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Blog: आपका ब्लॉग

Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
नेता बने जब से ही गाँव के ये लप्पूजी,राजनीति में भी वे चलाने लगे चप्पूजी।बेसुरी अलापै राग,सुन सभी जावै भाग।लगे हैं ये कहलाने तब से ही भप्पूजी।।बासुदेव अग्रवाल 'नमन'तिनसुकिया... Read more
clicks 32 View   Vote 0 Like   11:25am 4 May 2021 #बासुदेव अग्रवाल 'नमन'
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
''वो अफ़्साना जिसे अंजाम तक लाना न हो मुमकिन..........उसे इक ख़ूबसूरत मोड़ दे कर छोड़ना अच्छा''कई बार हर रिश्ते से पवित्र और सुखद दोस्ती का रिश्ता भी बिछड़ कर मिल ही जाता है , और ईश्वर कब कहाँ और कैसे इसकी रंगों के परत को उड़ा और कब कहाँ भर देता है इसका किसी को पता भी नही चलता है । ... Read more
clicks 15 View   Vote 0 Like   4:55pm 19 Apr 2021 #
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
सजन मत प्यास अधूरी छोड़।नहीं कोमल मन मेरा तोड़।।बहुत ही तड़पी करके याद।सुनो अब तो तुम अंतर्नाद।।सदा तारे गिन काटी रात।बादलों से करती थी बात।।रही मैं रोज चाँद को ताक।कलेजा होता रहता खाक।।मिलन रुत आई बरसों बाद।हृदय में छाया अति आह्लाद।।बजा इस वीणा का हर तार।बहा दो आज ने... Read more
clicks 143 View   Vote 0 Like   11:53am 11 Apr 2021 #शृंगार छंद
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
कुछ अनकही सी …………!: ख्वाब: नन्ही  नन्ही आँखों के वो नन्हे से ख्वाब सुनहरे थे कुछ बिखरे कुछ सवरे जो भी थे वो थे मेरे अपने थे नन्हे से घरोंदें में तेरे मेरे ही दिन ...... Read more
clicks 77 View   Vote 0 Like   6:16pm 6 Apr 2021 #
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
इवा .....इवा .....(अन्या अपने पति और बेटे के साथ लाउंज की ओर जा रही थी क्यूँकि अभी उसकी फ़्लाइट के जाने में समय था ) अन्या ने पीछे मुड़कर देखा और सोचा यहाँ एयरपोर्ट पर उसे उसके बचपन के नाम से कौन उसे पुकार सकता है भला .......हो सकता है किसी और का कोई नाम ले रहा हो .....इवा .....इवा ....मैं आपको ... Read more
clicks 17 View   Vote 0 Like   10:36pm 1 Apr 2021 #
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
 अनुभूतियाँ :  07 1 प्रेम स्नेह जब रिक्त हो गयाप्रणय-दीप यह जलता कब तक?रात अभी पूरी बाक़ी है बिन बाती यह चलता कब तक? 2दुष्कर थीं पथरीली राहें-हठ था कि तुम साथ चलोगी।कितना तुम को समझाया था,हर ठोकर पर हाथ मलोगी। 3जीवन पथ का राही हूँ मैं,एक अकेला कई रूप में ।आजीवन चलता रहत... Read more
clicks 203 View   Vote 0 Like   5:37am 31 Mar 2021 #
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
सम्हल द्रोपदी शस्त्र उठ अबकोई कृष्ण न आएगारणचंडी तू बनकर दिखा अब।वार न खाली जाएगा।अबला समझ के तुझको सबनेनिशदिन बहुत सताया है।बेटी के शत्रु बन बैठे सब,बेटों पे दिल आया हैउठो द्रोपदी शस्त्र....।।किसका मुंह देखे तू बैठी,कोई ना अब आएगा।स्वयं करेगी अपनी रक्षा,मान तभी बच पा... Read more
clicks 35 View   Vote 0 Like   5:26am 8 Mar 2021 #
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
 अनुभूतियाँ 051सच ही कहा था तुम ने उस दिन, "जा तो रही हूँ  सजल नयन से"छन्द छन्द में उभरूँगी मैं,  गीत लिखोगे कभी लगन से। "2सुख-दुख का ताना-बाना है,जीवन है रंगीन  चदरिया ।नयनो के जल से धोता हूँ,हँसी खुशी यह कटे उमरिया।3बरसों से सच समझ रहे थे ,लेकिन वह था भरम हमारा।भला कि... Read more
clicks 55 View   Vote 0 Like   5:11am 6 Mar 2021 #
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
 अनुभूतियाँ 04  01क़तरा क़तरा दर्द हमारा,हर क़तरे में एक कहानी ।शामिल है इसमे दुनिया कीमिलन-विरह की कथा पुरानी । 02जब से छोड़ गई तुम मुझ कोसूना दिल का  कोना कोना ।कब तक साथ भला तुम चलती,आज नहीं तो कल था होना ।  03इतना सितम न ढाओ मुझ परटूट गया तो जुड़ न सकूँगा ।लाख करोगी को... Read more
