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Blog: ललितडॉटकॉम

Blogger: ललित शर्मा
जब भी बस्तर जाना होता है तब बस्तरिया खाना, पेय पदार्थ का स्वाद लेने का मन हो ही जाता है, चाहे, लांदा हो, सल्फ़ी हो या छिंदरस। बस्तर की संस्कृति पहचान ही अलग है। गत बस्तर यात्रा के दौरान अंचल के विशेष पेय पदार्थ एवं भोजन विकल्प सल्फी का रस तथा चावल का लांदा का स्वाद लिया गया।... Read more
clicks 174 View   Vote 0 Like   7:01pm 1 Oct 2018 #बस्तर
Blogger: ललित शर्मा
अमरकंटक मेकलसुता रेवा का उद्गम स्थल है, यह पुण्य स्थली प्राचीन काल से ही ॠषि मुनियों की साधना स्थली रही है। वैदिक काल में महर्षि अगस्त्य के नेतृत्व में ‘यदु कबीला’ इस क्षेत्र में आकर बसा और यहीं से इस क्षेत्र में आर्यों का आगमन शुरू हुआ।  वैदिक ग्रंथों के अनुसार विश... Read more
clicks 134 View   Vote 0 Like   10:30pm 11 Jan 2018 #इतिहास
Blogger: ललित शर्मा
छत्तीसगढ़ अंचल की प्राकृतिक सुंदरता का कोई सानी नहीं है। नदी, पर्वत, झरने, गुफ़ाएं-कंदराएं, वन्य प्राणी आदि के हम स्वयं को प्रकृति के समीप पाते हैं। अंचल के सरगुजा क्षेत्र पर प्रकृति की विशेष अनुकम्पा है, चारों तरफ़ हरितिमा के बीच प्राचीन स्थलों के साथ रमणीय वातावरण मनुष... Read more
clicks 160 View   Vote 0 Like   11:00pm 10 Jan 2018 #पुरातत्व
Blogger: ललित शर्मा
अमरकंटक मेकलसुता रेवा का उद्गम स्थल है, यह पुण्य स्थली प्राचीन काल से ही ॠषि मुनियों की साधना स्थली रही है। वैदिक काल में महर्षि अगस्त्य के नेतृत्व में ‘यदु कबीला’ इस क्षेत्र में आकर बसा और यहीं से इस क्षेत्र में आर्यों का आगमन शुरू हुआ। वैदिक ग्रंथों के अनुसार विश्वा... Read more
clicks 143 View   Vote 0 Like   11:00pm 9 Jan 2018 #कर्ण मंदिर
Blogger: ललित शर्मा
छत्तीसगढ़ के बालोद जिला मुख्यालय से लगभग दस किमी दूर दिसम्बर 2010 में एक गांव में कुम्हार परिवार से मिलने गया था। गांव का नाम भूल रहा हूँ। उस कुम्हार ने मिट्टी के भाण्डों को नवोन्मेष कर नया रुप दिया था।  उपरोक्त चित्र में दिख रहा मिट्टी का कूकर उसने तैयार किया था, जो धातु... Read more
clicks 150 View   Vote 0 Like   11:00pm 8 Jan 2018 #लेख
Blogger: ललित शर्मा
चतुर शिल्पकार वही होता है जो निर्माण सामग्री व्यर्थ न होने दे। ऐसी ही कुछ शिल्पकार की चतुराई हमें हम्पी के विट्ठल मंदिर स्थित विष्णु रथ में दिखाई देती है। विष्णु रथ का निर्माण एकाश्म शिला की बजाय पृथक पृथक खंड में हुआ है। जैसे #काष्ठ रथ का निर्माण होता है उसी तरह प्रस्... Read more
clicks 171 View   Vote 0 Like   11:00pm 7 Jan 2018 #हम्पी विष्णुरथ
Blogger: ललित शर्मा
