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Blog: आपका ब्लॉग

Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
 एक ग़ज़लअभी नाज़-ए-बुतां देखूँ  कि ज़ख़्मों के निशाँ देखूँ ,मिले ग़म से ज़रा फ़ुरसत तो फिर कार-ए-जहाँ देखूँ।    मसाइल हैं अभी बाक़ी ,मसाइब भी कहाँ कम हैं ,ज़मीं पर हो जो नफ़रत कम तो फिर मैं आसमाँ देखूँ ।  जो देखा ही नहीं तुमने , वहाँ की बात क्या ज़ाहिद !यहीं जन्नत ,यहीं दोज़ख़ मैं ... Read more
clicks 0 View   Vote 0 Like   5:20am 15 Sep 2021 #
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
 कुछ अनुभूतियाँ : क़िस्त 11 1दो बरतन जब पास पास होंलाजिम उनका टकराना है।छोड़ो छॊटी-मोटी बातें -बोलो वापस कब आना है ? 2दशकों का था साथ पुराना,चाँदी से तुम मोल लगाए ।सत्य यही है अगर तुम्हारातो फिर कौन तुम्हें समझाए?  3चाँद सितारों वाली बातें, लिख्खी हुई किताबों में हैं। च... Read more
clicks 4 View   Vote 0 Like   4:40am 11 Sep 2021 #
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
 कभी वक्त मिले तो,बतलाना तुमसुदूर क्षितिज पेआ जाना तुम...वहां चांद की रंगतपीली होगीऔर फलक की चादर कुछ नीली होगी जब रात ढलेऔर सुबह चले धूप  को उबटन लगाना तुम  आ जाना तुम वहां ओस भी कुछ कुछ गीली होगी और हवा भी कुछ कुछसीली होगी सावन मचले और बारिश छलके&nb... Read more
clicks 99 View   Vote 0 Like   4:16pm 30 Aug 2021 #
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
सोरठा छंद "राम महिमा"मंजुल मुद आनंद, राम-चरित कलि अघ हरण।भव अधिताप निकंद, मोह निशा रवि सम दलन।।हरें जगत-संताप, नमो भक्त-वत्सल प्रभो।भव-वारिध के आप, मंदर सम नगराज हैं।।शिला और पाषाण, राम नाम से तैरते।जग से हो कल्याण, जपे नाम रघुनाथ का।।जग में है अनमोल, विमल कीर्ति प्रभु र... Read more
clicks 49 View   Vote 0 Like   6:06am 5 Aug 2021 #सोरठा छंद
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
अनुभूतियाँ : क़िस्त 08 1दोनों के जब दर्द एक हैं,फिर क्यों दिल से दिल की दूरीएक साथ चलने में क्या है ,मिलने में हैं क्या मजबूरी ? 2रात रात भर तारे किस की ,देखा करते  राह निरन्तर  ?और जलाते रहते ख़ुद कोआग बची जो दिल के अन्दर । 3कितनी बार हुई नम आँखें,लेकिन बहने दिया न मैने।श... Read more
clicks 26 View   Vote 0 Like   1:17pm 19 Jun 2021 #
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
 कहानियां ....सुनाएगा जमाना कुछ कहानियां ...वक्त के धारों कीबहते किनारों की कहानियां ...कहानियां..कहानियां ...जब हम मिले थे पहले दिल धड़का हौले हौलेशोर उठा फिर मुझमें ढूंढूं मैं खुद को तुझमें इश्क़ ने   कोई दस्तक दी थी ख्वाबों में शिरकत की थी इश्क़ में .....इश... Read more
clicks 34 View   Vote 0 Like   11:35am 3 Jun 2021 #
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
 थोड़ा सा मिल जाए  आसमांथोड़ी सी मांगू मैं जमींपानी सी कल कल बह चलूं गर किनारे हो जाए हमनशी....I wanna paint  town ,all red I wanna do  all  I  have said I wanna be, in your arms I  wanna feel all your calm थोड़ा सा मिल जाए आसमान थोड़ी सी मांगू मैं जमीन ...जबसे मिले हो हमनवां देखो देखो दिल  ये उड़ चला है ख्वाहिशे... Read more
clicks 31 View   Vote 0 Like   6:32pm 12 May 2021 #
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
नेता बने जब से ही गाँव के ये लप्पूजी,राजनीति में भी वे चलाने लगे चप्पूजी।बेसुरी अलापै राग,सुन सभी जावै भाग।लगे हैं ये कहलाने तब से ही भप्पूजी।।बासुदेव अग्रवाल 'नमन'तिनसुकिया... Read more
clicks 84 View   Vote 0 Like   11:25am 4 May 2021 #बासुदेव अग्रवाल 'नमन'
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
