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Blog: स्वप्न मेरे

Blogger: दिगम्बर नासवा
बहला रहे हो झूठ से पगले नहीं हैं हम.बोलो न बात जोर से बहरे नहीं हैं हम. हमसे जो खेलना हो संभल कर ही खेलना,शतरंज पे फरेब के मोहरे नहीं हैं हम. सोने सी लग रही हैं ये सरसों की बालियाँ,तो क्या है जो किसान सुनहरे नहीं हैं हम. हरबार बे-वजह न घसीटो यहाँ वहाँ,   मसरूफियत है, ... Read more
clicks 7 View   Vote 0 Like   4:25pm 23 Nov 2020 #स्वप्नमेरे
Blogger: दिगम्बर नासवा
गुलाम बन के रहोगे तो कुछ नहीं होगानिज़ाम से जो डरोगे तो कुछ नहीं होगा तमाम शहर के जुगनू हैं कैद में उनकी  चराग़ छीन भी लोगे तो कुछ नहीं होगा समूचा तंत्र है बहरा, सभी हैं जन गूंगेजो आफताब भी होगे तो कुछ नहीं होगा बदल सको तो बदल दो जहाँ की तुम किस्मतजो भीड़ बन के चलोगे ... Read more
clicks 7 View   Vote 0 Like   7:39pm 9 Nov 2020 #बहरा
Blogger: दिगम्बर नासवा
आस्तीनों में छुपी तलवार हैऔर कहता है के मेरा यार है गर्मियों की छुट्टियाँ भी खूब हैंरोज़ बच्चों के लिए इतवार है सच परोसा चासनी के झूठ मेंछप गया तो कह रहा अख़बार है चैन से जीना कहाँ आसान जबचैन से मरना यहाँ दुश्वार है दर्द में तो देख के राज़ी नहींयूँ जताते हैं की मुझ... Read more
clicks 11 View   Vote 0 Like   1:38pm 27 Oct 2020 #परोसा
Blogger: दिगम्बर नासवा
 मुझे इक आईना ऐसा दिखा दे.हकीकत जो मेरी मुझको बता दे. नदी हूँ हद में रहना सीख लूंगी,जुदा सागर से तू मुझको करा दे. में गीली रेत का कच्चा घरोंदा,कहो लहरों से अब मुझको मिटा दे. बढ़ा के हाथ कोशिश कर रहा हूँ,ज़रा सा आसमाँ नीचे झुका दे. में तारा हूँ चमक बाकी रहेगी,अंधेरों मे... Read more
clicks 24 View   Vote 0 Like   4:29pm 19 Oct 2020 #लहर
Blogger: दिगम्बर नासवा
 ज़ख्म अपनेछुपाएरखिएगामहफ़िलोंकोसजाएरखिएगा दुश्मनीहैयेमानताहूँपर  सिलसिलातोबनाएरखिएगा कुछमुसाफिरज़रूरलौटेंगेएकदीपकजलाएरखिएगा कलकीपीड़ीयहाँसेगुजरेगीआसमाँतोउठाएरखिएगा रूठजाएँयेउनकीहै मर्ज़ीआपपलकेंबिछाएरखिएगा कामआजाएँकबयेक्याजानेंआंसु... Read more
clicks 23 View   Vote 0 Like   12:30am 12 Oct 2020 #पीढ़ी
Blogger: दिगम्बर नासवा
ग़रनिभानेकीचलेबातमनामतकरना.दिलकेरिश्तोंमेंकभीजोड़-घटामतकरना. रातआएगीतोइनकाहीसहाराहोगा,भूलसेदिनमेंचराग़ोंसेदगामतकरना.  मानावादीमेंअभीधूपकीसरगोशीहै,तुमरज़ाईकोमगरख़ुदसेजुदामतकरना. कुछगुनाहोंकाहमेंहक़मिलाहैकुदरतसे,बातअगरजानभीजाओतोगिलामतकरना. द... Read more
clicks 22 View   Vote 0 Like   7:36pm 4 Oct 2020 #रिश्ते
Blogger: दिगम्बर नासवा
