POPULAR ENGLISH+ SIGNUP LOGIN

Blog: कहानियो के मन से .....

Blogger: vijay kumar sappatti
पारिजात के फूलभाग 1 – 1982 वह सर्दियों के दिन थे. मैं अपनी फैक्टरी से नाईट शिफ्ट करके बाहर निकला और पार्किंग से अपनी साइकिल उठाकर घर की ओर चल पड़ा. सुबह के 8:00 बज रहे थे. मैं अपने घर के सामने से गुजरा. मां दरवाजे पर खड़ी थी, मैंने मां को बोला ‘मां नहाने का पानी गरम कर दे और पुड़ी सब्... Read more
clicks 149 View   Vote 0 Like   5:00am 7 Oct 2017 #vijay sappatti
Blogger: vijay kumar sappatti
 तान्याआज : दोपहर १ बजे मैंने सारे बर्तन सिंक में डाले और उन्हें धोना शुरू किया. आज मन कुछ अच्छा नहीं था. सुबह से ही अनमना सा था. कोई भी काम सही तरह से नहीं हो पा रहा था. कभी कुछ छूट जाता था,कभी कुछ नहीं हो रहा था. एक अजीब सी खीझ भी हो रही थी. मन में ये कैसी उदासी थी, मैं कुछ समझ न... Read more
clicks 183 View   Vote 0 Like   3:54am 15 Apr 2017 #बेटी
Blogger: vijay kumar sappatti
  |||  मर्डर इन गीतांजलि एक्सप्रेस |||||| सुबह 8:30 |||नासिक |||मैंने उतावली आवाज़ में टैक्सी ड्राईवर से पुछा, “और कितनी देर लगेंगी।” उसने कहा – “साहब बस 30 मिनट में पहुंचा देता हूँ।”  मैंने घडी देखी, 8:40 हो रहे थे। मैंने झल्लाते हुए कहा – “यार 9:20 की गाडी है। थो... Read more
clicks 165 View   Vote 0 Like   9:20am 11 Mar 2017 #
Blogger: vijay kumar sappatti
ॐ गणपतये नम:भगवान शिव की कथा लिखना ! मुझ जैसे मामूली से इंसान के बस की बात नहीं है। ये मेरी सिर्फ एक छोटी सी कोशिश मात्र है। ये मेरी शिव भक्ति का एक रूप ही है। भगवान शिव के चरणों में मेरे शब्दों के पुष्प समर्पण ! मैं तो सिर्फ प्रस्तुत कर रहा हूँ। सब कुछ तो बहुत पहले से ही ... Read more
clicks 202 View   Vote 0 Like   1:56pm 23 Feb 2017 #पार्वती
Blogger: vijay kumar sappatti
डायल कुमार फॉर किलिंग : १४ जुलाई :उस दिन दोपहर से ही बारिश हो रही थी. उन दिनों मेरा मूड वैसे ही खराब रहता था. कोई नया काम नहीं मिल रहा था. रुपये पैसो के मामले में मैं परेशान था. मेरा जीवन भी क्या बेकार सा जीवन था. मैं लेखक था,और पूरी तरह से फ्लॉप था. करियर के प्रारम्भ में मैं खूब... Read more
clicks 182 View   Vote 0 Like   7:33am 18 Dec 2016 #डायल कुमार फॉर किलिंग
Blogger: vijay kumar sappatti
क्या तुम्हे सब याद है - उसने मुझसे पुछाहां ! मैंने कहा .एक गहरी सांस लेकर मैंने आगे कहा- वो भी जो हुआ और वो भी जो नहीं हुआउसने अपनी भीगी आँखों से मुझे देखामैंने उसकी तरफ से मुड़कर खुद की आँखों को पोछा !© विजय... Read more
clicks 223 View   Vote 0 Like   4:44am 3 Sep 2016 #vijay sappatti
Blogger: vijay kumar sappatti
तो हुआ यूँ कि एक मरे हुए देश में , एक जिंदा आदमी ने अपनी जिंदा पत्नी को एक सरकारी हॉस्पिटल में भर्ती किया . अब सरकारी हॉस्पिटल भी मरा हुआ ही था. सो वहाँ वो औरत भी मर गयी , अब ये जो जिंदा आदमी था , इसके पास तो खाने के भी पैसे नहीं थे . और हमारे मरे हुए देश का मरा हुआ सरकारी दवाखाना ... Read more