''वो अफ़्साना जिसे अंजाम तक लाना न हो मुमकिन..........उसे इक ख़ूबसूरत मोड़ दे कर छोड़ना अच्छा''कई बार हर रिश्ते से पवित्र और सुखद दोस्ती का रिश्ता भी बिछड़ कर मिल ही जाता है , और ईश्वर कब कहाँ और कैसे इसकी रंगों के परत को उड़ा और कब कहाँ भर देता है इसका किसी को पता भी नही चलता है । ... Read more
clicks 45 View   Vote 0 Like   4:55pm 19 Apr 2021 #
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
सजन मत प्यास अधूरी छोड़।नहीं कोमल मन मेरा तोड़।।बहुत ही तड़पी करके याद।सुनो अब तो तुम अंतर्नाद।।सदा तारे गिन काटी रात।बादलों से करती थी बात।।रही मैं रोज चाँद को ताक।कलेजा होता रहता खाक।।मिलन रुत आई बरसों बाद।हृदय में छाया अति आह्लाद।।बजा इस वीणा का हर तार।बहा दो आज ने... Read more
clicks 202 View   Vote 0 Like   11:53am 11 Apr 2021 #शृंगार छंद
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
कुछ अनकही सी …………!: ख्वाब: नन्ही  नन्ही आँखों के वो नन्हे से ख्वाब सुनहरे थे कुछ बिखरे कुछ सवरे जो भी थे वो थे मेरे अपने थे नन्हे से घरोंदें में तेरे मेरे ही दिन ...... Read more
clicks 136 View   Vote 0 Like   6:16pm 6 Apr 2021 #
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
इवा .....इवा .....(अन्या अपने पति और बेटे के साथ लाउंज की ओर जा रही थी क्यूँकि अभी उसकी फ़्लाइट के जाने में समय था ) अन्या ने पीछे मुड़कर देखा और सोचा यहाँ एयरपोर्ट पर उसे उसके बचपन के नाम से कौन उसे पुकार सकता है भला .......हो सकता है किसी और का कोई नाम ले रहा हो .....इवा .....इवा ....मैं आपको ... Read more
clicks 55 View   Vote 0 Like   10:36pm 1 Apr 2021 #
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
 अनुभूतियाँ :  07 1 प्रेम स्नेह जब रिक्त हो गयाप्रणय-दीप यह जलता कब तक?रात अभी पूरी बाक़ी है बिन बाती यह चलता कब तक? 2दुष्कर थीं पथरीली राहें-हठ था कि तुम साथ चलोगी।कितना तुम को समझाया था,हर ठोकर पर हाथ मलोगी। 3जीवन पथ का राही हूँ मैं,एक अकेला कई रूप में ।आजीवन चलता रहत... Read more
clicks 282 View   Vote 0 Like   5:37am 31 Mar 2021 #
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
सम्हल द्रोपदी शस्त्र उठ अबकोई कृष्ण न आएगारणचंडी तू बनकर दिखा अब।वार न खाली जाएगा।अबला समझ के तुझको सबनेनिशदिन बहुत सताया है।बेटी के शत्रु बन बैठे सब,बेटों पे दिल आया हैउठो द्रोपदी शस्त्र....।।किसका मुंह देखे तू बैठी,कोई ना अब आएगा।स्वयं करेगी अपनी रक्षा,मान तभी बच पा... Read more
clicks 69 View   Vote 0 Like   5:26am 8 Mar 2021 #
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
 अनुभूतियाँ 051सच ही कहा था तुम ने उस दिन, "जा तो रही हूँ  सजल नयन से"छन्द छन्द में उभरूँगी मैं,  गीत लिखोगे कभी लगन से। "2सुख-दुख का ताना-बाना है,जीवन है रंगीन  चदरिया ।नयनो के जल से धोता हूँ,हँसी खुशी यह कटे उमरिया।3बरसों से सच समझ रहे थे ,लेकिन वह था भरम हमारा।भला कि... Read more
clicks 85 View   Vote 0 Like   5:11am 6 Mar 2021 #
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
 अनुभूतियाँ 04  01क़तरा क़तरा दर्द हमारा,हर क़तरे में एक कहानी ।शामिल है इसमे दुनिया कीमिलन-विरह की कथा पुरानी । 02जब से छोड़ गई तुम मुझ कोसूना दिल का  कोना कोना ।कब तक साथ भला तुम चलती,आज नहीं तो कल था होना ।  03इतना सितम न ढाओ मुझ परटूट गया तो जुड़ न सकूँगा ।लाख करोगी को... Read more
clicks 60 View   Vote 0 Like   5:43am 19 Feb 2021 #
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
 [*आज 16-फ़रवरी ,वसंत पंचमी और ’सरस्वती पूजन’ का दिन ।इस शुभ अवसर पर रचना प्रस्तुत कर रहा हूँ* । आशीर्वादाकांक्षी हूँ । सरस्वती वंदनाहंसवाहिनी ! ज्ञानदायिनी ! ज्ञान कलश भर दे !माँ शारदे वर दे ।मिटे तमिस्रा कल्मष मन कामन निर्मल कर दो जन जन कावीणापाणी ! सिर पर मेरे,वरद हस्त धर... Read more