आज फिर २५ सितम्बर है ... सोचता हूँ, तू आज होती तो पता नहीं कितनी कतरनें अखबार की काट-काट के अपने पास रक्खी होतीं ... सब को फ़ोन कर-कर के सलाह देती रहती ये कर, वो कर ... ये न कर, वो न कर, बचाव रख करोना से ... सच कहूँ तो अब ये बातें बहुत याद आती हैं ... शायद पिछले आठ सालों में ... मैं भी तो बूढा हो रहा हूँ ... और फिर ... बच्चा तो तभी रह पाता ... Read more
clicks 62 View   Vote 0 Like   4:56am 25 Sep 2020 #Poem
Blogger: दिगम्बर नासवा
पता है तुमसे रिश्ता ख़त्म होने के बाद कितना हल्का महसूस कर रहा हूँ सलीके से रहना ज़ोर से बात न करना चैहरे पर जबरन मुस्कान रखना "सॉरी""एसक्यूस मी"भारी भरकम संबोधन से बात करना"शेव बनाओ"छुट्टी है तो क्या ... "नहाओ"कितना कचरा फैलाते हो बिना प्रैस कपड़े पहन लेते होधीमे बोलने के ... Read more
clicks 44 View   Vote 0 Like   7:29am 21 Sep 2020 #यादें
Blogger: दिगम्बर नासवा
हम सवालों के जवाबों में ही बस उलझे रहे , प्रश्न अन-सुलझे नए वो रोज़ ही बुनते रहे.हम उदासी के परों पर दूर तक उड़ते रहे,बादलों पे दर्द की तन्हाइयाँ लिखते रहे .गर्द यादों की तेरी “सेंडिल” से घर आती रही,रोज़ हम कचरा उठा कर घर सफा करते रहे.तुम बुझा कर प्यास चल दीं लौट कर देखा नही... Read more
clicks 22 View   Vote 0 Like   11:01am 14 Sep 2020 #पपड़ी
Blogger: दिगम्बर नासवा
सच के ख्वाब का क्या होगाइन्कलाब का क्या होगा आसमान जो ले आये  आफताब का क्या होगा तुम जो रात में निकले होमाहताब का क्या होगा इस निजाम में सब अंधेइस किताब का क्या होगा मौत द्वार पर आ बैठीअब हिसाब का क्या होगा साथ छोड़ दें गर कांटे फिर गुलाब का क्या होगा है स... Read more
clicks 52 View   Vote 0 Like   10:40am 7 Sep 2020 #शराब
Blogger: दिगम्बर नासवा
सिक्कों का कुछ चाँद सितारों का बंधन.चुम्बक है पर तेरी बाहों का बंधन. दिन में भी तो चाँद नज़र आ जाता है,इसने कब माना है रातों का बंधन. तेरी आहट जैसे ही दरवाज़े पर,खोल दिया बादल ने बूंदों का बंधन. जो करना है अभी करो, बस अभी करो,किसने जाना कब तक साँसों का बंधन. तुमसे रौनक, त... Read more
clicks 49 View   Vote 0 Like   9:12am 31 Aug 2020 #बंधन
Blogger: दिगम्बर नासवा
रात जागी तो कान में बोलीइस अँधेरे की अब चली डोली बंद रहना ही इसका अच्छा थाराज़ की बात आँख ने खोली दोस्ती आये तो मगर कैसेदुश्मनी की गिरह नहीं खोली तब से चिढती है धूप बादल सेनींद भर जब से दो-पहर सो ली तब भी रोई थी मार के थप्पड़आज माँ याद कर के फिर रो ली खून सैनिक का तय ह... Read more
clicks 79 View   Vote 0 Like   9:34am 24 Aug 2020 #गिरह
Blogger: दिगम्बर नासवा
धूपकहतीहैनिकलकेदें…नदेंरौशनीहरघरकोचलकेदें…नदें साहूकारोंकीनिगाहेंकहरहींदामपूरेइसफसलकेदें…नदेंतयअँधेरेमेंतुम्हेंकरनाहैअबजुगनुओंकासाथजलकेदें…नदेंबातवोसचकीकरेगासोचलोआइनाउनकोबदलकेदें…नदेंफैंसलालहरोंकोअबकरनाहैयेसाथकिश्तीकाउछलकेदे ... नदेंसच... Read more
