की घंटियों के साथ आती है सहर.शाम की लाली है या फिर श्याम की लीला कोई,गेरुए से वस्त्र ओढ़े लग रहा है ये शहर. पूर्णिमा का चाँद हो के हो अमावस की निशा,प्रेम के सागर में उठती है निरंतर इक लहर. एक पल पर्दा उठा, नज़रें मिलीं, उफ़ क्या... Read more
clicks 31 View   Vote 0 Like   7:21am 4 May 2021 #शिव
Blogger: दिगम्बर नासवा
पाँव बादल पे उसी रोज़ पड़ गए होते.पीठ पर हम जो परिन्दों के चढ़ गए होते. जिस्म पत्थर है निकल जाता आग का दरिया,एक पत्थर से कभी हम रगड़ गए होते. ढूँढ़ते लोग किसी फिल्म की कहानी में,घर से बचपन में कभी हम बिछड़ गए होते. फिर से उम्मीद नई एक बंध गई होती,  वक़्त पे डाल से पत्ते जो झड़ गए ... Read more
clicks 24 View   Vote 0 Like   10:45am 20 Apr 2021 #स्वप्नमेरे
Blogger: दिगम्बर नासवा
ले कर गुलाब रोज़ ही आएँ … मुझे न दें.गैरों का साथ यूँ ही निभाएँ … मुझे न दें. गम ज़िन्दगी में और भी हैं इश्क़ के सिवा,कह दो की बार बार सदाएँ … मुझे न दें. इसको खता कहें के कहें इक नई अदा,हुस्ने-बहार रोज़ लुटाएँ … मुझे न दें. सुख चैन से कटें जो कटें जिंदगी के दिन,लम्बी हो ज़िन्दग... Read more
clicks 166 View   Vote 0 Like   3:47pm 7 Apr 2021 #स्वप्नमेरे
Blogger: दिगम्बर नासवा
ये सोच-सोच के हैरान सी हैं दीवारेंघरों के साथ ही दिल में खिची हैं दीवारें लगे जो जोर से धक्केगिरी हैं दीवारेंकदम-कदम जो चले खुद हटी हैं दीवारें सभी ने मिल के ये सोचा तो कामयाबी है जहाँ है सत्य वहीं पर झुकी हैं दीवारें इन्हें तो तोड़ ही देना अभी तो हैं कच्ची   &nbs... Read more
clicks 49 View   Vote 0 Like   8:19am 31 Mar 2021 #स्वप्नमेरे
Blogger: दिगम्बर नासवा
ये सोच-सोच के हैरान सी हैं दीवारेंघरों के साथ ही दिल में खिची हैं दीवारें लगे जो जोर से धक्केगिरी हैं दीवारेंकदम-कदम जो चले खुद हटी हैं दीवारें सभी ने मिल के ये सोचा तो कामयाबी है जहाँ है सत्य वहीं पर झुकी हैं दीवारें इन्हें तो तोड़ ही देना अभी तो हैं कच्ची   &nbs... Read more
clicks 38 View   Vote 0 Like   8:19am 31 Mar 2021 #स्वप्नमेरे
Blogger: दिगम्बर नासवा
पाँव दौड़े,महके रिब्बन, चुन्नी लहराई, गई.पलटी, फिर पलटी, दबा कर होंठ शरमाई, गई. खुल गई थी एक खिड़की कुछ हवा के जोर से,दो-पहर की धूप सरकी,पसरी सुस्ताई,गई. आसमां का चाँद,मैं भी,रूबरू तुझसे हुए,टकटकी सी बंध गई,चिलमन जो सरकाई,गई. यक-ब-यक तुम सा ही गुज़रा,तुम नहीं तो कौन था,दफ-अतन ऐ... Read more
clicks 49 View   Vote 0 Like   1:15pm 10 Mar 2021 #मद्धम_मद्धम
Blogger: दिगम्बर नासवा