clicks 195 View   Vote 0 Like   12:08pm 28 Aug 2016 #
Blogger: vijay kumar sappatti
आलेख||| शिष्टाचार |||ईश्वर के द्वारा रचे गए इस संसार में सबसे अद्भुत प्राणी सिर्फ मनुष्य ही है. मनुष्य को ही ईश्वर ने ज्ञान और बुध्दि से नवाज़ा है ,ताकि वो अन्य सभी प्राणियों में श्रेष्ठ रहे . मनुष्य जैसे जैसे बढता गया वैसे वैसे उसके जीवन में आमूल परिवर्तन आये है . और इन्ही पर... Read more
clicks 253 View   Vote 0 Like   3:11am 18 May 2016 #आलेख
Blogger: vijay kumar sappatti
कल से इस छोटे से शहर में दंगे हो रहे थे. कर्फ्यू लगा हुआ था. घर,दूकान सब कुछ बंद थे. लोग अपने अपने घरो में दुबके हुए थे. किसी की हिम्मत नहीं थी कि बाहर निकले. पुलिस सडको पर थी.ये शहर छोटा सा था,पर हर ६ – ८ महीने में शहर में दंगा हो जाता था. हिन्दू और मुसलमान दोनों ही लगभग एक ही संख... Read more
clicks 209 View   Vote 0 Like   3:09pm 28 Feb 2016 #लघुकथा
Blogger: vijay kumar sappatti
बिहार के दरभंगा जिले के दो परिवार है . एक है भूमिहार और दूसरा क्षत्रिय. दोनों के परिवार एक दुसरे से अपरिचित है . दो अलग अलग जगहों में रहते है . दोनों के बच्चे शहर में जाकर एक ही कॉलेज में एडमिशन लेते है . भूमिहार परिवार का पुत्र का नाम राजेश है और क्षत्रिय परिवार की लड़की का न... Read more
clicks 243 View   Vote 0 Like   3:08pm 28 Feb 2016 #लघुकथा
Blogger: vijay kumar sappatti
आज शर्मा जी के घर में बड़ी रौनक थी,उनकी एकलौती बेटी ममता की शादी जो थी. बहुत से मेहमानों से घर भरा हुआ था,दरवाजे पर शहनाई बज रही थी,खुशियों का दौर था.शर्मा जी बड़े व्यस्त थे. फेरे हो रहे थे. बेटी की विदाई के बारे में सोच सोच कर ही शर्मा दम्पति का दिल दुःख जाता था. शर्मा जी की पत्... Read more
clicks 221 View   Vote 0 Like   3:07pm 28 Feb 2016 #लघुकथा
Blogger: vijay kumar sappatti
मैंने रेड सिग्नल पर अपनी स्कूटर रोकी . ये सिग्नल सरकारी हॉस्पिटल के पास था . उस जगह हमेशा बहुत भीड़  रहती थी. मरीज , बीमार, उनके रिश्तेदार और भी हर किस्म के लोगो की भीड़ हमेशा वहां रहती थी,अब चूँकि सरकारी हॉस्पिटल था तो गरीब लोग ही वहां ज्यादा दिखाई देते थे. अमीर किसी और महंग... Read more
clicks 211 View   Vote 0 Like   3:05pm 28 Feb 2016 #लघुकथा
Blogger: vijay kumar sappatti
||| जनम |||गोपाला ने अपना एक झोला और बैग लिया और ट्रेन में बैठ गया,ये ट्रेन दुर्ग से जगदलपुर जा रही थी। गर्मी के दिन थे,उसे खिड़की के पास वाली सीट मिली । ट्रेन चलने लगी तो भागते हुए तीन युवक आये और ठीक उसके सामने वाली सीट पर बैठ गए । ट्रेन चल पड़ी तो थके होने के कारण थोड़ी देर में ह... Read more
clicks 247 View   Vote 0 Like   6:43am 6 Jan 2016 #vijay sappatti
Blogger: vijay kumar sappatti
