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Blog: उलूक टाइम्स

Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
 लिख लिया जाये कहीं किसी कागज में एक खयालबस थोड़ी देर के लिये उसे रोकना चाहता हूँना कागज होता है कहीं ना कलम होती है हाथ मेंयूँ ही सब भूल जाने के लिये भूलना चाहता हूँख्वाहिशें होती हैं बहुत होती हैं इधर से लेकर उधर तक होती हैंउनमें से कुछ समेटना चाहता हूँतरतीब से लगाने ... Read more
clicks 13 View   Vote 0 Like   2:20pm 4 Jun 2021 #कविता
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
उड़ रहे हैं काले कौऐ आकाश दर आकाश कबूतर कबूतर चिल्लाओकौन बोल रहा है सच रोको उसे ढूँढ कर एक गाँधी कहीं जा कर के कूट आओइस से पूछो उस से पूछो कहीं से भी पूछ कर कुछ उसके बारे में पता लगाओकैसे आगे हो सकता है कोई उसका अपना उससे कहीं तो जा कर के कुछ आग लगाओ कुछ मर गये कुछ आगे मरेंग... Read more
clicks 12 View   Vote 0 Like   2:44pm 29 May 2021 #कौए
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
जो कहीं नहीं है बस वही नजर आये जो सब जगह है उसे बताने की मनाही हैसब को सब समझ में कहाँ आता है आ भी गया तो कह देना दूसरी लहर आई हैमहफिल कहीं नहीं सजती अब अकेले रहा करो इसी में सबकी भलाई हैउठ के यूँ ही चले जा रहे हैं लोग छोड़ कर के आने में ही सुना रुसवाई हैजाना ही होता है सब जायें... Read more
clicks 11 View   Vote 0 Like   2:50pm 15 May 2021 #अफजाई
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
 कितना भी कोशिश करें हम शराफत पोतने कीदिख जाता है कहीं से भी फटा हुआकिसी छेद से झाँकता हुआ हमारा नजरियाहम कब गिरोह हो लेते हैंहमें पता कहाँ चलता हैहम कहा हैउसमें हो सकता हैतुम नहीं आते होगेबुरा मत मानियेगाहम कहा हैहमारी ओरधनुष मत तानियेगाहम कहने का मतलबमैं और ... Read more
clicks 53 View   Vote 0 Like   3:12pm 1 Apr 2021 #कविता
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
 सालों हो गये कुछ लिख लेने की चाह में कुछ लिखते लिखते पहुँच गये आज इस राह मेंशेरो शायरी खतो किताबत पता नहीं क्या क्या सुना गया लिखा गया याद कुछ नहीं रहा बस एक मेरे लिखे को तेरे समझ लेने की चाह मेंवो सारे तलवार लिये बैठे हैं हाथ में सालों से कलम छोड़ कर बेवकूफ तू लगता है ... Read more
clicks 80 View   Vote 0 Like   3:44pm 3 Mar 2021 #कलम
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
करते करते बकवास निरन्तर सुजान हो चले जड़मति ये भी तो किस्मत है होती अभ्यास समझ रोज का लेखन आभासी कलम पन्ने जोतती खुद ही कुछ बोती जमा होते चले आगे के पीछे पीछे के आगे आँखें मूंद वर्णमाला के मोती पर मोती वाक्य चढ़े वाक्य के ऊपर शब्दों की पहन कहीं अटपटी कहीं फटी एक धोती ... Read more
clicks 61 View   Vote 0 Like   4:30pm 28 Feb 2021 #किस्मत
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
अखबार में फोटो आई है सारा घर मगन है मालिक कभी दिखाया नहीं जाता है घर के कुत्ते ने बहुत धूम मचाई है घर में भौंकता नहीं है कभी कटखन्ने होने की मिठाई है किसी को कभी काटा नहीं किसी को कभी भौंका नहीं अपने को बचाने की कीमत मिली है या किसी ने कीमत चुकाई है बजट अभी अभी निकला है जन... Read more
clicks 94 View   Vote 0 Like   3:31pm 2 Feb 2021 #कुत्ता
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
सबसे अच्छा है कुछ नहीं लिखना कई कई दिनों तक पन्नों में नहीं दिखना किसी ने पूछना नहीं है क्यों नहीं दिख रहे हो किसे मतलब है कहने से किसलिये बकवास करने से आजकल बच रहे हो लिखने लिखाने वाले सभी कुछ ना कुछ लिख रहे हैं सब अपनी अपनी जगह पर अपने हिसाब से दिख रहे हैं कोई देश लिख र... Read more
clicks 70 View   Vote 0 Like   2:50pm 29 Jan 2021 #बेकार
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