लोग तो चले गए मगर पते रहे.याद के बुझे से तार छेड़ते रहे.   जल गया मकान हाथ सेकते रहे.सब तमाशबीन बन के देखते रहे. इस तरफ तो कर दिया इलाज़ दर्द का,और घाव उस तरफ कुरेदते रहे.  फर्श पे गिरे हैं अर्श से जो झूठ के,ख़्वाब इतने साल हमें बेचते रहे. हार तय थी दिल नहीं था मानता मग... Read more
clicks 60 View   Vote 0 Like   10:12am 24 Feb 2021 #दिगम्बर_की_ग़ज़लें
Blogger: दिगम्बर नासवा
गम न हो गम ख़ुशी ख़ुशी ना हो. रब करे ऐसी ज़िन्दगी ना हो. रेत पर लिख दिया तुझे उस दिन,ख्वाहिशों की वहाँ नदी ना हो. चुप से आँसू हँसी में क्यों छलके,मुसकराहट ये खोखली ना हो. नींद कमबख्त दूर है बैठी,रात पहलू में जागती ना हो. खुशबुओं से महक उठा मौसम,तू कहीं पास ही खड़ी ना हो.&nb... Read more
clicks 51 View   Vote 0 Like   7:34am 18 Feb 2021 #स्वप्नमेरे
Blogger: दिगम्बर नासवा
आपकागमआपकीरुस्वाइयाँलेजाऊँगा.देखते ही देखतेपरछाइयाँलेजाऊंगा . आपनेमुझकोकभीमानानहींअपनामगर,ज़िन्दगीसेआपकीकठिनाइयाँलेजाऊँगा. हाथसेछूकरकभीमहसूसतोकरलोहमें, आपकेसरकीकसमतन्हाइयाँलेजाऊँगा. आपकीमहफ़िलमेंआकरआपकेपहलूसेमें, शोखनज़रोंसेसभीअमराइयाँल... Read more
clicks 104 View   Vote 0 Like   6:37pm 11 Feb 2021 #स्वप्नमेरे
Blogger: दिगम्बर नासवा
तुमझुकोगेनहींबातहोगीनही.ज़िन्दगीभरमुलाक़ातहोगीनही. थामलोहाथकिस्मतसेमिलताहैये,उम्रभरफिरयेसौगातहोगीनही. आजमौकामिलाहैतोदामनभरो,फिरयेखुशियोंकीबरातहोगीनहीं. धूपनेहैबनायाअँधेरोंमेंघर,देखनाअबकभीरातहोगीनही. दिलमेंनफरतकेदीपकजोजलतेरहे, मीठेपानीकी... Read more
clicks 47 View   Vote 0 Like   4:02pm 2 Feb 2021 #स्वप्नमेरे
Blogger: दिगम्बर नासवा
गिर गए हैं और कुछ खड़े हुए.पेड़ आँधियों में हैं डटे हुए. बंट रहा है मुफ़्त में ही कुछ कहीं,आदमी पे आदमी चढ़े हुए. दूध तो नसीब में नहीं है अब,हम तो छाछ से भी हैं जले हुए. रोज एक इम्तिहान है नया,हम भी इस तरह से कुछ बड़े हुए. बादलों का साथ दे रही हवा,सामने हैं सूर्य के अड़े हुए. च... Read more
clicks 96 View   Vote 0 Like   3:46pm 27 Jan 2021 #सामाजिक
Blogger: दिगम्बर नासवा
पीठ तेरी नज्र से जो जल गई.ज़िन्दगी तब से ही हमको छल गई. रौशनी आई सुबह ने कह दिया,कुफ्र की जो रात थी वो ढल गई. मुस्कुराए हम भी वो भी हंस दिए,मोम की दीवार थी पिघल गई. रात भर कश्ती संभाले थी लहर,दिन में अपना रास्ता बदल गई. इस तरफ कूआं तो खाई उस तरफ,बच के किस्मत बीच से निकल गई.&nb... Read more
clicks 168 View   Vote 0 Like   9:29am 18 Jan 2021 #रौशनी
Blogger: दिगम्बर नासवा