......मैंने पहले बोलना सीखा ...अम्मा... !फिर लिखना सीखा.... क ख ग a b c 1 2 3 ...फिर शब्द बुने !फिर भाव भरे !.... मैं अब कविता गुनता हूँ  , कहानी गड़ता हूँ ..जिन्हें दुनिया पढ़ती है ..खो जाती है .. रोती है ... मुस्कराती है ...हंसती है ..चिल्लाती है ........मुझे इनाम ,सम्मान , पुरस्कार से अनुग्रहित करती है ...!.....औ... Read more
clicks 243 View   Vote 0 Like   4:21am 17 Aug 2015 #
Blogger: vijay kumar sappatti
कोलाज़ ::: प्रेमकथा - मैं, तुम और प्रेम :::विजय कुमार सप्पत्ति  :: Address  ::  VIJAY KUMAR SAPPATTI ,  FLAT NO.402, FIFTH FLOOR, PRAMILA RESIDENCY; HOUSE NO. 36-110/402, DEFENCE COLONY, SAINIKPURI POST,  SECUNDERABAD- 500 094 [TELANGANA]M : 09849746500  E : vksappatti@gmail.com::: प्रेमकथा - मैं, तुम और प्रेम  :::खुदा से बड़ा रंगरेज कोई दूसरा नहीं है वो किसे क्या देता है, क्यों देता ... Read more
clicks 380 View   Vote 0 Like   3:09am 25 Mar 2015 #इश्क
Blogger: vijay kumar sappatti
||| सुबह 8:30 |||मैंने टैक्सी ड्राईवर से पुछा- “और कितनी देर लगेंगी।”उसने कहा –“साहब बस 30मिनट में पहुंचा देता हूँ।”  मैंने घडी देखी  8:40हो रहे थे। मैंने कहा – “यार 9बजे की गाडी है।”थोडा जल्दी करो यार। उसने स्पीड बढ़ा दी. मैं नासिक की सडको को देखने लगा।मैं अपनी कंपनी के काम से आ... Read more
clicks 234 View   Vote 0 Like   3:27am 25 Feb 2015 #मर्डर
Blogger: vijay kumar sappatti
बहुत साल पहले की ये बात है. मुझे कुछ काम से मुंबई से सूरत जाना था.मैं मुंबई सेंट्रल स्टेशन पर ट्रेन का इन्तजार कर रहा था. सुबह के करीब ६ बजे थे. मैं स्टेशन में मौजूद बुक्स शॉप के खुलने का इन्तजार कर रहा था ताकि सफ़र के लिए कुछ किताबे और पेपर खरीद लूं.अचानक एक छोटा सा बच्चा जो ... Read more
clicks 266 View   Vote 0 Like   9:53am 2 Feb 2015 #किस्सा
Blogger: vijay kumar sappatti
पिताजी की स्मृति में...................दोस्तों, आज पिताजी को गुजरे एक माह हो गए. इस एक माह में मुझे कभी भी नहीं लगा कि वो नहीं है. हर दिन बस ऐसे ही लगा कि वो गाँव में है और अभी मैं मिलकर आया हूँ और फिर से मिलने जाना है. कहीं भी उनकी कमी नहीं लगी. यहाँ तक कि संक्रांति की पूजा में भी ऐसा लगा क... Read more
clicks 270 View   Vote 0 Like   1:43am 22 Jan 2015 #विजय कुमार सप्पत्ति
Blogger: vijay kumar sappatti
||| एक शहर की मौत |||पर्दा उठता हैमंच पर अँधेरे के बीच एक स्पॉट लाइट पड़ती है. उस स्पॉट लाइट के केंद्र में सूत्रधार आता है और दर्शको की ओर देखते हुए सबसे कहता है :“ दोस्तों, ये नाटक मात्र एक नाटक नहीं है, बल्कि हमारे देश के इतिहास का एक काला पन्ना है,इस पन्ने पर सिर्फ मौत लिखी है ... Read more
clicks 267 View   Vote 0 Like   12:39pm 19 Nov 2014 #एक शहर की मौत
Blogger: vijay kumar sappatti
::: अमृत वृद्धाश्रम :::||| एक नयी शुरुवात |||मैंने धीरे से आँखे खोली, एम्बुलेंस शहर के एक बड़े हार्ट हॉस्पिटल की ओर जा रही थी। मेरी बगल में भारद्वाज जी, गौतम और सूरज बैठे थे। मुझे देखकर सूरज ने मेरा हाथ थपथपाया और कहा,“ईश्वर अंकल,आप चिंता न करे,मैंने हॉस्पिटल में डॉक्टर्स से बात ... Read more