 बहुत हो गया है कूड़ा हो ही जाता है कूड़े का डिब्बा गले गले तक भर जाता है होना कुछ नहीं होता है पता होता है फुसफुसाने में सब खो जाता है बड़ी खबर किसने कह दिया आपके सोचने से होगी आदमी देख कर खबर का खाँचा बनाया जाता है प्रश्न प्रश्न होता है क्या होता है अगर किसी को बता दिया जात... Read more
clicks 77 View   Vote 0 Like   2:51pm 18 Jan 2021 #चोर
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
मत लिखा कर हर समय गीला सा सुखा लिया कर लिखा अपना सीला सा आग नहीं लगती है लिखा गीला होता है सीलन सुलगती नहीं है रोज लिखना हर समय दिखना इसलिये ठीक नहीं होता है लिखाई भी हर समय बहकती नहीं है लिखा कर कोई नहीं कहता है नहीं लिख बस फूँक लिया कर लिखते लिखते लिखे को स्याही सूखे बिना... Read more
clicks 50 View   Vote 0 Like   5:26pm 9 Jan 2021 #ईश्वरीय
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
उबासी लेता व्यंग अवसादग्रस्त है मगर मानने को तैयार नहीं है उसके खुद अपने चेहरे को खींचते हुऐ दाँत निपोरना जोर लगा कर हैशा कुछ ऐसा अहसास करा रहा है जैसे कलम का लिखा नहीं सामने से कलम का हाथ में लोटा लिये दिशा जाना समझा रहा है कलम वैसे भी अब कहीं होती भी कहाँ है कलम मोक्ष प... Read more
clicks 186 View   Vote 0 Like   4:02pm 11 May 2020 #अवसादग्रस्त
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
सालों गुजर गये सोचते हुऐ लिखने की कुछकुछ ऐसा जिसका कुछ मतलब निकले लिखना आने से मतलब निकलने वाला ही लिखा जायेगा बेमतलब की बात है बेमतलब का कई लिख लेते हैं भरी पड़ी हैं किताबें कापियाँ लकीरों से आड़ी तिरछी पर मुझ से नहीं लिखा गया ... Read more
clicks 102 View   Vote 0 Like   3:40pm 2 May 2020 #बकवास
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
पंख निकले होते हौले हौले फैल कर ढक लेते सब कुछ आँचल की तरह उड़ने के लिये अनन्त आकाश में दूर दूर तक फैले होते झुंड नहीं होते उड़ना होता हल्के होकर हवा की लहरों से  बनते संगीत के साथ कल्पनाएं होती अल्पनाओं सी रंग भरे होते असीम सम्भावनाएं होती ऊँचाइयों के ऊपर कहीं और ऊँचाइ... Read more
clicks 129 View   Vote 0 Like   4:35pm 25 Mar 2020 #झुँड
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
मन पक्का करना है बस सोच को संक्रमित नहीं होने देना है भीड़ घेरती ही है उसे कौन सा अपनी सोच से कुछ लेना देना है शरीर नश्वर है आज नहीं तो कल मिट्टी होना है तेरा तुझ को अर्पण क्या लागे मेरा की याद आ रही हो सभी को जब नौ दिशाओंसे ऐसे माहौल में कुछ कहना जैसे ना कहना है सिक्का उछालन... Read more
clicks 129 View   Vote 0 Like   5:48pm 24 Mar 2020 #कबाड़
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
समझ में जब खुद के ही नहीं आती है लगाई गयी आग और लगी आग से बनी राख तो किस लिये भटकता है औघड़ ढूँढने के लिये लकड़ियाँ माचिस का डब्बा और गंधक लगी छोटी छोटी तीलियाँ हुँकार कर आँखें लाल रक्त से भर और फूँक दे शँख रक्तबीज अंकुरित हैं हर समय हर दिशा में विषाणु को कोई भी नाम दे दो अच्छ... Read more
clicks 117 View   Vote 0 Like   3:29pm 14 Mar 2020 #आठवाँ आश्चर्य
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
खुलता रोज है एक पन्ना हमेशा खुलता है उसी तरह जैसे खोला जाता है सुबह किसी दुकान का शटर और बन्द कर दिया जाता है शाम को आदतन पिछले कई दिनों से तारीख बदल रही है रोज की रोज मगर कलम है लेट जाती है थकी हुयी सी बगल में ही सफेद पन्ने के सो जाती है आँखे खुली रख कर देखने के लिये कुछ रंग... Read more
clicks 164 View   Vote 0 Like   4:42pm 11 Mar 2020 #कागज
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
जरूरी है घिसना चौक काले श्यामपट पर पढ़ाना नहीं है ना ही कुछ लिखना है कुछ लकीरें खींच कर गिनना शुरु कर देना है कोई पूछे अगर क्या गिन रहे हैं शर्माना नहीं है कह देना है  मुँह पर ही लाशें किसकी कोई पूछे तो बता देना है अपने घर के किसी की नहीं है मातम कहीं दिख रहा हो तो पूछने जर... Read more
clicks 175 View   Vote 0 Like   4:01pm 25 Feb 2020 #उलूक