मल्हार नगर छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में अक्षांक्ष 21 90 उत्तर तथा देशांतर 82 20 पूर्व में 32 किलोमीटर की दूरी पर दक्षिण-पश्चिम में स्थित है। बिलासपुर से रायगढ़ जाने वाली सड़क पर 18 किलोमीटर दूर मस्तूरी है। मल्हार की मौर्यकालीन अद्भुत  विष्णु प्रतिमा  वहां से मल्हार, 14 कि. मी. द... Read more
clicks 168 View   Vote 0 Like   10:00pm 6 Jan 2018 #मल्हार
Blogger: ललित शर्मा
पंख झाड़ चुका मोर, यह चित्र मध्य नवम्बर माह में पुष्कर राजस्थान के पास अजयपाल के मंदिर के समीप का है। इस समय मोर अपने सारे पंख झाड़ चुका था और नए पंख निकल रहे थे।  वैसे वर्ष में एक बार अगस्त माह के आस पास मोर अपने सारे पंख झाड़ देता है और ग्रीष्म काल आते तक उसके सारे पंख पुन: ... Read more
clicks 145 View   Vote 0 Like   10:30pm 5 Jan 2018 #राष्ट्रीय पक्षी मोर
Blogger: ललित शर्मा
प्राचीन शिल्प में विश्राम हेतु बाजवट/खाट या शय्या प्रयोग दिखाई देता है। खाट या शय्या का मनुष्य के दैनिक जीवन में कब से प्रवेश हुआ, इसकी जानकारी तो स्पष्ट रुप से नहीं है, परन्तु शिल्पांकन में अवश्य दिखाई देती है।   खजुराहो के लक्ष्मण मंदिर की भित्ति शिल्पांकन में शय्य... Read more
clicks 132 View   Vote 0 Like   10:30pm 4 Jan 2018 #शय्या खाट
Blogger: ललित शर्मा
प्राचीनकाल के मंदिरों की भित्ति में जड़ित प्रतिमाओं से तत्कालीन सामाजिक गतिविधियाँ एवं कार्य ज्ञात होते हैं। शिल्पकारों ने इन्हें प्रमुखता से उकेरा है। इन प्रतिमाओं से तत्कालीन समाज में स्त्रियों के कार्य, दिनचर्या एवं मनोरंजन के साधनों का भी पता चलता है।   कंदुक ... Read more
clicks 142 View   Vote 0 Like   11:00pm 3 Jan 2018 #स्त्री मनोविनोद
Blogger: ललित शर्मा
शिकार द्वारा मनोरंजन वैदिक काल से समाज में विद्यमान रहा है एवं प्राचीन काल के मनोरंजन के साधनों का अंकन मंदिरों की भित्तियों में दिखाई देता है। मंदिरों की भित्तियों में अंकित प्रतिमाओं से ज्ञात होता है कि प्राचीन काल के समाज में किस तरह के मनोरंजन के साधन प्रचलित थे... Read more
clicks 118 View   Vote 0 Like   10:00pm 2 Jan 2018 #पुरातत्व
Blogger: ललित शर्मा
सौंदर्य के प्रति मानव प्राचीन काल से ही सजग रहा है, देह के अलंकरण में उसने कोई कोर कसर नहीं छोड़ी एवं नख सिख से लेकर गुह्यांग तक अलंकरण करने के लिए नवोन्मेष किए। सौंदर्य वृद्धि के लिए किए गए भिन्न भिन्न अलंकरण हमें तत्कालीन प्रतिमा शिल्प में दिखाई देते हैं।   क्या मुखड़... Read more
clicks 169 View   Vote 0 Like   10:30pm 1 Jan 2018 #पुरातत्व
Blogger: ललित शर्मा
अरसे से मृतप्राय ब्लॉगजगत को एक बार पुनः जीवन देने का आह्वान पुराने ब्लॉगरों ने फेसबुक के माध्यम से किया। इस आह्वान पर कुछ ब्लॉगरों ने ध्यान दिया और एक जुलाई को पोस्ट भी लगाकर श्रीगणेश भी किया। मेरे व्यक्तिगत संकलक के हिसाब से चौबीस घंटों में 70 ब्लॉग अपडेट भी हुए। कु... Read more
