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Blog: ...प्रेरणा....

Blogger: नूतन व्यास
रात में नींद की चौकसी करता फटेहाल मन ..अब ठोकता है स्मृतियों की लाठी फोड़ता है माथा .... ध्वस्त धमनियों में शोकाकुल ठहाके लगाता है मानवता का चोर ... जगा कर रखना , ऐ ! पेड़ों पर ग़दर मचाती हवा ..."जागते रहो जागते रहो "चिल्लाते हुए मुझे कोसती रहना... कि हर पेड़ की हर शाख अब ... Read more
clicks 261 View   Vote 0 Like   2:59am 2 Jun 2014 #
Blogger: नूतन व्यास
कविता ...पुल बाँधती थीभ्रम की रस्सियों से ..कभी अट्टहास भर थीकभी ...हुंकारती सीकभी गोल गोलअपनी ही परीधि मेंखोजती..जाने क्या ....पर अब कवितागुट बाँधती है..काटती है अपनी क़िस्मेंऔर छाँटती हैजुडने और जोड़ने कीसब कलाएँ ...तुम सुन रहे थे...सहज होने की सभीसंभावनाएँ ,थीं बचींअब तुम न... Read more
clicks 232 View   Vote 0 Like   5:00pm 1 Jun 2014 #
Blogger: नूतन व्यास
आज मन बहुत उदास है !!शरीर को छूने वाले हाथ काँपे नहीं होंगे क्या ! उसको नंगा करते हुए उसकी नसों पे दबाव डालते हाथ पैर बाँधते घसीटते हुए जब ले गया उसे तो कौन सा जानवर था उस मर्द के भीतर ? आख़िर क्या है बलात्कार ? स्त्री देह की इच्छा मात्र ? या वासनाओं की तृप्ति ? या फिर शायद ख़ुद ... Read more
clicks 199 View   Vote 0 Like   5:59am 30 May 2014 #
Blogger: नूतन व्यास
भूल तो तुम्हारी है क्यूँ दे दी तुमने अग्नि परीक्षा क्यूँ हाथ जोड़ेअश्रु बहाए...क्यूँ नहीं भस्म कर डालातुम पर लांछन लगाते असुरों को ...हाथों हाथ तुम्हारे सतयुग से तो कलयुगयह मेरा भला है !!जहाँ मुझको यह तो पता है'राम'से हटकर भीमेरा अस्तित्व हैनहीं लादती मैं ख़ुद प... Read more
clicks 226 View   Vote 0 Like   6:25am 16 Dec 2013 #
Blogger: नूतन व्यास
विषैली हो गईं हैंज़बानेसोचयहाँ तक कीस्मृतियाँ भीमशीनों पर लगी जंग सीकडवाहट ही फैली हैअब हर ओरकितना शोरऔरजो संबंधों में तकनीकसमाई हैसो विलुप्त है अब बचा कूचासामंजस्य का बोधलो अब ढोनामानवता की मृत भावनाओं का बोझअंत तक  ........ Read more
clicks 242 View   Vote 0 Like   2:46pm 20 Jun 2013 #
Blogger: नूतन व्यास
कुछ यूँ हिलती डुलती ज़मीनों कासच प्रत्यक्ष होने लगा है और ...नदियों में उफान का रेतीले बवंडरों का या कि समुद्री तूफानों का .....हाँ सच तो केवल एक है युगों से युगों का सफ़र निरंतर अवश्य ....परन्तु अनंत तो नहीं ........ Read more
clicks 223 View   Vote 0 Like   3:43pm 19 Jun 2013 #
Blogger: नूतन व्यास
एक मैं और मेरा अहम्उस पर अहम् का अस्तित्व भीजीवन भरसंघर्षरत सभीकोई भी जीते निश्चित है ,पराजय मेरी क्योंकि मन पराधीन ...चेतन होकर भी !?... Read more
clicks 307 View   Vote 0 Like   12:51pm 19 May 2013 #
Blogger: नूतन व्यास
एक मैं और मेरा अहम्उस पर अहम् का अस्तित्व भीजीवन भरसंघर्षरत सभीकोई भी जीते निश्चित है ,पराजय मेरी क्योंकि मन पराधीन ...चेतन होकर भी !?... Read more
clicks 193 View   Vote 0 Like   12:51pm 19 May 2013 #
Blogger: नूतन व्यास
एक मैं और मेरा अहम्उस पर अहम् का अस्तित्व भीजीवन भरसंघर्षरत सभीकोई भी जीते निश्चित है ,पराजय मेरी क्योंकि मन पराधीन ...चेतन होकर भी !?... Read more
