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Blog: आवारगी

Blogger: lori Ali
 क्षमा क्षमा क्षमा प्रियवरआत्मीय, वंदनीय क्षमा ! हर दुर्बलता वश हुए पाप पर हर झूठ, हर द्वंद, हर कलाप पर हर युद्ध, हर वध, हर प्रपंच छल पर हर दीनता, हर विवश हल पर क्षमा करना हे आत्मीय मुझको कि जन्म मानव का मिला है दानव कर्म भी करने होंगे पाप और पुण्य से आगे म... Read more
clicks 27 View   Vote 0 Like   9:22am 23 Aug 2020 #
Blogger: lori Ali
सुनते हैं बडी तरक्की कर ली है हमने! सभी कुछ आधुनिक हो गया है। भक् भक् कर  जलती बत्तियाँ, पिटर पिटर कर मटकती थिरकती परियाँ, सुंदर आलीशान इमारतें, उनके पोर्टिको मे खड़ी बडी बडी गाड़ियाँ! कम्प्युटर, रोबोट, ढेर सी मशीनें। बहुत सा समय बचने लगा है अब पास मे! खूब सी आसान ज़िंदगी ... Read more
clicks 96 View   Vote 0 Like   4:10pm 10 Mar 2020 #
Blogger: lori Ali
  “मीना” हिंदी फ़िल्मों की “ट्रेजेडी क़्वीन”. “मीना” जैसे रब की सबसे मुकम्मल तख्लीक. “मीना” जैसे स्याह आसमान की क़िस्मत में आया कोई चौहदवीं का चांद;“मीना” जैसे बारिश की भीगी शाम ख़िडकी पर गूंजता बूंदों का जलतरन्ग. लिल्लाह! एक नाम और ख्वाहिशों का इतना लम्बा भीगता सा जंग... Read more
clicks 227 View   Vote 0 Like   7:17am 1 Aug 2018 #
Blogger: lori Ali
      बरोडा,ग़ुजरात के पास एक छोटा सा गांव अमरोली;उसके नन्हे से क़स्बे की बडी सी हवेली का ज़नाना,जिसमे दर्दे ज़ेह से करहाती “फ़रीदा बेगम” और पेहलौठी के बच्चे का इंतेज़ार करते मुम्बई से वकालत पढ कर आये जनाब मुस्तफ़ा शेख़. दोनो ही इस बात से अंजान कि अल्लाह एक के बाद एक पांच औलाद... Read more
clicks 167 View   Vote 0 Like   12:38pm 25 Mar 2018 #
Blogger: lori Ali
      कल ही लम्बे चौडे भाषणों का सिलसिला तारी हो गया था,सभी को इस दिन का महत्व भली भांति समझा दिया गया था...खूबसूरती से बताया था कि सभी को आना है,और गणतन्त्र दिवस के कार्यक्रम को सफल बनाने में अपना योगदान देना है.       मैं! जो भाषा के साथ नैतिक शिक्षा भी पढाती... Read more
clicks 199 View   Vote 0 Like   9:19am 26 Jan 2017 #
Blogger: lori Ali
                         सुबह सुबह दरख्तों में पानी डालने गयी, क्या देखती हूँ, नंन्हे से गुलाबी गुलाब में ताज़ा मोतिया फूल अपनी ख़ुशबू बिखेर रहा है. पूरी बगिया रोशन हो गयी उसकी महक और खूबसूरती से.  दो पल को लगा परिस्तान से कोईं शहज़ादी उतर आयी हो, और मेरे फ... Read more
clicks 212 View   Vote 0 Like   11:33am 22 Jan 2017 #
Blogger: lori Ali
अंजाम से  आग़ाज़  करउठ कर ज़रा परवाज़ कररख दे  परे   मायूसियांतू ज़िंदगी को साज़ करख़ामोशियां सरगम पे होंनाकामियां परचम पे होंतो ज़ीस्त भी खिलती नहीऔर मौत भी मिलती नहीउठ! तू ख़ुद की ख़ाक से ही ‘तामीर-ए-ख़ुद’  जांबाज़ कर सेहबा  ... Read more
clicks 238 View   Vote 0 Like   4:36pm 31 Dec 2016 #
Blogger: lori Ali
             बहिनो! क्या  बताऊं,तुमसे बांट बूंट कर हल्की होना चाहती हूं: मियां मौलवी साहब की पांच बेटियां अस्मां,सीमा,रेशमा,गुड्डी,मुन्नी. अगले दिन ईद और मियां मौलवी साहब के पाजामे को टेलर मास्टर ने लम्बा कर दिया. मियां साहब ने अस्मा को बुला ताक़ीद की “ बिटीया!!! ज़रा... Read more
clicks 178 View   Vote 0 Like   5:15pm 5 Jul 2016 #
Blogger: lori Ali