clicks 131 View   Vote 0 Like   11:00pm 31 Dec 2017 #हिन्दी ब्लॉग
Blogger: ललित शर्मा
तीखे तीखे नयन…। नायिका के नयनों की सुंदरता का वर्णन करते हुए कवियों ने खूब कागज काले किए एवं इन्हें विभिन्न उपमाओं से विभुषित किया। आँखे ही वह रास्ता है, जहाँ से कामदेव का प्रवेश हृदय में होता है और रोम रोम रोमांचित हो जाता है, लग जाती है लगन। कवि बिहारीे सुंदरियों के ऐ... Read more
clicks 142 View   Vote 0 Like   12:00am 30 Dec 2017 #पुरातत्व
Blogger: ललित शर्मा
खजुराहो के विश्वनाथ मंदिर में शिल्पकार ने स्त्री के पैर के तलुए में गड़ी शूल देखते एवं उसे निकालते हुए चिकित्सक का प्रदर्शन किया है। यह इस मंदिर का महत्वपूर्ण शिल्प है। घर-बार दैनिक जीवन में कार्य करते हुए शूल गड़ना सहज बात है, परन्तुं वह शूल किसी कोमलांगी को गड़ जाए तो उस... Read more
clicks 144 View   Vote 0 Like   12:00am 29 Dec 2017 #पुरात्त्व
Blogger: ललित शर्मा
वन मुर्गा जंगल सफ़ारी के दौरान कई बार दिखाई देता है, परन्तु आहट सुनकर जल्दी ही झाड़ियों में गायब हो जाता है। राजा जी नेशनल पार्क चिल्ला रेंज में दिखाई दिया और इसने फ़ोटो लेने का भरपूर अवसर भी दिया। अपने रंगों के प्रभाव के कारण यह बहुत सुंदर दिखाई देता है। वन मुर्गी धूसर रं... Read more
clicks 122 View   Vote 0 Like   4:19am 28 Dec 2017 #वन्य जीवन
Blogger: ललित शर्मा
बुंदेलखंड के दो प्राचीन नगर हैं, ओरछा एवं गढकुंढार। गढ कुंढार तो नहीं देख सके पर गत वर्ष पहाड़ों से लौटते हुए ओरछा जाना हुआ और इस वर्ष भी पहाड़ों से लौटते हुए ओरछा पहुंच गए। वैसे तो ओरछा का इतिहास 8 वीं सदी से प्रारंभ होता है, परन्तु यहां रौनक बुंदेलाओं के कार्यकाल में आई ए... Read more
clicks 142 View   Vote 0 Like   10:30pm 26 Dec 2017 #गढकुंढार
Blogger: ललित शर्मा
सद्यस्नाता नाभिदर्शना का खजुराहो के मंदिर शिल्पकला में अनुपम प्रदर्शन हैं। वह एक दौर था जब प्रतिमा शिल्प में देह सौष्ठव, वस्त्रादि अलंकरण एवं लावण्यता का विशेष ध्यान रखा जाता था।   मंदिर की भित्तियों पर दिनचर्या का विशेष तौर पर अंकन किया गया है। जिसमें स्नानोपरा... Read more
clicks 144 View   Vote 0 Like   12:00am 26 Dec 2017 #सद्यस्नाता नाभिदर्शना
Blogger: ललित शर्मा
वर्तमान में जल संकट का सामना ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर शहरों तक मनुष्य को करना पड़ रहा है। नदियाँ सूख रही हैं, कूप एवं तालाब सूख जाते हैं, बांधों में जल का स्तर कम हो जाता है, घर घर में बोरवेल के कारण भूजल का स्तर भी रसातल तक पहुंच रहा है। जहाँ दस हाथ की खुदाई से जल निकल आता थ... Read more