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
वैसे भी कौन लिख पाता है पूरा सच कोशिश सच की ओर कुछ कदम लिखने की होती है कोशिश जारी रहती है जारी रहनी चाहिये आप लिख रहे हैं लिखते रहें आपके लिखने ना लिखने से किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता है हाँ ज्यादा मुखर होना कुछ समय बाद आपको महसूस होने लगता है आप पर ही भारी पड़ रहा है आप कौन ह... Read more
clicks 167 View   Vote 0 Like   3:10pm 4 Feb 2020 #उलूक
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
एक लम्बे अर्से तक टिक कर अघोषित अर्धविक्षिपतत्ता के अंधेरे में की गयी बड़बड़ाहट को सफेद कागज के ऊपर काले अक्षरों को भैंस बराबर देखते समझते जानबूझ कर रायते की तरह फैलाने की कोशिश जरूर कामयाब होती है एक नहीं कई उदाहरण सामने से नजर आयेंगे जरूरत प्रयास करने की है अब कौन विक... Read more
clicks 109 View   Vote 0 Like   4:21pm 28 Jan 2020 #अर्धविक्षिपतत्ता
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
Pageviews today4,091Pageviews yesterday5,924Pageviews last month144,743Pageviews all time history4,006,520Followers253हो सकता है यूँ ही घूमने आते होगेंं आप पर मेरे लिये आपका एक कदम इनाम है चालीस लाख कदम के लिये आभार ।ulooktimes.blogspot.com 225,737Alexa Traffic Rank 22,823Traffic Rank in IN84Sites Linking InSearch AnalyticsTop queries drivingtraffic to ulooktimes.blogspot.comWayback MachineSee how ulooktimes.blogspot.comlooked in the pastSimilar Sitesulookti... Read more
clicks 112 View   Vote 0 Like   2:56pm 26 Jan 2020 #चालीस लाख
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
खड़े खड़े किनारे में कहीं पहले से सूखे हुए किसी पेड़ के हरियाली सोचते हुए थोड़े से समझ में थोड़ा थोड़ा करके समय के साथ समझ आ बैठे शब्दों की रेजगारी के साथ मगजमारी करते सामने वाले के मगज की लुगदी बनाने की फिराक में तल्लीन समकालीन दौड़ों से दूरी बनाकर लपेटते हुऐ वाक्यों के स... Read more
clicks 101 View   Vote 0 Like   3:06pm 21 Jan 2020 #बटुवा
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
मक्खियाँ ही मक्खियाँ हो रही हैं हर तरफ से भिन भिन हो रही है बस कहाँ हैं पता नहीं चलने दे रही हैं ठण्ड बहुत हो रही है इस साल शायद सिकुड़ कर छोटी हो रही हैं महसूस भर हो रही हैं हर तरफ उड़ रही हैं मक्ख़ियाँबस दिखाईनहीं... Read more
clicks 122 View   Vote 0 Like   4:13pm 17 Jan 2020 #फिजाँ
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
Your few poems touched me. इस बक बक ️को कुछ लोग समझ जाते हैं । वो *पागल* में कुछ *पा* के *गला* ️हुआ इंसान देख लेते हैं । ऐसे लोगो की कविताओं में गूढ़ इशारे होतें हैं । जो जागे हुए लोगों को दिख जातें हैं । मुझे आपकी कविताओं में कुछ अलग दिखा, जिसके कारण में आने उद्गारों को रोक नही पाया । मैँ आपकी ब... Read more
clicks 106 View   Vote 0 Like   4:15pm 8 Jan 2020 #गुंडों
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
पूरा हुआ खाता बही आज और अभी इस साल की कुछ चुनी हुयी बकवासों का सभी नहीं भी कही गयी कुछ अनछुयी रह ही गयी  फिर भी बन गया खींच तान कर किसी तरह शतक थके थकाये अहसासों का समझे गये कुछ लोग समझाये गये कुछ लोग लिखे लिखाये में दिखा सैलाब उमड़ते जज्बातों का चित हुआ करते थे सिक्के का ज... Read more
clicks 108 View   Vote 0 Like   4:29pm 30 Dec 2019 #पाठक
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
मुँह में दबी सिगरेट से जैसे झड़ती रही राख पूरे पूरे दिन पूरी रात फिर एक बार और सारा सब कुछ हवा हो गया एक साल और सामने सामने से मुँह छिपाकर गुजरता हुआ जैसे धुआँ हो गया थोड़ी कुछ चिन्गारियाँ उठी कुछ लगी आग दीवाली हुयी आँखों की... Read more
clicks 114 View   Vote 0 Like   3:11pm 28 Dec 2019 #आग
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