    याद नही उम्र कितनी थी,पांचवे का इम्तेहान दिया था और अब तक रमज़ान में इफ्तारी खाने का ही लुत्फ उठया था कि रमज़ान के छट्वें रोज़े के दिन अम्मा दादी अम्मा के साथ लोगों की फेह्रिस्त बनाती बरामद हुईं. अप्रैल का महिना,ऐन मेरी सालगिरह के एक दिन पहिले. स्कूल अभी खुले नही थे,लि... Read more
clicks 200 View   Vote 0 Like   9:47pm 24 Jun 2016 #
Blogger: lori Ali
मेरे फाग भरे गीतों को,अपने राग भरे स्वर देनामीत! मेरे मीठे सपनों को अपनी प्रीत का घर देनाबासंती मौसम में बहकी मधुमासी सी हलचल मेंमेरी सांसों के उपवन को प्रीत पवन से भर देना हर धडकन में बिछे पलाश के स्वागत आतुर आलिंगन को अपने हाथों मंथन कर के प्रेम पलाश सा कर देना प्रिय... Read more
clicks 260 View   Vote 0 Like   8:01am 24 Mar 2016 #
Blogger: lori Ali
एक के बाद एक मेरी देह पर पड़तेतुम्हारे गहरे नीले चुम्बनजैसे ख़ुदा का  यक-ब -यक किसी गर्म दिन को गले लगा लेनाऔर उन्हें महसूस कर झरते मेरे आंसूजैसे गर्मियों के बाद की निहायत पहली बारिश -  लोरी ... Read more
clicks 243 View   Vote 0 Like   3:17pm 8 Feb 2016 #
Blogger: lori Ali
सेहबा जाफ़री      लिल्लाह! यह गोपाल भाई हैं!! मैंने देखा और खूब ग़ौर से देखा,बचपन से लगा जवानी तक जिन गोपाल भाई की,अपने भाई सी ही सहचरी रही उन्हे इनती- गिनती के पांच सालों मे ही कैसे भूल सकती हूँ! पलकें झपकायी,दुहरा-दुहरा और तिहरा-तिहरा कर;मगर दुविधा है कि मस्तिष्क का स... Read more
clicks 328 View   Vote 0 Like   5:27pm 17 Jan 2016 #
Blogger: lori Ali
अपनी रुस्वाई तेरे नाम का चर्चा देखूँ एक ज़रा शेर कहूँ , और मैं क्या क्या देखूँ नींद आ जाये तो क्या महफिलें बरपा देखूँ आँख खुल जाए तो तन्हाई का सहारा देखूँ शाम भी हो गयी धुंधला गयी आँखें मेरीभूलने वाले, कब तक मैँ  तेरा  रास्ता देखूँ सब ज़िदें उसकी मैं  पूरी करू... Read more
clicks 229 View   Vote 0 Like   12:31pm 11 Oct 2015 #
Blogger: lori Ali
एक मुलाकातमैं चुप शान्त और अडोल खड़ी थी सिर्फ पास बहते समुन्द्र में तूफान था……फिर समुन्द्र को खुदा जाने क्या ख्याल आया उसने तूफान की एक पोटली सी बांधी मेरे हाथों में थमाई और हंस कर कुछ दूर हो गयाहैरान थी…. पर उसका चमत्कार ले लिया पता था कि इस प्रकार की घटना&nb... Read more
clicks 236 View   Vote 0 Like   3:41pm 30 Aug 2015 #
Blogger: lori Ali
           "अल्लाहो बाक़ी!" न ना !! ये उसका वहम  नहीं था , देख ही तो रहा था वह !!!  नाज़िश बेबाकी से उसके यों  घूरने को बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी, एक सवा घंटा तो हो ही गया था उसे यूं  घूरते घूरते! कभी  दरवाज़े  डेवढ़ी  की ओंट  से देखे , तो कभी थम्बेली-चम्बेली  की ओं... Read more
clicks 266 View   Vote 0 Like   5:03pm 18 Jun 2015 #
Blogger: lori Ali
बारिश हुई तो फूलों के तन  चाक हो गए मौसम के हाथ भीग के सफ्फाक हो गएबादल को क्या ख़बर है की बारिश की चाह में कैसे बुलंद-ओ -बाला  शजर ख़ाक हो गए  जुगनू को दिन के वक़्त परखने की ज़िद करें बच्चे हमारे अहद के चालाक हो गए लहरा रही है , बर्फ की चादर हठा  के घांस सूरज क... Read more
clicks 207 View   Vote 0 Like   9:28am 13 Jun 2015 #
Blogger: lori Ali
​हे ईश्वर !अगर तुम "ही " हैतो पुरुषों के लिए हर्ष का विषय होअगर "शी "हो तोऔर भी अच्छा किजीवन और जीवन शक्ति दोनोंतुम से हैंदेखो!मैं  तो डरती हूँनपुंसकता से, कायरता से तुम्हारे कुछ नहीं रहने सेऔर उन बदलते ढंगों सेजिससे तुमआहिस्ते -आहिस्ते"इट "हो रहे हो           - ल... Read more