clicks 32 View   Vote 0 Like   5:43am 19 Feb 2021 #
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
 [*आज 16-फ़रवरी ,वसंत पंचमी और ’सरस्वती पूजन’ का दिन ।इस शुभ अवसर पर रचना प्रस्तुत कर रहा हूँ* । आशीर्वादाकांक्षी हूँ । सरस्वती वंदनाहंसवाहिनी ! ज्ञानदायिनी ! ज्ञान कलश भर दे !माँ शारदे वर दे ।मिटे तमिस्रा कल्मष मन कामन निर्मल कर दो जन जन कावीणापाणी ! सिर पर मेरे,वरद हस्त धर... Read more
clicks 51 View   Vote 0 Like   6:19am 16 Feb 2021 #
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
 एक व्यंग्य व्यथा :  वैलेन्टाइन डे -3 इस 3- से आप ’पानीपत का "तीसरा"युद्ध न समझ लें । हालाँकि नव संस्कृति के नए दौर में  ’वैलेन्टाइन डे"मनाना किसी पानीपत के युद्ध से कम भी नहीं  ,जहाँ एक तरफ़ नए नए प्रेमी जोड़े लड़के-लड़कियाँ -दूसरी तरफ़ संस्कृति के ठेकेदार. प्रशासन, पुलिस ... Read more
clicks 48 View   Vote 0 Like   6:32am 14 Feb 2021 #
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
हर सू बीमारी नहीं तो और क्या है दोस्तो,ज़िंदगी भारी नहीं तो और क्या है दोस्तो।रोग से रिश्वत के कोई अब नहीं महफ़ूज़ है,ये महामारी नहीं तो और क्या है दोस्तो।सर छुपाने को न छत है, लोग भूखे सो रहे,मुफ़लिसी ज़ारी नहीं तो और क्या है दोस्तो।नारियाँ अस्मत को बेचें, भीख बच्चे माँगते,घो... Read more
clicks 50 View   Vote 0 Like   2:13pm 12 Feb 2021 #
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
 चन्द माहिए:1:दुनिया को दिखाना क्या !दिल न मिलाना तो,फिर हाथ मिलाना क्या ! :2:क्या तुम को ख़बर भी है ?मेरे इस दिल में,इक शौक़-ए-नज़र भी है । :3:गुरबत में हो जब दिल,दर्द कहूँ किस से ?कहना भी है मुश्किल । :4;अनबन हो भले जानमतुम पे भरोसा हैरुठा न करो, हमदम !5कहता है कहने दो,बातें ज़ाहिद कीज़ा... Read more
clicks 50 View   Vote 0 Like   10:54am 11 Feb 2021 #
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
                                     एक व्यंग्य व्यथा : सम्मान करा लो---जाड़े की गुनगुनी धूप । गरम चाय की पहली चुस्की --कि मिश्रा जी चार आदमियों के साथ आ धमके।-पाठक जी ! इनसे मिलिए --ये हैं फ़लाना जी--ये हैं हिरवाना जी--ये सरदाना जी--और ये हैं--मकवाना जी-’ मिश्रा जी ने ... Read more
clicks 51 View   Vote 0 Like   6:39am 3 Feb 2021 #
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
फरवरी का महीना ख़ुद में ही सारे रंगों से सराबोर होता है और इस समय प्रकृति धरती को नए सौंदर्य से भर देती है । पेड़ों और पौधों में नयी कोपलें फूटती हैं, आम के पेड़ बौरों से लद जाते हैं, खेत सरसों के फूलों से भरे पीले दिखाई देते हैं अतः राग रंग और उत्सव मनाने के लिए मन भी उत्स... Read more
clicks 47 View   Vote 0 Like   10:47am 29 Jan 2021 #
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
 वीर शहीदों की कुर्बानी याद रहे चिरकाल तक।तिरंगे की अमर कहानी गूँजे हर एक माथ तक।आज राष्ट्रगान गूँजा हैभविष्य बस  यशगान हो।तिरंगे की तीन छटा -सा समृद्धि ,प्रीति ,सम्मान हो। गणतंत्र की हर सुबह में  एक संदेशा याद रहे।कल भी पैदा होंगे भेदी वह निर्बल असहाय ... Read more
clicks 43 View   Vote 0 Like   6:06am 26 Jan 2021 #
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
 सुनो ....क्या कहकर पुकारूं तुम्हे ?चित्रकार ?कि उकेरती है तुम्हारी उंगलियां कितने ही प्रणय के चित्र मेरी देह पे ...या कहूंजुलाहा तुम्हे   मैं?कि तुम्हारे स्पर्श मात्र से उग आती है कितनी ही कहानियां मेरी देह पे तुम कहो तो कहूं एक आखेटक  तुम्हे ...ज... Read more