clicks 55 View   Vote 0 Like   9:51am 17 Aug 2020 #आइना
Blogger: दिगम्बर नासवा
वो जो कड़वी ज़ुबान होते हैं, एक तन्हा मचान होते हैं.चुप ही रहने में है समझदारी, कुछ किवाड़ों में कान होते हैं.एक दो, तीन चार, बस भी करो, लोग चूने का पान होते हैं.उम्र है लोन, सूद हैं सासें, अन्न-दाता, किसान होते हैं.गोलियाँ,गालियाँ, खड़े तन कर,फौज के ही जवान होते हैं.  जो न... Read more
clicks 22 View   Vote 0 Like   9:11am 10 Aug 2020 #पान
Blogger: दिगम्बर नासवा
अधूरीख्वाहिशेंरहतीहैंदरवाज़ोंमेंअपनीतभीतोज़िन्दगीजीतेहैंसबटुकड़ोंमेंअपनी तूयूँहीबोलनामैंभीफ़कतसुनतारहूँगासुनोशक्करज़राकमडालनाबातोंमेंअपनी अभीतोरातनेदिनकाशटरखोलानहींहैचलोइकनींदतोलेनेदोतुमबाहोंमेंअपनी कभीगुस्सा, झिझकना, रूठना, फिरमानजानाहमेश... Read more
clicks 103 View   Vote 0 Like   7:22am 3 Aug 2020 #हिन्दी गज़ल
Blogger: दिगम्बर नासवा
आँसुओं से तर-ब-तर मासूम कन्धा रह गया वक़्त की साँकल में अटका इक दुपट्टा रह गयामिलगया जो उसकी माया, जो हुआ उसका करम पा लिया तुझको तो सब अपना पराया रह गयाआदतन बोला नहीं मैं, रह गईं खामोश तुम  झूठ सच के बीच उलझा एक लम्हा रह गया छू के तुझको कुछ कहा तितली ने जिसके कान में  इश्क़ ... Read more
clicks 86 View   Vote 0 Like   5:23am 27 Jul 2020 #तितली
Blogger: दिगम्बर नासवा
उदासी से घिरी तन्हा छते हैं कई किस्से यहाँ के घूरते हैं परिंदों के परों पर घूमते हैं हम अपने घर को अकसर ढूँढ़ते हैं नहीं है इश्क पतझड़ तो यहाँ क्यों सभी के दिल हमेशा टूटते हैं मेरा स्वेटर कहाँ तुम ले गई थीं तुम्हारी शाल से हम पूछते हैं नए रिश्तों में कितनी भी हो गर्मीकहाँ र... Read more
clicks 103 View   Vote 0 Like   1:49pm 23 Jul 2020 #पतझड़
Blogger: दिगम्बर नासवा
ज़िन्दगी में हैं कई लोग आग हों जैसे हर अँधेरे में सुलगते हैं जुगनुओं जैसे सोच लेता हूँ कई बार बादलों जैसे भीग लेने दूं किसी छत को बारिशों जैसे बैठे बैठे भी कई बार चौंक जाता हूँ दिल में रहते हैं कई लोग हादसों जैसेहम सफ़र बन के मेरे साथ वो नहीं तो क्या मील दर मील खड़े हैं वो पत्... Read more
clicks 105 View   Vote 0 Like   6:50am 20 Jul 2020 #पत्थर
Blogger: दिगम्बर नासवा
कहीं खामोश है कंगन,कहीं पाज़ेब टूटी है सिसकता है कहीं तकिया,कहीं पे रात रूठी है अटक के रह गई है नींद पलकों के मुहाने परसुबह की याद में बहकी हुई इक शाम डूबी हैयहाँ कुछ देर बैठो चाय की दो चुस्कियाँ ले लो यहीं से प्रेम की ऐ. बी. सी. पहली बार सीखी है न क्यों सब इश्क़ के बीमार मिल कर ... Read more