clicks 222 View   Vote 0 Like   8:04am 2 Jun 2015 #
Blogger: lori Ali
जगह जगह परछांई  सी है      अपने घर अँगनाई सी है              न होने के बाद भी अपने                        पूरे घर पर छाई सी है हल्दी-मिर्ची , तेल -शकर सी,        गंध में महके पूजा घर सी               पिछवाड़े से अगवाड़े  तक           &nbs... Read more
clicks 217 View   Vote 0 Like   11:19am 10 May 2015 #
Blogger: lori Ali
मोज़े  बेचती, जूते बेचती औरत  मेरा नाम नहीं मैं  तो वही हूँ जिसको तुम दीवार में चुन कर मिस्ले सबा बेख़ौफ़ हुए ये नहीं जाना पत्थर से आवाज़ कभी भी दब नहीं सकती मैं  तो वही हूँ रस्म व रिवाज़ के बोझ  तले जिसे तुमने छुपाया ये नहीं जाना रोशनी घोर अंधेरों से&nb... Read more
clicks 213 View   Vote 0 Like   5:18am 7 May 2015 #
Blogger: lori Ali
मौसम -ए -वीरां का , बहक कर यूं शराबी होना तेरी आमद पे 'फ़ज़ा  का ,       यूं गुलाबी होना  शहर का शहर ही , रक्साँ  है , तेरे इश्क़ में यूं तो उसपे पाँवों  में मेरे यार !         यूं गुर्गाबी  होना इश्क़ सचमुच  ही खुदा ही की रज़ा से है  रोशन सब पे अफ्ज़ा   नहीं ... Read more
clicks 250 View   Vote 0 Like   10:33am 12 Apr 2015 #
Blogger: lori Ali
कमरे में हर चीज़ अपनी जगह मौजूद थी सब ठीक ठाक था फिर भी यूं लग रहा था जैसे कोई चीज़ चोरी हो गयी है मैंने एक बार फिर कमरे का जायज़ा लिया अल्मारी और मेज़ के खानों में हर चीज़ ज्यों की त्यों रखी हुई थी लेकिन केलेंडर से अट्ठाइस के बाद की तारीख़ें चोरी हो गयी थ... Read more
clicks 228 View   Vote 0 Like   3:58am 28 Feb 2015 #
Blogger: lori Ali
कितनी मुद्द्त बाद मिले हो, वस्ल का कोई भेद तो खोलो कैसे  कटे दिन हिज्र की धूप में, कैसे गुज़री रात तो बोलो क्या अब भी, इन रातों में ख़्वाबों के लश्कर आते हैंक्या अब भी नींदों से नींदों पुल जैसे बन जाते हैंक्या अब भी पुरवा कानो में गीत सुहाने गाती है ​​क्या अब... Read more
clicks 225 View   Vote 0 Like   12:08pm 19 Feb 2015 #
Blogger: lori Ali
सहरा सहरा, गुलशन गुलशन गीत हमारे सुनियेगा याद बहुत जब आएंगे हम, बैठ के सर को धुनियेगा आज हमारे अश्क़ों से दामन को बचा लें आप मगर ये वह मोती हैं कल जिनको शबनम शबनम चुनियेगा हमसे सदा दिल लोगों पर ज़ौक़े असीरी १ ख़त्म हुआ हम न रहे तो किसकी ख़ातिर , जाल सुनहरे बुनियेगा ... Read more
clicks 246 View   Vote 0 Like   1:49pm 13 Feb 2015 #
Blogger: lori Ali
आँखों में  अब न नींद है, सोएं किधर से हम ख्वाबों की रहगुज़र में , खोएं किधर से हम ख़ुशियों के जो शजर थे, ख़ाली थे, बेसमर थेइस रुत में नए आसरे , बोयें किधर से हम टूटे हैं इस क़दर कि, खाली हैं अब तो आँखें आंसू में तेरा दामन, भिगोएं किधर से हम चाँद के बरक्स ख़्वाब, बढ़ते ही ढल ग... Read more
clicks 267 View   Vote 0 Like   4:26am 4 Feb 2015 #
Blogger: lori Ali
कपूर तालाब वक़्त कैसा भी हो इसकी ख़ासियत  है, यह ठहरता नहीं, गुज़र जाता है. गुज़र कर कभी अफ़साने की शक्ल ले लेना , कभी गीत हो जाना, कभी एक ठंडी सी सांस लेकर, किसी अनकहे जज़्बे सा ही चमक कर बुझ जाना इसकी तासीर है.  इसी तासीर को हवा देने के लिए शायर गज़लें लिखते हैं और मुसव्विर अप... Read more
clicks 268 View   Vote 0 Like   11:19am 25 Jan 2015 #
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