सच के लिए हर किसी से लड़ गया.नाम का झन्डा उसी का गढ़ गया. ठीक है मिलती रहे जो दूर से,धूप में ज्यादा टिका जो सड़ गया. हाथ बढ़ाया न शब्द दो कहे, मार के ठोकर उसे वो बढ़ गया. प्रेम के नगमों से थकेगा नहीं,आप का जादू कभी जो चढ़ गया. होश ठिकाने पे आ गए सभी,वक़्त तमाचा कभी जो जड़ गया. बा... Read more
clicks 62 View   Vote 0 Like   2:50pm 6 Jan 2021 #सामजिक ग़ज़ल
Blogger: दिगम्बर नासवा
२०२० कई खट्टी-मीठी यादें ले के बीत गया ... जीवन जीने का नया अंदाज़ सिखा गया ... आप सब सावधान रहे, संयम बरतें ... २०२१ का स्वागत करें ... मेरी बहुत बहुत शुभकामनायें सभी को ... हमारे प्यार की वो दास्ताँ बताते हैंमेरी दराज़ के कुछ ख़त जो गुनगुनाते हैं  चलो के मिल के करें हम भी अपने दि... Read more
clicks 81 View   Vote 0 Like   12:39pm 29 Dec 2020 #स्वप्न मेरे
Blogger: दिगम्बर नासवा
सागर की बाज़ुओं में उतरती हुई मिली.तन्हा उदास शाम जो रूठी हुई मिली. फिर से किसी की याद के लोबान जल उठे ,बरसों पुरानी याद जो भूली हुई मिली. बिखरा जो काँच काँच तेरा अक्स छा गया ,  तस्वीर अपने हाथ जो टूटी हुई मिली. कितने दिनों के बाद लगा लौटना है अब ,बुग्नी में ज़िन्... Read more
clicks 152 View   Vote 0 Like   3:30pm 22 Dec 2020 #गज़ल
Blogger: दिगम्बर नासवा
कोई भी बात उकसाती नहीं हैन जाने क्यों वो इठलाती नहीं है कभी दौड़े थे जिन पगडंडियों परहमें किस्मत वहाँ लाती नहीं हैमुझे लौटा दिया सामान साराहै इक “टैडी” जो लौटाती नहीं है कहाँ अब दम रहा इन बाजुओं मेंकमर तेरी भी बलखाती नहीं है नहीं छुपती है च्यूंटी मार कर अबदबा कर ह... Read more
clicks 124 View   Vote 0 Like   7:30pm 8 Dec 2020 #स्वप्न मेरे
Blogger: दिगम्बर नासवा
नया ही चाहिए कोई बहाना.तभी फिर मानता है ये ज़माना. परिंदों का हैपहला हक़ गगन पर,हवा में देख कर गोली चलाना. दरो दीवार खिड़की बन्द कर के,किसी के राज़ से पर्दा उठाना. सृजन होगा वहाँ हर हल में बस,जहाँ मिट्टी वहां गुठली गिराना. यहाँ आँसू के कुछ कतरे गिरे थे,यहीं होगा मुहब्बत ... Read more
clicks 94 View   Vote 0 Like   4:10pm 1 Dec 2020 #बहाना
Blogger: दिगम्बर नासवा
बहला रहे हो झूठ से पगले नहीं हैं हम.बोलो न बात जोर से बहरे नहीं हैं हम. हमसे जो खेलना हो संभल कर ही खेलना,शतरंज पे फरेब के मोहरे नहीं हैं हम. सोने सी लग रही हैं ये सरसों की बालियाँ,तो क्या है जो किसान सुनहरे नहीं हैं हम. हरबार बे-वजह न घसीटो यहाँ वहाँ,   मसरूफियत है, ... Read more
clicks 88 View   Vote 0 Like   4:25pm 23 Nov 2020 #स्वप्नमेरे
Blogger: दिगम्बर नासवा