clicks 290 View   Vote 0 Like   5:40am 16 Oct 2014 #अमृत वृद्धाश्रम
Blogger: vijay kumar sappatti
नाटक ::: ||| आत्महत्या ||| :::विजय कुमार सप्पत्ति:: Address  ::  VIJAY KUMAR SAPPATTI,  FLAT NO.402, FIFTH FLOOR, PRAMILA RESIDENCY; HOUSE NO. 36-110/402, DEFENCE COLONY, SAINIKPURI POST,  SECUNDERABAD- 500 094 [TELANGANA ]M : 09849746500  E : vksappatti@gmail.comआत्महत्यामुख्य कलाकार :कांस्टेबल रामसिंह सब इंस्पेक्टर काम्बले सूबेदार मेजर रावत डिप्टी कमांडेंट सिंह कमांडेंट देवे... Read more
clicks 236 View   Vote 0 Like   7:27am 2 Sep 2014 #आत्महत्या
Blogger: vijay kumar sappatti
DISCLAIMER: इस कहानी में उपयुक्त हुए नाम, संस्थाए, जगह, घटनाएं इत्यादि का उपयोग सिर्फ और सिर्फ कहानी को मनोरंजक बनाने के लिए किया गया है। किसी भी व्यक्ति या संस्था से इनका कोई सम्बन्ध नहीं है,कृपया इस कथा को मुक्त हास्य में ले; पर/और दिल पर न ले !!! कथा में निहित व्यंग्य को समझिये ! ... Read more
clicks 291 View   Vote 0 Like   6:34am 2 Mar 2014 #
Blogger: vijay kumar sappatti
दोस्ती, प्यार और ज़िन्दगी का चौराहा !करीब ८ महीने पहले………………….!डॉक्टर वर्मा ने मुझे अपने करीब बिठाया और कहा,“देखो देव,तुम एक संवेदनशील कवि और लेखक हो,मैं तुमसे झूठ नहीं बोलूँगा। तुम लंग कैंसर की एडवांस स्टेज पर हो। तुम्हारी सिगरेट पीने की आदत ने तुम्हे ख़तम कर दिया है। अब... Read more
clicks 388 View   Vote 0 Like   5:48am 14 Jan 2014 #कथा
Blogger: vijay kumar sappatti
आंठवी सीढ़ी ::: बीतता हुआ आज, बीता हुआ कल और आने वाले कल की गूँज ::::मैं, पहली मंजिल पर स्थित अपने घर की बालकनी में बैठी नीचे देख रही थी ।  आज मेरे सर में हल्का हल्का सा दर्द था ।  मैंने अपने लिये अदरक वाली चाय बनाई और धीरे धीरे उसकी चुस्कियां लेते हुये सड़क को निहार रही थी । सड़क... Read more
clicks 296 View   Vote 0 Like   6:03am 9 Oct 2013 #इश्क
Blogger: vijay kumar sappatti
आंठवी सीढ़ी ::: बीतता हुआ आज, बीता हुआ कल और आने वाले कल की गूँज ::::मैं, पहली मंजिल पर स्थित अपने घर की बालकनी में बैठी नीचे देख रही थी ।  आज मेरे सर में हल्का हल्का सा दर्द था ।  मैंने अपने लिये अदरक वाली चाय बनाई और धीरे धीरे उसकी चुस्कियां लेते हुये सड़क को निहार रही थी । सड़क... Read more
clicks 403 View   Vote 0 Like   6:03am 9 Oct 2013 #प्यार
[ Prev Page ] [ Next Page ]

Share:

Members Login

    Forget Password? Click here!
  • Latest
  • Week
  • Month
  • Year
  हमारीवाणी.कॉम पर ब्लॉग पंजीकृत करने की विधि बहुत सरल हैं। इसके लिए सबसे पहले प्रष्ट के सबसे ऊपर दाईं ओर लिखे ...
  हमारीवाणी पर ब्लॉग-पोस्ट के प्रकाशन के लिए 'क्लिक कोड' ब्लॉग पर लगाना आवश्यक है। इसके लिए पहले लोगिन करें, लोगिन के उपरांत खुलने वाले प...
और सन्देश...
कुल ब्लॉग्स (3993) कुल पोस्ट (195281)