clicks 56 View   Vote 0 Like   9:35am 23 Jan 2021 #
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
 चन्द माहिए:1:सजदे में इधर हैं हमऔर उधर दिल हैदर पर तेरे जानम;2;जब से है तुम्हें देखादिल ने कब मानीकोई लछ्मन  रेखा:3:क्या बात हुई ऐसीदिल में अब तेरेचाहत न रही वैसी:4:समझो न ये पानी हैक़तरा आँसू काख़ुद एक कहानी है5इक राह अनोखी हैजाना है सब कोपर किसने देखी है ?-आनन्द पाठक-... Read more
clicks 101 View   Vote 0 Like   6:54am 22 Jan 2021 #
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
 एक हास्य-व्यथा  : दीदी ! नज़र रखना "ट्रिन! ट्रिन !ट्रिन !-फोन की घंटी बजी और श्रीमती ने आदतन फ़ोन उठाया।कहते हैं श्रीमती जी फ़ोन सुनती नहीं, ’सूँघती’ है और समझ लेती हैं कि किसका  होगा।"हाँ  बिल्लो बोल  !""क्या दीदीऽऽ! तुम भी न! अरे ;बिल्लो नहीं --बिट्टो बोल रही हूँ।बिट्टो... Read more
clicks 38 View   Vote 0 Like   5:34am 15 Jan 2021 #
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
एक गीततुम चाहे जितने पहरेदार बिठा दोदो नयन मिले तो भाव एक रहते हैं    दो दिल ने कब माना है जग का बन्धन  नव सपनों का करता  रहता आलिंगन  जब युगल कल्पना मूर्त रूप  लेती हैं  मन ऐसे महका करते  ,जैसे चन्दनजब उच्छवासों में युगल प्राण घुल जातेतब मन के अन्तर्भाव  एक... Read more
clicks 129 View   Vote 0 Like   5:49am 9 May 2020 #
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
एक ग़ज़ल : मेरे जानाँ --मेरे जानाँ ! न आजमा  मुझकोजुर्म किसने किया ,सज़ा मुझकोजिन्दगी तू ख़फ़ा ख़फ़ा क्यूँ है ?क्या है मेरी ख़ता ,बता  मुझकोयूँ तो कोई नज़र नहीं  आताकौन फिर दे रहा सदा मुझकोनासबूरी की इंतिहा क्या  हैज़िन्दगी तू ही अब बता मुझकोहोश फिर उम्र भर  नहीं आ... Read more
clicks 173 View   Vote 0 Like   6:53am 1 May 2020 #
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
गीतापार्थ उठाओ शस्त्र तुम,करो अधर्म का अंत।रणभूमि में कृष्ण कहे,गीता ज्ञान अनंत।।कर्मयोग के ज्ञान का,अनुपम दे संदेश।गीता जीवन सार है,जिससे कटते क्लेश।।पतवारसाहस की पतवार हो,संकल्पों को थाम।पाना अपने लक्ष्य को,करना अपना नाम।।अक्षरअक्षर अच्युत अजर हैं, कण-कण में वि... Read more
clicks 107 View   Vote 0 Like   9:03am 27 Apr 2020 #
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
एक व्यंग्य :: हुनर सीख लो ----’मेम सा’ब-आज मैं काम पर आने को नी ।महीने भर को गाँव जा री हूं। मेरा हिसाब कर के ’चेक’ गाँव भिजवा देना-’- कामवाली बाई ने अपनी अक्टिवा स्कूटर पर बैठे बैठे ही मोबाईल से फोन किया ।मेम साहब के पैरों तले ज़मीन खिसक गई -अरे सुन तो ! तू है किधर अभी?’’मेम साहब !... Read more
clicks 115 View   Vote 0 Like   1:00pm 24 Apr 2020 #
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
--रंग-मंच है जिन्दगी, अभिनय करते लोग।नाटक के इस खेल में, है संयोग-वियोग।।--विद्यालय में पढ़ रहे, सभी तरह के छात्र।विद्या के होते नहीं, अधिकारी सब पात्र।।--आपाधापी हर जगह, सभी जगह सरपञ्च।।रंग-मंच के क्षेत्र में, भी है खूब प्रपञ्च।।--रंग-मंच भी बन गया, जीवन का जंजाल।भोली चिड़... Read more
clicks 192 View   Vote 0 Like   1:22am 27 Mar 2020 #रंग-मंच है जिन्दगी
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
एक व्यंग्य : तालाब--मेढक---- मछलियाँ गाँव में तालाब । तालाब में मेढकऔर मछलियाँ ।और मगरमच्छ भी । गाँव क्या ? "मेरा गाँव मेरा देश ’ही समझ लीजिए।मछलियों ने मेढकों को वोट दिया और ’अलाना’ पार्टी बहुमत के पास पहुँचते पहुँचते रह गई । गोया क़िस्मत की देखो ख़ूबी ,टूटी कहाँ कमंददो-चार... Read more
clicks 128 View   Vote 0 Like   6:20am 17 Mar 2020 #
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