गुलाम बन के रहोगे तो कुछ नहीं होगानिज़ाम से जो डरोगे तो कुछ नहीं होगा तमाम शहर के जुगनू हैं कैद में उनकी  चराग़ छीन भी लोगे तो कुछ नहीं होगा समूचा तंत्र है बहरा, सभी हैं जन गूंगेजो आफताब भी होगे तो कुछ नहीं होगा बदल सको तो बदल दो जहाँ की तुम किस्मतजो भीड़ बन के चलोगे ... Read more
clicks 91 View   Vote 0 Like   7:39pm 9 Nov 2020 #बहरा
Blogger: दिगम्बर नासवा
आस्तीनों में छुपी तलवार हैऔर कहता है के मेरा यार है गर्मियों की छुट्टियाँ भी खूब हैंरोज़ बच्चों के लिए इतवार है सच परोसा चासनी के झूठ मेंछप गया तो कह रहा अख़बार है चैन से जीना कहाँ आसान जबचैन से मरना यहाँ दुश्वार है दर्द में तो देख के राज़ी नहींयूँ जताते हैं की मुझ... Read more
clicks 87 View   Vote 0 Like   1:38pm 27 Oct 2020 #परोसा
Blogger: दिगम्बर नासवा
 मुझे इक आईना ऐसा दिखा दे.हकीकत जो मेरी मुझको बता दे. नदी हूँ हद में रहना सीख लूंगी,जुदा सागर से तू मुझको करा दे. में गीली रेत का कच्चा घरोंदा,कहो लहरों से अब मुझको मिटा दे. बढ़ा के हाथ कोशिश कर रहा हूँ,ज़रा सा आसमाँ नीचे झुका दे. में तारा हूँ चमक बाकी रहेगी,अंधेरों मे... Read more
clicks 96 View   Vote 0 Like   4:29pm 19 Oct 2020 #लहर
Blogger: दिगम्बर नासवा
 ज़ख्म अपनेछुपाएरखिएगामहफ़िलोंकोसजाएरखिएगा दुश्मनीहैयेमानताहूँपर  सिलसिलातोबनाएरखिएगा कुछमुसाफिरज़रूरलौटेंगेएकदीपकजलाएरखिएगा कलकीपीड़ीयहाँसेगुजरेगीआसमाँतोउठाएरखिएगा रूठजाएँयेउनकीहै मर्ज़ीआपपलकेंबिछाएरखिएगा कामआजाएँकबयेक्याजानेंआंसु... Read more
clicks 103 View   Vote 0 Like   12:30am 12 Oct 2020 #पीढ़ी
Blogger: दिगम्बर नासवा
ग़रनिभानेकीचलेबातमनामतकरना.दिलकेरिश्तोंमेंकभीजोड़-घटामतकरना. रातआएगीतोइनकाहीसहाराहोगा,भूलसेदिनमेंचराग़ोंसेदगामतकरना.  मानावादीमेंअभीधूपकीसरगोशीहै,तुमरज़ाईकोमगरख़ुदसेजुदामतकरना. कुछगुनाहोंकाहमेंहक़मिलाहैकुदरतसे,बातअगरजानभीजाओतोगिलामतकरना. द... Read more
clicks 91 View   Vote 0 Like   7:36pm 4 Oct 2020 #रिश्ते
Blogger: दिगम्बर नासवा
आज फिर २५ सितम्बर है ... सोचता हूँ, तू आज होती तो पता नहीं कितनी कतरनें अखबार की काट-काट के अपने पास रक्खी होतीं ... सब को फ़ोन कर-कर के सलाह देती रहती ये कर, वो कर ... ये न कर, वो न कर, बचाव रख करोना से ... सच कहूँ तो अब ये बातें बहुत याद आती हैं ... शायद पिछले आठ सालों में ... मैं भी तो बूढा हो रहा हूँ ... और फिर ... बच्चा तो तभी रह पाता ... Read more
clicks 157 View   Vote 0 Like   4:56am 25 Sep 2020 #Poem
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