clicks 202 View   Vote 0 Like   12:51pm 19 May 2013 #
Blogger: नूतन व्यास
हाँ कि बगिया सा महकता हैतेरी ममता का आँचल यूँतेरी गोद ही में सर रख लूँमेरी तो बस ये जन्नत है मेरे सपने तेरा मक़सदतू कब ख़ुद के लिए जीतीबिना माँगे जो हो पूरीतू एक प्यारी सी मन्नत है... Read more
clicks 238 View   Vote 0 Like   12:50pm 19 May 2013 #
Blogger: नूतन व्यास
खो जाने का डर नहींमुझे डर है सोच न पाने का ! क्या होगा तब जब दृष्टि की सीमाओं कोलाँघ नहीं पाएगा मन जब अल्साए सूरज कीकिरणों तक को छू न पाएगा या कि बिन माँ के बच्चों संगख़ुद भी बिलख न पाएगा ! ...और वोपंछी की उन्मुक्त उड़ान या न चाह कर भीकभी न रुक पाए उसशापित जीवन का एहसास ...नहीं क... Read more
clicks 225 View   Vote 0 Like   12:48pm 19 May 2013 #
Blogger: नूतन व्यास
हे विधाता संदेह है मुझको क्या परस्पर किसी विरोधाभास में मनुष्य रचा तुमने संवेदनाओं की वेदी चढ़ा इसे अनगिनत भूमिकाओं में बाँध तुम हुए विलुप्त यूँ कि हाथ भी नहीं आते अब और एक दिन इसी मृत्यु  जीवन के संघर्ष में भूल जाएंगे तुम्हे और तुम्हारा होना न होना हमारे हाथ होगा फिर क... Read more
clicks 194 View   Vote 0 Like   12:01pm 20 Feb 2013 #
Blogger: नूतन व्यास
अपने अपने अस्तित्व की लड़ाई में दिशाहीन ,खोखला अंतस ....एक  स्वार्थ की बली चढ़ गया बच गया फिर भी जीवन भर का सारांश अल्पविराम... एक निजी !!... Read more
clicks 213 View   Vote 0 Like   9:05am 12 Feb 2013 #
Blogger: नूतन व्यास
सभी कर्मयोगी थे मैं न जाने कैसे शिथिल सी बन इधर उधर गिरती पड़ती बैठी बैठी अनगिनत स्वप्न...बुन चली और मार्ग मार्ग पर कठिनाई का एक चिट्ठा तक लिख डाला और नाम दे दिया मेरी 'कविता 'क्या कविता का सृजन मात्र इतना भर था ....? या फिर सृष्टि की उत्पत्ति जितना ही क्लिष्ट ?या वृक्ष की छाया ... Read more
clicks 256 View   Vote 0 Like   2:10pm 7 Feb 2013 #
Blogger: नूतन व्यास
सभी कर्मयोगी थे मैं न जाने कैसे शिथिल सी बन इधर उधर गिरती पड़ती बैठी बैठी अनगिनत स्वप्न...बुन चली और मार्ग मार्ग पर कठिनाई का एक चिट्ठा तक लिख डाला और नाम दे दिया मेरी 'कविता 'क्या कविता का सृजन मात्र इतना भर था ....? या फिर सृष्टि की उत्पत्ति जितना ही क्लिष्ट ?या वृक्ष की छाया ... Read more
clicks 189 View   Vote 0 Like   2:10pm 7 Feb 2013 #
Blogger: नूतन व्यास
क्यूँ समाधान खोजने निकल पडता है हर बार ..जीवन ,क्या मार्ग पर बढ़ते रहना ही नहीं केवल ध्येय,क्या लक्ष्य नहीं कर देता सीमित मन विराट... ब्रह्माण्ड सी सोच का कर रहा जीवन चक्र, ध्येय ,लक्ष्य ..., ....आदर्श विलुप्त ?...और फिर भी लक्ष्यहीन भोगता रह जाता समाधान की खोज भर में .... आजीवन कारा... Read more
clicks 214 View   Vote 0 Like   7:27am 6 Feb 2013 #
Blogger: नूतन व्यास
व्यापकता के झोल झाल में कविता की तो नींव हिल गई उलझी जंगल के झाड़ फूस में पेड़ों में अक्सर लुप्त हुई ऊँचे टीले आसमान की ख़ाक छानती शुब्ध हुई बिरहन बन सब रंग खोती बंधन मुक्त नहीं हो पाई सागर के मंथन में भी न सीख सकी कुछ न दिख पाई एक व्यापक होनहार कविता न हो पाई न हो पाई !... Read more