clicks 109 View   Vote 0 Like   9:34am 13 Jul 2020 #गज़ल
Blogger: दिगम्बर नासवा
यूँ ही मुझको सता रही हो क्या  तुमकहीं रूठ करचली हो क्या उसकी यादें हैं पूछती अक्सर मुझसे मिलकर उदास भी हो क्या मुद्दतों से तलाश है जारीज़िन्दगीमुझसे अजनबी हो क्या वक़्त ने पूछ ही लिया मुझसे बूढ़े बापू की तुम छड़ी हो क्या तुमको महसूस कर रहा हूँ मैं माँ कहीं आस पास ही हो क्य... Read more
clicks 76 View   Vote 0 Like   7:14am 6 Jul 2020 #गज़ल
Blogger: दिगम्बर नासवा
गम के किस्से, ख़ुशी के ठेले हैंज़िन्दगी में बहुत झमेले हैंवक़्त का भी अजीब आलम हैकल थी तन्हाई आज मेले हैंबस इसी बात से तसल्ली हैचाँद सूरज सभी अकेले हैंभूल जाते हैं सब बड़े हो करकिसके हाथों में रोज़ खेले हैंचुप से बैठे हैं आस्तीनों मेंनाग हैं या के उसके चेले हैंटूट जाते हैं ग... Read more
clicks 100 View   Vote 0 Like   9:53am 29 Jun 2020 #गज़ल
Blogger: दिगम्बर नासवा
दो पीठ के बीच का फांसला मुड़ने के बाद ही पता चल पाता है हालांकि इन्च भर दूरी उम्र जितनी नहीं पर सदियाँ गुज़र जाती हैं तय करने में "ईगो" और "स्पोंड़ेलाइटिस" कभी कभी एक से लगते हैं दोनों फर्क महसूर नहीं होता दर्द होता है मुड़ने पे पर मुश्किल भी नहीं होती जरूरी है बस एक ईमानदार कोशिश दोनों तरफ से एक ही समय, एक ही ... Read more
clicks 77 View   Vote 0 Like   4:05pm 22 Jun 2020 #Poem
Blogger: दिगम्बर नासवा
शबनम से लिपटी घास पर नज़र आते हैं कुछ क़दमों के निशानसरसरा कर गुज़र जाता है झोंका जैसे गुजरी हो तुम छू कर मुझे हर फूल देता है खुशबू जंगली गुलाब की  खुरदरी हथेलियों की चिपचिपाहट महसूस कराती है तेरी हाथों की तपिश   उड़ते हुए धुल के अंधड़ में दिखता मिटता है तेरा अक्स अकसरजा... Read more
clicks 69 View   Vote 0 Like   8:26am 15 Jun 2020 #खुशबू
Blogger: दिगम्बर नासवा
सच जबकि होता है सच लग जाती है मुद्दत सच की ज़मीन पाने में झूठ जबकि नहीं होता सच फ़ैल जाता है आसानी से सच हो जैसे हालांकि अंत जबकि रह जाता है केवल सच पर सच को मिलने तक सच की ज़मीन झूठ हो जाती है तमाम उम्रतो क्या है सच ज़िन्दगी ... या प्राप्ति सच या झूठ की ...... Read more
clicks 75 View   Vote 0 Like   10:19am 8 Jun 2020 #झूठ
Blogger: दिगम्बर नासवा
किसी की आँखों में झाँकना उसके दर्द को खींच निकालना नहीं होता  ना ही होता है उसके मन की बात लफ्ज़-दर-लफ्ज़ पढ़नाउसकी गहरी नीली आँखों में प्रेम ढूँढना तो बिलकुल भी नहीं होता  हाँ ... होते हैं कुछ अधूरे सपने उन आँखों मेंदेखना चाहता हूँ जिन्हेंसमेटना चाहता हूँ जिनको करना चा... Read more
clicks 67 View   Vote 0 Like   6:34am 1 Jun 2020 #जंगली_गुलाब
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