clicks 138 View   Vote 0 Like   11:00pm 24 Dec 2017 #लेख
Blogger: ललित शर्मा
छत्तीसगढ़ के राजनांदगाँव जिले के गंडई ग्राम में फणी नागवंशीकालीन 13 वीं शताब्दी का प्रस्तर निर्मित शिवालय है। इसकी बाह्य भित्तियों में प्रतिमा अलंकरण है। भित्तियों में विभिन्न पौराणिक प्रसंगों को लेकर बनाई गयी प्रतिमाएँ जड़ी हुई हैं। मोबाईल पर बात करती स्त्री  इ... Read more
clicks 118 View   Vote 0 Like   10:00pm 23 Dec 2017 #मोबाईल
Blogger: ललित शर्मा
सांप और नेवले की कहानी महाभारत से लेकर हितोपदेश तक उपलब्ध होती है। बचपन में सांप एवं नेवले की लड़ाई खूब देखी परन्तु वर्तमान में वन्य प्राणी कानून होने के बाद सांप एवं नेवले की लड़ाई दिखाने वाले दिखाई नहीं देते।  नारायणपुर (कसडोल-छत्तीसगढ़) के मंदिर की भित्ति में सांप एव... Read more
clicks 109 View   Vote 0 Like   10:30pm 22 Dec 2017 #सांप नेवला
Blogger: ललित शर्मा
प्रारंभ से पढें कुकुर कोटना से आगे बढ़ने पर मुझे सूखी हुई वह घास दिखाई दी, जिसे मेले ठेले में लोग संजीवनी बूटी कह कर बेचते हैं। यह सूखी घास पानी में डालने पर फ़िर से हरी हो जाती है। रामकुमार ने बताया कि इसे भठेलिया (लाल खरगोश) चारा कहते हैं, यह भठेलियों का भोजन है।  भालुओं क... Read more
clicks 184 View   Vote 0 Like   11:00pm 21 Dec 2016 #छत्तीसगढ़
Blogger: ललित शर्मा
प्रारंभ से पढें चलते-चलते बन्नु सिंह अपनी कथा कहता जा रहा था "मुझसे धनी कोई नहीं है, ये पत्थर देखो। एक-एक पत्थर कितना मंहगा है। ये पेड़ देखो, जिसे दीमक खा रही है, यह कितना मूल्यवान है। जंगल वाले ही सारा जंगल काट कर ले गए। अब तो जलाऊ के लायक भी लकड़ी नहीं दिखाई देती।  बन्नु सि... Read more
clicks 199 View   Vote 0 Like   11:00pm 20 Dec 2016 #छत्तीसगढ़
Blogger: ललित शर्मा
प्रारंभ से पढें,  भालु खांचा से आगे बढने पर घना जंगल प्रारंभ हो जाता है, पेड़ों पर लटकती लताओं की बेलें मोटी हो जाती हैं। दीमक की बांबियाँ आठ-दस फ़ुट ऊंची हो जाती हैं। इन बांबियों में सांपों का बसेरा रहता है और भालू भी इनके आस पास दीमकों की तलाश में पहुंचते हैं।  पदयात्रा ... Read more
clicks 173 View   Vote 0 Like   11:00pm 19 Dec 2016 #छत्तीसगढ़
Blogger: ललित शर्मा
प्रारम्भ से पढ़ें  कंकालीन मंदिर में पक्का हाल भी बना हुआ है, वहाँ रात काटने के लिए हमने रामकुमार से चर्चा की तो वह हमें स्थान देने के लिए तैयार हो गया और एक दरी हमारे सोने के लिए भी बिछा दी। रात बातचीत करते हुए सुबह का कार्यक्रम बनाते हुए गहरी होती गई।  सफ़र का साथी पोयाम ... Read more
clicks 158 View   Vote 0 Like   11:00pm 18 Dec 2016 #छत्तीसगढ़
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