clicks 252 View   Vote 0 Like   4:54pm 28 Jan 2013 #
Blogger: नूतन व्यास
हूँ शून्यता में खोजता मैं,एक नई ही प्रेरणा..मैं प्रश्‍न हूँ ,विचार हूँ,या स्मृति की वेदना...हाँ !मैं पंख हूँ और मुझे,विलोम कण है भेदना..या त्रुटि शूल हूँ मैं,स्वयं ही को छेदतासुवास हूँ मैं रंग हूँ,विहग की हूँ चेतना,ग्लानि नहीं,हूँ प्रयास,हूँभंवर मधु से खेलता...विश्वास हूँ मै... Read more
clicks 225 View   Vote 0 Like   5:46pm 25 Jan 2013 #
Blogger: नूतन व्यास
"क्या दीख पड़ता है कहो सत्ता के रेशे रेशे से ...टपकता खून और नयन भर आंसूं ?छोटे छोटे सपनो की लाशों पर पड़ी सूखी चन्दन की लकडियाँ ?या रुढ़िवादियों की जनि कुरीतियों पर निर्दोष चीखें ?हाँ ! मगर सत्ता तो विराम ले बैठी है वन्हीं की वन्हीं यही निर्लज्जता की पराकाष्ठा "तो क्या ले लें ... Read more
clicks 264 View   Vote 0 Like   4:55pm 21 Jan 2013 #
Blogger: नूतन व्यास
मैं केवल समानताएं ढूंढती थी तुम में और मुझ में क्या पाया मैंने अबोध से कुछ आचरण और सहमे सहमे कुछ स्वप्न उधेडबुन में इसकी कौन किसका रक्षक लेकिन फिर भी था कुछनिरंतर होता घटित जब यह बंधन मतवाला करता निस्वार्थ अभिनन्दन एक दुसरे की सत्ता का निर्भीक समर्थन ... Read more
clicks 263 View   Vote 0 Like   2:21pm 21 Jan 2013 #
Blogger: नूतन व्यास
माँ तुझको क्यूँ लगता हैमैं सुलझी हूँपूरा दिन बैठ सोफ़े परलेपटोप को तकतीदूरभाष पर हंसी ठिठोलीहूँ कितना मैं करतीइस टीवी के स्वप्न लोकमें उलझी हूँमाँ तुझको क्यूँ लगता हैमैं सुलझी हूँछोड़ दिया है पैदल चलनापहिये चार की गाडी हैथोड़ा सा जो श्रम कर जाऊंसरपट दौड़ती नाड़ी हैजी... Read more
clicks 256 View   Vote 0 Like   6:07pm 3 Sep 2012 #
Blogger: नूतन व्यास
केवल समर्थन नहीं अनुशासन भी पारस्परिकता का नियम ...वैसे ही जैसे युद्ध भूमि में कृष्ण ने सारथी बन ...अर्जुन के अनुशासन को दिशा दे, लक्ष्य को स्थापित किया और तिमिर अन्धकार जला एक ज्योति पुंज साकार किया... Read more
clicks 256 View   Vote 0 Like   6:58pm 31 Aug 2012 #
Blogger: नूतन व्यास
तुम स्वर हो जानाऔर मैं ....मैं  तुम्हारे स्वर का अभिमत... किन्तु इस होने न होने के प्रक्रम में इतना भर सचेत रहना ...कहीं स्वर से सत्य विलुप्त  न हो जाए कि अपनी गूँज केवल एक शरणार्थी बन ,लक्ष्यरहित, न विस्मित हो  कहीं ...भटक जाए.....! ... Read more
clicks 213 View   Vote 0 Like   12:52pm 30 Aug 2012 #
Blogger: नूतन व्यास
ओ मीत मेरे तुम मधुरिम गीत सुना जाना जब सावन रिमझिम बरसा था प्रीत ,पवन ,हरित जलसा था नित नई बूँद निर्भय होकर इत उत डोली सुध बुध खोकर खेत भरे नव जीवन नभ ने पहचाना ओ मीत मेरे ...तुम मधुरिम गीत सुना जाना चंदा ने मुख फेर लिया था मन विषाद तम ढेर किया था सरल नहीं रह पाया कुछ भी मैं ... Read more
clicks 228 View   Vote 0 Like   6:53am 30 Aug 2012 #
Blogger: नूतन व्यास
क्यूँ नहीं तुम सा बोध मुझ में और मुझ सा सामर्थ्य तुम में क्या ' तुम ' और ' मैं 'एक नहीं ... जीवन नेपथ्य में ?... Read more
clicks 232 View   Vote 0 Like   6:08am 27 Aug 2012 #
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