clicks 98 View   Vote 0 Like   6:19am 16 Feb 2021 #
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
 एक व्यंग्य व्यथा :  वैलेन्टाइन डे -3 इस 3- से आप ’पानीपत का "तीसरा"युद्ध न समझ लें । हालाँकि नव संस्कृति के नए दौर में  ’वैलेन्टाइन डे"मनाना किसी पानीपत के युद्ध से कम भी नहीं  ,जहाँ एक तरफ़ नए नए प्रेमी जोड़े लड़के-लड़कियाँ -दूसरी तरफ़ संस्कृति के ठेकेदार. प्रशासन, पुलिस ... Read more
clicks 89 View   Vote 0 Like   6:32am 14 Feb 2021 #
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
हर सू बीमारी नहीं तो और क्या है दोस्तो,ज़िंदगी भारी नहीं तो और क्या है दोस्तो।रोग से रिश्वत के कोई अब नहीं महफ़ूज़ है,ये महामारी नहीं तो और क्या है दोस्तो।सर छुपाने को न छत है, लोग भूखे सो रहे,मुफ़लिसी ज़ारी नहीं तो और क्या है दोस्तो।नारियाँ अस्मत को बेचें, भीख बच्चे माँगते,घो... Read more
clicks 90 View   Vote 0 Like   2:13pm 12 Feb 2021 #
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
 चन्द माहिए:1:दुनिया को दिखाना क्या !दिल न मिलाना तो,फिर हाथ मिलाना क्या ! :2:क्या तुम को ख़बर भी है ?मेरे इस दिल में,इक शौक़-ए-नज़र भी है । :3:गुरबत में हो जब दिल,दर्द कहूँ किस से ?कहना भी है मुश्किल । :4;अनबन हो भले जानमतुम पे भरोसा हैरुठा न करो, हमदम !5कहता है कहने दो,बातें ज़ाहिद कीज़ा... Read more
clicks 86 View   Vote 0 Like   10:54am 11 Feb 2021 #
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
                                     एक व्यंग्य व्यथा : सम्मान करा लो---जाड़े की गुनगुनी धूप । गरम चाय की पहली चुस्की --कि मिश्रा जी चार आदमियों के साथ आ धमके।-पाठक जी ! इनसे मिलिए --ये हैं फ़लाना जी--ये हैं हिरवाना जी--ये सरदाना जी--और ये हैं--मकवाना जी-’ मिश्रा जी ने ... Read more
clicks 91 View   Vote 0 Like   6:39am 3 Feb 2021 #
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
फरवरी का महीना ख़ुद में ही सारे रंगों से सराबोर होता है और इस समय प्रकृति धरती को नए सौंदर्य से भर देती है । पेड़ों और पौधों में नयी कोपलें फूटती हैं, आम के पेड़ बौरों से लद जाते हैं, खेत सरसों के फूलों से भरे पीले दिखाई देते हैं अतः राग रंग और उत्सव मनाने के लिए मन भी उत्स... Read more
clicks 76 View   Vote 0 Like   10:47am 29 Jan 2021 #
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
 वीर शहीदों की कुर्बानी याद रहे चिरकाल तक।तिरंगे की अमर कहानी गूँजे हर एक माथ तक।आज राष्ट्रगान गूँजा हैभविष्य बस  यशगान हो।तिरंगे की तीन छटा -सा समृद्धि ,प्रीति ,सम्मान हो। गणतंत्र की हर सुबह में  एक संदेशा याद रहे।कल भी पैदा होंगे भेदी वह निर्बल असहाय ... Read more
clicks 81 View   Vote 0 Like   6:06am 26 Jan 2021 #
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
 सुनो ....क्या कहकर पुकारूं तुम्हे ?चित्रकार ?कि उकेरती है तुम्हारी उंगलियां कितने ही प्रणय के चित्र मेरी देह पे ...या कहूंजुलाहा तुम्हे   मैं?कि तुम्हारे स्पर्श मात्र से उग आती है कितनी ही कहानियां मेरी देह पे तुम कहो तो कहूं एक आखेटक  तुम्हे ...ज... Read more
clicks 86 View   Vote 0 Like   9:35am 23 Jan 2021 #
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
 चन्द माहिए:1:सजदे में इधर हैं हमऔर उधर दिल हैदर पर तेरे जानम;2;जब से है तुम्हें देखादिल ने कब मानीकोई लछ्मन  रेखा:3:क्या बात हुई ऐसीदिल में अब तेरेचाहत न रही वैसी:4:समझो न ये पानी हैक़तरा आँसू काख़ुद एक कहानी है5इक राह अनोखी हैजाना है सब कोपर किसने देखी है ?-आनन्द पाठक-... Read more
clicks 144 View   Vote 0 Like   6:54am 22 Jan 2021 #
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